शतभिषा नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं गृह स्थित फल

 शतभिषा नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं गृह स्थित फल

वैतरणी नदी : भारतीयो की हिन्दू मान्यता है की प्रत्येक को मृत्यु बाद वैतरणी नदी पार करनी पड़ती है। हिन्दू आख्यानो अनुसार वैतरणी नदी बहुत ही गर्म और बहुत ही गन्दी तथा घृणास्पद पदार्थो से भरी रहती है। पुण्यात्मा इसे धर्मबल से शीघ्र पार कर लेते है और उर्ध्व गति होकर स्वर्ग मे स्थान पाते है। पापियो को पार कर पाना बहुत कष्ट साध्य होता है और उनकी अधो गति होकर उन्हे नरक मे स्थान मिलता है।

? स्वर्ग-नरक एक मान्यता है। व्यक्ति को एक अच्छा इंसान बनाने के लिए स्वर्ग की कल्पना की गई होगी, तभी तो भारत के नरको मे भीषण गर्मी तपते तेल के कड़ाह आदि होते है। क्योकि भारतीय उपमहाद्वीप मे गर्मी सबसे कष्ट दायी ऋतु होती है। इसके विपरीत पश्चिमी देशो मे नरक की कल्पना अत्यंत ठन्डे प्रदेश के रूप मे की गई है। मिल्टन के महाकाव्य "पेरेडाइज लास्ट" मे नरक को अत्यंत बर्फीला, श्वास को जमा देने वाला बताया है। क्योकि ठण्ड इन देशो की त्रासदी है। शतभिषा नक्षत्र-यह चौबीसवां नक्षत्र भचक्र पर धनिष्ठा से अगले 1320’ क्षेत्र में, पूर्णतः कुम्भ राशि क्षेत्र में अवस्थित है। इस नक्षत्र में सर्वाधिक (100) तारे हैं, जो मिल-जुलकर कनेर पुष्प/मृदंग जैसी   आकृति बनाते हैं। 100 तारों के कारण इसे ’शतभिषा’ कहा गया है। इस नक्षत्र के देवता वरुण (सभी प्रकार के जलों के अधिपति) हैं तथा इसका स्वामी राहू है।

     शतभिषा नक्षत्र में जन्मा पुरुष जातक वीर तथा पराई स्त्री से प्रेम करने वाला एवं सामान्यतः कंजूस धनी होता है। परदेस/विदेश में अधिक घूमने वाला या वहां आजीविका कमाने वाला किन्तु परस्त्रीगामी होता है। (मेरे देखने में आया है कि ऐसी परस्त्रियां भी प्रायः निम्न जाति की/विधवा/परित्यक्ता अथवा विधर्मी होती है। या फिर प्रौढ़ होती हैं। यह अनुभव 13 जातकों के अध्ययन के आधार पर प्राप्त हुआ है।)

     शतभिषा नक्षत्र में जन्मी महिला जातक दानी, सुंदर स्त्रियों में पूजनीय, बड़ी स्त्रियों के अनुकूल चलने वाली, देव-गुरु ब्राह्मण के पूजन में श्रद्धा रखने वाली, सर्वहितकारिणी किन्तु कौतुहलों से युक्त होती है।

आकाश मे यह सबसे बड़ा तारा मंडल है जिसे वैतरणी नाम दिया है। दक्षिण व मध्य भारत मे इस वैतरणी मंडल को आसानी से देखा जा सकता है। यह नदी टेडी-मेढी है, और यूनान में इसे "ऐरीदानुस" कहते है। यह वैतरणी धारा मृग मंडल से शुरू होकर पश्चिम की ओर चलती हुई फिर दक्षिण पूर्व को मुड़कर पुनः दक्षिण-पश्चिम की ओर व अंततः दक्षिणी ध्रुव से 23 अंश ऊपर समाप्त होती है।

आधुनिक खोजो से पता चला है कि वैतरणी मंडल का ईप्सिलोन नामक तारा गुण-धर्म मे हमारे सूर्य जैसा ही अपनी धुरी पर ही धूमता है जिसका हमारे सौरमंडल की तरह कोई सौर मंडल होना चाहिये। इसी से यहाँ के किसी गृह पर जीवन की सम्भावना हो सकती है। यह तारा हमसे 10 हजार अरब किलो मीटर दूर है।

शतभिषा

राशि चक्र मे 30640 से 32000 अंश विस्तार का क्षेत्र शतभिषा नक्षत्र कहलाता है। अरब मंजिल मे इसे अल स'द अल सु'अद अर्थात तम्बू का परम सुख, ग्रीक मे एक्वेरी, चीनी सियु में गुई कहते है। शतभिषा का अर्थ 100 औषधि माना जाता है। इसके शब्दार्थ अनुसार शतभिषा के फूल के आकार मे 100 तारे माने होते है। खंडकातक अनुसार इस नक्षत्र का प्रतीक एक ही तारा माना जाता है।

देवता वरुण, स्वामी ग्रह राहु, राशि कुम्भ 0640 से 2000 अंश। भारतीय खगोल मे यह 24 वा नक्षत्र चर संज्ञक है। इसके 100 तारे है इसलिए इसे शततारिका भी कहते है। शतभिषा का अर्थ 100 औषधि भी है। यह शुभ तामसिक, नपुसंक नक्षत्र है। इसकी जाति क्रूर शूद्र, योनि अश्व, योनि वैर महिष, गण राक्षस, नाड़ी आदि है। यह दक्षिण दिशा का स्वामी है।

