उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं गृह स्थित फल
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं गृह स्थित फल
उत्तरा भाद्रपदराशि चक्र मे 333।20 से 346।40 अंश विस्तार का क्षेत्र उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र कहलाता है। इसे अरब मंजिल
मे अल फर्ग अल थानी यानि पानी के मर्तबान मे नीचे की टोटिया, ग्रीक मे इसे पेगेसी चीनी सियु मे पाई कहते है। उत्तर भाद्रपद का अर्थ
सुन्दर बाया पैर है। पूर्वा भाद्रपद अचानक क्रोध का प्रतीक है तो उत्तरा भाद्रपद
उस क्रोध को नियंत्रण की शक्ति है। उत्तरा भाद्रपद सब छोड़कर आध्यात्मिक जगत की
प्रगति की समर का प्रतीक है। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र-पूर्वाभाद्रपद से अगले 13-20’
के क्षेत्र में भचक्र पर मीन
राशि क्षेत्र में यह छब्बीसवां नक्षत्र उत्तराभाद्रपद स्थित है। इस नक्षत्र के 2 तारे एक यमक/जुड़वां का आभास देते हैं। इस नक्षत्र के देवता
अहिर्बुध्य हैं, जो वैदिक देवता
हैं। इस नक्षत्र के स्वामी शनि हैं।
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में उत्पन्न होने वाला पुरुष जातक
शूर, साहसी व शत्रुहन्ता होता है। वह गोरा, स्वस्थ, धार्मिक प्रकृति
का तथा प्रायः शुभकर्मा होता है। ऐसा शास्त्रकारों का मत है।
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जन्मी स्त्री जातक क्षमाशील, गर्वरहित, सत्यपरायण, बड़ों का आदर करने वाली, सदा पति के हित में लगी रहने वाली, विचारशील तथा पुत्र के सुख से युक्त होती है।
देवता अहिर्बुध्न्य, स्वामी
शनि, राशि मीन 3।20 से 16। 40 अंश। भारतीय खगोल का
यह 26 वा चंद्र भवन ध्रुव संज्ञक है। इसके दो तारे है। ये
चौकी या पलंग का आकार प्रदर्शित करते है। इसे उत्तर प्रष्ठप्रदा या उत्तर सुखी पाद
भी कहते है। यह शुभ राजसिक पुरुष नक्षत्र है। इसकी जाति क्षत्रिय, योनि गौ, योनि वैर व्याघ्र, मनुष्य
गण, आदि नाड़ी है। यह उत्तर दिशा का स्वामी है।
प्रतीकवाद - इसके देवता अहिर्बुध्न्य है। यह एक अजगर या
सांप या एक कठोर प्राणी है। अहिर्बुध्न्य को गहरे पानी की नागिन या शिव का एक रूप
रूद्र मानते है। विश्वकर्मा शिल्प शास्त्र अनुसार अहिर्बुध्न्य 11 रुद्रो मे तीसरे रूद्र है। रूपमंदना
अनुसार 12 रुद्रो मे से नौवे रूद्र है। हिन्दू पुराणो अनुसार
अहिर्बुध्न्य, अहि यानि नाग, बुधाना
यानि दुनिया की नीव होता है। यह संदर्भित करता है कि अहिर्बुध्न्य हजार फन वाले
अनंत या शेष नाग है जिनके सिर पर पृथ्वी मंडित है। वैष्णव ग्रंथो अनुसार
अहिर्बुध्न्य शिव का ही एक नाम है जो विष्णु के परम भक्त है। अहिर्बुध्न्य संहिता
अनुसार अहिर्बुध्न्य को शिव के साथ ही पहचाना गया है।
विशेषताएं - यह भी अग्नि
तत्व का योद्धा नक्षत्र है। यह एक स्थिर नक्षत्र भी माना जाता है। इसमे गृह
निर्माण व अन्य कर्म शुभ होते है। पुरुष जातक का व्यवहार सौहाद्रपूर्ण, सम्मानयुक्त, प्रशंसनीय होता है। यह अच्छा साथी और
सबको समान समझने वाला होता है। स्त्री जातक परिवार की देखभाल करने वाली, घरेलू मामलो का कुशल प्रबंधन करने वाली होती है। यह चाहने वाले पर जीवन
बलिदान करने मे संकोच नही करती है।
उत्तरा भाद्रपद फलादेश
यह भी द्वि आकृति का नक्षत्र है। यह स्थाईत्व और निर्माण का
द्योतक है। इसके प्रभाव पूर्व भाद्रपद जैसे लेकिन मृदु होते है। जातक अनुशासित, वक्ता, लेखक, क्रोध और आक्रामकता को नियंत्रित करने वाला, आलसी,
जीवन के उत्तरार्ध मे पैतृक सम्पदा प्राप्त करने वाला, अकेलापन और एकांत प्रिय, आत्मवादी, अंतर्मुखी, जन्म स्थान से दूर भाग्यशाली, सुखी घरेलू दाम्पत्य जीवन, संततिवान, धर्मात्मा, शत्रुहंता, देव
तुल्य होता है।
पुरुष जातक &a जातक अत्यंत मोहक] मासूम मुखड़ा] आकर्षण वाला होता है। यदि यह हलकी मुस्कान
से देख ले तो वह इसका गुलाम हो जाता है। जातक ऊंच&aaनीच]
अमीर&aaगरीब सबसे समान सम्बन्ध रखने वाला] नाक पर गुस्सा
रखने वाला] प्रेमियो के लिए जीवन न्योछावर करने वाला] छेड़ने पर सिंह के सामान]
विवेकी] बुद्धिमान] ज्ञानवान होता है। यह आकर्षक भाषणबाज] शत्रुओ को रोंदता हुआ
उच्च पदवान] स्त्रियो मे रत] सहवास का अभिलाषी होता है।
सम्पूर्ण शिक्षा एक ही समय पर नही होती न ही इसके पास कोई
उपाधि होती है परन्तु इसकी वाक्य शैली से इसकी विद्वता झलक जाती है। विवाह पश्चात
उन्नत और स्थिर होता है। 18 या 19 वर्ष की आयु से आजीविका उपार्जन करने लगता है। जातक पिता की सहयता या लाभ
से वंचित] बचपन से ही उपेक्षित और घर दूर रहने वाला होता है। दाम्पत्य जीवन अत्यंत
सुखद होता है पत्नी आज्ञाकारणी होती है। पौत्र पौत्री युक्त घर मे विभूति होता है।
स्त्री जातक - इसमे गुणदोष पुरुष जातक जैसे ही होते है, अंतर निम्न है।
1 यह
मध्यम कद दुबली-पतली, उभरी आंखो वाली होती है।
2 यह
परिवार मे लक्ष्मी स्वरूपा, साकार पारिवारिक स्त्री का मूर्त
