सम्पूर्ण वास्तुशास्त्र फेंग्शुई र्दंशन
सम्पूर्ण वास्तुशास्त्र फेंग्शुई र्दंशन
घर में नहीं होगी धन-धान्य की कमी
खिड़कियों की आवाज अशुभ क्यों? वास्तु के अनुसार घर में खिड़कियां होना आवश्यक है। इनसे नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकलती है तथा सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती है।
घर की सुंदरता में भी खिड़कियां का अहम योगदान होता है। घर में खिड़कियां बनवाते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए-
1- खिड़कियां खोलते व बंद करते समय आवाज नहीं आवाज नहीं होना चाहिए। इसका प्रभाव घर की सुख-शांति पर पड़ता है। इससे कारण परिवार के सदस्यों का ध्यान भंग होता है।
2- खिड़कियों की संख्या सम हो किंतु दस के गुणक में जैसे- 10, 20, 30 या 40 न हो।
3- किसी कमरे की किसी एक दीवार में जहां तक हो सके एक से अधिक खिड़कियां न रखें। कमरे की साइज के अनुपात में खिड़की बड़ी ही बनवाएं।
4- अधिक ऑक्सीजन एवं ताजा हवा के लिए अपेक्षित है कि प्रत्येक लिविंग रूम में कम से कम दो खिड़कियां व दो रोशनदान अवश्य हों।
5- खिड़कियां ऊंचे स्थानों पर हों ताकि शुद्ध हवा आसानी से घर में प्रवेश कर सके और अशुद्ध हवा दूसरी खिड़की से बाहर निकल सके।
समृद्धि लेकर आते हैं तीन सिक्के
फेंगशुई का चलन दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है इसका प्रमुख कारण है कि इसके आसान टिप्स। यह टिप्स इतने सरल होते हैं जो आसानी से किए जा सकते हैं।
इन्हीं में से कुछ प्रमुख फेंगशुई टिप्स नीचे दिए गए हैं-
1- फेंगशुई के अनुसार घर के दरवाजे में लाल रिबन से बंधे सिक्के लटकाने से घर में धन और समृद्धि आती है। अपने घर के दरवाजे के हैंडल में सिक्के लटकाना घर में संपत्ति व सौभाग्य लाने का सर्वोत्तम मार्ग है। सिर्फ तीन सिक्के ही लगाएं और वह भी दरवाजे के अंदर की ओर। बाहर सिक्के लगाने से लक्ष्मी द्वार पर ही ठहर जाती है। आप तीन पुराने चीनी सिक्कों को लाल रंग के धागे अथवा रिबन में बांध कर अपने घर के हैंडल में लटका सकते हैं। इससे घर के सभी लोग लाभान्वित होंगे। ये सिक्के दरवाजे के अंदर की ओर लटकाने चाहिए न कि बाहर की ओर। केवल मुख्य द्वार के हैंडल में सिक्के लटकाएं।
2- यदि सोते समय शरीर का कोई अंग दर्पण में दिखाई देता है, तो उस अंग में पीड़ा होने लगती है। इस तरह सोने से बचें।
3- सोते समय सिर या पैर किसी भी दरवाजे की ठीक सीध में नहीं होने चाहिए। इससे मानसिक दबाव बनता है।
4- घर के सदस्यों की दीर्घायु के लिए स्फटिक का बना हुआ एक कछुआ घर में पूर्व दिशा में रखें।
5- मछलियों के जोड़े को घर में लटकाना बहुत शुभ एवं सौभाग्यदायक माना जाता है। इनके प्रभाव से घर में धन की बरकत और कार्यक्षेत्र में उन्नति होती है। इन्हें बृहस्पतिवार अथवा शुक्रवार को घर में टांगना शुभ होता है।
छत पर नहीं रखें कबाड़ा, क्यों?
वास्तु शास्त्र हमेशा इस बात पर अधिक ध्यान देता है कि घर में किसी भी तरह से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश न हो। नकारात्मक ऊर्जा परिवार के सदस्यों को प्रभावित करती है, जिसके कई दुष्परिणाम हो सकते हैं।
नीचे कुछ वास्तु टिप्स दिए गए हैं जिनसे आप घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक ऊर्जा को रोक सकते हैं-
1- घर की छत पर कबाड़ा अथवा फालतू सामान न रखें। यदि जरुरी हो तो एक कोने में रखें। कबाड़ा व फालतू सामान रखने से परिवार के सदस्यों के मन-मस्तिष्क पर दबाव पड़ता है। इससे पितृ दोष भी लगता है।
2- घर जितना प्राकृतिक लगेगा उतना ही उसका आभामंडल उन्नत होगा। घर का प्राकृतिक रूप देने के लिए आस-पास पेड़-पौधे, चारों ओर खुला हुआ स्थान, दूर से दिखने वाली दीवारों पर प्राकृतिक पत्थर, गमले आदि का उपयोग करें।
3- घर की आभा को कायम रखने के लिए जरुरी है कि घर का प्लास्टर उखड़ा हुआ न हो। यदि कहीं से थोड़ा सा भी प्लास्टर उखड़ जाए तो तुरंत उसे दुरुस्त करवाएं।
4- घर में कलर करवाते समय इस बात का ध्यान रखें कि पेंट एक सा हो। शेड एक से अधिक हो सकते हैं लेकिन शेड्स का तालमेल ठीक होना चाहिए।
5- घर के आस-पास कोई गंदा नाला, गंदा तालाब, शमशान घाट या कब्रिस्तान नहीं होना चाहिए। इससे भी आभामंडल को अधिक फर्क पड़ता है।6- घर कितना ही पुराना हो, समय-समय पर उसकी मरम्मत, रंग-रोगन आदि कार्य करवाते रहना चाहिए ताकि नयापन व ताजगी बनी रहे।
बंद घड़ी घर में नहीं रखें, क्यों?
फेंगशुई वास्तु शास्त्र का ही एक रूप है। फेंगशुई से मिलती-जुलती कई बातें भारतीय वास्तु शास्त्र में भी है।
फेंगशुई बिना तोड़-फोड़ आपके घर को वास्तु सम्मत बना देता है। फेंगशुई की कुछ टिप्स नीचें दी गई हैं।
इनसे आप सुख-समृद्धि पा सकते हैं-
1- घर में जो घडिय़ां बंद पड़ी हों, उन्हें या तो घर से हटा दें या चालू करें। बंद घडिय़ां हानिकारक होती हैं। इनसे नकारात्मक ऊर्जा निकलती है।
2- फेंगशुई के अनुसार घर के पूर्वोत्तर कोण में तालाब या फव्वारा शुभ होता है। इसके पानी का बहाव घर की ओर होना चाहिए न कि बाहर की ओर।
3- घर को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त रखने के लिए पूर्व दिशा में मिट्टी के एक छोटे से पात्र में नमक भर कर रखें और हर चौबीस घंटे के बाद नमक बदल दें।
4- अपने ऑफिस में पूर्व दिशा में लकड़ी से बनी ड्रैगन की एक मूर्ति रखें। इससे ऊर्जा एवं उत्साह प्राप्त होगा।
5- घर या दफ्तर में झाड़ू का जब इस्तेमाल न हो रहा हो, तब उसे नजऱों के सामने से हटाकर रखें।
6- यदि घर का मुख्य द्वार उत्तर, उत्तर-पश्चिम या पश्चिम में हो तो उसके ऊपर बाहर की तरफ घोड़े की नाल लगा देना चाहिए। इससे सुरक्षा एवं सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
7- कमरों में पूरे फर्श को घेरते हुए कालीन आदि बिछाने से लाभदायक ऊर्जा का प्रवाह रुकता है।
फेंगशुई से मालामाल होगी दुकान
कारोबार की सफलता कई कारणों पर निर्भर करती है जिनमें से वास्तु भी महत्वपूर्ण है। फेंगशुई के कुछ सिद्धांतों का पालन करने से न सिर्फ कारोबार में सफलता मिलती है अपितु यश व मान-सम्मान भी मिलता है।
व्यवसाय में सफल होने के लिए फेंगसुई के इन सिद्धांतों का पालन करें-
1. दुकान का दरवाजा बड़ा होना चाहिए और वह किसी संकरे गलियारे में नहीं खुलना चाहिए।
2. दरवाजे के आगे कोई स्तम्भ, बिजली का खम्भा, वृक्ष, खंडहर, सीढियां, किसी भवन या दुकान का धारदार कोना नहीं होना चाहिए।
3 यदि आपकी दुकान किसी तिराहे या चौराहे पर हो तो यह अच्छा है। दुकान के बाहर एक दर्पण अवश्य लगाएं।
4. दुकान का कैश काउंटर दरवाजे के साथ लगता हुआ और उसके समानांतर नहीं होना चाहिए।
5. दुकान के कैश काउंटर के उपर लटकती बीम नहीं होनी चाहिए।
6. दुकान के अंदर दीवारों का रंग फेंगशुई के अनुरूप हो।
बिना तोड़-फोड़ कैसे मिटाएं वास्तु दोष
बिना सोचे-विचारे मकान बनवाने पर उसमें कई वास्तु दोष आ जाते हैं। जिनका असर हमारे जीवन पर पड़ता है।
वास्तु शास्त्रियों के अनुसार कुछ मामूली परिवर्तन कर इन वास्तु दोषों को समाप्त किया जा सकता है। यह उपाय निम्न हैं-
1- यदि आपके घर की छत पर व्यर्थ का सामान पड़ा हो तो उसे वहां से हटा दें।
2- प्लास्टर आदि उखड़ गया हो तो उसकी तत्काल मरम्मत करवा दें।
3- यदि आपकी रसोई के गेट के ठीक सामने बाथरूम का गेट हो तो यह नकारात्मक ऊर्जा देगा। इस दोष से बचने के लिए बाथरूम तथा रसोई के बीच में एक कपड़े का पर्दा या किसी अन्य प्रकार का पार्टीशन खड़ा कर सकते हैं ताकि रसोई से बाथरूम दिखाई न दे।
4- यदि घर के दरवाजे व खिड़कियां खुलने व बंद होने पर आवाज करते हैं तो उनकी आवश्यक मरम्मत करवाएं।
5- आग्नेय कोण में रसोई न होने पर गैस चूल्हे को रसोई के आग्नेय कोण में रखकर दोष का निवारण कर सकते हैं।
और यह भी नहीं सकते तो आग्नेय कोण में एक जीरो वाट का बल्ब जलाकर भी इस दोष से बचा जा सकता है।
6- यदि ईशान में बोरिंग या अण्डर ग्राउंड टैंक आदि न बनवा सके हों तो ईशान में एक सादा जल लगवा कर दोष का निवारण कर सकते हैं।
7- यदि भूखण्ड चौकोर नहीं हो तो यह अवश्य देख लें कि लंबाई, चौड़ाई की दुगुनी से अधिक न हो। यदि लंबाई, चौड़ाई से दुगुनी हो तो अतिरिक्त भूभाग पर स्वतंत्र इकाई का निर्माण करवाया जा सकता है।
बेडरूम बढ़ाए दाम्पत्य सुख
वास्तु शास्त्रियों का मानना है कि वास्तु में न सिर्फ सुख-समृद्धि के अपितु सुखद दाम्पत्य के सूत्र भी छिपे हैं। दाम्पत्य जीवन में बेडरूम काफी खास होता है। यदि बेडरूम में नीचे लिखे वास्तु नियमों का पालन किया जाए तो दाम्पत्य जीवन कहीं अधिक सुखमय हो सकता है।
1-यदि आप दाम्पत्य जीवन में खुशी चाहते हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बेडरूम शांत, ठंड़ा, हवादार व बिना दबाव वाला होना चाहिए। बेडरूम में बेकार सामान नहीं होना चाहिए।
2-बेडरूम में निजता कायम रहे। इसके लिए ध्यान रखें कि बेडरूम की खिड़की दूसरे कमरे में न खुले। शयन कक्ष की आवाज बाहर नहीं आना चाहिए। इससे दाम्पत्य जीवन में मिठास बढ़ती है।
3-शयन कक्ष में पेंट हल्का व अच्छा हो। दीवारों पर चित्र कम हों, चित्र मोहक होना चाहिए।
4-बेडरूम में पलंग आवाज करने वाला न हो तथा सही दिशा में रखा हो। सोते समय सिर दक्षिण की ओर होना चाहिए। आरामदायक व भरपूर नींद से दाम्पत्य जीवन अधिक सुखद बनता है।
5-बाथरूम बेडरूम से लगा हुआ होना चाहिए। बाथरूम का दरवाजा बेडरूम में खुलता हो तो उसे बंद रखना चाहिए। उस पर परदा भी डाल सकते हैं।
6-बेडरूम में पेयजल की सुविधा होना चाहिए ताकि रात को उठकर बाहर न जाना पड़े।
7- बेडरूम में प्रकाश की उचित व्यवस्था होना चाहिए। सोते समय जीरो वॉट का बल्ब जलाना चाहिए। रोशनी सीधी पलंग पर नहीं पडऩी चाहिए।
फेंगशुई : खुशहाली का प्रतीक है कछुआ
फेंगशुई में कछुए को शुभ माना जाता है। इसे घर में रखने से कामयाबी के साथ धन-दौलत और खुशहाली भी आती है। इसे अपने ऑफिस या मकान की उत्तर दिखा में रखें। याद रहे कछुए को जब भी रखें तो उसका चेहरा अंदर की ओर होना चाहिए तभी दिशा शुभ होगी। इसे कभी जोड़े में न रखें।
ड्रेगन मुंह वाला कछुआ सौभाग्य का प्रतीक है। अत: इसे शयनकक्ष में न रखें। इसको बैठक हॉल में रखें। अगर यह पूर्व या उत्तर दिशा में रखा जाए तो बहुत ही बेहतर है।
फेंगुशई से वास्तु दोष निवारण में दूसरा नंबर कछुआ का आता है। ऐसे में आपके घर में अगर कछुआ उपस्थित है तो समझिए कि आपकी बीमारी और शत्रुओं से छुट्टी हो गई है।
परिवार का फोटो क्यों लगाएं घर में?
लकड़ी तथा उससे बनी वस्तुओं का हमारे जीवन में काफी महत्व है।
फेंगशुई के अनुसार लकड़ी की वस्तुएं घर या दफ्तर के पूर्व दिशा में स्थापित करने से यह दिशा ऊर्जावान होती है।
यदि आप भी अपने घर और दुकान में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना चाहते हैं तो नीचे लिखी लकड़ी की वस्तुएं रखकर इन्हें सुधार सकते हैं-
1- यदि घर, कार्यालय, शो-रूम आदि के पूर्वी हिस्से में लकड़ी का फर्नीचर या लकड़ी से निर्मित वस्तुएं अलमारी, शो पीस, पेड़-पौधे या फ्रेम जड़े हुए चित्र लगाए जाएं, तो अपेक्षित लाभ होता है।
2- परिवार की खुशहाली और स्वास्थ्य के लिए पूरे परिवार का फोटो लकड़ी के फ्रेम में जड़वाकर घर की पूर्वी दीवार पर लटकाएं।
3- घर की बैठक में जहां घर के सदस्य आमतौर पर एकत्र होते हैं, वहां बांस का पौधा लगाना चाहिए। पौधे को बैठक के पूर्वी कोने में गमले में रखें।
4- नुकीले औजार जैसे- कैंची, चाकू आदि कभी भी इस प्रकार नहीं रखे जाने चाहिए कि उनका नुकीला बाहर की ओर हो।
5- शयन कक्ष में पौधा नहीं रखना चाहिए, किन्तु बीमार व्यक्ति के कमरे में ताजे फूल रखने चाहिए। इन फूलों को रात को कमरे से हटा दें।
6- मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए चंदन आदि से बनी अगरबत्ती जलाएं। इससे मानसिक बेचैनी कम होती है।
7- तीन हरे पौधे मिट्टी के बर्तनों में घर के अंदर पूर्व दिशा में रखें। बोनसाई व कैक्टस न लगाएं क्योंकि बोनसाइ प्रगति में बाधक एवं कैक्टस हानिकारक होता है।
बेडरूम में रखें गुलदस्ता, क्यों?
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का हर हिस्सा व्यवस्थित होना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होता है। वास्तु शास्त्र में घर के रंग-रोगन, साज-सज्जा पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। अगर आप भी अपने घर को वास्तु सम्मत बनाना चाहते हैं तो नीचे लिखे वास्तु टिप्स का उपयोग करें-
1- अगर आप अपना दाम्पत्य जीवन सुखमय बनाना चाहते हैं तो बेडरूम में फ्लावर पॉट अवश्य रखें लेकिन उसकी रोजाना सफाई अवश्य करें। सफाई नहीं करने से दाम्पत्य जीवन में खटास आ सकती है।
2- शयन कक्ष बहुत खास जगह होती है। यहां आप कपल फोटो लगा सकते हैं लेकिन पैरों की ओर नहीं लगाएं।
3- बेडरूम में हल्की व सुंदर लाइट व्यवस्था होनी चाहिए।
4- जहां तक हो सके बाहरी दीवारों पर वाटर प्रुफ कलर का इस्तेमाल करें।
5- घर के बाहर खुले स्थानों पर सीमेंटेड गमलों में फूल या बेलें लगाएं।
6- रसोई के हर कोने में प्रकाश की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
7- पेंटिग्स दीवारों का खालीपन दूर करती है। बेडरूम व भोजन कक्ष में हल्के रंगों वाली पेंटिग्स लगाएं।
क्या स्वयं का मकान बना पाएंगे?
सभी का सपना होता है कि उसका अपना एक सुंदर घर हो, जिसमें तमाम सुख-सुविधाएं भी हो। वास्तु शास्त्र में ऐसे लोगों की जन्म कुण्डली के बारे में भी उल्लेख मिलता है जिनके भाग्य में स्वश्रम से या अन्य किसी माध्यम से भवन प्राप्ति का योग होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार जो व्यक्ति स्वपरिश्रम से भवन प्राप्त करते हैं उनकी कुण्डली में यह योग बनते हैं-
1- भूमि का ग्रह मंगल है। जन्मपत्री का चौथा भाव भूमि व भवन का है। वस्तुत: चौथे भाव के स्वामी (चतुर्थेश) का केंद्र त्रिकोण में होना उत्तम भवन प्राप्ति का योग है। मंगल और चतुर्थेश लग्नेश व नवमेश का बली होना या शुभग्रहों से युत या दुष्ट होना भवन प्राप्ति का अच्छा संकेत है।
2- जन्म कुण्डली के चौथे भाव का स्वामी किसी शुभ ग्रह के साथ युति करके 1, 4, 5, 7, 9 व 10 वें भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति को स्वश्रम से निर्मित उत्तम सुख-सुविधाओं ये युक्त भवन प्राप्त होता है।
3- जन्मकुण्डली के चौथे भाव का स्वामी (चतुर्थेश) पहले (लग्न) भाव में हो और पहले (लग्न) भाव का स्वामी (लग्नेश) चौथे भाव में हो तो भी ऐसा व्यक्ति स्व पराक्रम व पुरुषार्थ से अपना घर(भवन) बनाता है।
कम बजट में कैसे बनाएं घर?
दिनोंदिन बढ़ती मंहगाई का असर सीधे-सीधे मकान की लागत पर हो रहा है। इससे नया मकान बनवाने वालों को अपनी जेबें कुछ ज्यादा ही ढीली करनी पड़ रही है।
अगर नीचे लिखे बातों पर ध्यान दें तो कम लागत में भी मजबूत व सुंदर घर बन सकता है-
1- गृह निर्माण करवाने से पहले घर का एक वास्तु सम्मत नक्शा बनवा लें और उसके अनुसार निर्माण करवाएं ताकि अनावश्यक तोड़-फोड़ न करनी पड़े।
2- विवाद ग्रस्त अथवा उबड़-खाबड़ भूखण्ड नहीं खरीदना चाहिए नहीं तो इसे व्यवस्थित करवाने में ही काफी पैसा खर्च हो जाएगा।
3- भूखण्ड के आस-पास यदि कोई कोई खाली कमरा हो तो उसे किराए पर लेकर उसमें निर्माण सामग्री रखवा सकते हैं। इससे चौकीदार का खर्चा बचेगा।
4- निर्माण आरंभ करने से पूर्व भूखण्ड पर निर्माण सामग्री पर्याप्त मात्रा में खरीद लें ताकि निर्माण कार्य में व्यवधान न हो। एक साथ खरीदने पर सामान सस्ता भी पड़ेगा।
5- नींव आवश्यकतानुसार ही खुदवाएं। अधिक गहरी नींव खुदवाने से भरने में खर्चा ही बढ़ेगा। सामान्यत: चार-पांच फुट गहरी नींव पर्याप्त होती है।
6- बाउंड्री वॉल पर अधिक महंगी रैलिंग न लगाएं। पत्थर, मार्बल व लोहे की जाली मंहगी होती है। सीमेंट की जाली अपेक्षाकृत सस्ती होती है।
7- यदि कारीगर अधिक लग रहे हों तो मसाला तैयार करने के लिए मिक्सर मशीन का उपयोग करें। मशीन से मसाला जल्दी व संतुलित बनता है तथा श्रम, समय व पैसे की बचत भी होती है।
8- शेल्फ व खिड़कियों में नीचे-ऊपर सस्ते पत्थर लगवाना चाहिए। सैण्ड स्टोन अन्य पत्थरों से काफी सस्ता पड़ता है।
9- शीशम व सागवान की लकड़ी की जगह बबूल की लकड़ी का उपयोग किया जा सकता है। यह सस्ती होने के साथ मजबूत भी होती है।
10- बिजली फिटिंग अण्डर ग्राउण्ड ही करवाएं। यह अपेक्षाकृत सस्ती पड़ती है।
बेडरूम में न हो बाथरूम, क्यों
आधुनिक भवनों में बाथरूम एक आवश्यक व महत्वपूर्ण अंग है। बाथरूम बनवाते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए-
1- वास्तु के अनुसार बेडरूम में बाथरूम नहीं होना चाहिए क्योंकि दोनों की ऊर्जाओं का परस्पर आदान-प्रदान स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता ।
2- बाथरूम घर के नैऋत्य कोण में बनवाना चाहिए। अगर संभव न हो तो वायव्य कोण में भी बाथरूम बनवाया जा सकता है।
3- बाथरूम में पानी का बहाव उत्तर की ओर रखें।
4- गीजर आदि विद्युत उपकरण बाथरूम के आग्नेय कोण में लगाएं।
5- बाथरूम में एक बड़ी खिड़की व एक्जॉस्ट फैन के लिए रोशनदान अवश्य हो।
6- बाथरूम में गहरे रंग की टाइल्स न लगाएं। हमेशा हल्के रंग की टाइल्स का उपयोग करें।
7- यदि बाथरूम का दरवाजा बेडरूम में ही खुलता हो तो उसे सदैव बंद रखना चाहिए तथा उसके आगे पर्दा लगा देना चाहिए।
ऐसे मिटाएं ऑफिस का वास्तु दोष
ऑफिस वह स्थान होता है जहां अनेक कर्मचारी एक ही स्थान पर मिलकर एक-दूसरे से सामंजस्य बनाकर कार्य करते हैं। यदि ऑफिस में वास्तु दोष हो तो उसके कर्मचारियों तथा कंपनी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ऑफिस के वास्तु दोषों को नीचे लिखे उपायों से दूर किया जा सकता है-
1- कार्यालय के मुख्य प्रभारी का कक्ष सबसे पहले नहीं होना चाहिए। प्रवेश द्वार के समीप किसी ऐसे सहायक का कक्ष हो जो आगन्तुकों को जानकारी उपलब्ध करवा सके।
2- कार्यालय में किसी भी कमरे के दरवाजे के ठीक सामने टेबल नहीं होना चाहिए।
3- ऑफिस में हरे या गहरे रंग का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यह रंग रोशनी अधिक खाता है। सफेद, क्रीम या पीला जैसे हल्के रंग का उपयोग करना चाहिए।
4- कार्यालय में पानी की व्यवस्था ईशान कोण में करनी चाहिए। ईशान में पानी तब ही शुभ होगा, जब उसका संबंध जमीन से हो। यदि धरातल से ऊंचे स्थान पर पानी रखना हो तो अपनी सुविधानुसार किसी भी स्थान पर रख सकते हैं।
5- कैशियर को ऐसे स्थान पर नहीं बैठाना चाहिए, जहां से उसे कार्य करते हुए अधिकाधिक कर्मचारी देखें। 6
– कुबेर का वास उत्तर दिशा में माना गया है इसलिए जहां तक संभव हो कैशियर को उत्तर दिशा में ही बैठाएं।
हरियाली से वास्तु दोष निवारण
वास्तु शास्त्र में हरियाली को खास महत्व दिया गया है। इसके अनुसार यदि घर के आस-पास कोई बगीचा हो तो यह बहुत से दोषों का निवारण स्वतः ही हो जाता है। सामान्य वास्तु दोषों को मिटाने के लिए आप भी अपने घर में बगीचा बना सकते हैं। यह हरियाली आपको प्रकृति के बेहद नजदीक होने का अनुभव देगी।
घर में बगीचा बनाते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें-
1- घर में बगीचा बनाने केलिए सबसे पहले उसकी जगह तय कर लें।
2- गार्डन घर के हिसाब से बनाएं। यानि बड़े घर के हिसाब से बड़ा व छोटे घर के हिसाब से छोटा। इससे घर का लुक अच्छा लगेगा।
3- अब सीजन के हिसाब से अपने मन पसंद फूल चुन लीजिए।
4- गार्डन को अपनी इच्छानुसार 2 या 3 भागों में भी बांट सकते हैं।
5- इन भाग में अलग-अलग तरह के सुंदर फूलों के पौधे लगाइए।
6- गार्डन के बीच में गुलमोहर, नीम या आम जैसा बड़ा पेड़ भी लगा सकते हैं। यह पेड़ स्वास्थ के लिए अच्छे तो होते ही हैं, साथ ही साथ गर्मियों में ताजी हवा के लिए इससे बढिय़ा कोई उपाय नहीं है।
7- क्यारियों की सुंदरता बढ़ाने के लिए स्टार, सर्कल या कोई और शेप भी दे सकते हैं।
8- बीजों को यूं ही नहीं बिखेरना चाहिए। बल्कि इन्हें ठीक से लगाइए जिससे पौधे बड़े होने पर व्यवस्थित और सुंदर दिखे। 9- हमेशा पौधों के बीच परस्पर दूरी अवश्य छोड़ें। इससे पौधों की जड़ों को फैलने में आसानी रहेगी और उनकी सुंदरता बनी रहेगी।
दुकान के लिए उपयोगी वास्तु टिप्स
दुकान के लिए उपयोगी टिप्स वास्तु के सिद्धांत सिर्फ घर को ही नहीं अपितु दुकान आदि को भी प्रभावित करते हैं। दुकान में भी वास्तु का विशेष महत्व है। यदि दुकान वास्तु सम्मत हो तो शुभ साबित होती है।
इसलिए दुकान में नीचे लिखे वास्तु नियमों का पालन करना चाहिए-
1- दुकान का ईशान कोण खाली या हल्का रखें और स्वच्छता बनाएं रखें।
2- दुकान में पीने के पानी की व्यवस्था ईशान कोण, उत्तर या पूर्व में रखें।
3- भारी सामान दक्षिण या पश्चिम में रखें। 4- पूजा स्थल ईशान, उत्तर या पूर्व में बनाएं।
5- दुकान में तराजू पश्चिमी या दक्षिणी दीवार के साथ रखें।
6- आलमारी, शो-केस, फर्नीचर आदि दक्षिण-पश्चिम या नैऋत्य में लगाएं।
7- पूर्वी व उत्तरी क्षेत्र ग्राहकों के आने-जाने के लिए खाली छोड़ें।
– दुकान में माल का स्टोर दक्षिण, पश्चिम या नैऋत्य में कर सकते हैं।
9- विद्युत उपकरण मीटर, स्विच बोर्ड, इनवर्टर आदि आग्नेय कोण में स्थापित करें।
10- दुकान के सामने कोई सीढ़ी, बिजली या फोन का खंबा अथवा पेड़ नहीं होना चाहिए।
वास्तु के सिद्धांत सिर्फ घर को ही नहीं अपितु दुकान आदि को भी प्रभावित करते हैं। दुकान में भी वास्तु का विशेष महत्व है। यदि दुकान वास्तु सम्मत हो तो शुभ साबित होती है।
इसलिए दुकान में नीचे लिखे वास्तु नियमों का पालन करना चाहिए—
1- दुकान का ईशान कोण खाली या हल्का रखें और स्वच्छता बनाएं रख
2- दुकान में पीने के पानी की व्यवस्था ईशान कोण, उत्तर या पूर्व में रखें।
3- भारी सामान दक्षिण या पश्चिम में रखें।
4- पूजा स्थल ईशान, उत्तर या पूर्व में बनाएं।
5- दुकान में तराजू पश्चिमी या दक्षिणी दीवार के साथ रखें।
6- आलमारी, शो-केस, फर्नीचर आदि दक्षिण-पश्चिम या नैऋत्य में लगाएं।
7- पूर्वी व उत्तरी क्षेत्र ग्राहकों के आने-जाने के लिए खाली छोड़ें।
8- दुकान में माल का स्टोर दक्षिण, पश्चिम या नैऋत्य में कर सकते हैं।
9- विद्युत उपकरण मीटर, स्विच बोर्ड, इनवर्टर आदि आग्नेय कोण में स्थापित करें।
10- दुकान के सामने कोई सीढ़ी, बिजली या फोन का खंबा अथवा पेड़ नहीं होना चाहिए।
घर में सीढिय़ां कैसी हों?