शतभिषा नक्षत्र का देवता वरुण है। जो वर्षा का देवता और आदित्यो मे से एक आदित्य है। सम्पूर्ण वाह्य जगत भूमि, समुद्र, वायु मंडल वरुण से सम्बंधित है। अकाल के समय वरुण देवता की पूजा की जाती है। विश्वास किया जाता है कि वरुण देव अंतरिक्ष मे घूमते है और अधिमुख आरोहित रेडियो धर्मिता को मूलतत्व से नियंत्रित करते है। ये निऋति / निरीति (जो शुभकार्य और मांगलिक कार्य मे बाधक है) से बचाने के लिये शक्ति ग्रहण करते है। वरुण को चिकित्सा शास्त्र का देवता भी माना गया है।

प्रतीकवाद - वैदिक धर्म मे वरुण को आकाश, विधि, जल, आकाशीय सागर, अधोलोक का स्वामी माना है। ऋग्वेद मे इसे प्रमुख असुर मानते स्वर्ग और पृथ्वी का स्वामी माना है। ऋग्वेद और अथर्वेद मे वरुण को सर्वज्ञ कहकर झूठे को जाल मे फसाकर पकड़ने वाला माना है। हिन्दू पौराणिकता अनुसार ये जल और जल के सभी तत्व तथा समुद्र और नदियो के स्वामी है। इन्हे सभी दिशा (मतान्तर पश्चिम दिशा) का स्वामी माना है। वरुण माता अदिति और महर्षि कश्यप के पुत्र और चौथे आदित्य है। इनकी पत्नी वरुणी और वाहन मगर है। इनके महर्षि वशिष्ट, यश चित्रस्तवन, गन्धर्व हुहू, अप्सरा रम्भा, रक्षक सहजन्य, नाग शुक्र है।

विशेषताऐ -

जातक कुशल चिकित्सक होता है। वह रहस्य मय, दार्शनिक, वैज्ञानिक, दूरदर्शी होता है।

पुरुष जातक कोमल शरीर, उत्कृष्ट स्मृति शक्ति, चौड़ा ललाट, आकर्षक नेत्र, चमकदार चेहरा, उभरा उदर, उन्नत नाक वाला होता है।

स्त्री जातक लम्बी-दुबली, पतली, अतिसुन्दर, उन्नत नितम्ब, गुलाबी अधर, चौड़े कपोल, सुरुचि पूर्ण स्वभाव वाली होती है। स्त्री जातक को वैवाहिक जीवन में लम्बा वियोग सहना पड़ता है। कभी-कभी वैधव्य योग भी होता है। रोहणी नक्षत्र के पुरुष जातक से तारतम्य ठीक रहता है।

शतभिषा विभक्तियां

इसाक न्यूटन शतभिषा तृतीय पाद

शतभिषा नक्षत्र फलादेश

शतभिषा के 100 तारे, 100 औषधिया, 100 आरोग्यकर है। इसका महत्वपूर्ण तथ्य इसकी गोपनीयता है। हालाकि, अनुराधा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा मे भी गोपनीय प्रभाव है, परन्तु शतभिषा जीवनशक्ति गोपनीयशक्ति से प्राप्त करता है। यह कपट और निर्जनता आधारित इलेक्ट्रॉनिक मीडिया है।

जातक परिस्थिति मे देर से अभ्यस्त होने के कारण सुरक्षित, गुप्त, दूसरो की पहुँच से बाहर, वैराग्य जनक, अंतर्मुखी, विलक्षण, समस्याओ को सुलझाने वाला, झूठ का पर्दाफास करने वाला, वास्तु का अंदरूनी जानकर, बाल्य काल मे अल्प शिक्षा, ठण्डा होने से भावुकता पर नियंत्रण करने वाला होता है।

जातक धनवान, पर स्त्री गामी, अपने नियमो का पक्का, धात करने योग्य, उद्यमी, विदेश मे रहने की कामना करने वाला, परिमित होता है। इस नक्षत्र मे भेषज शक्ति है।

पुरुष जातक - यह मुलायम शरीर, सुस्मृति युक्त, चौड़ा ललाट, सुन्दर नेत्र, तेजयुक्त मुखड़ा, उभरा पेट वाला होता है। यह पहली ही नजर मे कुलीन परिवार का लगता है। जातक सत्यमेव जयते सिद्धांत का अनुशरणी, सत्य के लिये प्राणोत्सर्ग करने वाला, जीवन नियमो का पालक निस्वार्थ सेवा करने वाला, धार्मिक परम्परावान स्वनिर्णय आलम्बी, अच्छाई-बुराई का मिश्रण होता है।

यह उत्तेज्जित होने पर विलायती कुत्ते के समान परन्तु शीघ्र शांत होने वाला, दिखावट रहित होता है। अपनी विद्वता दिखाने की लिए शर्मिंदा किन्तु वार्तालाप मे विद्वता झलक आती है जो शिक्षा देने वाली और मार्गदर्शक होती है। व्यवसायिक जीवन 34 उम्र वर्ष तक परीक्षण वाला बाद मे निरंतर उन्नति होती है। इस नक्षत्र मे श्रेष्ट चिकित्सक होते है। जातक प्रिय और नजदीकियो तथा भाइयो से पीड़ित लेकिन उनका मददगार, पिता की सहायता से वंचित, माता से स्नेह पाने वाला, प्रिय पत्नी युक्त होता है। इसकी संस्कृति प्रभु राम जैसी होती है। इसका दाम्पत्य जीवन सुखी नही होता है।