रूप होती है। इसका वर्ताव आदर युक्त प्रशंसा के योग्य होता है। अनुकूलता, निष्पक्षता, अनुरूपता ये तीन गुण इसमे होते है।
3 यदि
नौकरपेशा हो तो अच्छे ऊँचे पद पर होती है। उत्तरा भाद्रपद स्त्री जातक पीहर और
सुसराल दोनो मे रत्न होती है। इसका पग फेरा लक्ष्मी दायक होता है।
नक्षत्र फलादेश आचार्यो अनुसार
उत्तरा भाद्रपद मे उत्पन्न जातक को संतान अधिक होती है। ये
लोग कुशल वक्ता, धार्मिक स्वभाव
वाले सुखी होते है। ये प्रायः अपने वचन पर कायम रहते है। इनकी काम वासना तीव्र
होती है। - नारद
ये लोग प्रयत्नो और सम्पर्को से सामर्थ्य प्राप्त कर अपने
कुल में प्रशंसित होते है। अपने रूप, गुण
विद्या, धन, स्वभाव आदि के कारण उत्सव
आदि मे शोभा बढ़ाते है। ये मध्यम कद के होते है। इनके हाथो अनेक काम सम्पन्न होते
है। प्राय: उदार और धन्य होते है। ये शत्रुता नही करते है अगर कोई शत्रुता करे भी
तो ये अपने गुणो से उसे शान्त कर लेते है। - वराहमिहिर
ये लोग जल से घबराते है। इन्हे समुद्र, नदी प्रवाह आदि से भय होता है और नौका
विहार या समुद्री यात्रा नही करते है। ये लोग राज्य से सत्कार पाने वाले या
राज्याश्रित, अधिक संतान वाले, यज्ञ,
स्वाध्याय विद्या अर्जन आदि मे रत रहते है। - पराशर
चंद्र :
यदि चंद्र इस नक्षत्र में हो, तो
जातक अनुशासित वक्ता, लेखक, स्व
अभिमानी, अंतर्ज्ञानी, अंतर्मुखी
प्रफुल्ल होता है। यह आकर्षक, पैतृक सम्पदा युक्त, सुखी घरेलू जीवन, एकांत और अकेलापन प्रिय होता है। जातक
आकर्षक, मासूम चेहरा, सुहृदयी, नौकरी उन्मुख, शत्रुहंता होता है। कोई-कोई जातक आलसी
होता है।
वराहमिहिर अनुसार चन्द्र प्रभाव मोहकता, सदगुण, संचार शक्ति
का कारक है।
सूर्य :
यदि सूर्य इस नक्षत्र मे हो, तो
जातक विद्वान, तीव्र बुद्धि, रचनात्मक
कार्यकारी, दयालु, सुलेखक, रहस्यात्मक, गुप्त, चालाक,
कर्मठ, आध्यात्मिक, मृदुभाषी
होता है।
लग्न :
लग्न उत्तरा भाद्रपद मे हो, तो
जातक वाकपटु, परोपकारी, रहस्यवादी,
मानवीय स्वभावी, संतान से सुखी, परिवार प्रेमी, पर्यटनी, लेखक,
कवि, अस्थिर चित्त, स्थाई
शत्रु होता है।
उत्तरा भाद्रपद चरण फल
प्रथम चरण - इसका स्वामी सूर्य है। इसमे गुरु, शनि, सूर्य ♃ ♄ ☉ का प्रभाव है।
मीन 333।20 से 336।40 अंश।नवमांश सिंह। यह निश्चितता, अहंकार, इच्छा का द्योतक है। यह मोटी चौड़ी भोंहे व
नाक वाला, सुन्दर देह, क्रियापटु,
जंगल विचरणी, धार्मिक कार्यो में निपुण,
माँसाहारी होता है।
इस पाद का जातक कर्मठ, ज्ञानी,
समाज मे प्रतिष्ठित, विरोधी इसके विचारो मे
असहमत किन्तु यह उनको झुकाने वाला, गुपचुप मांसाहारी होता
है।
द्वितीय चरण - इसका स्वामी बुध है। इसमे गुरु, शनि, बुध ♃ ♄ ☿ का प्रभाव है।
मीन 336।40 से 340।00 अंश।नवमांश कन्या। यह संचार, गणना, योजना का द्योतक है। जातक गौर वर्ण, सुन्दर नेत्र, सुन्दर आकर्षक देह, धैर्यवान, विद्वान, नम्र,
कृपालु, विनीत होता है।
इस पाद में जातक अध्यनरत, जीवन
और उद्द्येश्यो का परिकलन करने वाला, बुद्धि पर विवेकी,
थोड़ा अन्तर्मुखी, विपरीत लिंग के विकास हेतु
विचार विमर्श करने वाला होता है।
तृतीय चरण - इसका स्वामी शुक्र है। इसमे गुरु, शनि, शुक्र ♃ ♄
का प्रभाव है। मीन 340।00 से 343।20 अंश।नवमांश तुला। यह संतुलन, लक्ष्य. सकारात्मकता का
द्योतक है। जातक गुणवान, विपत्तिशील, सहायता
सेवा करने वाला, धार्मिक कार्य में निपुण, विद्वान, साहसी, निपुण,
ऊँची नाक वाला होता है।
जातक शोध से जुड़ा हुआ, ज्योतिष
और उसकी शखाओ मे रुचिवान, आध्यात्मिक प्रमुख, आध्यात्मिक शोध से संबद्ध, अाध्यात्म के लिए परिवार
बलिदानी, जीवन मे विरोध और बाधाओ का सामना करने वाला,
वरिष्ठो से सहयता प्राप्त होता है।
चतुर्थ चरण - इसका स्वामी मंगल है। इसमे गुरु, शनि, मंगल ♃ ♄
का प्रभाव है। मीन 343।20 से 346।40 अंश। नवमांश वृश्चिक। यह जादूगरी, ऊर्जा या रहस्य का
द्योतक है। जातक लम्बा, काला, ऊँचे अंग,
छोटी नाक, प्रतापी, हिंसा
पूर्ण या आध्यात्मिक कामो मे सलग्न, असह्य होता है।
जातक रहस्य विज्ञान से सम्बन्धित होता है। आध्यात्म ज्ञान
को उजागर करने वाला होता है। इस चरण के जातक को प्रकृति या ईश्वर का रहस्य उजागर
करने का खतरा होता है, जिसके लिए इस
जन्म या अगले जन्म में सजा भुगतनी पड़ती है। यह अन्य चरणो के जातक से भिन्न होता
है।
आचार्यो ने चरण फल सूत्र रूप में कहा है परन्तु अंतर बहुत
है।
यवनाचार्य : उत्तरा भाद्रपद प्रथम चरण मे राजा, द्वितीय मे तस्कर, तृतीय
मे पुत्रवान, चतुर्थ मे सुखी होता है।
मानसागराचार्य : पहले चरण में काल ज्ञान हीन, दूसरे मे लम्पट, तीसरे
मे धनवान, चौथे मे चोर होता है।
उत्तरा भाद्रपद विभूतिया
भारत रत्न नोबल पुरस्करित रविंद्र नाथ टैगोर का यह जन्म
नक्षत्र है।
भारतीय मत मे सूर्य, बुध,
शुक्र की आपसी पूर्ण या पाद दृष्टि नही होती क्योकि सूर्य से बुध 28
अंश और शुक्र 48 अंश से अधिक दूर नही हो सकते