यदि मकान बहुमंजिला है तो उसमें सीढिय़ा अवश्य होती है। वर्तमान समय में डिजाइनर सीढिय़ों (लोहे की या घुमावदार) का चलन भी है। सीढिय़ां भी घर के वास्तु को प्रभावित करती हैं।
मकान में सीढिय़ां बनवाते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें—–
1- वास्तु सम्मत सीढिय़ां भवन के पूर्व या दक्षिण दिशा में बनवाई जानी चाहिए।
2- सीढिय़ों का उतार-चढ़ाव ढलान के अनुसार ही होना चाहिए। यानि सीढिय़ों पर पूर्व से पश्चिम या उत्तर से दक्षिण की तरफ चढ़ाई हो सकती है।
3- यदि सीढिय़ां बीच में घुमावदार हों तो यह घुमाव चढ़ते समय क्लॉकवाइज यानि बाएं से दाएं होनी चाहिए। चूंकि पृथ्वी भी इसी दिशा में घूमती है और चढ़ते समय एनर्जी भी अधिक खर्च होती है इसलिए क्लॉकवाइज घूमते हुए ही चढऩा चाहिए ताकि अतिरिक्त ऊर्जा न लगानी पड़े।
4- चूंकि उतरते समय कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए एण्टी-क्लॉकवाइज घूमते हुए भी उतरा जा सकता है। बड़े भवनों में नीचे से दो तरफ से सीढिय़ां चढ़ाई जाती हैं और घुमाव के स्थान पर मिलाते हुए ऊपर ही कर दी जाती है अथवा नीचे से एक सीढ़ी चढ़ाते हुए घुमाव के स्थान पर उस दो स्थानों पर उसे दो भागों में दो तरफ चढ़ा दी जाती है, इससे चढ़ते व उतरते समय क्लॉक वाइज घूमा जा सकता है।
5- यदि सीढिय़ां बिल्कुल सीधी हैं, बीच में कोई घुमाव नहीं है तब भी छत पर प्रवेश करते समय घड़ी की सूइयों की दिशा में ही दरवाजा होना चाहिए ताकि छत के कमरे में प्रवेश करते समय क्लॉकवाइज घूमना पड़े। एण्टी-क्लॉकवाइज घुमाव वाला दरवाजा न रखें। यदि सीढिय़ां सीधे ही छत के कमरे में प्रवेश करती हों तब किसी परिवर्तन की आवश्यकता नहीं है।
6- भवन के मध्य भाग में कोई पिलर अथवा सीढिय़ां नहीं बनवाई जानी चाहिए।
क्या आसानी से मिलेगा मकान?
सभी का सपना होता है कि उसका एक सुंदर सा घर हो। इसके लिए वह दिन-रात मेहनत करता है। कई बार ऐसा भी होता है कि कोई जीवन भर मेहनत कर स्वयं का मकान नहीं बना पाता जबकि किसी को बिना मेहनत के ही कई मकान मिल जाते हैं। नीचे कुछ योग दिए गए हैं। जिनके भाग्य में यह योग होते हैं उन्हें सहजता के भवन की प्राप्ति होती है-
1- पहले व सातवें भाव का स्वामी पहले (लग्न) भाव में हो तथा चौथे भाव पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो व्यक्ति को बिना प्रयास के ही भवन प्राप्त हो जाता है।
2- जन्मकुण्डली के चौथे भाव का स्वामी उच्च, मूलत्रिकोण या स्वराशि में हो तथा नौवें भाव का स्वामी केंद्र (1, 4, 7, 10) में हो तो ऐसे जातक को सरलता से भवन की प्राप्ति हो जाती है।
3- जन्मकुण्डली के पहले और सातवें भाव का स्वामी पहले या चौथे भाव में हो और शुभ ग्रहों से युक्त हो, नौवें भाव का स्वामी केंद्र (1, 4, 7, 10) भाव में हो और चौथे भाव का स्वामी उच्च, मूल त्रिकोण या स्वराशि का हो तो ऐसा व्यक्ति अल्प प्रयास से अच्छा भवन प्राप्त कर लेता है। शुभ होता है घर के सामने बगीचा वास्तु ऐसा माध्यम है जिससे आप जान सकते हैं कि किस प्रकार आप अपने घर को सुखी व समृद्धशाली बना सकते हैं।
नीचे वास्तु सम्मत ऐसी ही जानकारी दी गई है जो आपके लिए उपयोगी होगी——
1- ऐसे मकान जिनके सामने एक बगीचा हो, भले ही वह छोटा हो, अच्छे माने जाते हैं, जिनके दरवाजे सीधे सड़क की ओर खुलते हों क्योंकि बगीचे का क्षेत्र प्राण के वेग के लिए अनुकूल माना जाता है। घर के सामने बगीचे में ऐसा पेड़ नहीं होना चाहिए, जो घर से ऊंचा हो।
2- वास्तु नियम के अनुसार हर दो घरों के बीच खाली जगह होना चाहिए। हालांकि भीड़भाड़ वाले शहर में कतारबद्ध मकान बनाना किफायती होता है लेकिन वास्तु के नियमों के अनुसार यह नुकसानदेय होता है क्योंकि यह प्रकाश, हवा और ब्रह्माण्डीय ऊर्जा के आगमन को रोकता है।
3- आमतौर पर उत्तर दिशा की ओर मुंह वाले कतारबद्ध घरों में तमाम अच्छे प्रभाव प्राप्त होते हैं जबकि दक्षिण दिशा की ओर मुंह वाले मकान बुरे प्रभावों को बुलावा देते हैं। हालांकि पूर्व और पश्चिम की ओर मुंह वाले कतारबद्ध मकान अनुकूल स्थिति में माने जाते हैं क्योंकि पश्चिम की ओर मुंह वाले मकान सामान्य ढंग के न्यूट्रल होते हैं।
4- पूर्व की ओर मुंह वाले घर लाभकारी होते हैं। कतार के आखिरी छोर वाले मकान लाभकारी हो सकते हैं यदि उनका दक्षिणी भाग किसी अन्य मकान से जुड़ा हो या पूरी तरह बंद हो। ऐसी स्थिति में जहां कतारबद्ध घर एक-दूसरे के सामने हों, वहां सीध में फाटक या दरवाजे लगाने से बचना चाहिए।
5- यह भी ध्यान रखना चाहिए कि दक्षिण की ओर मुंह वाले घर यदि सही तरीके से बनाए जाएं तो लाभकारी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
कैसी तस्वीर लगाएं घर में?
घरों में तस्वीर या चित्र लगाने से घर सुंदर दिखता है। परंतु बहुत कम ही लोग यह जानते हैं कि घर में लगाए गए चित्र का प्रभाव हमारे जीवन पर भी पड़ता है—–
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में श्रृंगार, हास्य व शांत रस उत्पन्न करने वाली तस्वीरें ही लगाई जानी चाहिए।
1- फल-फूल व हंसते हुए बच्चों की तस्वीरें जीवन शक्ति का प्रतीक है। उन्हें पूर्वी व उत्तरी दीवारों पर लगाएं।
2- लक्ष्मी व कुबेर की तस्वीरें भी उत्तर दिशा में लगानी चाहिए। ऐसा करने से धन लाभ होने की संभावना है।
3- पर्वत आदि प्राकृतिक दृश्यों को दक्षिण व पश्चिम में लगा सकते हैं।
4- नदियों-झरनों आदि की तस्वीरें उत्तरी व पूर्वी दिशा में लगा सकते हैं।
5- उजड़े शहर, खण्डहर, वीरान दृश्य, सूखी नदियां, सूखी झीलों, हिंसक युद्ध, अस्त्र-शस्त्र, महाभारत, बाघ, शेर, कौआ, उल्लू, भालू, चील, गिद्ध या रेगिस्तान का चित्र घर में नहीं लगाना चाहिए। इससे घर में अशांति फैलती है तथा परिवार के सदस्यों में मनमुटाव होता है।
घर में क्यों न लगाएं कांटेदार पौधे ?
भवन की सीमा में आने वाली प्रत्येक वस्तु घर के वास्तु को प्रभावित करती है। इसके कई नकारात्मक व सकारात्मक प्रभाव भी होते हैं। घर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए लगाए गए पेड़-पौधे भी घर के वास्तु को प्रभावित करते हैं।
घर में पौधे लगाते समय इन बातों का ध्यान अवश्य रखें-
1- वास्तु के अनुसार घर में कांटेदार व दूध वाले पौधे नहीं लगाना चाहिए। क्योंकि कांटे नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। गुलाब जैसे कांटेदार पौधे लगाए जा सकते हैं।
2- बोनसाई पौधे भी घर में तैयार नहीं करने चाहिए और न ही बाहर से लाकर लगाने चाहिए। बोनसाई पौधे घर वालों का विकास रोकते हैं।
3- घर या कार्यस्थल की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए ताजा फूल आवश्यक है। फूलों के गुलदस्ते ताजगी व सौभाग्य की वृद्धि करते हैं। मुरझाए फूल व पत्तियां नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करती हैं।
4- प्लास्टिक या रेशम के फूल भी घर में सजा सकते हैं किंतु इनकी साफ-सफाई समय पर होती रहनी चाहिए।
5- शयन कक्ष में पौधे नहीं लगाने चाहिएं। डाइनिंग व ड्रॉइंग रूम में गमले रखे जा सकते हैं।
6- यदि किसी दीवार में पीपल उग आए तो उसे पूजा करके हटाते हुए गमले में लगा देना चाहिए। पीपल को बृहस्पति गृह का कारक माना जाता है।
कैसी हो घर की बाउण्ड्री वॉल?
घर चाहे छोटा हो या बड़ा, गांव में हो या शहर में बाउण्ड्री वॉल यानि चारदीवारी अवश्य बनाई जाती है।
घर की बाउण्ड्री वॉल बनवाते समय इन बातों का ध्यान अवश्य रखें-
1- बाउण्ड्री की नींव तो गहरी ही खुदवाएं। नीचे से डेढ़ या दो फुट मोटी पत्थर की दीवार बनवाएं किंतु प्लींथ से ऊपर दीवार की चौड़ाई कम से कम रखें।
2- भवन निर्माण से पूर्व ही बाउण्ड्री वॉल की नींव भर देनी चाहिए ताकि नकारात्मक प्रभाव को भूखण्ड में आने से रोका जा सके। 3- आगे की बाउण्ड्री वॉल पर लोहे की, सीमेंट की अथवा पत्थर की रैलिंग लगवाई जा सकती है। बाउण्ड्री वॉल व रैलिंग का शिल्प भवन के शिल्प से मेल खाता हुआ होना चाहिए।
4- सामने की बाउण्ड्री वॉल की ऊंचाई अधिक नहीं रखनी चाहिए ताकि हवा व प्रकाश अवरुद्ध न हो सके।
5- चारदीवारी घर की सुरक्षा के साथ-साथ घर में अतिरिक्त ऊर्जा के प्रवाह को रोकने में भी मदद करती है।
6- चारदीवारी टूटी-फूटी न हो, टूट-फूट या प्लास्टर उखडऩे पर तुरंत मरम्मत करवा दें।
वास्तु: ऐसे होगी हर इच्छा पूरी
वास्तु शास्त्र के अनुसार हर मनोकामना पूर्ति के लिए भवन के अलग-अलग स्थान उत्तरदायी होते हैं।
अगर आप भी अपनी मनोकामनाएं पूरी करना चाहते हैं तो इन वास्तु नियमों का पालन अवश्य करें-
1- वास्तु शास्त्र के अनुसार वायव्य कोण वायुदेवता का स्थान है। अत: विवाह योग्य कन्या को वायव्य कोण( उत्तर-पश्चिम) में स्थित कमरा देना चाहिए। इससे उसका विवाह शीघ्र हो जाता है।
2- यदि आप स्थान परिवर्तन चाहते हैं तो भी वायव्य कोण के कमरे में रहना ठीक होता है। इससे शीघ्र ही स्थान परिवर्तन हो जाता है।
3- लेकिन अगर आप स्थान परिवर्तन नहीं चाहते हो तो वायव्य कोण में स्थित कमरे में नहीं रहना चाहिए इससे जीवन में अस्थिरता आ जाती है।
4- दक्षिण-पूर्व में स्थित कमरे में रहने वाला परिवार का सदस्य झगड़ालू प्रवृत्ति का हो जाता है तथा वह असंतुष्ट रहने लगता है। अत: इस स्थान पर कमरा न बनाकर किसी अन्य उपयोग में ले सकते हैं।
5- दक्षिण-पश्चिम में स्थित कमरा स्थायित्व प्रदान करता है। अत: यह गृह स्वामी के रहने का उपयुक्त स्थान होता है।
6- उत्तर-पूर्व के कमरे में रहने वाले परिवार के सदस्य का स्वास्थ्य खराब रहता है। इसलिए यह स्थान खुला ही छोड़ दें।
कैसी हो घर की बॉलकोनी?
बॉलकोनी होने से भवन की भव्यता में चार-चांद लग जाते हैं। बॉलकोनी ऐसे स्थान पर निर्मित करवानी चाहिए जहां प्रात:कालीन सूर्य का प्रकाश एवं प्राकृतिक हवा सहज सुलभ हो। बॉलकोनी से हवा व प्रकाश घर में भी प्रवेश करना चाहिए।
बॉलकोनी बनवाते समय इन बातों का ध्यान रखें-
1- यदि भूखण्ड पूर्वोन्मुखी या उत्तोन्मुखी हो तो वास्तु के अनुसार भवन के ईशान कोण में बॉलकोनी बनवाएं।
2- यदि भूखण्ड पश्चिममुखी हो तो बॉलकोनी वायव्य कोण में व दक्षिणोन्मुखी हो तो आग्नेय कोण में बनवाएं।
3- बॉलकोनी के फर्श की ऊंचाई भवन की सामान्य छत से थोड़ी नीची होनी चाहिए।
4- यदि भवन बहुमंजिला हो तो प्रत्येक लिविंग रूम के साथ बॉलकोनी भी होना चाहिए। मच्छर मक्खी आदि बॉलकोनी के माध्यम से घर में प्रवेश कर जाते हैं इसलिए आजकल बॉलकोनी को वायरगेज आदि से कवर्ड करने का भी प्रचलन है। इससे हवा व प्रकाश तो पूरा मिलता है, कीट-पतंग भी अंदर नहीं आते।
5- बॉलकोनी में सीमेंट, पत्थर, मार्बल, लोहा या लकड़ी की रैलिंग लगाई जा सकती है। पैराफिट वॉल पूरी तरह ईंट की न बनाएं अन्यथा हवा रुक जाएगी। डेढ़ फीट तक ईंट की दीवार बनवाई जा सकती है। इसके ऊपर रैलिंग लगवा लें।
6- बॉलकोनी के ऊपर की पूरी छत या आधी छत को ढलान देते हुए उस पर खपरैल की डिजाइन दी जा सकती है।
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कैसा हो स्टोर रूम?