यदि शनि गुरु पाप पीड़ित या अशुभ प्रभाव मे हो, तो जातक जीवन भर अविवाहित रहता है, यदि विवाह हो भी जाय तो पत्नी सर्वगुण सम्पन्न होते हुए भी दाम्पत्य जीवन दुःखद, क्लेश व कष्टमय होता है।

स्त्री जातक - यह लम्बी पतली, शानदार मुखड़ा, सुन्दर, चौड़े कपोल, असामान्य कनपटी और उभरे नितम्ब वाली होती है। यह प्रायः शांत, कभी-कभी गुस्सैल, ईश्वर से डरने वाली, धार्मिक गतिविधियो मे रत, गर्म स्वभाव के कारण परिवार मे झगडे जिससे अशांत रहती है। जनता और परिवार दोनो मे गलत समझी जाती है। प्राय: चिकित्सक होती है। यह पति भक्त, नये या दूसरो के विचारो को नही मानने वाली, दुराग्रही होती है। विवाह मे विलम्ब या रूकावट होती है।

इसका रोहिणी जातक से विवाह सुखद होता है। प्रारम्भ मे अड़चने आती है जो कालांतर में ठीक हो जाती है।

आचर्यो अनुसार नक्षत्र फलादेश

इस नक्षत्र मे उत्पन्न जातक प्रायः किलेबंदी, समाजबंदी, पार्टीबंदी, कूटनीति, फ़ूटनीति येन-केन प्रकारेण अपने को बचाने वाले और शत्रुओ को फ़साने वाले होते है। इन लोगो को कोई न कोई व्यसन अवश्य रहता है इसलिये इनके जीवन मे उतार-चढाव आते रहते है। इनमे दूसरो को चकमा देकर कार्य सिद्ध करने की आदत होती ही। पर स्त्री और पर धन की ओर इनका विशेष लगाव होता है। - नारद

बदला लेने और शत्रु को शिकस्त देने का नशा इनमे छाया रहता है। सर्दी से स्वयं का बचाव करते रहते है, क्योकि इन्हे शीत सहन नही होती है।

ये लोग शीघ्र प्रसन्न नहीं होते है और बहुत समय तक याचना करने पर थोड़ा प्रसन्न होते है। यदि इनके हाथो मे अधिकार आ जाय तो लोगो को अपने पिछे घुमाते रहते है। साफ व तीखा बोलना इनका स्वभाव होता है। वस्त्र और गहने का शौक होता है। - वराहमिहिर

ये लोग एकत्रित संपत्ति मे बहुत कम फेर बदल करते है। इनकी वैद्यक या चिकित्सक विषयो मे रूचि होती है। पराशर अनुसार ये अच्छे चिकित्सक लेकिन किसी न किसी रोग से ग्रस्त रहते है। पर स्त्री सेवन और मध्यपान इनकी कमजोरी होती है। साधारणतया सहनशील होते है।

चन्द्र :

जातक सिद्धांतवादी, सत्यवादी, दयालु, लेखक, ज्योतिषी, मनोविद, तीव्र स्मृति वान, निर्भीक, शत्रुहन्ता, स्वतंत्र विचारक, कलाकार होता है। जातक आरोग्यकर, डाक्टर, आध्यात्मिक, रहस्य वादी, दार्शनिक, भविष्य द्रष्टा होता है। कोई-कोई जातक गोपनीय, वैरागी, मिजाजी, निराश, दुराग्रही होता है। विवाह मे विलम्ब होता है।

वराहमिहिर अनुसार चंद्र प्रभाव बिना विचारे कार्य या निर्णय करना, कठोर भाषा, स्वतंत्र विचार का द्योतक है।

सूर्य :

यदि सूर्य शतभिषा नक्षत्र मे हो, तो जातक कर्मठ, मानवीय, लेखक, दार्शनिक, प्रोत्साहन चाहने वाला होता है।

लग्न :

जातक रहस्यवाद और ज्योतिष मे रुचिवान, नौकर पेशा, राजनीति मे रत, शिक्षा के उद्देश्य से यात्रा करने वाला होता है। शराब नुकसान दायक होती है।

नक्षत्र चरण फल

प्रथम चरण - इसका स्वामी गुरु है। इसमे शनि, राहु, गुरु का प्रभाव है। कुम्भ 30640 से 31000 अंश। नवमांश धनु। यह भाग्य, आशावाद, मानवजाति प्रेम या विश्वप्रेम, विशेष कारण का द्योतक है। जातक मिला हुआ शरीर, सुन्दरियो को प्रिय, वैदूर्य के सामान कान्ति वाला, शास्त्रज्ञ व शास्त्र का प्रयोग करने वाला होता है।इस पाद मे जातक विद्वान, आध्यात्मिक, परम्परागत मापदंड मे विश्वासी होता है। यह सकारात्मक ऊर्जावान तीर्थ स्थलो और शिवालयो की बार-बार यात्रा करने वाला, धर्म शास्त्रो का ज्ञाता, परिपक्व होता है।

द्वितीय चरण - इसका स्वामी शनि है। इसमे शनि, राहु, शनि का प्रभाव है। कुम्भ 31000 से 31320 अंश। नवमांश मकर। यह आयोजन, प्रयोगिक, इच्छाओ का द्योतक है। जातक गौर वर्ण, बड़ा मुख, स्त्रियो मे अनुरक्त, धीर, वीर, गंभीर, शत्रुहंता, भोग विलास मे रत होता है।