है।
उत्तराभाद्रपद ग्रह चरण फल
सूर्य :
➤ उत्तरा भाद्रपद
सूर्य पर चंद्र की दृष्टि हो, तो जातक पुत्रवान और भाषणबाज
होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
सूर्य पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक पुलिस विभाग मे होगा,
नाम और यश अर्जित करेगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
सूर्य पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक मंत्री या मंत्री के
समकक्ष पद पर होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
सूर्य पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक बुरे लोगो की संगति मे
रहेगा।
उत्तरा भाद्रपद सूर्य चरण फल
प्रथम चरण - जातक क्रोध और आक्रामकता को नियंत्रित करने
वाला, कुटनीतिज्ञ, गुप्त
तथ्यो को छिपाने वाला, चालक होता है। अकेला सूर्य हो तो समाज
मे मान्य, परिवार सुख होता है।
द्वितीय चरण - जातक बहु संतान वाला, सुलेखक, कुशल वक्ता,
मृदुभाषी, रहस्यवादी, वचन
पर कायम रहने वाला, कुल गौरव, सिंचित
भूमि व योजना से संपन्न होता है।
तृतीय चरण - व्यक्ति धार्मिक स्वभाव वाला, आध्यात्मिक, दयालु,
रचनात्मक कार्यकारी, कामी, स्वभाव से उदार होता है। बुध की युति हो, तो विद्वान,
बुद्धिमान, शुक्र की युति हो तो सरकारी नौकर
होगा।
चतुर्थ चरण - व्यक्ति सामान्य कद वाला, कर्मठ किन्तु चतुर, चालक,
जल से डरने वाला, शत्रु रहित, बहु संतानि होता है।
चन्द्र :
➤ उत्तरा भाद्रपद
चन्द्र पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक प्रसिद्ध, राजसी वैभव युक्त होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
चन्द्र पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक सुरक्षा या पुलिस या
सेना मे होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
चन्द्र पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक शिल्पकार और सेवको
युक्त होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
चन्द्र पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक सुन्दर, आद्योगिक संस्था का अध्यक्ष होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
चन्द्र पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक धनी और भोग विलाश मे
धन खर्च करेगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
चन्द्र पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक शास्त्रो का विद्वान
होगा।
उत्तरा भाद्रपद चन्द्र चरण फल
प्रथम चरण - जातक आकर्षक मूरत, अनेक संतान वाला, धनाढ़्य,
सुखी घरेलू जीवन लेकिन अकेलापन और एकांत प्रिय, अनुशासित, स्व बलिदानी होता है।
द्वितीय चरण - जातक अनुशासित वक्ता, प्रफुल्ल, अच्छा लेखक,
अंतर्मुखी, मुक्तहस्त, धनवान
और पैतृक सम्पदा युक्त, आत्मवादी होता है। कोई-कोई जातक आलसी
और जल भीरु होता है।
तृतीय चरण - जातक आकर्षक और मासूम चेहरे वाला, नौकरी उन्मुख, सुहृदयी,
सुखी वैवाहिक जीवन, रूप, गुण, विद्या, धन, स्वभाव आदि के कारण उत्सव की शोभा बढ़ने वाला होता है।
चतुर्थ चरण - जातक सुन्दर, सुखी,
स्व बलिदानी, अनुशासन प्रिय, एकांतप्रिय, संतान से सुखी, शत्रुहंता,
प्रयत्न और सम्पर्क से सामर्थ्यवान होता है।
मंगल :
➤ उत्तरा भाद्रपद
मंगल पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक सम्मानित, भाग्यशाली होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
मंगल पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक शारीरिक अपंगता से
पीड़ित होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
मंगल पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक कलाओ का ज्ञाता, अन्य विषयो मे प्रवीण होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
मंगल पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक धनी, सुखी, साधन सम्पन्न होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
मंगल पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक दान-धर्म करने वाला
किन्तु काम वासनायुक्त होता है।
➤ उत्तरा भाद्रपद
मंगल पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक अपंग, आवारा, क्रूर, क्रोधी होता है।
उत्तरा भाद्रपद मंगल चरण फल
प्रथम चरण - जातक वचन का पक्का, प्रबल काम वासना युक्त, बहुत संतान वाला, पानी से घबराने वाला, पैतृक गुणो से युक्त, विदेशो में भटकने वाला,
धोखा खाने वाला होता है। जातक आर्थिक हानि उठायेगा और जब-जब
रिस्तेदारो से मदद मांगने जायगा तब-तब घर से निष्काषित कर दिया जायगा।
द्वितीय चरण - जातक अनुशासित, मन
के आपा को नियंत्रित करने वाला, उदार, धैर्यवान,
सुवक्ता, वचन का पक्का, शुभ
कार्यकारी होता है। कोई-कोई जातक स्वार्थी, बुजुर्गो का
सम्मान नही करने वाला, दुःख सहने वाला कैंसर पीड़ित होता है।
तृतीय चरण - जातक सामान्य कद वाला, अति कामुक, रतिक्रीड़ा