बदलते समय के साथ स्टोर रूम घर का जरुरी हिस्सा हो गया है। आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक अथवा कार्यालयीन भवन, इन सभी में स्टोर रूम बेहद उपयोगी है।स्टोर रूम वह स्थान होता है जहां घर में उपयोग न वाली वस्तुएं रखी जाती हैं।
स्टोर रूम बनवाते समय इन बातों का ध्यान रखें—-
1- नियमित रूप से काम में आने वाली वस्तुओं को छोड़कर शेष प्रकार की वस्तुओं को सामान्यत: स्टोर रूम में ही रखना चाहिए ताकि घर खुला-खुला लगे और घर में अनावश्यक कबाड़ा भी नजर न आए।
2- खाद्य सामग्री के लिए यदि अलग से स्टोर रूम का निर्माण करवाना हो तो रसोई घर के पूर्व की ओर अथवा आग्नेय कोण के मध्य पूर्वी दीवार के सहारे या ईशान कोण में बनवाया जा सकता है।
3- स्टोर रूम में प्रकाश की व्यवस्था पर्याप्त होनी चाहिए। साथ ही रोशनदान की भी व्यवस्था हो ताकि नमी न रहे।
4- स्टोर रूम की छत की ऊंचाई भवन के अन्य भाग के बराबर रखी जा सकती है। चाहें तो मुख्य छत से तीन फुट नीचे दुछत्ती का निर्माण करवा दें ताकि स्टोर रूम की क्षमता बढ़ सके।
5- स्टोर रूम में एक ही दरवाजा रखें। खिड़की न हो तो ज्यादा बेहतर होगा लेकिन रोशनदान अवश्य होना चाहिए।
6- स्टोर का रंग-रोगन हल्का रखें ताकि अंदर अंधेरा नहो। वैसे दीवारों पर हल्का ऑयल/वॉटर बेस पेंट करवाना चाहिए।
7-स्टोर रूम में दीमक आदि भी लग सकती है इसलिए नींव भरते समय ही ट्रीटमेंट करवा लें।
दाम्पत्य सुख बढ़ाता है मनी प्लांट
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का हर हिस्सा तथा हर वस्तु उसमें रहने वाले लोगों के जीवन को किसी न किसी तरह से प्रभावित करती है। यहां तक कि घर में रखे फूल व पौधे भी परिवार के सदस्यों पर अपना असर डालते हैं।
नीचे ऐसे ही कुछ पौधों के बारे में जानकारी दी गई है-
1- घरों की सुंदरता बढ़ाने के लिए मनी प्लांट्स लगाए जाते हैं। ये शुक्र के कारक हैं। मनी प्लांट लगाने से पति-पत्नी के संबंध मधुर होते हैं।
2- फैंगशुई के अनुसार बांस के पौधे सुख व समृद्धि के प्रतीक होते हैं।
3- परिवार में यदि कोई बीमार हो तो उसके आस-पास ताजा फूल रखना शुभ है किंतु रात को वहां से हटा देना चाहिए।
4- गुलाब, चंपा व चमेली के पौधे मानसिक तनाव व अवसाद में कमी लाते हैं। इन्हें लगाना अच्छा होता है।
5- शयन कक्ष के नैऋत्य कोण में टेराकोटा या चीनी मिट्टी के फूलदानों में सूरजमुखी के फूल लगाए जा सकते हैं। सूरजमुखी का पौधा मन में उल्लास पैदा करता है।
6- पौधे व फूलों का उपयोग घर के नुकीले कोणों व उबड़-खाबड़ जमीन को ढकने के लिए भी किया जा सकता है।
ड्रैगन करता है घर की सुरक्षा
फेंगशुई चीन का वास्तु शास्त्र है। वस्तुत: फेंगशुई चीन की दार्शनिक जीवन शैली है जो ताओवादी धर्म पर आधारित है। फेंग यानि वायु और शुई यानि जल अर्थात फेंगशुई शास्त्र जल व वायु पर आधारित है। फेंगशुई के कुछ उपयोगी टिप्स नीचे लिखे गए हैं-
1- फेंगशुई के अनुसार घर की रक्षा ड्रैगन करता है इसलिए घर में ड्रैगन की मूर्ति या चित्र अवश्य रखें।
2 – भारतीय बाजारों में विण्ड चाइम (हवा से हिलने वाली घंटी) उपलब्ध है। हवा चलने से जब यह टकराती हैं तो बहुत ही मधुर ध्वनि उत्पन्न करती है जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
3- फेंगशुई के अनुसार कंपनी के कान्फ्रेंस हॉल में धातु की सुंदर मूर्ति रखना आवश्यक अच्छा होता है।
4- कार्य स्थल(ऑफिस) पर प्रकाश की उचित व्यवस्था होना चाहिए।5- पलंग, सोफा या कुर्सी के ऊपर कोई झुकी हुई वस्तु न हो।
6- घर या फर्नीचर में लंबा चौड़ा व बड़ा फर्नीचर नहीं होना चाहिए। फर्नीचर कम जगह घेरने वाला होना चाहिए।
ऐसे दूर करें फैक्ट्री का वास्तु दोष
घर की तरह ही फैक्ट्री व कारखाना आदि में भी वास्तु शास्त्र बहुत उपयोगी है। यदि फैक्ट्री वास्तु सम्मत हो तो बेहद सफल साबित होती है और यदि वास्तु सम्मत न हो तो नुकसानदायक भी हो जाती है।
नीचे लिखे वास्तु नियमों को अपनाकर आप भी फैक्ट्री को वास्तु सम्मत बना सकते हैं-
1- फैक्ट्री का उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र भारी नहीं होना चाहिए। यह नकारात्मक ऊर्जा देता है।
2- पड़ोस की फैक्ट्री का मुख्य द्वार यदि आपकी फैक्ट्री के मुख्य द्वार की ठीक विपरीत दिशा में हो, तब भी नकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
3- यदि उत्तर की सड़क में पूर्व से पश्चिम की ओर ढलान हो या नैऋत्य क्षेत्र का दक्षिणी भाग खुला हो तो भी नकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
4- फैक्ट्री के दक्षिण या वायव्य कोण में ऊर्जा उत्पादन या ऊर्जा-गमन संबंधी उपकरण नहीं लगाए जाने चाहिए। लेबर कैंटीन या रसोई घर भी इन क्षेत्रों में नहीं बनाएं।
5- फैक्ट्री(कारखाना) लगाने से पहले बाउण्ड्री वॉल बनवानी चाहिए फिर मशीन आदि का फाउण्डेशन बनवाएं।
6- वर्षा का पानी दक्षिण-पश्चिम से उत्तर या ईशान कोण में निकलना चाहिए।
7- भारी मशीनें पश्चिम-दक्षिण में, भट्टी, बॉयलर, जनरेटर सेट, ट्रांसफार्मर, बिजली मीटर आदि आग्नेय कोण में लगाएं।
बेडरूम में लगाएं बालकृष्ण की तस्वीर
बेडरूम घर का सबसे खास हिस्सा होता है। यहां रखी हर एक वस्तु का दाम्पत्य जीवन पर प्रभाव पड़ता है जैसे- तस्वीर, गुलदस्ता आदि। यदि आप भी चाहते हैं कि आपका दाम्पत्य जीवन सफल रहे तो यह उपाय करें-
1- ऐसे नवदम्पत्ति जो संतान सुख पाना चाहते हैं वे श्रीकृष्ण का बाल रूप दर्शाने वाली तस्वीर अपने बेडरूम में लगाएं।
2- ध्यान रखें कि कृष्ण का फोटो स्त्री के लेटने के समय बिल्कुल मुख के सामने की दीवार पर रहे।
3- यूं तो पति-पत्नी के कमरे में पूजा स्थल बनवाना या देवी-देवताओं की तस्वीर लगाना वास्तुशास्त्र में निषिद्ध है फिर भी राधा-कृष्ण की तस्वीर बेडरूम में लगा सकते हैं।
4- भवन में महाभारत के युद्ध दर्शाने वाली तस्वीर वास्तुशास्त्र के अनुरूप नहीं माना जाता इसलिए ऐसे चित्र घर में न लगाएं।
5- भगवान श्रीकृष्ण का चित्र आवासीय एवं व्यावसायिक दोनों ही स्थानों पर रखा जाना चाहिए, इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
6- भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला के दृश्यों की तस्वीरों को भवन की पूर्व दिशा पर लगाया जा सकता है।
7- वसुदेव द्वारा बाढग़्रस्त यमुना से श्रीकृष्ण को टोकरी में ले जाने वाली झांकी समस्याओं से उबरने की प्रेरण
घर में न आए नकारात्मक ऊर्जा
वास्तु शास्त्र सकारात्मक व नकारात्मक ऊर्जा के सिद्धांत पर कार्य करता है। यदि घर में या घर के आस-पास कोई ऐसी वस्तु हो जिससे नकारात्मक ऊर्जा निकलती हो तो यह गंभीर वास्तु दोष की श्रेणी में आता है। ऐसे दोषों को इस प्रकार दूर किया जा सकता है-
1- घर के आंगन में सूखे एवं भद्दे दिखने वाले पेड़ जीवन के अंत की ओर इशारा करते हैं। ऐसे पेड़ों या ठूंठ को शीघ्र ही कटवा देना चाहिए।
2- इंटीरियर डेकोरेशन के लिए कुछ ऐसी कलाकृतियों का प्रयोग होता है जो सूखे ठूंठ या नकारात्मक आकृति के होते हैं। ये सभी मृतप्राय: सजावटी वस्तुएं वास्तु शास्त्र में अच्छे नहीं माने जाते हैं अत: इनके प्रयोग से भी बचें।
3- यदि ड्रॉइंगरूम में फूलों को सजाते हैं तो ध्यान दें कि उन्हें प्रतिदिन बदलते रहना जरुरी है। चूंकि जब ये फूल मुरझा जाते हैं तो इनसे नकारात्मक ऊर्जा निकलने लगती है।
4- कभी-कभी बेडरूम की खिड़की से नकारात्मक वस्तुएं दिखाई देती हैं जैसे- सूखा पेड़, फैक्ट्री की चिमनी से निकलता हुआ धुआं आदि। ऐसे दृश्यों से बचने के लिए खिड़कियों पर परदा डाल दें।
5- किसी भी भवन के मुख्य द्वार के पास या बिल्कुल सामने बिजली के ट्रांसफार्मर लगे होते हैं जिनसे चिंगारियां निकलती हैं । ऐसे दृश्य भी नकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं।
6- पुराने भवन के भीतर कमरों की दीवारों पर सीलन पैदा होने से बनी भद्दी आकृतियां भी नकारात्मक ऊर्जा का सूचक होती हैं। ऐसी दीवारों की तुरंत रिपेयरिंग करवा लें।
लवबर्ड का जोड़ा रखें बेडरूम में
यदि आपका दाम्पत्य जीवन सुखमय है तो अन्य परेशानियां स्वयं ही समाप्त हो जाती हैं। पति-पत्नी के बीच मधुरता बढ़ाने के लिए कुछ फेंगशुई सिद्धांतों का भी उपयोग किया जा सकता है।
नीचे ऐसे ही कुछ फेंगशुई टिप्स दी गई है जिनसे आप अपना दाम्पत्य जीवन सुखमय बना सकते हैं-
1- लवबर्ड, मैंडरेन डक जैसे पक्षी प्रेम के प्रतीक हैं इनकी छोटी मूर्तियों का जोड़ा अपने बेडरूम में रखें।
2- बेडरूम में दक्षिण-पश्चिम दिशा में दिल की आकृति का रोज क्वाट्र्ज रखें।
3- पति-पत्नी के प्रतीक के रूप में बेडरूम में दो सुंदर सजावटी गमले रखें।
4- बेडरूम में पानी की तस्वीर वाली पेंटिंग न लगाएं इसके स्थान पर रोमांटिक कलाकृति, युगल पक्षी की तस्वीर लगाएं।
5- यदि आपको लगे कि आपका प्यार छिन रहा है तो आप अपने कमरे में शंख या सीपी अवश्य रखें। इससे आपका प्यार आपसे दूर नहीं जाएगा।
6- यदि आपकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और इसी वजह से दांपत्य जीवन सुखमय नहीं है तो सुंदर से बाउल में पवित्र क्रिस्टल को चावल के दानों के साथ मिलाकर रखें। इन नुस्खों को आजमाने पर निश्चित ही कुछ ही समय में आपको सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगेंगे। आपका दांपत्य जीवन खुशियों भरा और सुखी होगा।
ऐसे दूर करें वास्तु दोष
वास्तु न सिर्फ आपके घर को बल्कि आपके जीवन को भी प्रभावित करता है। जीवन में आने वाली परेशानियों का कारण घर का वास्तु दोष भी हो सकता है।
नीचे लिखे कुछ सरल उपाय कर इन वास्तु दोषों को दूर किया जा सकता है-
1- स्वस्तिक, मंगल कलश, ओम, 786 आदि मंगल चिन्हों की तस्वीरें घर में अवश्य लगाएं। इनसे घर में सुख-शांति बढ़ती है।
2- पूर्वजों के चित्र, देवी-देवताओं के साथ कभी न लगाएं।
3- शयन कक्ष में सदैव सुंदर, कलात्मक फूलों या हंसते हुए बच्चों की तस्वीरें लगाने से नींद भी बेहतर आती है।
4- डाइनिंग हॉल की दीवारों का रंग हल्का व शांत व शीतलता प्रदान करने वाला हो। भारी सजावट से भी बचें।
5- डाइनिंग हॉल की दीवारों पर फल-फूलों व प्राकृतिक दृश्यों के अच्छे चित्र लगाए जा सकते हैं।
6 – अनुपयोगी वस्तुएं घर में न रखें। उन्हें घर से निकालते रहें।
7- यदि जनरेटर सेट अथवा इन्वर्टर ईशान में हो तो उसे वहां से हटाकर आग्नेय कोण में स्थापित करें।
दरवाजे की आवाज अशुभ क्यों?
दरवाजे घर का मुख्य भाग होते हैं क्योंकि नकारात्मक व सकारात्मक ऊर्जा यहीं से घर में प्रवेश करती व बाहर निकलती है। वास्तु शास्त्र में दरवाजों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
नीचे दरवाजे से संबंधित कई उपयोगी वास्तु टिप्स दिए गए हैं-
1- दरवाजे खोलते व बंद करते समय आवाज नहीं आना चाहिए । इससे एकाग्रता भंग होती है।
2- दरवाजा स्वत: खुलने व बंद होने वाला नहीं होना चाहिए।
3- मुख्य द्वार पर कोई मांगलिक या शुभ चिन्ह बनवाया जा सकता है।
4- घर के कुल दरवाजों की संख्या यदि सम संख्या में हो तो शुभ माना जाता है।
5- दो भवनों के मुख्य द्वार एक-दूसरे के ठीक सामने न हो।
6- दरवाजे उत्तर व पूर्व दिशा में अधिक रखने चाहिए ताकि हवा प्रकाश व ऊर्जा का संचार पर्याप्त हो सके।
7- प्रवेश द्वार अंदर की ओर खुलना चाहिए।
8- पूर्व अथवा उत्तरमुखी भवनों में चारदीवारी की ऊंचाई पूर्व या उत्तर में मुख्य द्वार से कम होनी चाहिए तथा पश्चिम या दक्षिणमुखी भवनों की चारदीवारी भवन के मुख्य द्वार से ऊंची, बराबर अथवा नीची रखी जा सकती है।
आमदनी पर असर डालती है उत्तर दिशा
घर की बनावट का प्रभाव घर में निवास करने वालों की आर्थिक, शारीरिक, मानसिक स्थिति आदि पर पड़ता है।
परिवार के सदस्यों का दिशाओं और कोणों से संबंध इस प्रकार रहता है-
1- उत्तर दिशा के शुभ-अशुभ का प्रभाव घर की महिलाओं एवं परिवार की आमदनी पर पड़ता है।
2- ईशान कोण के शुभ-अशुभ का प्रभाव घर के मालिक एवं वहां रहने वाले अन्य पुरुषों एवं उनकी संतानों पर पड़ता है। संतान में विशेषकर प्रथम पुत्र पर इसका प्रभाव ज्यादा पड़ता है।
3- पूर्व दिशा के शुभ-अशुभ का प्रभाव भी संतान पर ही पड़ता है ।
4- आग्नेय कोण के शुभ-अशुभ का प्रभाव घर की स्त्रियों, बच्चों विशेषकर द्वितीय संतान पर पड़ता है।
5- दक्षिण दिशा के शुभ-अशुभ का प्रभाव घर की स्त्रियों पर विशेष रूप से पड़ता है।
6- नैऋत्य कोण के शुभ-अशुभ का प्रभाव परिवार के मुखिया व उनकी पत्नी एवं बड़े पुत्र पर पड़ता है।
7- पश्चिम दिशा के शुभ-अशुभ का प्रभाव घर के पुरुषों पर पड़ता है।
8- वायव्य कोण के शुभ-अशुभ का प्रभाव घर की महिलाओं एवं तीसरी संतान पर पड़ता है।
घर में कहां बनवाएं गैराज?
जिस तरह दिनों-दिन वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। उसी तरह वाहनों को रखने की भी समस्या भी आम बात हो चुकी है। बड़े शहरों में वाहनों को रखने के लिए गैराज बनाए जाते हैं जिनका मुख्य उपयोग वाहन रखने के लिए किया जाता है।
गैराज बनवाते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें-
1- गैराज घर के पश्चिमी वायव्य (उत्तर-पश्चिम) या आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) में अति उत्तम माना गया है। दक्षिण या पश्चिम दिशा में उत्तम तथा ईशान (उत्तर-पूर्व) में वर्जित माना गया है।
2- गैराज के लिए अगर अलग से कोई शेड बनाना हो तो यह मुख्य भवन को टच नहीं करना चाहिए।
3- गैराज में उत्तर व पूर्व की दीवारों पर कम वजन होना चाहिए।
4- यदि गैराज को किराए पर देना हो तो उसमें रसोई व बाथरूम भी अवश्य बनवाएं।
5- यदि गैराज को भविष्य में दुकान के रूप में उपयोग करने का विचार हो तो निर्माण के समय ही गैराज में तीन तरफ दीवारों पर कोटा स्टो/मार्बल आदि की सैल्फ लगवाएं ताकि दुकान के लिए अलग से लकड़ी आदि की सैल्फ बनवाने की आवश्यकता नहीं पड़े।
6- गैराज का उपयोग स्टोर रूम के रूप में भी कर सकते हैं। इसके लिए पीछे के हिस्से में दुछत्ती भी बनवाई जा सकती है ताकि अधिक सामान रखा जा सके।
7- स्टोर रूम के लिए गैराज में शटर लगवाने की आवश्यकता नहीं है। करीब चार फुट चौड़ा दरवाजा लगवा लें। प्रकाश के लिए सामने खिड़की रखें।
सोच-विचार कर बनाएं घर का मुख्य द्वार
भवन के मुख्य द्वार का उसके वास्तु शास्त्र पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। यदि मुख्य द्वार में ही दोष हो तो इसे दूर करना अति आवश्यक होता है। मुख्य द्वार बनवाते समय नीचे लिखी बातों का ध्यान रखें-
1- वास्तु के अनुसार मुख्य द्वार काफी महत्वपूर्ण होता है इसे सिंह- द्वार भी कहते हैं।
2- वास्तु के अनुसार चारों दिशाओं के 32 देवताओं के शुभ-अशुभ फलों को देखते हुए ही मुख्य द्वार बनवाना चाहिए।
3- यदि भूखण्ड पूर्वोन्मुखी हो तो पूर्व की ओर के मध्य से ईशान कोण तक का भाग मुख्य द्वार बनवाने के लिए एकदम उपयुक्त होता है।
4- दक्षिणोन्मुखी भूखण्ड की भुजा के मध्य बिंदु से आग्नेय कोण तक का भाग मुख्य द्वार के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
5- पश्चिमोन्मुखी भूखण्ड की पश्चिमी भुजा के मध्य से वायव्य कोण तक का भाग मुख्य द्वार के लिए उच्च कोटि का माना गया है। साथ ही मध्य भाग से नैऋत्य कोण के बीच भी मुख्य द्वार रखा जा सकता है।
6- उत्तोन्मुखी भूखण्ड की उत्तरी भुजा के मध्य से ईशान तक का भाग मुख्य द्वार के लिए उत्तम माना गया है।
7- वास्तु के अनुसार मुख्य द्वार के लिए उत्तरी ईशान, पूर्वी ईशान, दक्षिणी आग्नेय व पश्चिमी वायव्य कोण अधिक शुभ माने जाते हैं।
कैसी हो घर की विद्युत व्यवस्था?
घरों में विद्युत व प्रकाश व्यवस्था काफी महत्वपूर्ण होती है। अगर प्रकाश व्यवस्था ठीक नहीं होगी तो इसका नकारात्मक प्रभाव घर में रहने वाले सदस्यों पर पड़ेगा। विद्युत फिटिंग व प्रकाश व्यवस्था करते समय इन बातों का ध्यान रखें-
1- घर चाहे बड़ा हो या छोटा, कच्चा हो या पक्का, गांव में हो या शहर में विद्युत कनेक्शन आवश्यक है।
2- वास्तु शास्त्र के अनुसार बिजली का मीटर, जनरेटर, इनवर्टर आदि घर के आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) में ही स्थापित करवाने चाहिए। ऐसा करना संभव नहीं हो तो वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) में भी लगाए जा सकते हैं।
3- आपके घर का प्रवेश द्वार जिस दिशा में हो, सामान्यत: बिजली का मीटर भी उसी दिशा में लगाया जाता है। वैसे अपनी सुविधानुसार मीटर बोर्ड आदि लगवा सकते हैं।
4- प्रत्येक कमरे में प्रवेश करते समय दाईं तरफ स्विच बोर्ड लगवाने चाहिएं।
5- बिजली फिटिंग हेतु निर्माण कार्यों के साथ-साथ ही आवश्यक कार्य करवाते रहें ताकि बाद में तोड़-फोड़ व खुदाई न करनी पड़े।
6- विद्युत फिटिंग हेतु अच्छी किस्म के तार व अन्य सामग्री का प्रयोग करें। विद्युत फिटिंग व एसेस
किस दिशा में हो फैक्टरी का स्टोर रूम ?
फैक्टरी में कच्चा तथा तैयार माल रखने के लिए स्टोर रूम अवश्य होते हैं। यदि तैयार माल रखने वाला स्टोर रूम वास्तु सम्मत नहीं है तो इसका प्रभाव फैक्टरी की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
फैक्टरी व कारखानों में इन बातों का भी ध्यान रखें-
1- तैयार माल का भण्डारण (स्टोर) वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम)में करें। किसी अन्य दिशा में स्टोर रूम बनाने से फैक्टरी की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
2- अर्द्ध निर्मित माल का भण्डारण पश्चिमी भाग में करें।
3 – कमरे के मुख्य द्वार के सामने बैठक कदापि न करें।
4- भारी मशीनों की स्थापना दक्षिण अथवा नैऋत्य कोण (पश्चिम-दक्षिण) में करनी चाहिए। हल्की मशीनें उत्तर या वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) में लगाई जा सकती है।
5- यदि नैऋत्य (पश्चिम-दक्षिण) में भण्डारण करना पड़े तो उसे सदैव भरा हुआ रखें।
6- फैक्ट्री के भूखण्ड के पूर्व में ऊंचे-ऊंचे टीले अथवा दक्षिण-पश्चिम में ठीक न की जा सकने वाली खाइयां नहीं होनी चाहिए।
7- जल व्यवस्था के लिए कुआं, बोरिंग, ट्यूब वैल, स्वीमिंग पुल आदि उत्तर, पूर्व या ईशान (उत्तर-पूर्व) में खुदवाना चाहिए।
8- बोरिंग व बाउण्ड्री वॉल के बीच कम से कम तीन फुट का फासला होना चाहिए।
दरवाजे के सामने न हो धार्मिक स्थल, क्यों ?
घर के वास्तु में मुख्य द्वार के साथ ही अन्य द्वारों का अहम योगदान होता है। अगर घर के द्वार में ही वास्तु दोष हो तो यह घर के साथ ही उसमें रहने वाले परिवार के सदस्यों को भी प्रभावित करते हैं। द्वार बनवाते समय इन बातों का ध्यान रखें-
1- वास्तु शास्त्रियों के अनुसार घर के मुख्य द्वार के सामने मंदिर या अन्य कोई धार्मिक स्थल नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर घर के वास्तु पर इसका असर पड़ता है। मुख्य द्वार के ठीक सामने कोई लेंप पोस्ट, खंभा, पिलर या वृक्ष आदि भी नहीं होने चाहिए।
2- मुख्य द्वार के संबंध में वास्तु शास्त्र के विद्वानों के विभिन्न मत हैं किंतु व्यावहारिक दृष्टि से मुख्य द्वार ऐसे स्थान पर रखा जाना चाहिए, जहां से पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो सके व परिवार के लिए सुविधाजनक हो।
3- यदि मुख्य द्वार पश्चिम में हो तो पूर्वी दिशा में भी एक द्वार बनवाया जा सकता है। यदि मुख्य द्वार दक्षिण में हो तो उत्तर में भी एक द्वार बनवा लेना चाहिए। इससे घर वालों की गति पूर्वोन्मुखी अथवा उत्तरोन्मुखी रहेगी, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से आवश्यक है।
4- कमरे के किसी भी कोने में दीवार से करीब चार इंच की दूरी पर द्वार बनवाया जा सकता है।
5- मुख्य द्वार के अतिरिक्त अन्य दरवाजों पर एक पल्ले वाला(सिंगल डोर) किवाड़ ही लगवाना चाहिए।
6- दरवाजे दीवार की तरफ खुलने चाहिएं ताकि अनावश्यक जगह न घिरे।
7- जिस दीवार के सहारे किंवाड़ खुलता हो, उसे दीवार में किंवाड़ के पीछे नीचे की तरफ छोटी-छोटी आलमारियां दी जा सकती हैं।
8- भवन के चारों ओर द्वार बनाए जा सकते हैं किंतु ध्यान रखें कि द्वार शुभ स्थानों पर ही बनवाया जाए।
9- जहां तक संभव हो, कमरे दरवाजा दीवार के मध्य न बनाएं अन्यथा कमरे का सही-सही उपयोग नहीं हो सकेगा।
वास्तु: ऐसे आएं परीक्षा में अव्वल
आजकल अभिभावक बच्चों की पढ़ाई के लिए अत्यधिक चिंतित रहते हैं। अधिक अंक लाने के लिए बच्चों में शिक्षा के प्रति एकाग्रता का होना आवश्यक होता है। अगर आप भी चाहते हैं कि आपके बच्चे परीक्षा में अव्वल नंबरों से पास हों तो
नीचे लिखे वास्तु टिप्स का उपयोग करें-
1- बच्चों का अध्ययन कक्ष हमेशा पश्चिम या दक्षिण दिशा में बनाना चाहिए क्योंकि इससे स्थायित्व रहता है।
2- बच्चों के अध्ययन कक्ष में अध्ययन करने की मेज कभी भी कोने में नहीं होनी चाहिए। अध्ययन के लिए मेज कक्ष के मध्य (दीवार के मध्य) में होनी चाहिए। दीवार से कुछ हटकर होनी चाहिए।
3- पढ़ाई करते समय बच्चे का मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में रहना चाहिए। इससे अध्ययन में एकाग्रता बनी रहती है।
4- पुस्तकों को हमेशा दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण या पश्चिम दीवार के साथ आलमारी में रखनी चाहिए। पूर्व, पूर्व-उत्तर या उत्तर दिशा में पुस्तकें नहीं रखनी चाहिए।
5- पुस्तकों को कभी भी खुला तथा इधर-उधर नहीं रखना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है।
6- अध्ययन के लिए मेज पर भी अधिक अनावश्यक पुस्तकें नहीं होनी चाहिए। जिस विषय का अध्ययन करना हो, उससे संबंधित पुस्तक को निकालकर पढ़े और बाद में उसे यथास्थान रख दें।
7- भारतीय परंपरा के अनुसार पढ़ाई की मेज के सामने मां सरस्वती और गणेशजी की तस्वीर होनी चाहिए।
8- फेंगशुई के अनुसार मेज पर अमेथिस्ट या क्रिस्टल का एज्युकेशन टॉवर रखें, जिससे ऊपर उठने की प्रेरणा मिलती रहती है और एकाग्रता बढ़ती है।
स्मरण शक्ति बढ़ाता है पिरामिड
भारतीय वास्तु शास्त्र में पिरामिड के आकार का विशेष महत्व है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के किसी एक हिस्से की छत को पिरामिड का आकार देना चाहिए। इसके नीचे बैठने से स्मरण शक्ति बढ़ती है तथा और भी मानसिक समस्याएं पिरामिड के नीचे बैठने से दूर होती है।
पिरामिड के कुछ और फायदे नीचे बताए गए हैं-
1- यदि घर को पिरामिड की अद्भुत शक्तियों का लाभ दिलवाना हो तो घर के मध्य भाग को अथवा किसी लिविंग रूम को ऊपर से पिरामिड की आकृति का बनवाएं।
2- यदि घर के किसी भाग में पिरामिड का निर्माण करवाना हो तो उसका एक त्रिभुज उत्तर दिशा की ओर रखें, शेष त्रिभुज स्वत: ही दिशाओं के अनुरूप हो जाएंगे।
3- मस्तिष्क की सक्रियता के लिए पिरामिड के नीचे बैठना लाभप्रद रहता है। मानसिक थकावट दूर होगी और अनिद्रा, सिरदर्द, पीठदर्द आदि में लाभ मिलेगा।
4- लंबी बीमारी व शल्य क्रिया के बाद पिरामिड के नीचे बैठने से जल्दी आराम मिलता है।
5- पिरामिड के नीचे रखी दवाइयां कई दिनों तक खराब नहीं होती, साथ ही उनका असर भी बढ़ जाता है।
6- घर में पिरामिड का चित्र कभी नहीं लगाना चाहिए, यह नकारात्मक ऊर्जा देता है।
7- यदि आपका ईशान ऊंचा हो और नैऋत्य नीचा हो तो नैऋत्य में छत पर पिरामिड की आकृतिनुमा निर्माण करते हुए नैऋत्य को ईशान से ऊंचा किया जा सकता है।
क्यों लगाएं रसोई घर में आईना?
