ज्वर नाशक मंत्र यंत्र तंत्र
[ज्वर नाशक मन्त्र-१]
मनसामेदाम नवमे कंपटी बसे कपाल हावके भले हनुमंत की
आन सीसी जंग पाठान बिचान मंत्र शांती गायत्री नाम सेन देवता
मोहज्ञा राजा तिजाट एक ज्वरा तिन ज्वरा चारि ज्वरा पांच ज्वरा सातज्वरा जोर है तो राजा अजयपाल का चक्र बहे तैंतीस कोटि देवता मेरेमंत्र की शक्ति से चलें चोंचन खंड में जाए चीर न मारे वाज न खाएक्षणे बाण क्षणे दक्षिण क्षणे आसे होर अचन सोरो स्मरिरे कायाविख्यात होर ।
उक्त मन्त्र से सात बार झाड़ने से कैसा भी ज्वर क्यों न हो वह छू होजाता है और रोगी स्वस्थ हो जाता है।
[ज्वर नाशक मन्त्र-૨]
श्री कृष्ण बलभद्रश्च प्रद्युम्न अनिरुद्द्ध च। ऊषा स्मरण मात्रेणज्वर व्याधि विमुच्यते ।।
उक्त मन्त्र को कोरे कागज पर लिखकर धूप-दीपक दिखाकर गले मेंपहन लेने से ज्वर दूर हो जाता है। उक्त मन्त्र का केवल जप करते रहने से भीज्वर दूर हो जाता है।
[ज्वर नाशक मन्त्र-३]
ॐ नमो भगवते रुद्राय शूल पाणये ।
पिशाचाधिपतये आवेशय कृष्ण पिंगल फट् स्वाहा ।।
उक्त मन्त्र को कोरे कागज पर कोयले से लिखकर दाहिनी बांह में पहनलेने से रोज आने वाला ज्वर दूर हो जाता है।
[ज्वर नाशक मन्त्र-४]
ॐ नमो अजयपाल की दुहाई जो ज्वर रहे अमुक पिंडे तोमहादेव की दुहाई फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा ।
जो रोगी ज्वर से, य्सित हो उसे उक्त मन्त्र से सात बार झाड़ा देने सेज्वर दूर हो जाता है और रोगी स्वस्थ हो जाता है।
[ज्वर नाशक मन्त्र-५]
कारी कुकरी सात पिल्ला ब्याई सातों दूध पिआई जिआईबाघ थन इलोकांश्च लाय के मंत्रे तीनों जाई ।
रोगी को एकटक देखते हुए उक्त मन्त्र को इक्कीस बार बोलकर फूंकमारने से रोगी को हर तीसरे दिन आने वाला बुखार खत्म हो जाता है।
[ज्वर नाशक मन्त्र-६]
ॐ नमो कामरूप देश कामाख्या देवी जहाँ बसे इस्माईलजोगी इस्माईल जोगी के तीन पुत्री एक तोड़़े एक पिछोड़़े एक तिजोरीतोड़े।
जिसे तिजारी ज्वर आता हो साधक उस रोगी को अपने सामने खड़ाकरके रोगीं के शरीर को अपने हाथ से पकड़़े जहाँ शीत लगती हो। त्पश्चात्साधक उक्त मन्त्र से इक्कीस बार रोगी को झाड़े तो तिजारी ज्वर ठीक हो जाता है।
[ज्वर नाशक तन्त्र]
० शनिवार को प्रातःकाल बबूल की सफेद जड़ को सफेद धागे मेंलपेट कर हाथ पर बाँधने से ज्वर उत्तर जाता है।
मिलता है।0 मकोय की जड़ को कान में बाँधने से भी ज्वर में आराम
0जिस व्यक्ति को केवल रात्रि में ही ज्वर होता हो उसके सिर परकमल की जड़ रख देने से शीघ्र आराम मिलता है।
सफेद जयंती की जड़़ को सिर पर धारण करने से किसी भी प्रकारका ज्वर नष्ट हो जाता है।
० सात दिनों तक काली तुलसी की पत्तियों की माला गले में धारणकरने से ज्वर उतर जाता है।
०रोगी के पैर के नाखून से सिर बराबर लाल सूती धागा नापकर उसमें नील की जड़ लपेट कर कमर में -बाँधने से तिजारी ज्वर उतरजाता है।
०ऐसी कन्या जिसको माहवारी प्रारम्भ न हुई हो यदि रोगी के दाहिनेहाथ में सफेद सूत में लिपटी सहदेई की जड़ बाँध दें तो भूत के भय सेउत्पन्न ज्वर नष्ट हो जाता है।
० लहसुन की एक गाँठ को पीसकर काले कपड़े में बाँध लें। वहकपड़ा रोगी के बाएँ पैर के अंगूठे में बाँध दें। इससे ज्वर उतर जाता है।ज्वर उतरने के बाद लहसुन बँधा कपड़ा खोलकर किसी चौराहे पर फेंक देनाचाहिए।
०कमल की टहनी के छोटे-छोटे टुकड़े करके किसी धागे में पिरोलें। उसे माला की तरह गले में पहनने से सन्निपात ज्वर ठीक हो जाता है।