प्रेमी, ललनाओं की फ़िराक में रहने वाला, बंधु-बान्धवो का स्नेह भाजन, अस्वस्थ्य, चापलूसी पसंद होता है।
चतुर्थ चरण - जातक साहसी लेकिन जल से डरने वाला, सलिला और सरोवर से दूर रहने वाला, प्रबल यौन पिपासु, अपने प्रयत्नो से सामर्थ्य
प्राप्त करने वाला, चुस्त और चौकन्ना होता है। बुध से युति
हो, तो इंजीनियर पति पत्नी मे मन मुटाव व मारपीट होती है।
बुध :
➤ उत्तरा भाद्रपद
बुध पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक विश्वासपात्र, मिलनसार, लेखक होता है।
➤ उत्तरा भाद्रपद
बुध पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक लेखन से कमाने वाला लेकिन
लेखन अप्रिय होगा और उसकी आलोचना होगी।
➤ उत्तरा भाद्रपद
बुध पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक कुलीन, आकर्षक, बुद्धिमान, राजनीतिज्ञ
होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
बुध पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक क्रूर, धूर्त, अस्तित्व विहीन होगा।
उत्तरा भाद्रपद बुध चरण फल
प्रथम चरण - जातक नास्तिक, धार्मिक
परम्पराओ का जघन्य निर्वाहक, अपने वचन का पालन करने वाला,
स्पष्ट भाषी, अपने कुल मे प्रशंसित होता है।
➛ अन्यत्र : जातक
कल्पनाशील तथा धाराप्रवाह अभिव्यक्ति शील होगा। बढ़ती आयु मे उसकी कल्पना शक्ति और
अंतर्दृष्टि मे सुधार होगा।
द्वितीय चरण - जातक धार्मिक स्वभाव वाला, परम्पराओ का निर्वाहक किन्तु समयानुसार
परम्पराओ मे परिवर्तन का हिमायती, कुल मे प्रधान, अपने रूप, गुण विद्या, धन से
उत्सवो की शोभा बढ़ाने वाला, विधि, वाणिज्य,
गणित मे प्रसिद्ध होता है।
तृतीय चरण - जातक धार्मिक स्वभाव वाला, उदार, धन्य, कुशल वक्ता, बहु संतान वाला, अपने
रूप, गुण विद्या, धन से उत्सवो की शोभा
बढ़ाने वाला, जल से डरने वाला, शत्रुओ
को शांत करने वाला होता है।
➛ अन्यत्र : जातक
स्वतंत्र व्यापार व्यवसाय करने वाला, लेखा निरीक्षक, इंजीनियर होगा। यदि बुध की युति हो, तो प्रतिष्ठित
व्याख्याता या प्राचीन परम्पराओ का अनुसंधानक होगा।
चतुर्थ चरण - जातक व्यर्थ की बकभक करने वाला, धार्मिक कार्यो की नुक्ता चीनी करने वाला,
आलसी, प्रयन्तशील, सुखी
जीवन होता है। यदि बुध अशुभ प्रभाव मे है तो सेवक या मजदूर होगा।
गुरु :
➤ उत्तरा भाद्रपद
गुरु पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक निर्धन होता है,
उसे कोई पसंद नही करेगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
गुरु पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक धनी, ऐशो-आराम युक्त, भाग्यवान होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
गुरु पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक क्रूर, समस्या कारक, शत्रु नाशक होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
गुरु पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक मंत्री या शासकीय
विभागाध्यक्ष होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
गुरु पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक दीर्घायु, सौभाग्यशाली होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
गुरु पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक चोर, समाज से त्यागा हुआ होगा।
उत्तरा भाद्रपद गुरु चरण फल
प्रथम चरण - व्यक्ति दुष्ट स्वभाव वाला, अकेलापन और एकांत प्रिय, आत्मवादी, घर से दूर रहकर भाग्यशाली, जीवन के उत्तरार्ध मे पैतृक सम्पदा प्राप्त करने वाला, जल से डरने वाला होता है।
द्वितीय चरण - व्यक्ति धार्मिक, कुशल वक्ता, उत्सवो
मे सुशोभित, मधुर भाषी, गुणवान,
धनवान, पैतृक गुणो से सम्पन्न, शत्रुओ को मोहित करने वाला, स्वाध्याय और विद्या
अर्जन मे रत होता है।
तृतीय चरण - व्यक्ति गौर वर्णी, यज्ञादि धार्मिक कार्यो मे रत, देव तुल्य, सुखी घरेलू वैवाहिक जीवन, विरोधियो को अपने गुणो से शांत करने वाला, व्रत
उपवास मे रत होता है।
चतुर्थ चरण - व्यक्ति कुटिल, धर्म
और धार्मिक परम्परा को नही मानने वाला, समाज से बहिष्कृत,
कामुक, शत्रुहंता, नदी,
तालाब, कुवां आदि जलाशयो से दूर रहने वाला,
व्यसन प्रिय, पर धर्म का अनुयायी का होता है।
शुक्र :
➤ उत्तरा भाद्रपद
शुक्र पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक राजसी वैभव युक्त
होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
शुक्र पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक भवन-वाहनादि और धन-
सम्पत्ति युक्त होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
शुक्र पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक अनेक विवाह करेगा और
बड़ा परिवार होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
शुक्र पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक हर प्रकार सुखी होगा।
उत्तरा भाद्रपद शुक्र चरण फल