घर में छोटे-छोटे वास्तु दोष होना आम बात है। घर में कुछ मामूली परिवर्तन कर इन दोषों को दूर किया जा सकता है या उसके नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है।
नीचे वास्तु दोष मिटाने के ऐसे ही कुछ उपाय दिए हैं-
1- खाना बनाते समय गृहिणी की पीठ रसोई के दरवाजे की तरफ न हो, यदि ऐसा हो तो गृहिणी के सामने दीवार पर एक आईना लगाकर दोष दूर किया जा सकता है।
2- यदि रसोई का सिंक उत्तर या ईशान में न हो और उसे बदलना भी संभव न हो तो लकड़ी या बांस का पांच रोड वाला विण्ड चिम सिंक के ऊपर लगाएं।
3- चूल्हा मुख्य द्वार से नहीं दिखना चाहिए। यदि ऐसा हो और चूल्हे का स्थान बदलना संभव नहीं हो तो पर्दा लगा सकते हैं।
4- यदि घर में तुलसी का पौधा न हो तो अवश्य लगाएं। कई रोगों व दोषों का निवारण अपने आप हो जाएगा।
5- यदि नैऋत्य कोण की छत ईशान से नीची हो तो नैऋत्य में एक टी.वी. एण्टिना लगाकर दोष दूर सकते हैं।
6- रसोई में यदि पानी व चूल्हा एक सीध में हो और उन्हें बदलना संभव न हो तो दोनों के बीच में एक छोटा सा पौधा रख सकते हैं।
7- यदि घर की सीढिय़ां घर के उत्तर या पूर्व दिशा में हों तो सीढिय़ों के दक्षिण या पश्चिम में एक कमरा और बनवा दें। दोष नहीं रहेगा।
8- अगर आप किसी मेहमान से परेशान हो गए हों तो उसका कमरा बदल दें या उसके पलंग की दिशा बदल दें। मेहमान स्वत: ही चला जाएगा। वास्तु शास्त्र के अनुसार वायव्य कोण में अतिथि कक्ष होने से अतिथि अधिक समय नहीं ठहरता है।
सुख-समृद्धि का प्रतीक हैं फुक-लुक-साऊ
वास्तु शास्त्र का उद्देश्य मनुष्य के जीवन में आने वाली परेशानियों व समस्याओं का दूर कर उनके जीवन में सुख-समृद्धि लाना है। फेंगशुई भी इसी सिद्धांत पर कार्य करता है। फेंगशुई के अनुसार घर में फुक-लुक-साऊ की मूर्ति रखने से सभी वास्तु दोष दूर हो जाते हैं तथा आर्थिक समस्याएं दूर हो जाती हैं। चीन के लगभग सभी घरों में इनकी मूर्तियां देखने को मिलेंगी। ये चीनी देवता हैं लेकिन इनकी पूजा नहीं की जाती। ये क्रमश: समृद्धि, वंशवृद्धि व दीर्घायु के देवता हैं। फुक राजसी पोशाक में समृद्धि व प्रसन्नता के देवता है यह लुक व साऊ से कद में ऊंचे हैं। इन्हें मध्य में रखा जाता है। लुक गोद में बच्चा लिए हैं ये वंशवृद्धि का प्रतीक हैं तथा साऊ गंजे सिर वाले हैं जिसका अर्थ है दीर्घायु।
नींव खोदने पर कोयला निकले तो…
वास्तु शास्त्र का हमारे जीवन में अत्यधिक महत्व है। चूंकि घर हो, ऑफिस हो या दुकान। यह सभी स्थान वास्तु से प्रभावित रहते हैं। इसलिए यहां के वास्तु दोषों को समाप्त करना अति आवश्यक होता है। वास्तु दोष को समाप्त करने के कुछ टिप्स नीचे दिए गए हैं-
1 – किसी भी भवन के निर्माण के पूर्व उसकी नींव खोदी जाती है। अगर नींव खोदते समय भूखण्ड से रूई या कोयला निकलता है तो अशुभ माना जाता है। ऐसे भूखण्ड पर भवन बनाने का विचार त्याग देना चाहिए।
2 – यदि भवन के पिछवाड़े गहरा गड्ढा, कुआं या काफी नीचा स्थल हो तो वह भी परेशानी पैदा करता है। यदि ऐसा है तो उसे समतल करवा दें। दोष समाप्त हो जाएगा।
3 – निर्मित भवनों के कोने आमने-सामने न हों अन्यथा मस्तिष्क पर नुकीला प्रभाव पड़ेगा।
4 – भवन के पास बड़े व भारी वृक्ष न हों। इनसे नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
5 – छत पर चील, कौए आदि के बैठने से इनकी परछाई भवन पर पड़ती है जो शुभ नहीं है।
6 – घर के सामने या बाईं ओर मंदिर न हो। मंदिर की परछाई भी घर पर नहीं पडऩी चाहिए।
7 – भूखण्ड के चारों कोणों का अनुपात सही न होने पर भी मानसिक अशांति बनी रहती है।
8 – घर के आस-पास रेलवे स्टेशन, बस स्टैण्ड, सिनेमाघर, स्कूल या आवागमन के सार्वाजनिक स्थान नहीं होना चाहिए। इनसे मानसिक तनाव पड़ता है।
फेंगशुई:—- ऐसे मिलेगी सफलता——
फेंगशुई हमारे जीवन की कई परेशानियों का समाधान करता है। समस्या चाहे दाम्पत्य की हो, व्यापार-व्यवसाय की या कोई और। फेंगशुई के उपाय सभी परेशानियों का हल करने में उपयोगी हैं।ऐसे ही कुछ उपाय नीचे लिखे गए हैं जिन्हे अपनाकर आप कार्यक्षेत्र में अप्रत्याशित सफलता पा सकते है
पानी का फव्वारा :—– यदि आपके कार्यक्षेत्र में बार-बार व्यवधान आ रहे हैं और किसी कार्य में सफलता नहीं मिल रही तो उत्तर दिशा में बहते पानी का फव्वारा रखने से सफलता मिलेगी। संगीत घड़ी : मधुर संगीत उत्पन्न करने वाली घड़ी घर में ऊर्जा का संतुलन बनाती है। ऐसी घड़ी घर के बाहर बरामदे में या गैलरी में नहीं लगानी चाहिए। हर समय ध्वनि पैदा करने वाली घड़ी भी नकारात्मक प्रभाव डालती है।
नोकदार क्रिस्टल :—— यदि ड्रांइगरूम में टेबल पर मध्य में नोकदार क्रिस्टल रखा जाए तो व्यक्ति का जीवन काफी व्यवस्थित होगा। अगर ऐसे क्रिस्टल का उपयोग पेपरवेट के रूप में किया जाए तो कार्यक्षेत्र में अप्रत्याशित सफलता मिलती है।
कैरियर को ऊंचाई देता है क्रिस्टल ग्लोब
फेंगशुई की सहायता से आप जीवन की हर समस्या का समाधान आसानी से कर सकते हैं। यदि आप अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं तो भी फेंगशुई आपकी सहायता कर सकता है। फेंगशुई के अनुसार जो लोग अपने व्यापार या कैरियर के प्रति चिंतित हैं तो उन्हें अपने कमरे, दुकान या ऑफिस में क्रिस्टल ग्लोब रखना चाहिए। इस ग्लोब से सकारात्मक ऊर्जा निकलती है, जो आपके व्यक्तित्व में नई ऊर्जा का संचार करती है और आप अपने कैरियर में उन्नति करते हैं। विद्यार्थियों के लिए क्रिस्टल ग्लोब काफी लाभदायक होता है। इससे उनकी स्मरण शक्ति तथा एकाग्रता बढ़ती है।
कैसे करें उपयोग क्रिस्टल ग्लोब को
प्रयोग में लाने से पहले 24 घंटे के लिए स्टैंड से खोलकर नमक के घोल में रख देना चाहिए, फिर साफ पानी से धोकर कांच के बर्तन में रखकर सुबह की धूप में दो-तीन घंटे सुखाना चाहिए। ऐसा करने से क्रिस्टल ग्लोब और प्रभावशाली हो जाता है। इस ग्लोब को दिन में तीन बार घुमाना चाहिए जिससे इसमें से निकलने वाली यांग ऊर्जा पूरे क्षेत्र में फैल जाए।
जब खरीदने जाएं नया फ्लैट तो…
कुछ वास्तु दोष ऐसे होते हैं जो वास्तु का ज्ञान ना होने पर दिखाई दे जाते हैं। जैसे गलत स्थान पर रसोई, टैंक, जल की निकासी, पूजाघर, शयनकक्ष बच्चों का कमरा यदि गलत जगह बना हो तो उस घर में रहने वालों को मानसिक अशांति का सामना करना पड़ता है।
इसलिए अगर आप कोई नया घर या फ्लैट खरीदने जा रहे हैं तो नीचे लिखी बातों का जरुर ध्यान रखें ताकि नये घर में भी आपका जीवन खुशियों से भरा रहे—-
– रसोईघर कभी घर के मुख्य दरवाजे के सामने ना हो।
– शौचालय का स्थान उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम में होना चाहिए।
– रसोई, पूजा स्थल और शौचालय एक-दूसरे के अगल-बगल में ना हो।
– ईशान कोण या उत्तर-पूर्व नीचा और दक्षिण-पश्चिम ऊंचा रहना चाहिए।
– उत्तर-पूर्व कोने में शौचालय या रसोई घर नहीं होना चाहिए।
– उत्तर-पूर्व में कोई बोरिंग भूमिगत पानी या टंकी या किसी प्रकार का गढ्ढा ना हो।
एक्वेरियम से पाएं धन, सपंदा व समृद्धि ——–
फिश एक्वेरियम देखते ही मन खुश हो जाता है। इससे न केवल घर की सुंदरता बढ़ती है बल्कि फेंगशुई के अनुसार घर में सुख-समृद्धि भी आती है। घर में एक छोटे से एक्वेरियम (मछलीघर) में सुनहरी मछलियां पालना सौभाग्यवर्धक होता है।फेंगशुई में मछली सफलता व व्यवसाय का प्रतीक मानी जाती है। ध्यान रहे कि एक्वेरियम में आठ मछलियां सुनहरी और एक काले रंग की होनी चाहिए। अगर कोई सुनहरी मछली मर जाए तो माना जाता है कि घर पर आई कोई मुसीबत वह अपने साथ ले गई यानि सुनहरी मछली का मरना अपशकुन नहीं होता। एक्वेरियम को मुख्यद्वार के समीप नहीं रखना चाहिए। उत्तर-पूर्व क्षेत्र धनसंपदा तथा समृद्धिदायक क्षेत्र है। यह जलतत्त्व का प्रतीक है। इस क्षेत्र में एक्वेरियम रखना उत्तम व शुभ रहता है। यह समृद्धि, संपत्ति और सफलता देता है।
मिलेंगे करियर के क्षेत्र में नए अवसर
फेंगशुई के अनुसार ड्रेगन और फीनिक्स चीन की पौराणिक कथाओं के दो अत्यंत शक्तिशाली और महत्वपूर्ण प्रतीक है। फीनिक्स अपने आप में यांग का प्रतीक है लेकिन ड्रेगन की परिस्थिति में यिन हो जाता है। चीनी परंपरा के अनुसार यांग पुरुषत्व का प्रतीक माना गया है और यिन स्त्रीत्व का। यदि घर में ड्रेगन और फीनिक्स दोनो एक साथ हों तो वे सफल वैवाहिक जीवन, आर्थिक सम्पन्नता और कई संतानों के प्रतीक माने जाते है। ऐसा माना जाता है इससे सम्पति व सौभाग्य बढ़ता है। चीनी परंपरा के अनुसार ड्रेगन कुल पिता का प्रतीक है, जबकि फीनिक्स कुलमाता का। इसे दक्षिण- पश्चिम दिशा में रखने से कुल माता के सौभाग्य में अभिवृद्धि होती है। उत्तर पश्चिम दिशा में रखने पर कुलपिता के सौभाग्य वृद्धि होते है। ड्रेगन और फीनिक्स का यह प्रतिरूप पूर्व दिशा में रखने से परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य में सुधार होता है और दक्षिण दिशा में रखने से करियर के क्षेत्र में नए अवसर प्राप्त होते हैं। प्रतिष्ठा और मान सम्मान में वृद्धि होती है।
सही दिशा में लगाएं भगवान की तस्वीर
वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में छोटे-छोटे बदलाव करके आप अद्भुत मानसिक शांति महसुस कर सकते है। घर में देवी-देवताओं की तस्वीर तो सभी लगाते है। देवताओं की सही दिशा में सही तस्वीर लगाकर कोई भी अपना जीवन सुख-समृद्धि से पूर्ण बना सकता हैं तो आइये जानते है वास्तु के अनुसार घर में कौन से भगवान की तस्वीर घर की किस दिशा में लगाने से शुभ फल मिलता है।
– राधाकृष्ण की तस्वीर बेडरूम में लगाना शुभ है।
– रामायण, महाभारत के युद्ध के दृश्य नहीं लगाने चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार इन चित्रों से घर के सदस्यों को मानसिक तनाव झेलना पड़ सकता है और इनका आपस में तालमेल नहीं रहता।
– हनुमानजी की तस्वीर हमेशा दक्षिण दिशा की ओर देखती हुई लगाएं।
– स्वस्तिक, कमल के फुल, गुलदस्ते के चित्र को व खिलौने घर में रखना बहुत शुभ माना जाता है।
– भगवान शंकर, कुबेरदेव, गंधर्वदेव की तस्वीर उत्तर दिशा में लगाएं।
– महालक्ष्मी, मां दुर्गा, मां सरस्वती के चित्र लगाने के लिए उत्तर दिशा सर्वोत्तम है।
– महालक्ष्मी की बैठे स्वरूप वाली तस्वीर शुभ रहती है।
– मां दुर्गा के चित्र में शेर का मुंह खुला नहीं होना चाहिए।
सही दिशा में रखें धन तो होगी तेजी से वृद्धि
उत्तर दिशा को वास्तु शास्त्र के अनुसार धन के देवता कुबेर का स्थान माना जाता है। उत्तर दिशा का प्रभाव गृहस्वामी के धन की सुरक्षा और समृद्धि देने वाला माना जाता है। मतलब वास्तु शास्त्र के अनुसार गृहस्वामी को अपने नकद धन को उत्तर दिशा में रखना चाहिए। नकद धन के लिए अलग से कमरा बनाना आज के जमाने में तो संभव नहीं है। यह तो सिर्फ पुराने जमाने में राजे रजवाड़ो के लिए संभव था। इसलिए गृहस्थ को अपना धन उत्तर दिशा के बेडरुम में रखना चाहिये। नकद, गहनों एवं अन्य किमती चीजों को उत्तर दिशा में किसी स्थान पर रखना बहुत शुभ फल देने वाला होता हैं लेकिन उत्तर दिशा के पूजा स्थान के आसपास मे इसका स्थान उत्तम होता है धन को इस स्थान पर रखने से धन में तेजी से वृद्धि होने लगती है। इसमें एक अलग मत और भी है कुछ वास्तुशास्त्रीयों के अनुसार नकद धन को उत्तर में रखना चाहिए और रत्न, आभुषण आदि दक्षिण में रखना चाहिये। ऐसा इसलिए माना जाता है क्योंकि नकद धन आदि हल्के होते है इसलिए इन्हे उत्तर दिशा में रखना वृद्धिदायक माना जाता है। रत्न आभुषण में वजन होता है इसलिए उन्हे कहीं भी नहीं रखा जा सकता है। इसके लिए तिजोरी या अलमारी की आवश्कता होती है और ये काफी भारी होती है। इसलिए दक्षिण दिशा में रख उसमें आभुषण आदि रखने को उतम माना जाता है।
इस वास्तु दोष का ध्यान नहीं रखा तो होगा आर्थिक नुकसान
बढ़ती हुई आबादी और कम पड़ती हुई जमीन के कारण आजकल चौक वाले मकान बनना बंद हो गए हैं। पुराने जमाने में बड़े – बूढ़े कहा करते थे, कि जिस मकान में चौक नहीं होते थे उन्हें शुभ फलदायक नहीं माना जाता था। आज कल महानगरों में इतनी जमीन ही नहीं मिल पाती है ऐसे में यह कोशिश करनी चाहिये की घर में ब्रम्ह स्थान खाली रहे। भवन के अन्दर के मध्य भाग को ब्रम्हास्थान कहा गया है जिसका बड़ा महत्व हैं। पुराने जमाने में जितने भी घर बनते थे उन सब में ब्रम्हस्थान खुला छोड़ा जाता था। जिसे चौक कहा जाता था। पहले के निर्माण कोई स्तंभ या कोई साजो सामान नहीं रखा जाता था। वास्तु के अनुसार घर के ब्रम्ह स्थान हमेशा खाली छोडऩा चाहिये। यह स्थान एकदम खाली पिल्लर रहित होना चाहिये। इस स्थल पर किसी भी तरह का निर्माण करवाना घर में रहने वालों के लिए बहुत अशुभ माना गया है। इस जगह को खाली ना छोडऩे पर गृहस्वामी को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। यदि इस जगह को मकान बनाते समय खाली ना छोड़ पाएं तो इस बात का ध्यान रखें की घर में उस जगह पर अधिक वजनदार सामान ना रखे। इसका वैज्ञानिक औचित्य भी है। ब्रम्हस्थान के खुला रहने पर सूर्य के प्रकाश की किरणे सीधे घर में पड़ती है। वायुमंडल की पूरी उर्जा इस स्थान से होकर पूरे घर में फैलती है। जिससे घर में सुख व समृद्धि आती है।
अगर चाहते हैं खुशहाल वैवाहिक जीवन
क्या आपके लाइफ पार्टनर से आपकी नहीं बनती है? बात -बात पर दोनों का झगड़ा होता है। कहीं इसका कारण आपके बेडरुम का वास्तु तो नहीं क्योंकि अक्सर घरों में कुछ ऐसे छोटे- छोटे वास्तुदोष होते है जो घर में अशांति और झगड़ो का कारण बनते है। अगर आपके साथ भी यही समस्या है तो नीचे लिखे इन वास्तु उपायों को अपनाकर आप अपने वैवाहिक जीवन को खुशहाल बना सकते है।
– बेडरुम में कभी भी टूटे हुए शीशे को नहीं रखें यह पति- पत्नी के लिए अशुभ है।
– कभी भी शीशे को बिस्तर के सामने न रखे इससे आपके विवाहित जीवन में किसी तीसरे व्यक्ति के आने की संभावना होती है। यदि शीशा रखने की कोई जगह नहीं है तो सोने से पहले उसे ढक दे।
– बेडरुम के दरवाजे को खोलते या बंद करते समय किसी तरह की कोई आवाज नहीं होनी चाहिए। यदि बेडरुम का दरवाजा आवाज करता है तो पति-पत्नी में हमेशा छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़ा होता है।
– घर के उत्तर-पूर्व दिशा में बेडरुम नहीं होना चाहिये। इस दिशा में बेडरुम होने पर वैवाहिक जीवन सुखी नहीं रहता है। – खराब एयर कंडीशनर या पंखा जिसके चलने पर आवाज हो उसे तुरंत ठीक करवा लें।
इसके कारण वर वधु के सम्बंधों में परेशानी पैदा हो सकती है।
ऐसे पेड़ घर के निकट अशुभ होते है——
यदि घर का वास्तु एकदम सही हो तो उस घर में कभी कोई कमी नहीं आती है। जीवन सुख शांति से भरा रहता है। घर के आंगन में और घर के नजदीक लगे वृक्षों का वास्तु अनुसार भी घर पर शुभ-अशुभ प्रभाव पड़ता है।
घर के नजदीक बैर, बबुल के वृक्ष लगाने से घर में कलह बना रहता है।
– आधा जला हुआ, आधा सूखा, ठूंठ की तरह वृक्ष, तीन शिरों या अनेक शिरों वाला वृक्ष अशुभ होता है।
– इमली व मेंहदी पर बुरी आत्माओं का वास माना जाता है। घर के लान में या नजदीक ये पेड़ शुभ नहीं माने जाते है।
– पूर्व और ईशान में ऊंचे पेड़ नहीं होना चाहिये, क्योंकि ऊंचे वृक्षों घर के नजदीक या घर के आंगन में होना शुभ नहीं माना जाता है।
– ताड़ का वृक्ष, आंवला, कपास , रेशमी कपास भी अशुभ माना जाता है।
– अगर अशुभ पेड़ को काटना नहीं चाहते है तो उसके पास घर में नागकेसर, अशोक , नीम, नारियल, चन्दन, तुलसी, हल्दी, रात की रानी अन्य फुल वाले पौधे लगाना चाहिये।
ऐसा पूजा घर देता है सुख-शांति से भरपूर जीवन
कहते हैं यदि मकान वास्तु के अनुसार बना हो तो घर में हमेशा सुख-शांति बनी रहती है।
घर में पूजास्थल एक ऐसी जगह होती है जहां व्यक्ति पूजा-पाठ आदि के माध्यम से शांति प्राप्त करता है।
यदि पूजा घर वास्तु के अनुसार ना हो तो उस घर में कभी शांति नहीं मिलती है। वहां की गई पूजा का सकारात्मक परिणाम नहीं मिलता।
अगर आप चाहते हैं कि आपके घर में हमेशा सुख-शांति बनी रहे, तो इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें- – पूजा घर के नजदीक और ईशान कोण यानि उत्तर-पूर्व में झाड़ू, कुड़ेदान, पोंछा आदि ना रखें। संभव हो तो पूजा घर को साफ करने के झाड़ू-पोछा अलग रखें। इससे घर में बरकत होती है।
– शयनकक्ष में पूजा घर अशुभ होता है। साथ ही किसी विवाहित जोड़े के कक्ष में पूजा घर होना ही नहीं चाहिए। घर में जगह का अभाव हो तो पूजा घर पर पूजा के समय के अतिरिक्त पर्दा डालकर रखें।
– पूजा घर में ब्रह्मा, विष्णु, महेश, इंद्र और कार्तिकेय का मुख हमेशा पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिये।
– पूजा घर की दीवारों तथा फर्श का रंग सफेद या हल्के पीले रंग का होना चाहिए।
– पूजा घर को हमेशा शुद्ध, साफ एवं पवित्र बनाए रखें। इसमें कोई भी अशुद्ध या अपवित्र वस्तु ना रखें। घर के उत्तर-पूर्व के कोने को हमेशा साफ रखें।
– पूजा घर के नीचे अलमारी बनाकर किसी मुकदमे के कागजात रखने से मुकदमे में विजय होने की संभावना बढ़ जाती है। पूजा में इन बातों का ध्यान रखें और पाएं वास्तुदोष से मुक्ति
वास्तुदोषों का निवारण वास्तु शास्त्र के नियम अनुसार मकान में तोडफ़ोड़ करवाकर किया जा सकता है, लेकिन ऐसा सभी के लिए संभव नहीं होता है। ऐसे में क्या आप जिन्दगी भर छोटे-छोटे वास्तुदोषों के कारण परेशान होते रहेंगे? आप सोच रहे होंगे कि इसका और क्या उपाय हो सकता है। उपाय है, यदि आप अपने पूजा के नियम में थोड़ा बदलाव कर लें तो आपको अनेक तरह के वास्तुदोषों से मुक्ति मिल सकती है।
– घर में सुबह-शाम पूजा करते समय तीन बार शंख बजाएं। इससे घर से नकारात्मक उर्जा बाहर चली जाती है।
– रोज घर के पूजास्थल पर घी का दीपक जलाएं।
– अपने घर उत्तर- पूर्व के कोने मे या घर का मध्य भाग जिसे ब्रम्ह स्थान भी कहते है वहां स्फटिक श्रीयंत्र की स्थापना शुभ मुहूर्त में करें।