इस पाद मे जातक व्यावसायिक विकास मे ध्यान रखने वाला, कर्मठ और अपने विकास के लिए महत्वाकांक्षी, परिवार को अधिक समय नही देने वाला अच्छा अभिभावक होता है।

तृतीय चरण - इसका स्वामी शनि है। इसमे शनि, राहु, शनि का प्रभाव है। कुम्भ 31320 से 31640 अंश। नवमांश कुम्भ। यह दृष्टि, दर्शन, राजद्रोह, केंद्र भ्रष्ट का द्योतक है। जातक स्पष्ट ज्ञान वाला, कलाकार, कठोर अधर व पैर, गड्डेदार कपोल, सांवला वर्ण, कम सुनने वाला होता है।

इस पाद मे जातक तेज अन्तःज्ञानी, लिंग भेद का प्रदर्शन करने वाला, पति-पत्नी मे परस्पर प्रेम, अनुशासित होता है। दुश्मन इसे नुकसान पहुंचाने मे असफल और मित्र लाभ पहुंचाने मे वंचित रहते है।

चतुर्थ चरण - इसका स्वामी गुरु है। इसमे शनि, राहु, गुरु का प्रभाव है। कुम्भ 31640 से 32000 अंश। नवमांश मीन। यह भ्रम, खर्च, दया, पवित्रता का द्योतक है। जातक व्याघ्र मुखी, घुंघराले बाल वाला, साहसी, निश्चित अर्थ का ज्ञाता, हिंसक जन्तुओ को मारने वाला, राज्य प्रिय होता है।

इस पाद मे जातक सम्पदा और परिवार का प्रदर्शनकारी, व्यवसाय के कारण परिवार से दूर रहने वाला, भावुक, काल्पनिक, शराब के नशे का आदी और नशे के लिए घर का त्याग करने वाला लेकिन शराब की लत वाला, आध्यात्मिक गुरु या डाक्टर होता है।

आचर्यो ने चरण फल सूत्र रूप में कहा है परन्तु अंतर बहुत है।

यवनाचार्य : शतभिषा प्रथम चरण मे वाचाल, द्वितीय मे श्रीमंत, तृतीय मे सुखी, चतुर्थ में पुत्रवान होता है।

मानसागराचार्य : शतभिषा प्रथम चरण मे कष्ट पाने वाला, भाषाहीन, द्वितीय मे पुत्रवान, तृतीय मे राजमान्य, चतुर्थ मे धर्मात्मा होता है।

भारतीय मान्यता अनुसार सूर्य, बुध, शुक्र की आपसी पूर्ण या पाद दृष्टि नही होती है, क्योकि सूर्य से बुध 28 अंश और शुक्र 48 अंश से अधिक दूर नही हो सकते है।

सूर्य :

यदि शतभिषा सूर्य पर चंद्र की दृष्टि हो, तो जातक कुमार्ग मे धन गवांयेगा।

यदि शतभिषा सूर्य पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक दूसरो के झगडे या समझौता करवाने मे धन कमायेगा व धन गवांयेगा।

यदि शतभिषा सूर्य पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक सुकार्य करने वाला, दयालु, धनवान होगा।

यदि शतभिषा सूर्य पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक जिद्दी और शत्रुओ का नाश करने वाला होगा।

शतभिषा सूर्य चरण फल

प्रथम व चतुर्थ चरण - जातक कर्मठ, वैद्यक या चिकित्सा विषयो मे रुचिवान लेकिन स्वयं किसी-न-किसी रोग ग्रस्त, लेखक, दार्शनिक, प्रोत्साहन चाहने वाला होता है।

द्वितीय व तृतीय चरण - जातक व्यसनी (पर स्त्री सेवन, मद्यपान) चालाक, चकमा देकर अपना काम निकलने मे माहिर, शत्रुओ को परास्त करने वाला, परधन और परस्त्री पर आकर्षित होने वाला होता है।

चन्द्र :

यदि शतभिषा चन्द्र पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक राजा के सामान धन व शक्ति का उपभोग करेगा।

यदि शतभिषा चन्द्र पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक साहसी और प्रभुतावान होगा।

यदि शतभिषा चन्द्र पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक अमीर व सम्पन्न होगा।

यदि शतभिषा चन्द्र पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक राजनीतिज्ञ होगा।

यदि शतभिषा चन्द्र पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक गरीब, सामान्य व्यक्ति होगा।

यदि शतभिषा चन्द्र पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक जमीन का स्वामी होगा।

शतभिषा चंद्र चरण फल

प्रथम और चतुर्थ चरण - जातक सत्यवादी, सिद्धांतवादी, लेखक, मनोविद, तीव्र स्मृति वाला, भविष्य द्रष्टा, भविष्य वक्ता, डाक्टर, वीर, विचारक होता है। विवाह मे विलम्ब होता है।

अन्यत्र यह दिखने मे सामन्त मगर दुस्साहसी और जिद्दी होगा, उसके अंतर्मन की थाह पाना मुश्किल होगा। अपनी माता के आलावा किसी की भी परवाह नही करेगा। नैतिकता हीन होगा।