प्रथम चरण - जातक कायर किन्तु शत्रु को शांत करने वाला, तीव्र कामुक, पर
स्त्री रत, प्रयत्न और संपर्क से सामर्थ्य प्राप्त करने वाला,
धोखेबाज, आलसी होता है। स्त्री जातक ईर्ष्यालु
होती है।
द्वितीय चरण - जातक धार्मिक, यज्ञादि
मे रुचिवान, घरेलू सुखी वैवाहिक जीवन, रूप,
गुण, स्वभाव आदि से उत्सव की शोभा बढ़ाने वाला,
भाग्यशाली, सदा मुस्कराने वाला, उदार होता है।
तृतीय चरण - जातक प्रबल काम वासना युक्त, धार्मिक किन्तु चंचल, यौन पिपासु, रूपवान, गुणवान,
अस्थिर, सम्पत्तिवान, शुभ
कार्यो मे रत, सफल होता है। जातक लेखा कार्य, वाहन उद्योग, सट्टेबाजी से कमायेगा।
चतुर्थ चरण - जातक स्वस्थ, धार्मिक,
उदार स्वभाव वाला, पारिवारिक सुख युक्त,
रूप, गुण, स्वभाव आदि से
उत्सव की शोभा बढ़ाने वाला, बहु संतानी, ठेकेदार, भवन सामग्री विक्रेता होता है।
शनि :
➤ उत्तरा भाद्रपद
शनि पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक ईश्वर पदत्त धन व
प्रसिद्धि प्राप्त करेगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
शनि पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक माता-पिता के लिए खतरा
होता है।
➤ उत्तरा भाद्रपद
शनि पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक क्रूर, समस्या कारक, शत्रु नाशक होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
शनि पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक प्रतिष्ठित राजनेता होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
शनि पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक अध्यापक या शोध छात्र
होगा।
➤ उत्तरा भाद्रपद
शनि पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक को सभी प्रकार की खुशिया
मिलेगी।
उत्तरा भाद्रपद शनि चरण फल
प्रथम चरण - जातक आलसी, अकर्मण्य,
नास्तिक, यौन शोषक, यज्ञादि
मे विश्वास नही करने वाला, जल भीरु , एकांकिक,
आत्मवादी, अनुशासित, मध्यम
कद वाला होता है।
द्वितीय चरण - जातक सुंदर, आकर्षक,
धार्मिक स्वभाव वाला, यज्ञादि मे विश्वास रखने
वाला, कुशल वक्ता, सन्देश प्रसारित
करने वाला, सुखी, जीवन के उत्तरार्ध मे
अचानक धन प्राप्त करने वाला होता है।
तृतीय चरण - जातक विद्वान, कामुक
परन्तु स्व स्त्री को ही भोगने वाला, पारिवारिक सुखी,
अपने गुणो से शत्रुओ को शांत करने वाला, यज्ञादि
कर्म करने वाला होता है।
चतुर्थ चरण - जातक पवित्र मन वाला, धार्मिक अनुष्ठान मे सलग्न, विज्ञान के क्षेत्र मे अनुसन्धान करने वाला, शास्त्र
अध्ययन और विद्या अर्जन मे रुचिवान, विरोधियो को शांत करने
वाला होता है।
उत्तरा भाद्रपद राहु चरण फल
प्रथम चरण - जातक पर धर्म अनुयायी, सिद्धांत हीन, दुष्चरित्र,
वैवाहिक जीवन मे तलाक या विछोह, मांसाहारी,
अस्थि रोगी, शत्रु पीड़ित होता है।
द्वितीय चरण - जातक वातादिक रोग से पीड़ित, समाज मे अनादर, पारिवारिक
कलह, जलघात, वाचाल होता है।
तृतीय चरण - जातक महा कामुक, स्त्रियो
से छेड़-छाड़ मे कलंकित, प्रेम मे असफल, दुखद
दाम्पत्य होता है।
चतुर्थ चरण - जातक अपवित्र, धन
नाशक, कामुक और विलासी, परिवार से
तक्त्य, जल भीरु होता है।
उत्तरा भाद्रपद केतु चरण फल
प्रथम चरण - धननाश, देहपीड़ा,
कलह, दुःख, मानसिक पीड़ा,
जलघात, व्यथा, अपमान
होगा।
द्वितीय चरण - वाचाल, संतान
हीन, प्रबल विरोध का सामना करने वाला होगा।
तृतीय चरण - अति काम वासना के कारण बदनाम, बन्धुनाश, मधुमेह या
चर्मरोगो से पीड़ित होगा।
चतुर्थ चरण - अल्प धन लाभ, अचल
सम्पत्ति की प्राप्ति, परदेशवासी होगा।
जातक = वह प्राणी जिसका ज्योतिषीय विचार किया जा रहा हो।
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उत्तर भाद्रपद
पौराणिक परिचय
आकाश नक्षत्र में 27वें नक्षत्र उत्तर भद्रपद का विस्तार क्षेत्र मीन राशि के
अन्तर्गत
333 अंश, 20 कला से 346 अंश, 40 कला के मथ्य निर्धारित किया गया है। अद
ज्योतिष में इस नक्षत्र को 'अलपरा-अल-मुखीर कहते हैं। 'अन्द्रो मिडिया नाम ग्रीक
।
के चाइनीज स्य ज्योतिष में 'पाई' नाम से सम्बोधित किया जाता है।
उत्तर भाद्रपद का अर्थ है 'बाया चरण कमल' जो कि सुन्दर और दृष्टव्य है।
जहां पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र अचानक आदेश, क्रोथ तथा जल्दबाजी का सूचक है, वहाँ
।
उत्तर भाद्रपद क्रोथ, आवेश तथा उतावली को नियत्रित करने की अदम्य शक्ति रखता
है। इस नक्षत्र को यात्रा, भ्रमण, पर्यटन का शौक, परन्तु भौतिकवादी विचारों
की अपेक्षा
इसका मानसिक धरातल आध्यात्मिक और दार्शनिक अधिक है। इसका अधिदेवता
अहिर्बुधन्य है, जो कि पौराणिक कथाओं में जमीन के नीचे छुपा सर्प कहलाता है।
जो कि
खेत-खलिहान, रेगिस्तान या फिर जल मध्य-टापू, डेल्टा आदि प्रदेशों में पाया जाता
है।
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में पैदा जातकों के सामान्य लक्षण
पुरुष जातक
शारीरिक संरचना