– सुबह के समय कंडे पर थोड़ी गुग्गल डालकर रखें और ऊं नारायणाय नम: इस मंत्र का जप करें।
– अब गुग्गल से जो धुआं निकले उसे घर के हर कमरे में जाने दे। इससे घर की नकारात्मक उर्जा खत्म होगी और वास्तुदोषों का नाश होगा।
– शाम के समय घर में सामुहिक रूप से सभी परिवार के सदस्य आरती करें।
– सुबह के समय थोड़ी देर तक रोज गायत्री मंत्र या अन्य किसी मंत्र की धुन घर में चलने दें। मूर्ति दूर करेगी वास्तुदोष… वास्तु का शमन करने के लिए आदि काल से ही गणेश जी की वंदना की जाती रही है। गणेश जी को बुध ग्रह से संबंधित माना जाता है। गणेश जी की पूजा-अर्चना के बिना वास्तु देव की संतुष्टी संभव नहीं है। अगर आपके मकान में वास्तु दोष है, तो उसकी शांति के या निवारण के लिए नीचे लिखे उपाय को अपनाए।
– मकान के मुख्य द्वार पर एकदंत गणेश की प्रतिमा लगाकर उसके ठीक दूसरी ओर उसी स्थान पर दूसरी गणेश जी की मुर्ति इस प्रकार लगाएं कि दोनों प्रतिमाओं की पीठ आपस में मिल रहे।
– वास्तुदोष से प्रभावित मकान के किसी भाग में मिश्रित सिंदूर से दीवार पर स्वस्तिक बनाने से वास्तु दोष दूर होता है। – सुख-शांति समृद्धि के लिए घर में सफेद रंग के विनायक की प्रतिमा लगाएं।
– मकान में बैठे गजानन और ऑफिस में खड़े गजानन का चित्र लगाएं।
वास्तुदोष दूर करने के लिए गणेश जी की बांयी हाथ की ओर सूंड मुड़ी हुई हो तो कल्याणकारी और वास्तुदोष को दूर करने वाली है।
– मकान के ब्रम्हा्र स्थल मे दिशा व ईशान में विघ्रहर्ता विनायक की प्रतिमा लगाएं। इससे अनेक वास्तुदोष का निवारण स्वत: हो जाएगा।
– गणेश जी की प्रतिमा के सूंड में मोदक का होना शुभ है लेकिन ध्यान रहे प्रतिमा नैऋत्य या दक्षिण दिशा में ना लगाएं।
ऐसा होगा किचन तो मिलेगी समृद्धि
वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में छोटे-छोटे बदलाव करके भी आप अपने जीवन में खुशहाली ला सकते हैं। रसोई घर यानी किचन हमारे घर का सबसे महत्वपुर्ण कमरा होता है। आप अपने किचन में सिर्फ सामानों की जगह बदलकर अपने जीवन में सुख व समृद्धि ला सकते हैं।
– रसोई घर को आठ दिशाओं और उपादिशाओं में विभाजित करें।
– उत्तर पूर्व व उत्तर दिशा के अतिरिक्त किसी अन्य कोण या दिशा में चूल्हा रखने से कोई हानि नहीं होती।
– रसोई घर में भारी बर्तन आदि दक्षिणी दीवार की ओर रखें।
– रसोई घर में पीने का पानी उत्तर-पूर्वी कोने या उत्तर दिशा में रखें।
– खाना बनाते समय गृहिणी या खाना बनाने वाले का मुख पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए। यह घर के लोगों के स्वास्थय के लिए आवश्यक हैं।
– खाली या अतिरिक्त गैस सिलेन्डर को रसोईघर के नैऋत्य कोण में रखें।
– माइक्रोवेव, ओवन, मिक्सर ग्राइंडर आदि दक्षिणी दिशा के निकट रखें।
– रसोई घर में रेफ्रिजरेटर भी रखा जाना है तो इसके लिए दक्षिण, पश्चिम या उत्तर दिशा सही है।
दर्पण लगाएं और कहें वास्तुदोष को अलविदा
दुकान हो या घर के प्रवेश द्वार के सामने कोई धारदार किनारा, वृक्ष, खम्बा या ऊंचा भवन आदि नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा हो तो सभी के लिए तोड़-फोड़ करके वास्तुदोष दूर करना संभव नहीं होता।
इन सभी दोषों को दूर करने का सबसे सरल उपाय है सही दिशा में सही जगह आईना लगाना तो आइये जानते हैं कि कैसे आप दर्पण से पा सकते हैं वास्तुदोष से मुक्ति—-
– यदि घर का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा में है तो घर पर पडऩे वाली बुरी छाया को रोकने के लिए शीशे का उपयोग करें।
– घर का दरवाजा लिफ्ट के सामनें होना बुरा माना जाता है। यह घर में रहने वाले की धन सम्पति और सुख शांति के लिए हानिकारक होता है। इससे बचने के लिए आप मुख्य द्वार के ऊपर दर्पण लगाएं और मुख्यद्वार के नीचे फर्श को पांच से.मी. ऊंचा रखें जिसे लांघकर घर में प्रवेश करें। – घर के सामने ऊंची इमारत हो तो घर में रहने वालों के साथ धोखा हो सकता है। इसलिए अपने आप को बचाने के लिए कभी उधार न देने का नियम बनाएं और मुख्यद्वार के ऊपर उत्तल दर्पण को लटका दें।
– आपके घर के मुख्य द्वार के सामने व्यस्त यातायात वाला मार्ग हो तो घर में धन ठहर नहीं पाता और रहने वालों को धन जोडऩे में परेशानी होती है तो मुख्य द्वार की दिशा बदलकर उसे दूसरी दिशा में बना दें, जिससे मुख्य द्वार व्यस्त द्वार के सामने न हो अगर यह न हो सके तो मुख्य द्वार के बाहर की तरफ शीशा लगाएं।
– मकान के सामने अधिक खुली जगह होने पर वहां रहने वालों का स्वास्थ्य कमजोर और सुस्त रहता है। ऐसी स्थिति में मुख्य द्वार पर उत्तल दर्पण लगाएं जिससे की खुली जगह का प्रतिबिंब दिखाई दें और मुख्य द्वार के नीचे फर्श को दो इंच ऊंचा रखें जिसे आप लांघ कर घर में प्रवेश कर सकें ।
– घर के पीछे सड़क रहने पर घर में रहने वालों के बारे में लोग पीठ पीछे बुराई करेंगे। ऐसी अवस्था में घर की पीठ वाली दीवार पर शीशा लटकाएं जिससे पीछे वाली सड़क का प्रतिबिम्ब दिखाई दें।
वास्तु : ऐसे सजाएं डायनिंग रुम
वास्तु के अनुसार सिर्फ घर बनवाने से ही वास्तु के सारे नियमों का पालन नहीं होता बल्कि घर की सजावट कैसी है? कौन सा सामान किस जगह रखा है? इसका घर के वास्तु पर गहरा प्रभाव पड़ता है। घर का डायनिंग रुम का इन्टीरियर यदि वास्तु के अनुरुप हो तो घर के सारे सदस्यों में प्रेम बना रहता है।
– डायनिंग मेज वर्गाकार हो या आयाताकार होनी चाहिए।
– तीखे नुकीले कोनों वाली असमान आकार की डायनिंग मेज का प्रयोग भूलकर भी ना करें।
– डायनिंग मेज पर ताजे फलों की टोकरी रखें।
– डायनिंग मेज के आसपास कुर्सियां इस प्रकार रखें कि खाना खाते समय मुंह पूर्व या पश्चिम दिशा में रहें।
– डायनिंग मेज पर चारों तरफ खाना खाया जा सकता है लेकिन एक दिशा की कुर्सियां खाली रखें।
– डायनिंग मेज हाल के बीचों-बीच ना रखें।
– डायनिंग रुम की दिवारों पर हल्के शांत रंगों का प्रयोग करना चाहिए जैसे हल्का नारंगी, हल्का हरा, पीला, आडू, गुलाबी, तथा इनसे मिलते-जुलते रंगों का प्रयोग करें।
– खाना-खाते समय हल्की रोशनी का प्रयोग करें।
धन-दौलत बढ़ाती है ऐरोवाना-फिश
पीले और सुनहरे रंग की एरोवाना फिश को घर में रखना फेंगशुई के अनुसार बहुत शुभ माना जाता है। धन-दौलत में बढ़ोत्तरी करने वाला भी माना जाता है। वह भी खासतौर पर उन लोगों के लिए जो अपने भाग्य को बेहतर कर धन-दौलत को बढ़ाना चाहते हैं। रेजिन से बनी बहुत सुंदर एरोवाना फिश आपके घर व दफ्तर दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। इसे चाइनीज गोल्डन ड्रैगन फिश भी कहते हैं। जिससे इसे रखने वालों को फायदा होता है। एरोवाना को काफी कीमती मछली कहा जाता है, ऐसा इसलिए भी है क्योंकि यह ओरिएंटल ड्रैगन से बहुत मिलती-जुलती है। चीनी परंपराओं को मानने वाले वहां के रहवासी मछली को ‘यूÓ भी कहते हैं और इसे धन, भाग्य व शक्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानते हैं। एरोवाना एक शक्तिशाली मछली है, जिसमें यलो इनगॉट्स और गोल्ड कॉइन को भी जगह दी गई है। घर की उत्तरी दिशा में इसे रखने से आपका विंडफॉल लक बेहतर होगा, जो कॅरियर को फायदा पहुंचाता है। व्यापार स्थल के रिसेप्शन पर इसे दक्षिण-पूर्व में रखने से सौभाग्य बढ़ता है और आमदनी में भी बढ़ोत्तरी होती है। इसे प्रवेश द्वार के ठीक सामने वाले कोण में भी रखा जा सकता है। ऐरावाना फिश देखने में जितनी सुंदर है, प्रभाव के मामले में भी यह इतनी ही प्रभावी है। यह एक तरह से शो पीस का भी काम करती है।
वास्तु के कुछ उलझे नियम
किसी भी घर, आॅफिस या उद्योग को वास्तु सम्मत बनाने में ऐसे अनेकानेक बिंदु एवं नियम आते हैं जब कि एक नियम मानें तो दूसरे नियम की उपेक्षा होती है। किसी भी घर या आॅफिस को पूर्णतया वास्तु सम्मत बनाना तो संभव ही नहीं हो पाता। कई बार परिस्थितिवश भी वास्तु नियमों का पालन कठिन या असंभव हो जाता है। ऐसी स्थिति में जो नियम अधिक फलदायी होते हैं, उन्हें चुनना ही उचित है। यदि ईशान व नैर्ऋत्य कोण में ठीक से नियमों का पालन कर लिया जाए, तो वह स्थान अनुकूल और उपयोगी हो सकता है। किन नियमों का पालन कैसे करें, आइए एक दृष्टि में देखें। ईशान बड़ा व खुला होना: ईशान में वास्तु पुरुष का मस्तिष्क माना गया है। यदि ईशान बंधा हो, या स्थान कम या कटा हो, तो मस्तिष्क काम नहीं करता। निर्णय गलत हो जाते हैं। मेहनत करके भी लाभ नहीं होता। इस कोण को सर्वदा स्वच्छ व सुगंधमय रखना चाहिए ताकि घर में अधिक से अधिक ऊर्जा का प्रवेश हो। इस कोण में जल स्रोत या फव्वारा भी उŸाम होता है, लेकिन गंदे पानी का निकास इस ओर से नहीं होना चाहिए। इसके अतिरिक्त यह कोण अन्य सभी स्थानों से नीचा होना चाहिए।
वास्तु के कुछ उलझे नियम
नीचे होने के कारण बारिश का पानी इसी ओर से बाहर निकलता है। यह शुभ माना गया है, क्योंकि वर्षा का पानी पूर्ण शुद्ध जल होता है। इसी ओर चापाकल या भूमिगत पानी की टंकी होना भी शुभ है। सकारात्मक ऊर्जा सदैव प्राप्त हो इसलिए दैव प्रतिष्ठा भी इसी कोण में की जानी चाहिए। यदि ईशान ठीक हो, तो मानसिक कष्ट, धन का अपव्यय व स्वास्थ्य संबंधी कष्ट नहीं होते हैं। इस ओर चटकीले व हल्के रंगों का उपयोग करना चाहिए। नैर्ऋत्य ऊंचा व सूखा होना: नैर्ऋत्य कोण में वास्तु पुरुष के पैर होते हैं। वास्तु पुरुष स्थिर रह सके इसलिए यह कोण ठोस, ऊंचा व सूखा रहना चाहिए। यदि कोण नीचा होता है, तो रहने वाले निश्चय ही रोग का शिकार हो जाते हैं। यदि यह खुला हो, तो सकारात्मक ऊर्जा का निकास हो जाता है और नकारात्म ऊर्जा जातक को रोगी बना देती है।
आपके घर का वास्तु और उनका फर्नीचर से संबंध
फर्नीचर भले ही घर का बेहद जरूरी हिस्सा है, लेकिन इसके इस्तेमाल में वास्तु के निर्देशों की जरूरत कम पड़ती है। असल में फर्नीचर का बिना सोचे-समझे इस्तेमाल करके आप वास्तु खराब कर सकते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में जो हम फर्नीचर लाते है वो हमारी सफलता, तरक्की, खुशियां लेकर आती है। इसलिए कभी भी फर्नीचर सोचे-समझकर ही घर लाना चाहिए। जिससे आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा रहें।
बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो वास्तु दोष में यकीन रखते हैं और उसी हिसाब से घर का नक्शा, डेकोरेशन और फर्नीचर का सामान सेट करते हैं। हम सब अपने घर को सुंदर और जरूरतों को पूरा करने को हर चीज अपने हिसाब से रखते है। इन्ही में से एक है फर्नीचर। जो कि हमारे घर का एक जरुरी हिस्सा है।
आपके घर का वास्तु और उनका फर्नीचर से संबंध
सही फर्नीचर के चुनाव के लिए इस बात पर ध्यान देना बहुत आवश्यक है। यदि आप लकड़ी के फर्नीचर का चुनाव करते हैं तो फर्नीचर की फिनिशिंग की अच्छी तरह जांच कर लें। यदि फिनिशिंग अच्छी नहीं है तो रंग ख़राब होने की संभावना बढ़ जाती है। विश्वसनीयता प्राप्त करने के लिए ब्रांडेड उत्पाद खरीदने का प्रयत्न करें। शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जहां फर्नीचर की जरूरत नहीं पड़ती है। फर्नीचर केवल घर की जरूरत ही नहीं होते हैं, बल्कि यह घर की खूबसूरती को भी बढ़ा देते हैं। हमेशा फर्नीचर सोच-समझकर ही खरीदना चाहिए। जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। कई घरों में तो केवल खूबसूरती बढ़ाने के लिए फर्नीचर रखे जातें हैं। काम के फर्नीचर अलग से रखे जाते हैं। आपको शायद पता ना हो लेकिन घर के वास्तु बनाने और बिगड़ने में फर्नीचर का बहुत बड़ा योगदान होता है। फर्नीचर का आकार और उसकी कीमत घर के वास्तु पर असर डालती है और कई बार आपकी आर्थिक स्थिति को भी काफी नुकसान पहुंचता है। अगर आप भी घर के लिए फर्नीचर खरीद रहे हैं या बनवा रहे हैं, तो वास्तु के कुछ नियमों को अपनाकर होने वाली परेशानियों से बच सकते हैं।
आपके घर का वास्तु और उनका फर्नीचर से संबंध
जब भी कभी फर्नीचर खरीदें, तो इस बात का जरुर ध्यान रखें कि वह किस तरह की लकड़ी से बनी है। यानि की हमेशा नीम, शीशम, अशोका, चंदन, सागवान, साल, अर्जुन से बनी हो। वही फर्नीचर खरीदें।
अगर आप फर्नीचर में किसी भी तरह की डिजाइन बनवाना चाहते है, तो उसमें फूल, मछली, सूरज. राधा-कृष्ण, गाय हाथी आदि की आकृति बनाएं। इसके साथ ही डार्क पॉलिश न करा कर हल्के रंग की पॉलिश कराएं। यह शुभ साबित होगा।
कई बार होता है कि फर्नीचर बनवाते समय हम किनारे नुकीले कर देते है। जो कि सही नहीं है। यह आपके लिए हानिकारक साथ ही घर में नकारात्मक ऊर्जा भी लाता है। इसलिए हमेशा गोल आकार में ही किनारा बनवाएं।
अगर आप ऑफिर में फर्नीचर का इस्तेमाल करना चाहते है, तो स्टील का खरीदें। इससे सकारात्मक ऊर्जा आने के साथ-साथ धन की वृद्धि होती है।
अगर बेड के हेडबोर्ड की डायरेक्शन साउथ या वेस्ट में हो, तो आपको हेडबोर्ड के सामने वाली दीवार को डेकोरेट करना चाहिए। इससे उस बेड पर सोने वाली की सेहत अच्छी रहती है।
आपके घर का वास्तु और उनका फर्नीचर से संबंध
घर का फर्नीचर भी सही हालत में होना आवश्यक है। वास्तुविद पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की वास्तु के अनुसार फर्नीचर में टूट-फूट अशुभ मानी जाती है। घर में वास्तु दोष होने से पैसों की कमी बनी रहती है, इसलिए इसका निवारण तुरंत करना चाहिए।
ऑफिस के लिए स्टील फर्नीचर का भी प्रयोग किया जा सकता है। ऑफिस में इसके इस्तेमाल से पॉजिटिव एनर्जी और पैसों का फ्लो बना रहता है।
जरुरत से ज्यादा कॉर्नर्स वाले फर्नीचर को शुभ नहीं माना जाता है। इसलिए कोशिश करें कि घर में कम से कम कॉर्नर फर्नीचर बनवाएं
फर्नीचर या फर्नीचर बनाने वाली लकड़ी किसी शुभ दिन ही खरीदें। कभी भी शनिवार, अमावस्या या फिर मंगलवार को न खरीदें।
घर में वुडवर्क का काम हमेशा साउथ या वेस्ट डायरेक्शन में शुरू करें और नार्थ-ईस्ट में खत्म। ऐसा करना घर के लोगों की तरक्की के लिए अच्छा माना जाता है।
फर्नीचर बनाने के लिए खरीदी लकड़ी को नॉर्थ, ईस्ट या नॉर्थ-ईस्ट डायरेक्शन में न रखें। इससे फर्नीचर बनाने की प्रोसेस में देरी हो सकती है और मनी फ्लो भी प्रभावित होगा।
ध्यान रखे कि फर्नीचर की लकड़ी किसी शुभ पेड़/वृक्ष (पॉज़िटिव ट्री) की हो। जैसे शीशम, चंदन, अशोका, सागवान, साल, अर्जुन या नीम। इससे बना फर्नीचर शुभ फल देने वाला होता है।
आपके घर का वास्तु और उनका फर्नीचर से संबंध
आप फर्नीचर में राधा-कृष्ण, फूल, सूरज, शेर, चीता, मोर, घोड़ा, बैल, गाय, हाथी और मछली की आकृति बनवा सकते हैं। फर्नीचर पर हमेशा हल्की पॉलिश का इस्तेमाल करें। डार्क और डल कलर्स निगेटिविटी फैलाते है।
फर्नीचर के किनारे गोलाकार होने चाहिए। नुकीले किनारे न सिर्फ खतरनाक होते हैं, बल्कि ये खराब एनर्जी भी छोड़ते हैं। अगर आपका फर्नीचर छत से टकरा रहा है, तो इसकी ऊंचाई कम करवा लें।
हल्का फर्नीचर हमेशा नॉर्थ और ईस्ट में रखें और भारी फर्नीचर साउथ और वेस्ट में रखें। इस बात का ध्यान न रखने पर पैसों का नुकसान हो सकता है।
अपने बेडरूम में बिजली की आइटम न रखें, चाहे वह टी.वी., कंप्यूटर, लैपटॉप या कोई अन्य वस्तु ही क्यूं ना हो। यह एनर्जी को ब्लॉक करते हैं। इन्हें रखने से आपके मन का सुकून खत्म होता है।
अगर बेड को दीवार के नजदीक सटा कर रख रहे हैं तो यह जरुर देख लें कि सिर के पीछे की दीवार काफी मजबूत हो। आपका सिर ना तो दीवार के कोने में हो और ना ही किसी अल्मारी के पीछे। इसके साथ ही सोते समय आपके पैर भी दीवार की ओर नहीं होने चाहिए। यह मृत्यु के समय की स्थिति होती है इसलिये कभी भी ऐसे ना सोएं।
सोने की सही दिशा
सोने की सही दिशा (Sleeping Direction) – अच्छा स्वास्थ्य काफी कुछ हमारे सोने की अवस्था पर भी निर्भर करता हैं. जैसे यदि आप अपना सिर दक्षिण दिशा की ओर करके सोते हैं तो आपका स्वास्थ्य हमेशा ठीक रहेगा. इसके अलावा यदि आपको पित्त की शिकायत हैं तो आप अपने दाहिने हाथ की ओर करवट लेकर सो सकते हैं तथा यदि आपको कफ की शिकायत हैं. तो वास्तुशास्त्र के अनुरूप आपको बाई और करवट लेकर सोना चाहिए |
पलंग (Bed) – वास्तुशास्त्र में यह मान्यता हैं कि हमेशा पलंग की लम्बाई सोने वाले व्यक्तियों की लम्बाई से अधिक होनी चाहिए. इसके साथ ही पलंग पर छोटा या बड़ा कैसा भी दर्पण नहीं लगा होना चाहिए. क्योंकि यदि दर्पण लगा होगा और सोने से पहले आप उसमें अपना प्रतिबिम्ब देखते हैं तो इससे आपकी सेहत को नुकसान पहुँचता हैं और आपकी आयु भी कम होती हैं.
दर्पण (Mirror)
दर्पण (Mirror) – कभी भी दर्पण को अपने कमरे के ऐसे स्थान पर न लगायें जहाँ से आपको अपना प्रतिबिम्ब लेटी हुई अवस्था में दिखाई दें. इसके सतह ही बेड को कभी भी दीवार के कोने से सटाकर बिल्कुल न रखें. क्योंकि इसका असर भी आपकी सेहत पर पड़ता हैं.
बीम (Beem) – घर बनवाते समय बीम को भी घर के बीचों बीच न बनवाएं. क्योंकि इससे दिमाग से सम्बन्धित परेशानियाँ उत्पन्न हो सकती हैं.
अक्सर लोग अपने घरों में फर्नीचर ड्राइंग रूम के बीच में रखते हैं लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के बीच में फर्नीचर नहीं रखने चाहिए. घर के बीच का स्थान ब्रहमस्थल होता हैं. इस स्थान में किसी तरह के पत्थर का या कंकरीट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए तथा प्रयास करना चाहिए कि यह स्थाम अधिकतर खाली ही रहे. क्योंकि इससे घर के सदस्यों की तबियत अधिकतर समय ख़राब रहती हैं.
बिना तोड़-फोड़ के कैसे दूर करें वास्तु दोष?
यदि घर में पानी का फ्लो ठीक न हो या पानी की सप्लाई सही दिशा से न हो, तो उत्तर-पूर्व दिशा से यानी ईशान कोण से भूमिगत पानी की टंकी का निर्माण कर उसी से घर में पानी की सप्लाई करें. ऐसा करने से यह वास्तु दोष दूर हो जाएगा और पानी की ग़लत दिशा से सप्लाई भी बंद हो जाएगी.
– घर का आगे का हिस्सा ऊंचा व पीछे का भाग नीचा हो, तो निचले भाग में डिश एंटीना, टीवी एंटीना आदि को अगले भाग से ऊंचा कर लगा दें. इससे यह वास्तु दोष पूरी तरह से दूर हो जाएगा.