द्वितीय और तृतीय चरण - जातक चालाकी व चकमा देकर शत्रुओ का संहार करने वाला, दूसरो को फ़साने वाला, तुनुक मिजाजी, दुराग्रही होता है। कोई-कोई जातक गोपनीय और वैरागी होता है।

अन्यत्र जातक ज्योतिषी, राजनीतिज्ञो से लाभी, जुआरी, शराबी, आय को उपभोगो पर खर्च करने वाला, बारम्बार प्रयासो के बावजूद निम्न स्तर पर रहने वाला, दुस्साहसी होता है। यह आपराधिक प्रकरणो का सामना करेगा लेकिन शुभ ग्रहो के कारण बचा रहेगा। 28 वे वर्ष मे दुर्घटना हो सकती है।

मंगल :

यदि शतभिषा मंगल पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक सब प्रकार सुखी जीवन व्यतीत करेगा।

यदि शतभिषा मंगल पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक माता के सुख से वंचित होगा।

यदि शतभिषा मंगल पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक मृदुभाषी लेकिन झूठ बोलने वाला होगा।

यदि शतभिषा मंगल पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक गुणवान, दीर्घायु होगा।

यदि शतभिषा मंगल पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक झगड़ालू, भाग्यशाली और रतिरत होगा।

यदि शतभिषा मंगल पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक स्त्रियो से परे, प्रसिद्ध, बुद्धिमान होगा।

शतभिषा मंगल चरण फल

प्रथम व चतुर्थ चरण - जातक कूटनीति से शत्रु को फसाकर स्वयं सुरक्षित होने वाला, शीघ्र प्रसन्न नही होने वाला, स्पष्ट बोलने वाला, चरित्रवान, सम्मानित, उदार, कुसंगति से परेशान होता है।

द्वितीय व तृतीय चरण - जातक व्यसनी, पर नारी रत और मध्यपानी, जालसाजी से शत्रुओ को फ़साने वाला, बदला लेने वाला, औषधियों का जानकर लेकिन स्वयं रोग ग्रस्त होता है।

बुध :

यदि शतभिषा बुध पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक डरपोक किन्तु धनवान होता है।

यदि शतभिषा बुध पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक नीच कार्य करने वाला, क्रूर, निःसंकोची होता है।

यदि शतभिषा बुध पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक समाज या संस्था प्रमुख, प्रज्ञ होता है।

यदि शतभिषा बुध पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक निष्ठुर, निर्धन, दुखी होगा।

शतभिषा बुध चरण फल

प्रथम व चतुर्थ चरण - जातक शत्रुओ का नाश करने का नशे वाला, बहुत मिन्नत करने पर थोड़ा प्रसन्न होने वाला, सफल चिकित्सक, साफ व तीखा बोलने वाला होता है।

द्वितीय व तृतीय चरण - जातक युद्ध की घोषणा और शत्रु को शिकस्त देने का इन्तजार करने वाला, सर्दी से बचने वाला, शीत सहन नही करने वाला होता है। शनि से युत हो, तो सरकार मे उच्च पद पर होगा। मंगल से युत हो, तो 31 वर्ष तक कष्ट बाद मे स्थिर और समृद्ध, उन्नत होगा। वह पत्नी की सम्पति का उपयोग और उपभोग करेगा लेकिन वैवाहिक जीवन दुःखी होगा।

गुरु:

यदि शतभिषा गुरु पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक ओजस्वी वक्ता, आकर्षक, मददगार होता है।

यदि शतभिषा गुरु पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक समाज का प्रधान या मंत्री होगा।

यदि शतभिषा गुरु पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक विश्वासपात्र और सहायक होगा।

यदि शतभिषा गुरु पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक शांतिप्रिय और विद्वान होगा।

यदि शतभिषा गुरु पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक सर्वगुण संपन्न, धनवान होगा।

यदि शतभिषा गुरु पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक की सभी आकांक्षाए पूर्ण होगी।

शतभिषा गुरु चरण फल

प्रथम और चतुर्थ चरण - जातक अंतर्मुखी, परिस्थितयो को देर से समझने के कारण सुरक्षित, सत्य को उजागर करने वाला, परस्थितियो को समझने वाला, शीतल होने से भावुकता पर नियंत्रण करने वाला होता है।

अन्यत्र बचपन मे स्वयं और माता का भरण-पोषण पिता द्वारा नही किया जायगा, अन्य रिस्तेदार करेगे।

द्वितीय और तृतीय चरण - जातक पर स्त्री गामी, शराबी, स्पष्ट वक्ता होने से उपलब्धियो से वंचित, नियमो का पक्का, घात लगाने और घात करने मे माहिर, चतुराई से चकमा देकर शत्रुओ को परास्त करने वाला, विदेश मे रहने की कामना करने वाला, कपटी होता है।

शुक्र :

यदि शतभिषा शुक्र पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक आकर्षक, सुन्दर होगा ।

यदि शतभिषा शुक्र पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक परिश्रमी, साहसी, बहादुर होगा ।

यदि शतभिषा शुक्र पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक कलाविद और संगीत का शौकीन होगा ।

यदि शतभिषा शुक्र पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक कामुक, भाग्यशाली, स्वस्थ होगा ।

शतभिषा शुक्र चरण फल

प्रथम व चतुर्थ चरण - जातक विलक्षण, समस्याओ को सुलझाने वाला, कूटनीतिज्ञ या राजनीतिज्ञ, राजदूत, वस्त्राभूषण का शौकीन, अपनी गोपन शक्ति से जीवन शक्ति प्राप्त करने वाला होता है।