बहुत ही आकर्षक तथा मासूम, भोला-भाला दिखाई पड़ने वाला उत्तर भाद्रपद जातक
अन्दर से बहुत चालाक तथा सतर्क रहता है। उसकी दृष्टि में एक चुम्बकीय शक्ति
होता
है तथा वार्तालाप भी वह कूटनीति से करता है। अगर सुन्दर शक्ल-सूरत तथा अच्छा
पहनावा हो तो वे किसी को भी एक मुस्कान में घायल कर देते हैं। "मुस्कराकर
लट लिया"
वाली बात इनके साथ सही चरितार्थ होती है।
चरित्र, गुण तथा सामान्य घटनाएं
छोटे तथा बड़े सबके साथ एक जैसा बर्ताव रखने वाले उत्तर भाद्रपद जातक बाह्य
जीवन में सहृदय, दूसरों की सहायता करने वाले तथा समान दृष्टि से व्यवहार करते
हैं।
उनकी नजर में छोटा या बड़ा कोई नहीं, दूसरों को तकलीफ पहुंचाना, उन्हें अच्छा
नहीं
लगता। उनका हृदय बेदाग और सदैव पवित्र रहा है। तुनक मिजाज बहुत होते हैं। दूसरों
के व्यंग्य बाण को सीधे ही आक्रमण की मुद्रा में ले आते हैं। अपने चहेते या
प्रिय पात्र
के लिए सब-कुछ न्यौछावर कर सकते हैं। इस प्रकार के जातक आत्मविश्वास से पूर्ण,
व्यक्तित्व तथा ज्ञान से समृद्ध तथा भाषण आदि देने, धारा प्रवाह एवं भावनात्मक
शैली
का प्रयोग करने वाले होते हैं।
वाणी की सरस्वती उन पर मेहरबान रहती है। किसी भी सभा को अगर वे एक बार
सम्बोधित कर दें तो दूसरी बार उनके भाषण सुनने को लोग उतावले रहते हैं। ज्ञान-विज्ञान
सम्मत बातों का मुलम्मा चढ़ाकर वे एक छोटी-सी बात के भी बड़े-बड़े अर्थ निकाल
लेते
हैं। दूसरी ओर बड़ी-से-बड़ी बात की भी ऐसी जड़ उखाड़ देते हैं कि मैदान साफ।
यौन-सुख पाना उन्हें बहुत सहज रहता है। अच्छी आकृति, रंग-रूप के अलावा विपरीत
योनि को वश में करने के लिए सभी गुर उनमें मौजूद होते हैं। अनेक महिलाओं के
यौन
सहभागी होने के नाते उन्हें कामदेव भी कहा जा सकता है।
शिक्षा, आर्थिक स्रोत तथा व्यवसाय
उत्तर भाद्रपद जातक शिक्षा क्षेत्र में अव्वल रहते हैं। वे अनेक विषयों और ज्ञान
शाखाओं के पारंगत विद्वान होते हैं। स्कूल-कॉलेज की डिग्री के बिना भी उनका
क्षेत्र बहुत
उच्च कोटि का, विकसित और अधिकारपूर्ण होता है। साहित्य, काव्य के अलावा
मनोविज्ञान, ज्योतिष तथा धर्मशास्त्र के भी प्रकाण्ड पंडित होते हैं। लेखन,
संपादन तथा
संचार माध्यमों में कार्यक्रम नियोजक बन सकते हैं। अपने कार्यक्षेत्र में वे
असाधारण
कार्यक्षमता के बल पर और गुणवत्ता पेश करके जल्दी ही शिखर पद पर पहुंच जाते
हैं।
आलस्य अथवा लापरवाही उनसे कोसों दूर रहती है। हर काम को चुस्ती-फुर्ती से
निबटाकर आगे के काम को निबटाने की चिंता करना उनके स्वभाविक गुण हैं।
कठिन-से-कठिन कार्य को भी वे हाथ में लेकर पूरा कर दिखाने का वायदा निभाते हैं।
यद्यपि उनका आर्थिक पक्ष मध्यावस्था तक कमजोर रहता है, परन्तु पद-प्रतिष्ठा
में वृद्धि
क साथ धीरे-धीरे धन की भी वद्धि होती है। अधिकांश जातक विवाहोपरान्त तरक्की
करत हायद्यपि 20-21 साल की आय के बाद से ही वे आजीविका आरम्भ कर देते हैं,
परन्तु 28-30 वर्ष के उपरान्त उनका कार्यक्षेत्र सुधरता ही जाता है। 35 से लेकर
40-
42 वर्ष के मध्य वे सर्वोच्च पदों पर आसीन हो जाते हा
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में पैदा जातकों के सामान्य लक्षण
पुरुष जातक
शारीरिक संरचना
बहुत ही आकर्षक तथा मासूम, भोला-भाला दिखाई पड़ने वाला उत्तर भाद्रपद जातक
अन्दर से बहुत चालाक तथा सतर्क रहता है। उसकी दृष्टि में एक चुम्बकीय शक्ति
होती
है तथा वार्तालाप भी वह कूटनीति से करता है। अगर सुन्दर शक्ल-सूरत तथा अच्छा
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और आपका स्वभाव
आप पुरुष हैं तो-आप भाग्यशाली, चतुर, उदारचित्त,
प्रसन्न, धनी एवं विद्या-प्रेमी होते हैं। आप मित्रवान, वाक-
पट, शत्रुहन्ता, धैर्यवान, सुखी एवं स्त्री सहयोग से धन पाने
वाले, अस्थिर विचारों के पुरुष हैं। आप अपने व्यवहार एवं
मदभाषी होने के कारण अनेक मित्र बना लेते हैं।
आप स्त्री हैं तो-आप पतिव्रता, पुत्रवान, सुखी, धन-
धान्य से युक्त, वाकपटु, लोकप्रिय एवं समाज में प्रतिष्ठित
स्त्री हैं। धार्मिक विचारों वाली, क्षमाशील एवं बड़े-बूढ़ों की
सेवा करने में तत्पर रहती हैं। दूजों के काम आने वाली,
विदुषी एवं धैर्यशीला हैं।
पहनावा हो तो वे किसी को भी एक मुस्कान में घायल कर देते हैं। "मुस्कराकर
लूट लिया"वाली बात इनके साथ सही चरितार्थ होती है।
चरित्र, गुण तथा सामान्य घटनाएं
छोटे तथा बड़े सबके साथ एक जैसा बर्ताव रखने वाले उत्तर भाद्रपद जातक बाह्य
जीवन में सहृदय, दूसरों की सहायता करने वाले तथा समान दृष्टि से व्यवहार करते
हैं।
उनकी नजर में छोटा या बड़ा कोई नहीं, दूसरों को तकलीफ पहुंचाना, उन्हें अच्छा
नहीं
लगता। उनका हृदय बेदाग और सदैव पवित्र रहा है। तुनक मिजाज बहुत होते हैं। दूसरों
के व्यंग्य बाण को सीधे ही आक्रमण की मुद्रा में ले आते हैं। अपने चहेते या
प्रिय पात्र
के लिए सब-कुछ न्यौछावर कर सकते हैं। इस प्रकार के जातक आत्मविश्वास से पूर्ण..