– घर में जो घड़ियां बंद पड़ी हों, उन्हें या तो घर से हटा दें या रिपेयर करवा लें. बंद घड़ियां हानिकारक होती हैं. इनसे नकारात्मक ऊर्जा निकलती हैं.
– यदि घर का प्लास्टर उखड़ गया हो या दरारें पड़ गई हों, तो उसे तुरंत रिपेयर करवा दें.
– किचन के दरवाज़े के ठीक सामने बाथरूम का दरवाज़ा हो, तो यह नकारात्मक ऊर्जा देगा. इस दोष से बचने के लिए बाथरूम या किचन के बीच में एक कपड़े का परदा या किसी अन्य प्रकार का पार्टिशन खड़ा कर सकते हैं, ताकि किचन से बाथरूम दिखाई न दे.
आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण की मध्य की दिशा) में किचन न होने पर गैस चूल्हे को किचन के आग्नेय कोण में रखकर दोष का निवारण किया जा सकता है.
– यदि उपरोक्त उपाय नहीं कर सकते, तो आग्नेय कोण में ज़ीरो पावर का बल्ब जलाकर भी इस दोष से बचा जा सकता है.
– यदि ईशान में बोरिंग या अंडरग्राउंड टैंक आदि न बनवा सके हों, तो ईशान में एक सिंपल पानी की टंकी लगवाकर दोष का निवारण कर सकते हैं.
बिना तोड़-फोड़ के कैसे दूर करें वास्तु दोष?
यदि भूखंड चौकोर नहीं हो, तो यह ज़रूर देख लें कि लंबाई चौड़ाई की दुगुनी से अधिक न हो. यदि लंबाई चौड़ाई से दुगुनी हो, तो अतिरिक्त भूभाग पर इंडिविज़ुअल कुछ डेवलप किया जा सकता है.
– फेंगशुई के अनुसार, घर के पूर्वोत्तर दिशा में तालाब या फाउंटेन शुभ होता है, पर इसके पानी का बहाव घर की ओर होना चाहिए न कि बाहर की ओर.
– घर के वास्तु दोष को दूर करने के लिए घर में इलेक्ट्रिकल उपकरण, जो कर्कश आवाज़ पैदा करते हों, जैसे- पंखे, कूलर आदि की समय-समय पर मरम्मत करवाते रहें.
– दरवाज़ों के कब्जों में तेल डालते रहें, वरना दरवाज़ा खोलते या बंद करते समय आवाज़ आती है, जो वास्तु के अनुसार अशुभ व नुक़सानदायक होती है.
– यदि आप वैवाहिक जीवन में ख़ुशियां चाहते हैं, तो बेडरूम की साफ़-सफ़ाई व ख़ूबसूरती पर भी विशेष ध्यान दें. बेडरूम शांत, ठंडा, हवादार व बिना दबाववाला होना चाहिए. बेडरूम में बेकार का सामान न रखें.
बिना तोड़-फोड़ के कैसे दूर करें वास्तु दोष?
बेडरूम में प्राइवेसी बरक़रार रहे, इसके लिए ध्यान रखें कि बेडरूम की खिड़की दूसरे कमरे में नहीं खुलनी चाहिए.
– बेडरूम की आवाज़ बाहर नहीं आनी चाहिए. इससे दांपत्य जीवन में मिठास बनी रहती है.
– बेडरूम की दीवारों पर पेंटिंग्स व तस्वीरें कम, मनभावन व आकर्षक हों.
– बेडरूम में पलंग आवाज़ करनेवाला न हो और सही दिशा में रखा हो. सोते समय सिर दक्षिण की ओर होना चाहिए. आरामदायक व भरपूर नींद से दांपत्य जीवन अधिक सुखद बनता है.
– बाथरूम बेडरूम से लगा हुआ होना चाहिए. बाथरूम का दरवाज़ा बेडरूम में खुलता हो, तो उसे बंद रखना चाहिए या फिर उस पर परदा भी डाल सकते हैं.
– बेडरूम में सोते समय ज़ीरो वॉट का बल्ब जलाना चाहिए, पर ध्यान रहे कि रोशनी सीधी पलंग पर नहीं पड़नी चाहिए.
– फेंगशुई में कछुए को शुभ माना जाता है. इसे घर में रखने से धन-दौलत व सुख-समृद्धि बनी रहती है. इसे अपने घर या ऑफिस की उत्तर दिशा में रखें. ध्यान रहे, कछुए को जब भी रखें, तो उसका चेहरा अंदर की ओर होना चाहिए, तभी दिशा शुभ होगी. इसे कभी जोड़े में न रखें.
बिना तोड़-फोड़ के कैसे दूर करें वास्तु दोष?
फेंगशुई से वास्तु दोष निवारण में कछुआ अहम् भूमिका निभाता है और यदि आपके घर में कछुआ है, तो समझ लीजिए आप बीमारी व शत्रुओं से दूर ही रहेंगे.
– परिवार की ख़ुशहाली व स्वास्थ्य के लिए पूरे परिवार की फोटो लकड़ी के फ्रेम में जड़वाकर घर की पूर्व दीवार पर लगाएं.
– लिविंग रूम में जहां घर के सदस्य आमतौर पर इकट्ठा होते हैं, वहां बांस का पौधा रखना चाहिए. पौधे को लिविंग रूम के पूर्व कोने में गमले में रखें.
– बेडरूम में पौधा नहीं रखना चाहिए, पर बीमार व्यक्ति के कमरे में फ्रेश फ्लावर्स रख सकते हैं. लेकिन इन फूलों को रात को कमरे से हटा दें.
– मानसिक शांति के लिए चंदन की अगरबत्ती जलाएं. इससे मानसिक बेचैनी कम हो जाती है.
रसोईघर की दिशा | Direction of Kitchen
वास्तुशास्त्र के अनुसार रसोईघर | Kitchen आग्नेय अर्थात दक्षिण-पूर्व दिशा ( South-East ) में ही होना चाहिए। इस दिशा का स्वामी अग्नि ( आग ) है तथा इस दिशा का स्वामी ग्रह शुक्र होता है। आग्नेय कोण में अग्नि का वास होने से रसोईघर तथा सभी अग्नि कार्य के लिए यह दिशा निर्धारित किया गया है। यदि आपका किचन इस स्थान पर तो सकारत्मक ऊर्जा ( Positive Energy ) का प्रवाह घर के सभी सदस्यों को मिलता है।
आग्नेय कोण/ दिशा का विकल्प | Option of South East Direction
वैसे तो इस दिशा का स्थान कोई अन्य दिशा नहीं ले सकता फिर भी यदि आप किसी कारण से आग्नेय कोण / दिशा में रसोई नही बना सकते तो विकल्प के रूप में आप वायव्य दिशा का चुनाव कर सकते है।
दिशा के अनुरूप रसोईघर / किचन का प्रभाव | Effect of Kitchen according to Direction
रसोईघर की दिशा | Direction of Kitchen
ईशान कोण /दिशा मे रसोईघर | Kitchen in North-East Direction
घर के ईशान कोण मे रसोईघर का होना शुभ नहीं है। रसोईघर की यह स्थिति घर के सदस्यों के लिए भी शुभ नहीं है। इस स्थान में रसोईघर होने से निम्नप्रकार कि समस्या आ सकती है यथा —
खाना बनाने में गृहिणी की रूचि नहीं होना, परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य खराब रहना, धन की हानि, वंश वृद्धि रूक जाना, कम लड़के का होना तथा मानसिक तनाव इत्यादि का सामना करना पड़ता है।
इस दिशा में रसोईघर बनाने से अपव्यय (बेवजह खर्च होना) एवं दुर्घटना होता है अतः भूलकर भी इस दिशा में रसोईघर नहीं बनवाना चाहिए।
उत्तर दिशा मे रसोईघर | Kitchen in North Direction
उत्तर दिशा रसोई घर के लिए अशुभ है। इस स्थान का रसोईघर आर्थिक नुकसान देता है इसका मुख्य कारण है कि उत्तर दिशा धन का स्वामी कुबेर का स्थान है यहाँ रसोईघर होने से अग्नि धन को जलाने में समर्थ होती है इस कारण यहाँ रसोई घर नहीं बनवानी चाहिए। हां यदि गरीबी जीवन या सब कुछ होने हुए भी कुछ नहीं है का रोना रोना है तो आप रसोईघर बना सकते है।
वायव्य कोण मे रसोईघर| उत्तर-पश्चिम दिशा
वायव्य कोण मे रसोईघर| उत्तर-पश्चिम दिशा | Kitchen in North-West Direction
विकल्प के रूप में वायव्य कोण में रसोईघर का चयन किया जा सकता है। परन्तु अग्नि भय का डर बना रह सकता है। अतः सतर्क रहने की जरूरत है।
पश्चिम दिशा मे रसोईघर | Kitchen in West Direction
पश्चिम दिशा में रसोईघर ( Kitchen ) होने से आए दिन अकारण घर में क्लेश ( Quarrel ) होती रहती है कई बार तो यह क्लेश तलाक ( Divorce ) का कारण भी बन जाता है। संतान पक्ष से भी परेशानी आती है।
नैर्ऋत्य कोण मे रसोईघर | दक्षिण-पश्चिम दिशा | Kitchen in South-West Direction
इस दिशा में रसोईघर बहुत ही अशुभ फल देता है। नैऋत्य कोण में रसोईघर बनवाने से आर्थिक हानि तथा घर में छोटी-छोटी समस्या बढ़ जाती है। यही नहीं घर के कोई एक सदस्य या गृहिणी शारीरिक और मानसिक रोग ( Mental disease ) के शिकार भी हो सकते है। दिवा स्वप्न बढ़ जाता है और इसके कारण गृह क्लेश और दुर्घटना की सम्भावना भी बढ़ जाती है।
वायव्य कोण मे रसोईघर| उत्तर-पश्चिम दिशा
दक्षिण दिशा मे रसोईघर | Kitchen in South Direction
दक्षिण दिशा में रसोई घर बनाने से आर्थिक नुकसान हो सकता है। मन में हमेशा बेचैनी बानी रहेगी। कोई भी काम देर से होगा। मानसिक रूप से हमेशा परेशान रह सकते है।
आग्नेय कोण मे रसोईघर | दक्षिण-पूर्व दिशा | Kitchen in South-East Direction
दक्षिण- पूर्व । आग्नेय कोण में रसोई घर बनाना सबसे अच्छा मान गया है। इस स्थान में रसोई होने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है। घर के सदस्य स्वस्थ्य जीवन व्यतीत करते है।
पूर्व दिशा मे रसोईघर | Kitchen in East Direction
पूर्व दिशा में किचन होना अच्छा नहीं है फिर भी विकल्प के रूप में इस दिशा में रसोई घर बनाया जा सकता है। इस दिशा में रसोई होने से पारिवारिक सदस्यों के मध्य स्वभाव में रूखापन आ जाता है। वही एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप भी बढ़ जाता है। वंश वृद्धि में भी समस्या आती है।
रसोईघर के लिए वास्तु टिप्स
रसोईघर का सामान | Correct Direction for Kitchen Goods
रसोईघर / किचन में अनेक प्रकार के सामान होते है जिसमे सबका अपना विशेष महत्त्व होता। रसोईघर में प्रयुक्त होने वाले सामान यदि उचित दिशा में नहीं रखा जाता है तो उसे वास्तु दोष माना जाता है। यह दोष होने पर जातक के घर परिवार में अनेक प्रकार की समस्या तो आती ही है साथ ही गृहिणी ( House Wife ) के स्वास्थ्य के ऊपर इसका असर ज्यादा पड़ता है। अतः यथा सम्भव यह प्रयास करना चाहिए कि सभी सामान वास्तु के अनुरूप निर्धारित दिशा में हो।
किचन / रसोईघर में प्रयोग होने वाले जरुरी सामान | Important Goods for Kitchen
चूल्हा (Gas)
स्लैब (Slab)
सिंक (Sink)
मिक्सी, टोस्टर, जूसर आदि
फ्रीज (Freeze)
एग्जोस्ट फैन (Exhaust Fan)
खाने की मेज (Food Table)
खिड़कियाँ (Windows)
स्टोर (Store)
स्लैब (Slab)
चूल्हा रखने के लिए पत्थर का स्लैब पूर्व तथा उत्तर की ओर बनानी चाहिए ताकि कहना बनाने के समय गृहिणी का मुख या तो उत्तर की ओर हो या पूर्व दिशा की ओर हो।
रसोईघर के लिए वास्तु टिप्स
चूल्हा | Gas
वास्तुशास्त्र के अनुसार चूल्हा आग्नेय कोण या पूर्व में रखना चाहिए। ईशान कोण में चूल्हा नहीं रखना चाहिए यहाँ रखने से संतान कष्ट तथा धन एवं मान सम्मान की हानि होती है।
उत्तर दिशा में चूल्हा रखने से धन की कमी महशुश होती है इसका मुख्य कारण है कि उत्तर दिशा में कुबेर का स्थान है और कुबेर धन का कारक है उस स्थान पर चूल्हा होने से चूल्हा रूपी अग्नि धन को जला देती है।
चूल्हे को कभी भी दीवार से सटा कर नहीं रखना चाहिए।
पानी का नल / सिंक या वाश बेसिन | Sink / Wash Basin
वाश बेसिन रसोई घर का एक महत्त्वपूर्ण उपकरण है। बर्तन धोने के लिए या हाथ धोने के लिए वाश बेसिन का होना बहुत ही जरुरी होता है। सिंक के लिए ईशान कोण ( उत्तर पूर्व) दिशा सबसे शुभ होता है अतः इसी स्थान का चुनाव करना चाहिए।
भंडारण | Store
रसोईघर में प्रयोग होने वाले खाद्य पदार्थ आटा, चावल दाल आदि पश्चिम अथवा दक्षिण दिशा में रखना चाहिए। इस दिशा में आलमारी भी बना सकते है।ऐसा करने से कभी खाने वाली वस्तुओं की कमी नहीं होती बल्कि बरकत होती है।
रसोईघर के लिए वास्तु टिप्स
एग्जोस्ट फैन | Exhaust Fan
एग्जॉस्ट फैन को पूर्वी दीवार पर लगाना श्रेष्ठकर माना गया है।
फ्रीज | Freeze
रसोईघर में बिजली से चलने वाले उपकरण यथा फ्रीज, मिक्सी माईक्रोवेव, टोस्टर जूसर इत्यादि को पश्चिम दिशा में रखना चाहिए। विकल्प के रूप में उत्तर दिशा का भी चुनाव कर सकते है।
खिड़की (Windows)
रसोई घर में उत्तर या पूर्व दिशा की ओर खिड़की रखनी चाहिए।
रसोईघर का दरवाजा (Kitchen Gate)
रसोई घर का प्रवेश द्वार ईशान या फिर उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है।
सम्पूर्ण वास्तु दोष निवारण यन्त्र
1. अपने घर के उत्तरकोण में तुलसी का पौधा लगाएं | 2. हल्दी को जल में घोलकर एक पान के पत्ते की सहायता से अपने सम्पूर्ण घर में छिडकाव करें. इससे घर में लक्ष्मी का वास तथा शांति भी बनी रहती है। 3. अपने घर के मन्दिर में घी का एक दीपक नियमित जलाएं तथा घंटी भी बजाना चाहिए जिससे सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा घर से बहार निकलती है। 4. घर में सफाई हेतु रखी झाडू को रस्ते के पास नहीं रखें. यदि झाडू के बार-बार पैर लगता है, तो यह धन-नाश का कारण होता है। झाडू के ऊपर कोई वजनदार वस्तु भी नहीं रखें। 5. अपने घर में दीवारों पर सुन्दर, हरियाली से युक्त और मन को प्रसन्न करने वाले चित्र लगाएं। इससे घर के मुखिया को होने वाली मानसिक परेशानियों से निजात मिलती है। 6. वास्तुदोष के कारण यदि घर में किसी सदस्य को रात में नींद नहीं आती या स्वभाव चिडचिडा रहता हो, तो उसे दक्षिण दिशा की तरफ सिर करके शयन कराएं। इससे उसके स्वभाव में बदलाव होगा और अनिद्रा की स्थिति में भी सुधार होगा।
सम्पूर्ण वास्तु दोष निवारण यन्त्र
. अपने घर के मन्दिर में देवी-देवताओं पर चढ़ाए गए पुष्प-हार दूसरे दिन हटा देने चाहिए और भगवान को नए पुष्प-हार अर्पित करने चाहिए। 8. घर के उत्तर-पूर्व में कभी भी कचरा इकट्ठा न होने दें और न ही इधर भारी मशीनरी रखें। 9. अपने वंश की उन्नति के लिये घर के मुख्यद्वार पर अशोक के वृक्ष दोनों तरफ लगाएं। 10. यदि आपके मकान में उत्तर दिशा में स्टोररूम है, तो उसे यहाँ से हटा दें। इस स्टोररूम को अपने घर के पश्चिम भाग या नैऋत्य कोण में स्थापित करें। 11. यदि आपके घर का मुख्य द्वार दक्षिणमुखी है, तो यह भी मुखिया के के लिये हानिकारक होता है. इसके लिये मुख्यद्वार पर श्वेतार्क गणपति की स्थापना करनी चाहिए। 12. अपने घर के पूजा घर में देवताओं के चित्र भूलकर भी आमने-सामने नहीं रखने चाहिए इससे बड़ा दोष उत्पन्न होता है।
सम्पूर्ण वास्तु दोष निवारण यन्त्र
13. अपने घर के ईशान कोण में स्थित पूजा-घर में अपने बहुमूल्य वस्तुएँ नहीं छिपानी चाहिए। पूजाकक्ष की दीवारों का रंग सफ़ेद, हल्का पीला अथवा हल्का नीला होना चाहिए। 14. दीपावली अथवा अन्य किसी शुभ मुहूर्त में अपने घर में पूजास्थल में खेत्रपाल की स्थापना करनी चाहिए और नित्य इसकी पूजा करें। खेत्रपाल को दोषयुक्त स्थान पर भी स्थापित करके आप वास्तुदोषों से सरलता से मुक्ति पा सकते हैं। 15. अपने घर में ईशान कोण अथवा ब्रह्मस्थल में स्फटिक श्रीयंत्र की शुभ मुहूर्त में स्थापना करें। यह यन्त्र लक्ष्मीप्रदायक भी होता ही है, साथ ही साथ घर में स्थित वास्तुदोषों का भी निवारण करता है। 16. घर में किसी भी कमरे में सूखे हुए पुष्प नहीं रखने दें। यदि छोटे गुलदस्ते में रखे हुए फूल सूख जाएं, तो नए फूल लगा दें और सूखे पुष्पों को निकालकर बाहर फेंक दें। 17. सुबह के समय थोड़ी देर तक निरंतर बजने वाली नवकार मन्त्र धुन या भक्तामर स्त्रोत्र के पाठ की धुन घर में बजने दें। इसके अतिरिक्त कोई अन्य धुन भी आप बजा सकते हैं। 18. सायंकाल के समय घर के सभी सदस्य मिलकर आरती करें। इससे भी वास्तुदोष दूर होते हैं।
वास्तुदेव का पूजन:-
सुख, शांति समृद्धि के लिए निर्माण के पूर्व वास्तुदेव का पूजन करना चाहिए एवं निर्माण के पश्चात् गृह-प्रवेशके शुभ अवसर पर वास्तु-शांति, होम इत्यादि किसी योग्य और अनुभवी ब्राह्मण, गुरु अथवा पुरोहित के द्वारा अवश्य करवाना चाहिए। लंबाई चैड़ाई को तीन भागों में विभक्तकिया जाए तो ऐसे भूखंड या भवन का मध्यवर्ती हिस्सा ब्रह्म स्थान कहलाता है। ब्रह्म स्थान धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण
होता है अतः इसे स्वच्छ रखा जाना चाहिए। ब्रह्म स्थान में तलघर, पाकशाला, पशुशाला, सेप्टिक टैंक, शौचालय, शयन कक्ष,
स्नान गृह, स्वीमिंग पूल, स्टोर रूम, कुआं, बोरिंग, वाटर-टैंक आदि नहीं बनाने चाहिए। ब्रह्म स्थान में सफेद रंग शुभ होता है।
नवरत्नों में माणिक्य का, पंचदशी यंत्र में पंचांक का और नवग्रह यंत्र में सूर्य का जो स्थान है वही स्थान मकान के ब्रह्म स्थान
का स्थान है। यदि भवन निर्माण की जगह को नौ बराबर-बराबर वर्गों में विभाजित किया जाए तो पांचवंे वर्ग वाली जगह ब्रह्म
स्थान की जगह होगी। इसे छोड़कर शेष आठ वर्गों की जगह पर पांच तत्वों के अनुरूप निर्माण करना चाहिए। यदि चीनी वास्तु
फेंगशुई के चमत्कारी कहे जाने वाले ‘लो- शु’ वर्ग पर ध्यान दें तो हम पाएंगे कि उसका केंद्रीय पंचम वर्ग ‘सेहत’ का होता है। इसे
भारतीय वास्तु के ब्रह्म स्थान का रहस्य माना जा सकता है। ब्रह्म स्थान आकाश तत्व वiला मना जाता है।
इसको खुला रखना इसलिए जरूरी है कि भवन में रहने वालों को आकाश की ओर से आने वाली नैसर्गिक ऊर्जाएं वास्तुदेव का पूजन:-
सतत प्राप्त होती रहें। चूंकि ब्रह्मांड में आकाशीय तत्वों का बाहुल्य है एवम् मानव मस्तिष्क का नियामक आकाश
ही है अतः सुख, संपदा, स्वास्थ्य और दीर्घायु के निमित्त वास्तु में ब्रह्म स्थान की महत्ता का प्रतिपादन वास्तु शास्त्र करता है।
पुराने समय में भगवान ब्रह्मा के निमित्त घर के बीच वाले स्थान में चैक या आंगन बनाया जाता था। ब्रह्म स्थान खुला रखने से घर
को वायु व प्रकाश भरपूर मिलता है और उस भवन में वास करने वाले सुखी, समृद्ध व स्वस्थ रहते हैं। स्वस्तिक मिटाता है वास्तुदोष शुभ
मांगलिक पर्वों के अवसर पर पूजा-घर, द्वार की चैखट और प्रवेश द्वार के आसपास अथवा घर की दीवारों पर प्राचीन समय से
ही स्वस्तिक चिह्न लगाने की प्रथा रही है। यह एक शुभ मंगल चिह्न है जिसे लगाने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। इसे
लगाने से आत्म संतुष्टि, शांति, एकाग्रता आदि की प्राप्ति और सदबुद्धि, प्रगति, पारिवारिक सौहार्द आदि में वृद्धि होती है।
साथ ही द्वेष भावना का शमन और कार्यक्षमता का विकास होता है। इस तरह स्वस्तिक शुभ होता है। हिंदू धर्म और संस्कृति में
रोली, हल्दी या सिंदूर से भी स्वस्तिक बनाने की प्रथा है। भवन के मुख्य द्वार की चैखट पर सोना, चांदी, तांबा अथवा पंचधातु से
निर्मित ‘स्वस्तिक’ की प्राण प्रतिष्ठा करवाकर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश आरै सकारात्मक ऊर्जा का विकास
होने लगता है, घर की स्थिति अनुकूल होने लगती है। स्वस्तिक वास्तु दोष को दूर करता है। नौ अंगुल की लंबाई चैड़ाई
वाला स्वस्तिक स्थापित करने से शीघ्र शुभ प्रभाव देने वाला होता है। घर, दुकान, निजी कार्यालय आदि के प्रत्येक कमरे
की पूर्वी दीवार पर शुभ मुहूर्त में स्वस्तिक यंत्र की स्थापना करने से विभिन्न वास्तु दोषों का शमन हो जाता है।
वास्तुदेव का पूजन:-
श्री गणेश
जी की मूर्ति की तरह ही स्वस्तिक यंत्र भी सौ हजार बोविस धनात्मक ऊर्जा उत्पन्न करने में सक्षम होता है। उसके इस गुण के