प्रथम चरण - जातक का विवाह कच्ची उम्र मे होने से उसके पुरुषत्व पर संदेह किया जावेगा परन्तु वह किशोरावस्था में कई बार मैथुन कर चुका होगा।

चतुर्थ चरण - बुध की युति होने पर वह सरकारी नौकर होगा। छोटी आयु में छोटे पद पर नियुक्त होकर शीर्ष पर पहुंचेगा। कुछ मामलो मे शिक्षा मे व्यवधान हो सकता है।

द्वितीय व तृतीय चरण - जातक दूसरो के गढ़ मे सेंध लगाने मे माहिर, कपटी, विदेश मे रहने की कामना करने वाला, व्यसनी, भेषज शक्ति युक्त, स्पष्टवादी, सत्यवादी, निर्जनतावादी होता है। विवाह छोटी उम्र मे होता है। जातक मैथुन क्रिया मे अत्यधिक लिप्त होता है।

शनि :

यदि शतभिषा शनि पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक सामान्य सूरत वाला, निर्धन, निर्भर होगा।

यदि शतभिषा शनि पर चंद्र की दृष्टि हो, तो चरित्रवान, माता की देखभाल से वंचित, सोच-विचारी होगा।

यदि शतभिषा शनि पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक विपरीत कार्य करने वाल, धूर्त होगा।

यदि शतभिषा शनि पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक नेक, धनी, लाभी और उच्च होगा।

यदि शतभिषा शनि पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक उच्च पद पर नियुक्त, सुरक्षा प्रमुख होगा।

यदि शतभिषा शनि पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक संवेदनशील होगा।

शतभिषा शनि चरण फल

प्रथम और चतुर्थ पाद - जातक अंतर्मुखी, येन-केन प्रकारेण अपने को सुरक्षित रखने वाला, बदला लेकर शत्रु को परास्त करने की धुन वाला, ईमानदार, शिष्ट व्यवहारी, अनुसन्धानी होता है।

द्वितीय और तृतीय पाद - जातक स्वस्थ, सुरक्षित, ऐश्वर्यशाली, जीवन मे उतार-चढ़ाव देखने वाला, अधिकार मिलाने पर लोगो को अपने पीछे घूमाने वाला होता है।

अन्यत्र जातक काम वासना मे लिप्त, पर स्त्रियो पर कुदृष्टि रखने वाला, रुखा, क्रोधी, जन्म स्थान से दूर रहने वाला होता है।

शतभिषा राहु चरण फल

पहला व चौथा पाद - जातक अशुभ कर्म करने मे माहिर, चालाक, चकमा देकर अपना कार्य करवाने मे माहिर, वात पीड़ित होता है। यदि सूर्य बुध की युति हो, तो क्षय रोग होता है।

दूसरा व तीसरा पाद - जातक धोखेबाज, कड़वा और कटु बोलने और कहने वाला, महा व्यसनी, भेद लेने-देने वाला होता है। यदि शनि से युत या धृष्ट हो, तो उक्त फलो में तीव्रता और मंगल से युत या धृष्ट हो, तो उक्त फलो मे हिंसकता आ जाती है।

शतभिषा केतु चरण फल

पहला और चौथा पाद , सभी संभावित कष्ट होगे लेकिन शुभ या सूर्य, बुध, गुरु की दृष्टि हो तो फल मे न्यूनता आ जाती है। जातक सामान्य लोगो से अति विद्वान और शिक्षा मे विशिष्ट होगा। धनहानि होगी, स्त्रियो से जातक के काम सम्बन्ध होगे।

तीसरा व चौथा पाद - कष्ट, धनहानि, पेट और चमड़ी के रोग होगे। सरकार से दण्डित होगा, हर प्रकार से निराश होगा। यदि शुभ ग्रहो की दृष्टि हो, तो उपरोक्त फल में न्यूनता आ जाती है।