व्यक्तित्व तथा ज्ञान से समृद्ध तथा भाषण आदि देने, धारा प्रवाह एवं भावनात्मक
शैली
का प्रयोग करने वाले होते हैं।
वाणी की सरस्वती उन पर मेहरबान रहती है। किसी भी सभा को अगर वे एक बार
सम्बोधित कर दें तो दूसरी बार उनके भाषण सुनने को लोग उतावले रहते हैं। ज्ञान-विज्ञान
सम्मत बातों का मुलम्मा चढ़ाकर वे एक छोटी-सी बात के भी बड़े-बड़े अर्थ निकाल
लेते।
हैं। दूसरी ओर बड़ी-से-बड़ी बात की भी ऐसी जड़ उखाड़ देते हैं कि मैदान साफ।
यौन-सुख पाना उन्हें बहुत सहज रहता है। अच्छी आकृति, रंग-रूप के अलावा विपरीत
योनि को वश में करने के लिए सभी गुर उनमें मौजूद होते हैं। अनेक महिलाओं के
यौन
सहभागी होने के नाते उन्हें कामदेव भी कहा जा सकता है।
शिक्षा, आर्थिक स्रोत तथा व्यवसाय
उत्तर भाद्रपद जातक शिक्षा क्षेत्र में अव्वल रहते हैं। वे अनेक विषयों और ज्ञान
शाखाओं के पारंगत विद्वान होते हैं। स्कूल-कॉलेज की डिग्री के बिना भी उनका
क्षेत्र बहुत ।
उच्च कोटि का. विकसित और अधिकारपूर्ण होता है। साहित्य, काव्य के अलावा
मनोविज्ञान, ज्योतिष तथा धर्मशास्त्र के भी प्रकाण्ड पंडित होते हैं। लेखन,
संपादन तथा
संचार माध्यमों में कार्यक्रम नियोजक बन सकते हैं। अपने कार्यक्षेत्र में वे
असाधारण
कार्यक्षमता के बल पर और गुणवत्ता पेश करके जल्दी ही शिखर पद पर पहुंच जाते
हैं।
आलस्य अथवा लापरवाही उनसे कोसों दूर रहती है। हर काम को चुस्ती-फुर्ती से
निबटाकर आगे के काम को निबटाने की चिंता करना उनके स्वभाविक गुण हैं।
कठिन-से-कठिन कार्य को भी वे हाथ में लेकर पूरा कर दिखाने का वायदा निभाते हैं।
पद्याप उनका आर्थिक पक्ष मध्यावस्था तक कमजोर रहता है, परन्तु पद-प्रतिष्ठा
में वृद्धि
साय धार-धीरे धन की भी वद्धि होती है। अधिकांश जातक विवाहोपरान्त तरक्की
करत है। यद्यपि 20-21 साल की आय के बाद से ही वे आजीविका आरम्भ कर देते हैं,
परन्तु 28-30 वर्ष के उपरान्त उनका कार्यक्षेत्र सुधरता ही जाता है। 35 से लेकर
40-
42 वर्ष के मध्य वे सर्वोच्च पदों पर आसीन हो जाते हैं।
पारिवारिक जीवन
अपने परिवार में पिता की सबसे अधिक महत्त्व येने वाले उत्तर भावपद जातक आपने
कर्म क्षेत्र में भी पिता काही अनुसरण करते हैं । यद्यपि पिता के द्वारा उन्हें
कोई विशेष
मारच माही दिया जाता, परन्तु वे स्वयं पिता के चरित्र गुणों से अत्यधिक प्रभावित
रहने
है। अपने परिवार से ये जातक बचपन में ही अलग हो जाते हैं और अपने परिवार वालों
के दैनिक रमेह से वंचित रहते हैं। विवाहोपरान्त इनके जीवन में घर-परिवार की
खशियां
लौट आती हैं। आदर्श गुणों वाली, शिक्षित और परिश्रमी महिला से इनका विवाह होता
है। संतान भी आज्ञाकारी और योग्य होती है। इन जातकों को अपने नाती-पोतो तथा
पड़पोतों तक को देखने की सुविधा मिलती है। लम्बे-चौड़े कुटुम्ब विस्तार में
इनको भीष्ण
पितामह की तरह पूजा जाता है।
स्वास्थ्य
आमतौर पर इनका स्वास्थ्य अच्छा ही रहता है। खाने पीने में परहेज नहीं करने वाले
ये जातक योग-व्यायाम आदि के भी शौकीन होते हैं। बहुत गंभीर अवस्था में ही इन्हें
डॉक्टर के पास जाना पड़ता है अन्यथा ये अस्पताल आदि से दूर ही रहते हैं। कोई
समस्या ।
हो भी जाए तो घरेलू अथवा प्राकृतिक उपचार करने में विश्वास करते हैं। कुछ जातकों
को गैस, हार्निया, उदर विकार, लकवा अथवा पाइल्स की बीमारी हो सकती है।
महिला जातक
उपरोक्त में पुरुष जातकों के लिए जो गुण विशेष कहे गए हैं, यही प्रभाव महिला
जातकों पर भी होंगे। इसके अलावा कुछ अन्य गुण यहां दिए जा रहे हैं-
शारीरिक संरचना
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र की महिलाएं मध्यम कद और हष्ट-पुष्ट शरीर की, आंखें
बड़ी-बड़ी और लम्बी नाक वाली होती है।
चरित्र गुण एवं सामान्य घटनाएं।
वेवास्तविक रूप में घर के लिए लक्ष्मीस्वरूप सिद्ध होती है। परिवार में मेल-मिलाप
और संतुलन रखना, उनका पहला प्रयास होता है। सबके साथ मधुर सम्बंध बनाए रखना,
अवस्था के अनुसार आदर देना तथा परिस्थितियों के अनुसार व्यवहार करना आदि उनके
प्रशंसनीय गुण है। किसी के प्रति अनदेखा या अन्याय करना, उनके लिए दुर्लभ है।
इन
सब अच्छे गुणों के कारण ही परिवार के सदस्य-गण अधिकांश तौर पर उनके विश्वासपात्र
बन जाते है।
शिक्षा, आर्थिक स्रोत और व्यवसाय
सार प्राप्त महिलाएं अपने प्रयास से उच्च पदाधिकारी दन जाती हैं। अध्यापन
तथा पत्रकारिता एवं संचार माथ्यमा के क्षेत्र में प्रवेश करने वाली महिलाएं
प्रखर
मासे उभरती हैं। वकालत या कानूनी पेशा भी उनके लिए अनुकूल सिद्ध होता है।
पारिवारिक जीवन
अपने परिवार में वे बहुमुल्य आभूषण की तरह मानी जाती हैं। अच्छे हों या बरे.