कारण कई वास्तु दोष दूर हो जाते हैं। गुरु पुष्यामृत योग, रविपुष्य योग, दीवाली, गणेश चतुर्थी, नव संवत्सरारंभ, नव वर्ष के दिन,
बुधवार को अथवा अपने मन को अच्छी लगने वाली किसी शुभ तिथि या पर्व आदि के दिन इसे लगाया जा सकता है। प्लास्टिक,
कांच, लोहे लकड़ी, स्टील या टिन का स्वस्तिक प्रयोग में नहीं लाना चाहिए। स्वस्तिक का उपयोग कोई भी कर सकता है।
इसे प्रतीक के रूप में अंगूठी और लाॅकेट में धारण कर लोग स्वयं को ऊर्जावान महसूस करते हैं। गृह-निर्माण आदि के समय निर्माण
कार्य जनित कई प्रकार के वास्तु दोष रह जाना आम बात होती है। निर्माण के बाद हर जगह सुधार, कार्य, मरम्मत,
तोड़फोड़, काट-छांट के जरिए वास्तु दोष हटाना संभव नहीं होता। ऐसी स्थिति में , स्वस्तिक आदि शुभ
चिह्नों आदि के उपयोग से वास्तु दोषों का शमन होता है।इसी तरह बिना तोड़-फोड़ किए धर्म, ज्योतिष और वास्तु से
संबंधित कुछ विशेष प्रकार के मंत्र युक्त यंत्र वास्तु दोष मिटाने में सहायक होते हैं इनमें कुछ यंत्रों का उल्लेख यहां प्रस्तुत है।
दुर्गा बीसा यंत्र:
दुर्गा बीसा यंत्र:
दुर्गा देवी के नवार्ण मंत्र की शक्ति से युक्त इस सिद्ध बीसा यंत्र को प्राण प्रतिष्ठत करा कर दुकान के मुख्य द्वार पर स्थापित किया जाता है।
गृह का आकार :-
जिस भूखंड की लंबाई अधिक तथा चौड़ाई कम हो, समकोण वाली उस भूमि को आयताकार भू-खंड (प्लॉट) कहते हैं। इस प्रकार
की भूमि सर्वसिद्धि दायक होती है।
'स्तिाराद् द्विगुणं गेहं गृहस्वामिविनाशनम्' (विश्वकर्मा प्रकाश 2/109)- चौड़ाई से
दुगनी या उससे अधिक लंबाई की आयताकार लंबा मकान 'सूर्यवेधी' और उत्तर से दक्षिण की ओर लंबा मकान 'चंद्रवेधी'
होता है। चंद्रवेधी मकान धन-समृद्धिदायक है, किंतु जल-संग्रह की दृष्टि से सूर्यवेधी शुभ होता है, चंद्रवेधी मकान में
पानी की समस्या रहती है। ब्रह्ममुहूर्त काल में सूर्य उत्तर पूर्वी भाग में रहता है। यह समय योग-ध्यान, भजन-पूजन और चिंतन-
मनन का है। ये क्रियाएं सफलता पूर्वक सम्पन्न हों, इस हेतु मकान के उत्तर पूर्व की दिशा में खिड़की या दरवाजा अवश्य
होना चाहिए। जिससे हमें अरुणोदय का लाभ मिल सके। प्रातः 6 से 9 बजे तक सूर्य पूर्व दिशा में रहता है, इसलिए घर का पूर्वी भाग
अधिक खुला रखना चाहिए। जिससे सूर्य की रोशनी अधिक कमरे में आ सके। तभी हम सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा का लाभ
उठा पाऐंगे। गृहनिर्माण आरंभ और गृह प्रवेश के समय विभिन्न देवताओं के रूप में सूर्यदेव का ही पूजन होता है ताकि प्राण
ऊर्जा देने वाले आरोग्य के देवता सूर्य का सर्वाधिक लाभ मिल सके। सूर्य रश्मियों की जीवनदायिनी प्राणऊर्जा का भरपूर
लाभ उठाने के लिए वास्तु शास्त्र में पूर्व दिशा की प्रधानता को स्वीकार किया गया है। गृहारंभ मुहूर्त से
गृह प्रवेश तक सूर्य का प्रधानता से विचार किया जाता है।
गृहारंभ की नींव :-
गृहारंभ की नींव :-
वैशाख, श्रावण, कार्तिक, मार्गशीर्ष और फाल्गुन इन चंद्रमासों में गृहारंभ शुभ होता है। इनके अलावा अन्य चंद्रमास अशुभ होने के कारण
निषिद्ध कहे गये हैं। वैशाख में गृहारंभ करने से धन धान्य, पुत्र तथा आरोग्य की प्राप्ति होती है। श्रावण में धन, पशु और मित्रों की वृद्धि होती है।
कार्तिक में सर्वसुख।मार्गशीर्ष में उत्तम भोज्य पदार्थों और धन की प्राप्ति। फाल्गुन में गृहारंभ करने से धन तथा सुख की प्राप्ति और वंश वृद्धि होती है।
किंतु उक्त सभी मासों में मलमास का त्याग करना चाहिए। गृहारंभ और सौरमास : गृहारंभ के मुहूर्त में
चंद्रमासों की अपेक्षा सौरमास अधिक महत्वपूर्ण, विशेषतः नींव खोदते समय सूर्य संक्रांति विचारणीय है। पूर्व कालामृत का कथन
है- गृहारंभ में स्थिर व चर राशियों में सूर्य रहे तो गृहस्वामी के लिए धनवर्द्धक होता है। जबकि द्विस्वभाव (3, 6, 9, 12) राशि गत सूर्य
मरणप्रद होता है। अतः मेष, वृष, कर्क, सिंह, तुला, वृश्चिक, मकर और कुंभ राशियों के सूर्य में गृहारंभ करना शुभ रहता है। मिथुन, कन्या,
धनु और मीन राशि के सूर्य में गृह निर्माण प्रारंभ नहीं करना चाहिए।
गृहारंभ की नींव :-
महाकवि कालिदास और महर्षि वशिष्ठ अनुसार तीन-तीन चंद्रमासों में वास्तु पुरुष की दिशा निम्नवत् रहती है।
भाद्रपद, कार्तिक, आश्विन मास में ईशान की ओर। फाल्गुन, चैत्र, वैशाख में नैत्य की ओर। ज्येष्ठ, आषाढ, श्रावण में आग्नेय कोण की ओर।
मार्गशीर्ष, पौष, माघ में वायव्य दिशा की ओर वास्तु पुरुष का मुख होता है। वास्तु पुरुष का भ्रमण ईशान से बायीं ओर अर्थात् वामावर्त्त होता है।
वास्तु पुरुष के मुख पेट और पैर की दिशाओं को छोड़कर पीठ की दिशा में अर्थात् चौथी, खाली दिशा में नींव की खुदाई शुरु करना उत्तम रहता है।
महर्षि वशिष्ठ आदि ने जिस वास्तु पुरुष को 'वास्तुनर' कहा था, कालांतर में उसे ही शेष नाग, सर्प, कालसर्प और राहु
की संज्ञा दे दी गई। अतः पाठक इससे भ्रमित न हों। मकान की नीवं खोदने के लिए सूर्य जिस राशि में हो उसके अनुसार राहु
या सर्प के मुख, मध्य और पुच्छ का ज्ञान करते हैं। सूर्य की राशि जिस दिशा में हो उसी दिशा में, उस सौरमास राहु
रहता है। जैसा कि कहा गया है- ''यद्राशिगोऽर्कः खलु तद्दिशायां, राहुः सदा तिष्ठति मासि मासि।'' यदि सिंह,
कन्या, तुला राशि में सूर्य हो तो राहु का मुख ईशान कोण में और पुच्छ नैत्य कोण में होगी और आग्नेय कोण खाली रहेगा। अतः उक्त
राशियों के सूर्य में इस खाली दिशा (राहु पृष्ठीय कोण) से खातारंभ या नींव खनन प्रारंभ करना चाहिए। वृश्चिक, धनु, मकर
राशि के सूर्य में राहु मुख वायव्य कोण में होने से ईशान कोण खाली रहता है। कुंभ, मीन, मेष राशि के सूर्य में राहु मुख नैत्य कोण
में होने से वायव्य कोण खाली रहेगा। वृष, मिथुन, कर्क राशि के सूर्य में राहु का मुख आग्नेय कोण में होने से नैत्य
दिशा खाली रहेगी। उक्त सौर मासों में इस खाली दिशा (कोण) से ही नींव खोदना शुरु करना चाहिए। अब एक प्रश्न उठता है
कि हम किसी खाली कोण में गड्ढ़ा या नींव खनन प्रारंभ करने के बाद किस दिशा में खोदते हुए आगे बढ़ें? वास्तु पुरुष या सर्प
का भ्रमण वामावर्त्त होता है। इसके विपरीत क्रम से- बाएं से दाएं/दक्षिणावर्त्त/क्लोक वाइज नीवं की खुदाई करनी चाहिए।
यथा आग्नेय कोण से खुदाई प्रारंभ करें तो दक्षिण दिशा से जाते हुए नैत्य कोण की ओर आगे बढ़ें। विश्वकर्मा प्रकाश में
बताया गया है- 'ईशानतः सर्पति कालसर्पो विहाय सृष्टिं गणयेद् विदिक्षु। शेषस्य वास्तोर्मुखमध्य -पुछंत्रयं परित्यज्यखनेच्चतुर्थम्॥'
वास्तु रूपी सर्प का मुख, मध्य और पुच्छ जिस दिशा में स्थित हो उन तीनों दिशाओं को छोड़कर चौथी में नींव खनन आरंभ
करना चाहिए। इसे हम निम्न तालिका के मध्य से आसानी से समझ सकते हैं।
शिलान्यास :-
गृहारंभ हेतु नींव खात चक्रम और वास्तुकालसर्प दिशा चक्र में प्रदर्शित की गई सूर्य की राशियां और राहु पृष्ठीय कोण नींव खनन के साथ-साथ शिलान्यास करने, बुनियाद भरने हेतु, प्रथम चौकार अखण्ड पत्थर रखने हेतु, खम्भे (स्तंभ) पिलर बनाने हेतु इन्ही राशियों व
कोणों का विचार करना चाहिए। जो क्रम नींव खोदने का लिखा गया था वही प्रदक्षिण क्रम नींव भरने का है। आजकल
मकान आदि बनाने हेतु आर.सी.सी. के पिलर प्लॉट के विभिन्न भागों में बना दिये जाते हैं। ध्यान रखें, यदि कोई पिलर राहु मुख
की दिशा में पड़ रहा हो तो फिलहाल उसे छोड़ दें। सूर्य के राशि परिवर्तन के बाद ही उसे बनाएं तो उत्तम रहेगा। कतिपय
वास्तु विदों का मानना है कि सर्व प्रथम शिलान्यास आग्नेय दिशा में करना चाहिए।
घर का मुख्य द्वार वास्तु शास्त्र के अनुसार कैसा और कहाँ होना चाहिए?
ऐसा माना जाता है कि हमारे शरीर में जितना महत्व मुख का होता है उतना ही महत्व घर के मुख्य द्वार का होता है। घर का मुख्य द्वार घर के बाकी सभी द्वारों से बड़ा होना चाहिए।
मुख्य द्वार के लिए पूर्व या उत्तर दिशा सबसे अच्छी मानी जाती है और जहाँ तक संभव हो, घर का मुख्य द्वार मध्य पश्चिम या दक्षिण में नहीं बनाना चाहिए।
मुख्य द्वार चार भुजाओं की चौखट वाला होना चाहिए यानी इसमें दहलीज भी होनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि दहलीज आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश को रोकती है।
घर के मुख्य द्वार पर रोशनी की अच्छी व्यवस्था रखनी चाहिए।
अगर आपके घर के शुरुआत में पर्याप्त स्थान है तो आपको दो दरवाजे बनवाने चाहिए। एक अंदर आने के लिए और एक बाहर जाने के लिए।
अगर आप दो दरवाजे बनवाते हैं तो ये ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है कि बाहर जाने वाले द्वार का आकार, अंदर आने वाले मुख्य द्वार से छोटा होना चाहिए।
मुख्य द्वार के दोनों तरफ और ऊपर कुमकुम, रोली, केसर और हल्दी को मिलाकर स्वास्तिक या ॐ का चिन्ह बनाना चाहिए।
घर का मुख्य द्वार वास्तु शास्त्र के अनुसार कैसा और कहाँ होना चाहिए?
अगर घर दक्षिण या पश्चिम मुखी हो तो उसमें कभी भी सिर्फ एक ही मुख्य द्वार नहीं बनवाना चाहिए।
मुख्य द्वार हमेशा अंदर और घड़ी की दिशा में ही खुलना चाहिए।
मुख्य द्वार को खोलने और बंद करने में किसी तरह की आवाज़ नहीं होनी चाहिए।
अगर एक द्वार के ऊपर दूसरा द्वार बनवाना पड़े तो ये ध्यान रखें कि ऊपर वाला द्वार मुख्य द्वार से छोटा होना चाहिए और एक सीध में होना चाहिए।
घर का मुख्य द्वार और रसोई आमने-सामने नहीं होने चाहिए लेकिन अगर आपके घर में ऐसी स्थिति है तो रसोई घर के दरवाजे पर पर्दा लगा लें।
घर के वास्तु दोष को कम करने के लिए, घर के मुख्य द्वार पर 4*4 इंच का ताम्बे से निर्मित वास्तु दोष निवारण यंत्र लगाया जा सकता है।
मुख्य द्वार से सम्बंधित वास्तु दोष को दूर करने के लिए इस द्वार पर घंटियों की झालर लगायी जा सकती है जिससे उत्पन्न होने वाली आवाज़ नकारात्मक ऊर्जा को घर से दूर रखेगी।
वास्तु गुरु द्वारा वास्तु सम्बन्धी शंकाओं का समाधान
यदि बड़े मकान के छोटे से भाग में वास्तुदोष होने से पूरा मकान ही वास्तुदोष युक्त हो जाता है, तो क्या ऐसे में दोषपूर्ण भाग की परिवार के ही किसी दूसरे सदस्य के नाम से रजिस्ट्री करने से क्या वह दोष समाप्त हो सकता है?
उत्तर : कई मकानों के थोड़े से भाग में वास्तुदोष इस प्रकार होते है कि उस भाग को अलग कर दिया जाए तो बचा हुआ मुख्य भाग पूर्णतः वास्तुनुकूल बन जाता है। ऐसे मामलों में कई वास्तुविद् इस तरह की सलाह देते है कि आप इस भाग को अलग न करे यदि इस भाग की रजिस्ट्री या लिखा-पढ़ी दूसरे के नाम कर दें तो यह दोष समाप्त हो जाएगा जो कि पूर्णतः अवैज्ञानिक है। सम्पत्ति का किसी व्यक्ति के नाम से होना या करना यह सब हमारी अपनी सामाजिक व्यवस्था है। सूर्य की किरणों एवं पृथ्वी पर बहने वाली चुबंकीय धाराओं को इन बातों से कोई मतलब नहीं होता। वास्तुशास्त्र के अनुसार एक चारदीवार के अंदर का स्थान एक वास्तु कहलाता है और दूसरी चारदीवारी का स्थान दूसरा वास्तु कहलाता है। अतः भवन के दोषपूर्ण भाग को दीवार बनाकर ही अलग करना पड़ता है जिससे यह वास्तु दो भागों में विभाजित हो जाता है| और दोनों भाग अपनी-अपनी वास्तु संरचना अनुरूप शुभ-अशुभ परिणाम देने लगते है।
प्रश्न : क्या वास्तुदोष ढूँढने का कोई यंत्र बाजार में उपलब्ध है ?
उत्तर : नहीं! जिन ऋषि-मुनियों ने वास्तुशास्त्र की खोज की उन्होंने तो कोई ऐसा यंत्र नहीं बनाया या भारत व चीन के किसी भी पुराने ग्रन्थ में इस प्रकार के यंत्र का वर्णन नहीं मिलता है। कुछ वास्तुशास्त्री लोगों को लूटने के लिए पर्यावरण एवं मानवीय तंत्र की ऊर्जा को मापने के लिए प्रयोग में आने वाला ‘लेकर एंटिना’ नामक यंत्र का उपयोग वास्तुदोष ढूँढने में करते हैं जिसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
वास्तु गुरु द्वारा वास्तु सम्बन्धी शंकाओं का समाधान
क्या वास्तुदोष निवारण यंत्र लगाने से कुछ लाभ होता है?
उत्तर : बिल्कुल नहीं! वास्तुशास्त्र के प्रथम ग्रन्थ से लेकर, 1995 से पूर्व छपे किसी भी वास्तुशास्त्र के ग्रन्थ में इस प्रकार के किसी भी यंत्र का वर्णन नहीं है। यह वास्तुदोष निवारण यंत्र केवल तथाकथित लालची वास्तुशास्त्रियों द्वारा भोली-भाली जनता को लूटने के लिए बनाया गया है जो बहुत ज्यादा दाम लेकर लगाया जाता है। वास्तुदोष निवारण यंत्र लगाने से एक प्रतिशत लाभ भी नहीं होता है।
प्रश्न : क्या घर के आगे गाय बाँधने से या तुलसी का पौधा लगाने से वास्तुदोष का निवारण होता है?
उत्तर : बिलकुल नहीं। यह सही है कि गाय की उपयोगिता को देखते हुए हम गाय को माँ के समान दर्जा देते हैं। गाय बाँधना, गाय के गोबर से घर लीपना, घर को गौ मूत्र से धोना यह हमारी धार्मिक आस्थाएँ हैं। इसी प्रकार तुलसी के औषधीय गुणों के कारण हम तुलसी की पूजा करते हैं। यह भी हमारी धार्मिक आस्था है। वास्तुशास्त्र विज्ञान है। अतः वास्तुदोष निवारण में ऐसे किसी भी प्रकार की धार्मिक आस्था से जुड़े कृत्य से कोई लाभ नहीं होता है।
वास्तु गुरु द्वारा वास्तु सम्बन्धी शंकाओं का समाधान
कई वास्तुविद् नैऋत्य कोण को ऊँचा करने के लिए एंटीना लगाने की सलाह देते है, क्या यह कारगर उपाय है?
उत्तर : वास्तुशास्त्र के नियमों के अनुसार उत्तर व पूर्व की तुलना दक्षिण व पश्चिम को ऊँचा रखना चाहिए क्योंकि वास्तु एक विज्ञान है और इसमें सूर्य का बहुत महत्त्व है, सूर्य की प्रातःकालीन किरणें सकारात्मक एवं जीवनदायी होती है एवं दोपहर बाद की किरणें नकारात्मक होकर हानिकारक होती है। सूर्य की प्रातःकालीन किरणों से मिलने वाली ऊर्जा का पूर्ण लाभ लेने के लिए भवन के
उत्तर-पूर्व के भाग को नीचा रखा जाता है और दोपहर के बाद सूर्य से मिलने वाली नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए दक्षिण व पश्चिम के भाग को ऊँचा रखा जाता है। अतः एंटीना लगाकर इस दोष को ठीक करना सम्भव नहीं है। यह दोष भवन की बनावट को ही ठीक करके दूर किया जा सकता है।
प्रश्न : कई वास्तुविद् नैऋत्य कोण को भारी करने के लिए वजन रखने की सलाह देते हैं, हमारे पड़ोसी ने किसी की सलाह पर 50-50 किलोग्राम के दस बाँट बनवाकर प्लाॅट के नैऋत्य कोण में गाड़े हैं इसका क्या लाभ है?
उत्तर : किसी भी भवन के नैऋत्य कोण को भारी करने के लिए कई वास्तुविद् इस तरह के वजन रखवाने की सलाह देते हैं जो कि पूर्णतः अवैज्ञानिक है। वास्तु नियमों के अनुसार उत्तर पूर्व की तुलना में दक्षिण पश्चिम को भारी रखना चाहिए। उसका वास्तुनुकूल सही तरीका यह है कि दक्षिण पश्चिम की कम्पाउण्ड वाल व भवन की दीवार को उत्तर पूर्व की दीवारों की तुलना में थोड़ा मोटा बनाया जाए।
वास्तु गुरु द्वारा वास्तु सम्बन्धी शंकाओं का समाधान
क्या जमीन में तांबे की तार या रत्न गाड़ने से वास्तुदोष दूर हो जाते हैं?
उत्तर : बिल्कुल नहीं! पिछले कुछ वर्षों से कुछ वास्तुविद् प्लाट के दोषपूर्ण बढ़ाव से उत्पन्न होने वाले कुप्रभाव को समाप्त करने के लिए जमीन में ताँबे की तार गड़वाते हैं तो कुछ प्लाट की ऊर्जा बढ़ाने के लिए चारों दिशाओं, चारों कोणों एवं मध्य में विभिन्न रंगों के रत्न गडवाते है। वास्तुदोष दूर करने के यह उपाए केवल अल्पज्ञानी, नौसीखिए या यूँ कहें की ठगों द्वारा ही किया जा रहा है। इसकी शुरूआत नागपुर से हुई है। इससे सिर्फ और सिर्फ पैसे की खूब बर्बादी होती है और लाभ एक नए पैसे का नहीं होता, क्योंकि यह पूर्णतः अवैज्ञानिक प्रक्रिया है। प्लाट में दोषपूर्ण बढ़ाव से उत्पन्न होने वाले कुप्रभाव से बचने का एकमात्र तरीका है कि, कम से कम चार फीट ऊँची दीवार खड़ी करके उस हिस्से को अलग कर दिया जाए।
प्रश्न : क्या विभिन्न प्रकार के रंगों का उपयोग करने से भी वास्तुदोष दूर होते है?
उत्तर : बिल्कुल नहीं! पिछले कुछ वर्षों से कई वास्तुविद् विभिन्न दिशाओं के दोषों को दूर करने के लिए ज्योतिष के आधार पर दिशाओं के स्वामी के प्रतिनिधित्व रंग के अनुसार लाल, पीले, हरे इत्यादि रंगों का उपयोग करने की सलाह देते हैं, जैसे दक्षिण दिशा में भूमिगत पानी की टंकी है तो इस दोष को दूर करने के लिए टंकी के ऊपर लाल रंग करवाते हैं, क्योंकि इस दिशा का स्वामी मंगल है, किन्तु सच्चाई यह है कि इससे वास्तुदोष के कुप्रभाव में 1 प्रतिशत की भी कमी नहीं आती। दोषपूर्ण स्थान पर बने टैंक के कुप्रभाव से बचने का एकमात्र तरीका है कि उस टैंक को मिट्टी डालकर पूरी तरह से बंद कर दिया जाए।
जानिए की केसे करें बिना तोड़-फोड़ के वास्तु सुधार/वास्तु दोष निवारण..???
एक सुंदर एवं दोषमुक्त घर हर व्यक्ति की कामना होती है। किंतु वास्तु विज्ञान के पर्याप्त ज्ञान के अभाव में भवन निर्माण में कुछ अशुभ तत्वों तथा वास्तु दोषों का समावेश हो जाता है। फलतः गृहस्वामी को विभिन्न आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। घर के निर्माण के बाद फिर से उसे तोड़कर दोषों को दूर करना कठिन होता है। ऐसे में हमारे ऋषि-मुनियों ने बिना तोड़-फोड़ किए इन दोषों को दूर करने के कुछ उपाय बताए हैं। उन्होंने प्रकृति की अनमोल देन सूर्य की किरणों, हवा और पृथ्वी की चुंबकीय शक्ति आदि के उचित उपयोग की सलाह दी है।
साधरणतः लोग बिना जाने समझे वास्तु दोष के नाम पर अनावश्यक तोड़-फोड़ कराने लगते हैं। अतः सबसे पहले यह जानना जरूरी होता है कि वास्तव में वास्तु दोष है भी अथवा नहीं। इसके लिए किसी अच्छे वास्तुविद की मदद लेनी चाहिए। और तदनुसार उपाय अथवा टोटके करना चाहिए। वास्तु का सबसे अच्छा उपाय है- वास्तु दोष से युक्त घर को तोड़-फोड़ कर वास्तु सम्मत बनाना। किंतु कई बार कुछ कारणवश घर में तोड़-फोड़ नहीं की जा सकती। इस दशा में दोष को दूर करने के लिए यंत्र, मंत्र, तंत्र और टोटकों की सहायता ली जाती है। इनकी वैज्ञानिक तार्किकता ज्ञान की इस प्राचीन विरासत को महिमा मंडित कर पुनः प्रतिष्ठित करते हुए जन मानस का कल्याण करती है।
जानिए की केसे करें बिना तोड़-फोड़ के वास्तु सुधार/वास्तु दोष निवारण..???