जातक = वह प्राणी जिसका ज्योतिषीय विचार किया जा रहा हो।

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शतभिषा: माया नही करना चाहिए। शतभिषा नक्षत्र पौराणिक परिचय आकाश मंडल में कुंभ राशि क्षेत्र के 306 अंश, 40 कला से 320 अंश तक का क्षेत्र शतभिषा नक्षत्र के लिए निर्धारित रहता है। अरबी ज्योतिष में इसे 'शाद अल आके बया' (चरागाह या सैरगाह जैसा मैदान) या 'शाद अल मलिक करते हैं। जिसका अभिप्राय है, सितारों का राजा। ग्रीक शास्त्रों में इसे 'एकावरी' कहा गया है। चाइनीज भविष्य शास्त्र में इसे 'ग्रोई' कहा गया है। शतभिषा नक्षत्र के अंदर सौ तारों की स्थिति मानी गई हैइस नक्षत्र का अधिदेवता वरुण जो कि आदित्य सत्र के अनुसार वर्षाकारक ग्रह है। संसार में तमाम हरे-भरे प्रदेश वरुण के अधीन आते हैं। सातों समुद्र वरुण के द्वारा ही जल को बादलों में परिवर्तित करके पृथ्वी के सूखे भू-भाग में वर्षा करते हैं। जब अत्यन्त सूखा पड़ जाता है तो वरुण यानी इन्द्र की पूजा-अर्चना की जाती है। यही कारण है कि देवी-शक्तियों से युक्त इन नक्षत्रों पर जब भी सूर्य या चन्द्रमा संचार करते हैं तो धरती पर तविषयक प्रभाव पड़ते हैं। इस नक्षत्र के दौरान जहरीली दवा भी अमृत बनकर जातक की जीवन-रक्षा करती है। शतभिषा नक्षत्र में पैदा जातकों के सामान्य गुण पुरुष जातक शारीरिक संरचना इन जातकों का शरीर कोमल, स्मरण शक्ति तेज तथा माथा चौड़ा होता है। आंखें तथा बाल भूरे या काले होते हैं। शरीराकृति से किसी राजसी खानदान में पैदा हुए लगते हैं। चरित्र, गुण और सामान्य घटनाएं शतभिषा जातक चरित्र में श्रेष्ठ, सत्यवादी तथा न्यायप्रिय आचरण के होते हैं। इन जातकों के कुछ सिद्धांत होते हैं। जिनकी खातिर अपने लाभ को भी ये तिलांजलि दे सकते हैं। अपनी सेवा खुद करने में विश्वास रखते हैं। धार्मिक प्रवृत्ति के अड़ियल या कट्टर धर्म को मानने वाले, दिखावा करने में विश्वास रखते हैं। विज्ञान, प्रौद्योगिकी अप विषयों पर इनकी शिक्षा होती है। आजीविका में उतार-चढ़ाव झेलते रहते है। द्वारा अपशब्द बोले जाने पर ये मरने-मारने पर उतारू हो जाते है। कछ कारणे मे क्षमता और ज्ञान दबकर रह जाता है। ये अद्भुत कलाकार, जासूसी कथाओं के लेख या फिल्म-फोटोग्राफी से जुड़े रहते हैं। शिक्षा, आर्थिक स्रोत और व्यवसाय जीवन के पूर्वार्द्ध यानी 35 वर्ष की आयु तक इन्हें बहुत उतार-चढ़ाव झेलने पड़ते हैं। उसके उपरांत ये लगातार उन्नति करते हैं। मनोवैज्ञानिक विषयों में इने - सफलता मिलती है। अनुसंधान, आविष्कार या आर्थिक नियोजन के क्षेत्र में भी उनका प्रभूत्व रहता है। ये अच्छे किस्म के डॉक्टर, अनुसंधानकर्ता और समाज सेवक भी होने हैं। अगर पाप ग्रहों का संयोग बड़ा हो तो नशीले और मादक पदार्थों के व्यापारी, तस्कर जालसाज एवं घोटाला, भ्रष्टाचार के नायक भी इन्हें कहा जाता है। पारिवारिक जीवन अपने स्वजनों के बीच इन्हें बहुत-से उतार-चढ़ाव देखने पड़ते हैं। अपनी क्षमता न होने के बावजूद वे दूसरों की सहायता करते हैं। भाई-बन्धुओं से उन्हें प्रताड़ना मिलती है। माता-पिता के स्नेह से भी वे लगभग बंचित रहते हैं। कुछ इन्हीं कारणों से इन्हें अच्छा जीवन-साथी भी नहीं मिल पाता। कुछ जातक अविवाहित भी रहते हैं। कई जातकों का विवाह वृद्धावस्था में भी होता है। स्वास्थ्य बाहरी तौर पर इनका स्वास्थ्य अच्छा नजर आता है, परन्तु अन्दर से अनेक बीमारियां इन्हें घेरे रहती हैं। मधुमेह, वात रोग तथा सांस लेने में कठिनाई या आंतों की कमजोरी इनको हो सकती है। कई जातक हृदय तथा यौन रोग से ग्रस्त रहते हैं। हड्डियों । और जोड़ों के दर्द भी कई जातकों को कष्ट देते हैं। उनके गुप्त सम्बंध अवांछित लोगों से होते हैं। इस कारण से भयावह रोग उन्हें पकड़ सकते हैं। अपने कार्यक्षेत्र के पर्यावरण जन्य दोष से भी वे रोगी हो जाते हैं, जिनमें गैस एवं रसायनों का दुष्प्रभाव बुजाय बदबूदार हवा से उत्पन्न बीमारियां प्रमुख हैं। महिला जातक शारीरिक संरचना हृष्ट-पुष्ट शरीर वाली, आमतौर पर सुन्दर भव्य आकृति, मांसल चेहरा और मनु शरीर की महिलाएं सौम्य गुणों से युक्त होती हैं। चरित्र, गुण और सामान्य घटनाएं शतभिषा महिलाएं शांत स्वभाव की, परन्तु कभी-कभी गुस्सैल नजर आती हैं। घर की जाय इन्हें घर से बाहर के