सभी
जोगाउनका गुणगान करते नहीं थकते। इस कारण परिवार में सौहार्द बनाए रखने वाली
महिलाएं आदर्श दम्पत्ति बनने में पति को भी सहयोग देती हैं।
स्वास्थ्य
इन महिलाओं को वातू अथवा सूजन आदि की शिकायत, रक्त में दोष, अपच, गैस
तथा पैरों में कम्पन की शिकायत रहती है। खुराक पीष्टिकता कम होने से क्षय या
तपेदिक
की संभावना रहती है।
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र पर अन्य ग्रहों का प्रभाव
सूर्यः इस नक्षत्र की स्थिति पर अन्य ग्रहों के प्रभाव, पूर्व पृष्ठों पर मूल
नक्षत्र देखें।
सूर्य अगर प्रथम चरण में हो तो व्यक्ति गुर्दे की बीमारी से ग्रस्त, कैंसर अथवा
विष
जन्य रोग भी हो सकते हैं। उनका परिवार समृद्ध तथा कुलीन, सुख-वैभव युक्त होता
है। वह उच्च-स्तर का शासनाधिकार या अफसर आदि बनता है।
द्वितीय चरण में सूर्य हो तो व्यक्ति कृषि अथवा उद्योग सम्बंधी कार्य में निपुण,
सिंचाई
व जल सम्बंधी कार्य से भी धन प्राप्त करता है। इस जातक के लिए भाई-बहनों का
सुख
गीण होता है।
तृतीय चरण में सूर्य हो तो व्यक्ति अनेक विश्वविद्यालयों की डिग्री आदि हासिल
करता
है। राजकीय सेवा में रहकर भी बार-बार अपने कार्य क्षेत्र को बदलता है। वह मध्यम
स्तर
का धनी और प्रख्यात होता है।
चतुर्थ चरण का सर्य हो तो व्यक्ति अपनी संतान के लिए अरिष्टकारक होता है।
उसकी एक-दो संतान ही जीवित रहती है।
26. उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और आपका स्वभाव
आप पुरुष हैं तो-आप भाग्यशाली, चतुर, उदारचित्त,
| प्रसन्न, धनी एवं विद्या-प्रेमी होते हैं। आप मित्रवान, वाक-
पटु, शत्रुहन्ता, धैर्यवान, सुखी एवं स्त्री सहयोग से धन पाने
वाले, अस्थिर विचारों के पुरुष हैं। आप अपने व्यवहार एवं
मदभाषी होने के कारण अनेक मित्र बना लेते हैं।
आप स्त्री हैं तो-आप पतिव्रता, पुत्रवान, सुखी, धन-
धान्य से युक्त, वाकपटु, लोकप्रिय एवं समाज में प्रतिष्ठित
स्त्री हैं। धार्मिक विचारों वाली, क्षमाशील एवं बड़े-बूढ़ों की
सेवा करने में तत्पर रहती हैं। दूजों के काम आने वाली,
विदुषी एवं धैर्यशीला हैं।
26. उत्तरा भारपद नक्षत्र सम्बन्धी कार्य एवं व्यवसाय
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के किसी भी चरण में जन्म हो,
राशि मीन राशीश गुरु एवं नक्षत्र स्वामी शनि है। इस
नपात्र में जन्म हुआ है तो आप चिकित्सक, हड्डी रोग
विशेषज्ञ, बन्दरगाह, आयात-निर्यात, धर्मार्थ चिकित्सालय,
कानून, बीमा, गुप्तचर-सेवा, शिक्षाविभाग, टूरिज्म, शिपिंग, फाउन्डरि , नदी,
नहर, बांध संबंधी कार्य, इंजीनियर, जेलर,
जेल निरीक्षक, धर्मार्थ संस्थाओं का अध्यक्ष, पाखण्डी, गृह,
पागलखाना, सेना, सोसायटी, क्लब, छतरी, रेनकोट व
नाव से सम्बन्धित व्यापार, नौकायन, तेल, मत्स्य पालन,
राजनयिक, उत्खनन सम्बन्धी कार्यों को करके सफलता
सहित अपना जीवनयापन कर सकते हैं।
पारिवारिक जीवन
अपने परिवार मे पिता को सबसे अधिक महत्त्व देने वाले उत्तर भारद जातको
कर्म-क्षेत्र में भी पिता का ही अनुसरण करते है। यद्यपि पिता के द्वारा उन्हें
कोई को
महत्व नहीं दिया जाता, परन्तु वे स्वयं पिता के चरित्र गुणों से अत्यधिक प्रभावित
राहते
है। अपने परिवार से दे जातक बचपन में ही अलग हो जाते है और अपने परिवार वालों
के दैनिक स्नेह से यचित रहते है। विवाहोपरान्त इनके जीवन में घर-परिवार की बुनियां
लौट आती है। आदर्श गुणों वाली, शिक्षित और परिश्रमी महिला से इनका विवाह होता।
है। संतान भी आज्ञाकारी और योग्य होती है। इन जातकों को अपने नाती-पोतो तथा
पड़पोतों तक को देखने की सुविधा मिलती है। लम्बे-चौड़े कुटुम्ब विस्तार में
इनको मोम
पितामह की तरह पूजा जाता है।
स्वास्थ्य
आमतौर पर इनका स्वास्थ्य अच्छा ही रहता है। खाने-पीने में परहेज नहीं करने वाले
ये जातक योग-व्यायाम आदि के भी शौकीन होते हैं। बहुत गंभीर अवस्था में ही इन्हें
डॉक्टर के पास जाना पड़ता है अन्यथा ये अस्पताल आदि से दूर ही रहते हैं। कोई
समस्या
हो भी जाए तो घरेलू अथवा प्राकृतिक उपचार करने में विश्वास करते हैं। कुछ जातको
को गेस, हार्निया, उदर विकार, लकवा अथवा पाइल्स की बीमारी हो सकती है।
महिला जातक
उपरोक्त में पुरुष जातकों के लिए जो गुण विशेष कहे गए है, वही प्रभाव महिला
जातकों पर भी होंगे। इसके अलावा कुछ अन्य गुण यहां दिए जा रहे हैं-
शारीरिक संरचना
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र की महिलाएं मध्यम कद और हष्ट-पुष्ट शरीर की, आख
बड़ी-बड़ी और लम्बी नाक वाली होती हैं।
चरित्र गुण एवं सामान्य घटनाएं।
वे वास्तविक रूप में घर के लिए लक्ष्मीस्वरूप सिद्ध होती हैं। परिवार में मेल-मिलाप
आर संतुलन रखना, उनका पहला प्रयास होता है। सबके साथ मधुर सम्बंध बनाए रखना।
अवस्था के अनुसार आदर देना तथा परिस्थितियों के अनुसार व्यवहार करना आदि उनक।
प्रशंसनीय गुण है। किसी के प्रति अनदेखा या अन्याय करना, उनके लिए दुर्लभ है।
इन।
सब अच्छे गुणों के कारण ही परिवार के सदस्य-गण अधिकांश तौर पर उनके विश्वासपात्र
बन जाते हैं।
रोजगा
चिकित्सात
भा. आर्थिक स्रोत और व्यवसाय
महिलाएं अपने प्रयासों से उच्च पदाधिकारी बन जाती हैं। अध्यापन,
तथा पत्रकारिता एवं संचार माध्यमों के क्षेत्र में प्रवेश करने वाली महिलाएं
प्रखर
से उभरती हैं। वकालत या कानूनी पेशा भी उनके लिए अनुकूल सिद्ध होता है।
पारिवारिक जीवन
अपने परिवार में वे बहुमूल्य आभूषण की तरह मानी जाती हैं। अच्छे हों या बुरे,
सभी
जोग उनका गुणगान करते नहीं थकते। इस कारण परिवार में सौहार्द बनाए रखने वाली
महिलाएं आदर्श दम्पत्ति बनने में पति को भी सहयोग देती हैं।
स्वास्थ्य
इन महिलाओं को वात् अथवा सूजन आदि की शिकायत, रक्त में दोष, अपच, गैस
तथा पैरों में कम्पन की शिकायत रहती है। खुराक पौष्टिकता कम होने से क्षय या
तपेदिक
की संभावना रहती है।