कार्य करने अधिक रुचिकर लगते हैं। धार्मिक रुचियों वाली महिलाएं पारिवारिक मतभेदों के कारण भी तनावग्रस्त तथा चिड़चिडी हो जाती हैं। शक्ति मार्ग के बीच में भी वे दुःखी और दुर्भाग्यपूर्ण जीवन से जूझती रहती हैं। इनकी स्मरण शक्ति बहत अच्छी, उदार एवं सहानुभूतिपूर्ण रवैये वाली, अपने स्वार्थ को साधने में मशगूल रहने जाली महिलाएं कभी-कभी निःस्वार्थ भाव से बड़े अच्छे काम कर डालती हैं। इनके कार्यशील जीवन की सर्वत्र चर्चा होती है। कभी-कभी जन-साधारण के बीच भी इन्हें गलत समझ लिया जाता है। जिसमें उसके पारिवारिक सदस्यों का विशेष योगदान होता है।। शिक्षा, आर्थिक स्रोत और व्यवसाय भौगोलिक, वैज्ञानिक और चिकित्सा विषय में इनकी अभिरुचि रहती है। औद्योगिक कार्यों के अलावा समाज-विज्ञान के क्षेत्र में इनको आजीविका या धन लाभ हो सकता है। विज्ञापन, मॉडलिंग या चलचित्र, टी. वी. व्यवसाय से भी शतभिषा महिलाएं जुड़ी रहती हैं। वायु सेवा, विमान संचालन में भी अनेक महिलाएं देखी गई हैं। पारिवारिक जीवन अपनी सम्पूर्ण निष्ठा और सेवा के बावजूद इसके पारिवारिक सदस्य इनके प्रति सहानुभूति पूर्ण नहीं होते। इनके हर कार्य को व्यंग्य बाणों से विछिन्न किया जाता है। ऐसे असंतुलित पारिवारिक जीवन के कारण ही अनेक महिलाएं आत्मघात कर लेती हैं। अनेक महिलाएं विधवा अथवा तलाकशुदा जीवन भी व्यतीत करती हैं। इनको अपनी कन्या-संतान का आश्रय मिलता है। स्वास्थ्य इन महिलाओं को मियादी बुखार, हृदय रोग, हड्डियों की चोट या विकार, किडनी आदि के रोग हो सकते हैं। आंखों में कमजोरी या मोतियाबिंद का प्रभाव भी देखा जाता शतभिषा नक्षत्र और आपका स्वभाव आप पुरुष हैं तो-आप बातूनी, स्पाएवादी. जिद्दी. धर्मभीरू, चंचल एवं स्वच्छता प्रेमी होते हैं। विलासिता, व्यसन, जुआ, नशीले पदार्थों के सेवन एवं परस्त्रीगमन के कारण अपयश एवं हानि के भागी बनते हैं। आप स्त्री हैं तो-आप साहसी, धर्मभीरू, बातूनी, चतुर, व्यसनशीला, शत्रुओं को हराने वाली, परिवार में सम्मान पाने वाली, ईश्वर भक्त एवं स्पष्टवादी होती हैं। कंजूस एवं व्यसनों में लिप्त रहने के कारण अपयश व हानि की भागी बुधः बुध ग्रह, शतभिषा में अन्य ग्रहों की दृष्टि प्रभाव हेतु श्रवण नक्षत्र पर बुधक संचार के दौरान अन्य ग्रहों के दृष्टिफल पीछे के पृष्ठों में देखें। इस नक्षत्र के प्रथम चरण में बुध हो तो व्यक्ति का एक भाई उच्च पदाधिकारी, शासन सत्ता के शीर्षपदों पर रहता है। अपने भाई के सहयोग से वह व्यापार आरम्भ करता है, जो कि 33 वर्ष के बाद सुचारू रूप से चलता है। दूसरे चरण में बुध के प्रारब्ध से व्यक्ति घर-परिवार से सुखी, भाइयों का चहेता, 25 वर्ष में विवाह के बाद भाग्योदय देखने वाला तथा अस्थाई एवं चलते-फिरते व्यवसाय करने वाला, दलाल, एजेंट अथवा कार्यकर्ता होता है। तीसरे चरण में बुध हो तो व्यक्ति सरकारी सेवा में प्रवेश करता है। 30-31 वर्ष में उसको किसी हादसे का सामना भी करना पड़ता है। उसका जीवन स्थिर सम्पन्नता से पूर्ण तथा संतान-दाम्पत्य सुख विशेष से भरा होता है। वह गुप्त रूप से पर-स्त्री गमन भी करता है, जिसकी भनक उसकी पत्नी तक को नहीं लगती। __चौथे चरण में बुध हो तो व्यक्ति व्यसनी और धूर्त स्वभाव का होता है। वह फालतू खर्च के कारण कर्जदार रहता है। अपने परिवार की संपत्ति को वह धीरे-धीरे बेच डालता। है। 28वें वर्ष के बाद अगर ग्रहयोग अच्छे हों तो उसके पास सीमित मात्रा में धन आता रहता है। 24. शतभिषा नक्षत्र सम्बन्धी कार्य एवं व्यवसाय शतभिषा नक्षत्र के किसी भी चरण में जन्म हो, राशि कुन, मशीश शनि एवं नक्षत्र स्वामी राहु है। इस नक्षत्र में जन्म हुआ है तो आप वैज्ञानिक, जादूगर, नाविक, कम्प्यूटर, इंजीनियर, खगोल शास्त्री, पुरानी वस्तुओं का व्यापारी, कबाड़ी, मनोवैज्ञानिक, परा- मनोविज्ञान, इतिहास, स्टॉक एक्सचेंज, जनगणना विभाग, अनुवादक, पांडुलिपि संशोधक, कैमिस्ट, फोटोग्राफी, प्रयोगशाला सहायक, सेन्सर, जेलर, सांख्यकी विभाग, तकनीशियन, शेयर बाजार, नक्शानवीस, विज्ञान, भौतिकी, विद्युत, अनु विद्युत, वायु यातायात, चर्म उद्योग, राशन विधाग, दुभाषिया, गुप्त विद्या सम्बन्धी कार्यों को करके सफलता सहित अपना जीवनयापन कर सकते हैं।

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