पूर्व दिशा में बिना तोड़-फोड़ के वास्तु दोषों का निवारण-
दोष : भवन की पूर्व दिशा का भाग अन्य दिशाओं की अपेक्षा ऊंचा होना। उपाय : उपरोक्त दोष निवारण के लिए भवन में टी.वी. का ऐन्टीना नैत्य कोण में लगा लें, जिसकी ऊंचाई भवन के पूर्वी एवं उत्तरी भाग की दीवारों से अधिक हो, ऐन्टीना के स्थान पर लोहे का एक पाइप या झंडा भी लगाया जा सकता है। भवन के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में ठोस वस्तुएं एवं उत्तरी-पूर्वी भाग में पोली वस्तुएं रख देनी चाहिए।
दोष : भवन में यदि पूर्वी-उत्तरी भाग में बिना कोई रिक्त स्थान छोड़े घर का निर्माण हो गया है तो- उपाय : दूसरी मंजिल का निर्माण कराते समय उत्तरी एवं पूर्वी भाग को खाली छोड़ दें और जब तक निर्माण कार्य नहीं होता, तब तक के लिए पूर्वी एवं उत्तरी भाग का हिस्सा बिना सामान के खाली छोड़ दें।
दोष : मुखय द्वार यदि आग्नेय में हो तो- उपाय : मुखय दरबाजे पर गहरे लाल रंग का पेन्ट करने तथा दरबाजे पर लाल रंग के पर्दे लगाने से इस दोष का निवारण हो जाता है। दरवाजे पर बाहर की ओर सूर्य का चित्र लगा दें। पूर्व आग्नेय कोण में स्थित दरवाजे को बंद रखें।
ईशान कोण में मुखय वास्तु दोष एवं बिना तोड़-फोड़ के वास्तु दोषों के निवारण के उपाय :
दोष : र्इ्रशानोन्मुख भूखंड की उत्तरी दिशा में ऊंची इमारत या भवन हो तो- उपाय : उपरोक्त वास्तु दोष को दूर करने के लिए उत्तर-दिशा वाली ऊंची इमारत और भवन के बीच एक मार्ग बना देना चाहिए अर्थात् मार्ग के लिए खाली जगह छोड़ दें। इससे ऊंची इमारत के कारण जो वेध उत्पन्न हो रहा है, उसके एवं भूखंड के बीच मार्ग बन जाने से वास्तु दोष या वेध दोष का निवारण स्वतः ही हो जाएगा।
दोष : ईशानोन्मुख भूखंड पर पूर्व व उत्तर दिशा की चार दीवारी से सटाकर एवं पश्चिम व दक्षिण दीवार से हटकर भवन होने से- उपाय : इस स्थिति में पूर्व या उत्तर दिशा के लिए निर्माण का कम से कम प्रयोग करें और इस भाग को हमेशा साफ एवं शुद्ध रखें। इसके साथ ही भूखंड के नैत्य कोण में अनुपयोगी एवं भारी वस्तुओं का ढेर बनाकर रखें।
दोष : ईशान कोण में कूड़ा-कचरा आदि का ढेर हो तो- उपाय : इसका सबसे सरल उपाय है कि ईशान कोण पर लगे ढेर को साफ करवाकर उस स्थान को स्वच्छ एवं पवित्र रखें।
दोष : ईशान कोण में रसोई घर होना- उपाय : इस स्थिति में रसोई घर के अंदर गैस चूल्हे को आग्नेय कोण में रख दें और रसोई के ईशान कोण में जल भरकर रखें।
उत्तरोन्मुखी भूखंड के वास्तु दोषों का निवारण :
दोष : इस भूखंड पर बनाए गये घर उत्तरी भाग उन्नत होना। उपाय : इस दोष के निवारण हेतु दक्षिण भाग को ऊंचा करने के लिए टी.वी. का ऐन्टीना, झंडा या लोहे का रॉड उत्तरी भाग से ऊंचा लगा दें तथा साथ ही घर में भारी सामान दक्षिण दिशा में ही रखें। छत के ऊपर रखी जाने वाली पानी की टंकी को भी दक्षिण दिशा में ही रखें।
दोष : भूखंड की पूर्व दिशा में टीले अथवा ऊंचा मकान हो तो- उपाय : उत्तर-दिशा में स्थित इन वेधों एवं भूखंड के बीच एक सार्वजनिक मार्ग बना दे।
वायव्योन्मुख भूखंड के वास्तु दोष एवं उनका निवारण-
दोष : यदि इस भूखंड पर बने घर में मुखय द्वार उत्तर दिशा में हो तथा दक्षिण और पश्चिम दिशा में दरवाजे हों तो- उपाय : इस दशा में वायव्य कोण व आग्नेय कोण में विस्तार की भूमि को अनुपयोगी छोड़ दें तथा दक्षिण दरवाजे का प्रयोग तुरंत बंद कर दें।
दोष : वायव्य दिशा में रसोई घर हो तो- उपाय : इस दशा में वायव्य कोण में स्थित रसोई के आग्नेय कोण में गैस चूल्हा रख देना चाहिए। इसके साथ ही घर में अन्नादि के डिब्बे वायव्य कोण में रख देना चाहिए।
पश्चिमोन्मुख भूखंड के वास्तु दोषों का निवारण- दोष :----
इस भूखंड के पश्चिम दिशा के दरवाजे का मुख नैत्य कोण में होने पर-
उपाय :----- इस दरवाजे पर काले रंग का पेन्ट करवा दें तथा दरवाजे के समक्ष एक आदमकद आईना इस प्रकार लगवाएं कि प्रवेश करने वाले व्यक्ति को उसका प्रतिबिम्ब अवश्य दिखाई दे।
दोष :----- घर में प्रयोग किया गया जल अथवा वर्षा का पानी पश्चिम से बाहर निकलता हो तो-
नैत्योन्मुख भूखंड के मुखय वास्तु दोष एवं उनके निवारण के उपाय :----
दोष :-----यदि इस भूखंड में बनाए गये भवन-कक्षों व बरामदों में ठोस भारी वस्तुएं नैत्य कोण का नीचा होना : उपाय ---: इस दशा में इन कमरों के अंदर व बरामदों में ठोस भारी वस्तुएं रखे कक्षों को धोते समय जल को नैत्य से ईशान की ओर लाएं एवं पूर्व, उत्तर अथवा ईशान को स्थित दरबाजे से बाहर निकलें।
दोष :--- नैत्य कोण में खिड़की होना -
उपाय :----- इस दशा में खिड़की को बंद कर उसके ऊपर गहरे हरे रंग का पर्दा डाल देना चाहिए।
दक्षिणोन्मुख भूखंड के वास्तु दोष एवं उनका निवारण : दोष : इस भूखंड के सम्मुख भाग में कुंआ हो तो- उपाय : ऐसी स्थिति में कुएं को बंद कर देना चाहिए/अथवा कुएं पर मोटी एवं भारी स्लैब डालकर उसे ऊपर से पाट देना चाहिए। आग्नेयोन्मुख भूखंड के वास्तु दोष निवारण हेतु कुछ अन्य जरुरी उपाय/टोटके---
-----दक्षिण में सिर करके सोना चाहिए इससे व्यक्ति स्वस्थ और दीर्घायु होता है।
-----पति पत्नी का सुंदर सा फोटो शयन कक्ष में लगाएं।
-----शयन कक्ष की उत्तरी दीवार पर हंस अथवा सारस के जोड़े का फोटो लगाएं। इससे दाम्पत्य जीवन में मधुरता बढ़ेगी और साथ ही पारिवारिक कलह में कमी आएगी।
------तिजोरी समतल धरातल पर रखें। इसे किसी धातु पर न रखें और हिलने से बचाने के लिए पत्थर के बजाय लकड़ी के टुकड़ों का उपयोग करें
----तिजोरी में सुग्रधित चीजें जैसे-सेंट, स्प्रे व अगरबत्ती आदि न रखें।
-----घर में नित्य घी का दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय लौ पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर हो या दीपक के मध्य में (फूलदार बाती) बाती लगाना शुभ फल देने वाला है।
----रात्रि के समय शयन कक्ष में कपूर जलाने से बीमारियां, दुःस्वपन नहीं आते, पितृ दोष का नाश होता है एवं घर में शांति बनी रहती है।
-----घर में कोई बीमार हो जाए तो उस रोगी को शहद में चन्दन और गंगाजल मिला कर चटाएं।
-----पुत्र बीमार हो तो कन्याओं को हलवा खिलाएं। पीपल के पेड़ की लकड़ी सिरहाने रखें।
------पत्नी बीमार हो तो गोदान करें। जिस घर में स्त्रीवर्ग को निरन्तर स्वास्थ्य की पीड़ा रहती हो, उस घर में तुलसी का पौधा लगाकर उसकी श्रद्धापूर्वक देखभाल से रोग पीड़ा समाप्त होती है।
----सदैव पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर सिर रख कर ही सोना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर सिर कर के सोने वाले व्यक्ति में चुम्बकीय बल रेखाएं पैर से सिर की ओर जाती हैं, जो अधिक से अधिक रक्त खींच कर सिर की ओर लायेंगी, जिससे व्यक्ति विभिन्न रोंगो से मुक्त रहता है और अच्छी निद्रा प्राप्त करता है।
जानिए की केसे करें बिना तोड़-फोड़ के वास्तु सुधार/वास्तु दोष निवारण..???
सदैव पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर सिर रख कर ही सोना चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर सिर कर के सोने वाले व्यक्ति में चुम्बकीय बल रेखाएं पैर से सिर की ओर जाती हैं, जो अधिक से अधिक रक्त खींच कर सिर की ओर लायेंगी, जिससे व्यक्ति विभिन्न रोंगो से मुक्त रहता है और अच्छी निद्रा प्राप्त करता है।
------अगर परिवार में कोई व्यक्ति बीमार है तथा लगातार औषधि सेवन के पश्चात् भी स्वास्थ्य लाभ नहीं हो रहा है, तो किसी भी रविवार से आरम्भ करके लगातार 3 दिन तक गेहूं के आटे का पेड़ा तथा एक लोटा पानी व्यक्ति के सिर के ऊपर से उबार कर जल को पौधे में डाल दें तथा पेड़ा गाय को खिला दें। अवश्य ही इन 3 दिनों के अन्दर व्यक्ति स्वस्थ महसूस करने लगेगा। अगर टोटके की अवधि में रोगी ठीक हो जाता है, तो भी प्रयोग को पूरा करना है, बीच में रोकना नहीं चाहिए।
-----चार-चार इंच का ताम्र धातु में निर्मित वास्तु दोष निवारण यन्त्र भवन के मुख्य द्वार पर लगाना चाहिए.
------भवन के मुख्य द्वार के ऊपर की दीवार पर बीच में गणेश जी की प्रतिमा, अन्दर और बाहर की तरफ, एक जगह पर आगे-पीछे लगाएं.
------वास्तु के अनुसार सुबह पूजा-स्थल (ईशान कोण) में श्री सूक्त, पुरूष सूक्त एवं संध्या समय श्री हनुमान चालीसा का नित्यप्रति पठन करने से की शांति प्राप्त होती है.
-----यदि भवन में जल का बहाव गलत दिशा में हो, या पानी की सप्लाई ठीक दिशा में नहीं है, तो उत्तर-पूर्व में कोई फाऊन्टेन (फौव्वारा) इत्यादि लगाएं. इससे भवन में जल संबंधी दोष दूर हो जाएगा.
------टी. वी. एंटीना/ डिश वगैरह ईशान या पूर्व की ओर न लगाकर नैऋत्य कोण में लगाएं, अगर भवन का कोई भूभाग ईशान से ऊँचा है, तो उसका कीदोष निवारण हो जाएगा.
------भवन या व्यापारिक संस्थान में कभी भी संगमरमर/ ग्रेनाईट पत्थर का उपयोग न करें. ग्रेनाईट चुम्बकीय प्रभाव में व्यवधान उत्पन कर नकारात्मक उर्जा का संचार करता है.
जानिए की केसे करें बिना तोड़-फोड़ के वास्तु सुधार/वास्तु दोष निवारण..???
भूखंड के ब्रह्म स्थल (केन्द्र स्थान) में ताम्र धातु निर्मित एक पिरामिड दबाएं .
-------जब भी जल का सेवन करें, सदैव अपना मुख उत्तर-पूर्व की दिशा की ओर ही रखें.
------भोजन करते समय, थाली दक्षिण-पूर्व की ओर रखें और पूर्व की ओर मुख कर के ही भोजन करें.
------ दक्षिण-पश्चिम कोण में दक्षिण की ओर सिराहना कर के सोने से नींद गहरी और अच्छी आती है. यदि दक्षिण की ओर सिर करना संभव न हो तो पूर्व दिशा की ओर की कर सकते हैं.
------यदि भवन की उत्तर-पूर्व दिशा का फर्श दक्षिण-पश्चिम में बने फर्श से ऊँचा हो तो दक्षिण-पश्चिम में फर्श को ऊँचा करें.यदि ऐसा करना संभव न हो तो पश्चिम दिशा के कोणे में एक छोटा सा चबूतरा टाईप का बना सकते हैं.
----दक्षिण-पश्चिम दिशा में अधिक दरवाजे, खिडकियाँ हों तो, उन्हे बन्द कर के, उनकी संख्या को कम कर दें.
-----भवन के दक्षिण-पश्चिम कोने में सफेद/क्रीम रंग के फूलदान में पीले रंग के फूल रखने से पारिवारिक सदस्यों के वैचारिक मतभेद दूर होकर आपसी सौहार्द में वृ्द्धि होती है.
-------श्यनकक्ष में कभी भी दर्पण न लगाएं. यदि लगाना ही चाहते हैं तो इस प्रकार लगाएं कि आप उसमें प्रतिबिम्बित न हों, अन्यथा प्रत्येक दूसरे वर्ष किसी गंभीर रोग से कष्ट का सामना करने को तैयार रहें.
--------अमावस्या को प्रातः मेंहदी का दीपक पानी मिला कर बनाएं। तेल का चैमुंहा दीपक बना कर 7 उड़द के दाने, कुछ सिन्दूर, 2 बूंद दही डाल कर 1 नींबू की दो फांकें शिवजी या भैरों जी के चित्र का पूजन कर, जला दें। महामृत्युजंय मत्र की एक माला या बटुक भैरव स्तोत्र का पाठ कर रोग-शोक दूर करने की भगवान से प्रार्थना कर घर के दक्षिण की ओर दूर सूखे कुंए में नींबू सहित डाल दें। पीछे मुड़कर नहीं देखें। उस दिन एक ब्राह्मण -ब्राह्मणी को भोजन करा कर वस्त्रादि का दान भी कर दें। कुछ दिन तक पक्षियों, पशुओं और रोगियों की सेवा तथा दान-पुण्य भी करते रहें। इससे घर की बीमारी, भूत बाधा, मानसिक अशांति निश्चय ही दूर होती है।
जानिए की केसे करें बिना तोड़-फोड़ के वास्तु सुधार/वास्तु दोष निवारण..???
यदि बीमार व्यक्ति ज्यादा गम्भीर हो, तो जौ का सवा पाव आटा लें। उसमें साबुत काले तिल मिला कर रोटी बनाएं। अच्छी तरह सेंके, जिससे वे कच्ची न रहें। फिर उस पर थोड़ा सा तिल्ली का तेल और गुड़ डाल कर पेड़ा बनाएं और एक तरफ लगा दें। फिर उस रोटी को बीमार व्यक्ति के ऊपर से 7 बार वार कर किसी भैंसे को खिला दें। पीछे मुड़ कर न देखें और न कोई आवाज लगाएं। भैंसा कहाँ मिलेगा, इसका पता पहले ही मालूम कर के रखें। भैंस को रोटी नहीं खिलानी है, केवल भैंसे को ही खिलाना श्रेष्ठ रहता है। शनिवार और मंगलवार को ही यह कार्य करें।
-----शुक्रवार रात को मुठ्ठी भर काले साबुत चने भिगोयें। शनिवार की शाम काले कपड़े में उन्हें बांधे तथा एक कील और एक काले कोयले का टुकड़ा रखें। इस पोटली को किसी तालाब या कुंए में फेंक दें। फेंकने से पहले रोगी के ऊपर से 7 बार वार दें। ऐसा 3 शनिवार करें। बीमार व्यक्ति शीघ्र अच्छा हो जायेगा।
-------यदि लगे कि शरीर में कष्ट समाप्त नहीं हो रहा है, तो थोड़ा सा गंगाजल नहाने वाली बाल्टी में डाल कर नहाएं।
-------हर मंगल और शनिवार को रोगी के ऊपर से इमरती को 7 बार वार कर कुत्तों को खिलाने से धीरे-धीरे आराम मिलता है। यह कार्य कम से कम 7 सप्ताह करना चाहिये। बीच में रूकावट न हो, अन्यथा वापस शुरू करना होगा।
-------धान कूटने वाला मूसल और झाडू रोगी के ऊपर से उतार कर उसके सिरहाने रखें।
------घर से बीमारी जाने का नाम न ले रही हो, किसी का रोग शांत नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र ले कर उसे हांडी में पिरो कर रोगी के पलंग के पाये पर बांधने से आश्चर्यजनक परिणाम मिलता है। उस दिन से रोग समाप्त होना शुरू हो जाता है।
-------यदि पर्याप्त उपचार करने पर भी रोग-पीड़ा शांत नहीं हो रही हो अथवा बार-बार एक ही रोग प्रकट होकर पीड़ित कर रहा हो तथा उपचार करने पर शांत भी हो जाता हो, ऐसे व्यक्ति को अपने वजन के बराबर गेहूँ का दान रविवार के दिन करना चाहिए। इस गेहूँ का दान जरूरतमंद एवं अभावग्रस्त व्यक्तियों को ही करना चाहिए।
जानिए की केसे करें बिना तोड़-फोड़ के वास्तु सुधार/वास्तु दोष निवारण..???
किसी के प्रत्येक शुभ कार्य में बाधा आती हो या विलम्ब होता हो तो रविवार को भैरों जी के मंदिर में सिंदूर का चोला चढ़ा कर बटुक भैरव की पूजा कर के गौ, कौओं और काले कुत्तों को उनकी रूचि का पदार्थ खिलाना चाहिए।
-------सरकारी या निजी रोजगार के क्षेत्र में परिश्रम के उपरांत भी सफलता नहीं मिल रही हो, तो नियमपूर्वक किये गये विष्णु यज्ञ की विभूति ले कर, अपने पितरों की कुषा की मूर्ति बना कर, गंगाजल से स्नान करायें तथा यज्ञ विभूति लगा कर, कुछ भोग लगा दें और उनसे कार्य की सफलता हेतु कृपा करने की प्रार्थना करें। किसी धार्मिक ग्रंथ का एक अध्याय पढ़ कर, उस कुशा की मूर्ति को पवित्र नदी या सरोवर में प्रवाहित कर दें। सफलता अवश्य मिलेगी। सफलता के पश्चात् किसी शुभ कार्य में दानादि दें।
--------व्यापार, विवाह या किसी भी कार्य के करने में बार-बार असफलता मिल रही हो तो यह टोटका करें- सरसों के तेल में सिक्के, गेहूँ के आटे व पुराने गुड़ से तैयार सात पूये, सात मदार (आक) के पुष्प, सिंदूर, आटे से तैयार सरसों के तेल का रूई की बत्ती से जलता दीपक, पत्तल या अरण्डी के पत्ते पर रखकर शनिवार की रात्रि में किसी चैराहे पर रखें और कहें -हे मेरे दुर्भाग्य तुझे यहीं छोड़े जा रहा हूँ कृपा करके मेरा पीछा ना करना। यह सामान रखकर पीछे मुड़कर न देखें।
-----सिन्दूर लगे हनुमान जी की मूर्ति का सिन्दूर लेकर सीता जी के चरणों में लगाएं। फिर माता सीता से एक श्वास में अपनी कामना निवेदित कर भक्ति पूर्वक प्रणाम कर वापस आ जाएं। इस प्रकार कुछ दिन करने पर सभी प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है।
--------किसी शनिवार को, यदि उस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग हो तो अति उत्तम सांयकाल अपनी लम्बाई के बराबर लाल रेशमी सूत नाप लें। फिर एक पत्ता बरगद का तोड़ें। उसे स्वच्छ जल से धोकर पोंछ लें। तब पत्ते पर अपनी कामना रुपी नापा हुआ लाल रेशमी सूत लपेट दें और पत्ते को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इस प्रयोग से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और कामनाओं की पूर्ति होती है।
------अक्सर सुनने में आता है कि घर में कमाई तो बहुत है, किन्तु पैसा नहीं टिकता, तो यह प्रयोग करें। जब आटा पिसवाने जाएं तो उससे पहले थोड़े से गेंहू में 11 पत्ते तुलसी तथा 2 दाने केसर के डाल कर मिला लें तथा अब इसको बाकी गेंहू में मिला कर पिसवा लें। यह क्रिया सोमवार और शनिवार को करें। फिर घर में धन की कमी नहीं रहेगी।
जानिए की केसे करें बिना तोड़-फोड़ के वास्तु सुधार/वास्तु दोष निवारण..???
अगर पर्याप्त धर्नाजन के पश्चात भी धन संचय नहीं हो रहा हो, तो काले कुत्ते को प्रत्येक शनिवार को कड़वे तेल (सरसों के तेल) से चुपड़ी रोटी खिलाएं।
----संध्या समय सोना, पढ़ना और भोजन करना निषिद्ध है। सोने से पूर्व पैरों को ठंडे पानी से धोना चाहिए किन्तु गीले पैर नहीं सोना चाहिए। इससे धन का क्षय होता है।
----रात्रि में चावल, दही और सत्तू का सेवन करने से लक्ष्मी का निरादर होता है। अतः समृद्धि चाहने वालों को तथा ------जिन व्यक्तियों को आर्थिक कष्ट रहते हों, उन्हें इनका सेवन रात्रि भोज में नहीं करना चाहिये।
-----भोजन सदैव पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर के करना चाहिए। संभव हो तो रसोईघर में ही बैठकर भोजन करें इससे राहु शांत होता है। जूते पहने हुए कभी भोजन नहीं करना चाहिए।
----सुबह कुल्ला किए बिना पानी या चाय न पीएं। जूठे हाथों से या पैरों से कभी भी गाय, ब्राह्मण तथा अग्नि का स्पर्श न करें।
-----घर में देवी-देवताओं पर चढ़ाये गये फूल या हार के सूख जाने पर भी उन्हें घर में रखना अलाभकारी होता है।
-----अपने घर में पवित्र नदियों का जल संग्रह कर के रखना चाहिए। इसे घर के ईशान कोण में रखने से अधिक लाभ होता है।
----किसी कार्य की सिद्धि के लिए जाते समय घर से निकलने से पूर्व ही अपने हाथ में रोटी ले लें। मार्ग में जहां भी कौए, दिखलाई दें, वहां उस रोटी के टुकड़े कर के डाल दें और आगे बढ़ जाएं। इससे सफलता प्राप्त होती है।
-----घर में समृद्धि लाने हेतु घर के उत्तर पश्चिम के कोण (वायव्य कोण) में सुन्दर से मिट्टी के बर्तन में कुछ सोने-चांदी के सिक्के, लाल कपड़े में बांध कर रखें। फिर बर्तन को गेहूं या चावल से भर दें। ऐसा करने से घर में धन का अभाव नहीं रहेगा।
-----अगर निरन्तर कर्ज में फँसते जा रहे हों, तो श्मशान के कुंड का जल लाकर किसी पीपल के वृक्ष पर चढ़ाना चाहिए।
----घर में बार-बार धन हानि हो रही हो तों वीरवार को घर के मुख्य द्वार पर गुलाल छिड़क कर गुलाल पर शुद्ध घी का दोमुखी (दो मुख वाला) दीपक जलाना चाहिए। इससे घर में धन हानि का सामना नहीं करना पड़ेगा। जब दीपक शांत हो जाए तो उसे बहते हुए पानी में बहा देना चाहिए।
----काले तिल परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर सात बार उतार कर घर के उत्तर दिशा में फेंक दें, धनहानि बंद होगी।
----घर की आर्थिक स्थिति ठीक करने के लिए घर में सोने का चैरस सिक्का रखें। कुत्ते को दूध दें। अपने कमरे में मोर का पंख रखें।
---कच्ची धानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें। अनिष्ट दूर होगा और धन भी प्राप्त होगा ।
-----अगर अचानक धन लाभ की स्थितियाँ बन रही हो, किन्तु लाभ नहीं मिल रहा हो, तो गोपी चन्दन की नौ डलियाँ लेकर केले के वृक्ष पर टाँग देनी चाहिए। यह चन्दन पीले धागे से ही बाँधना है। यदि व्यवसाय में आकिस्मक व्यवधान एवं पतन की सम्भावना प्रबल हो रही हो, तो प्रथम बुधवार को सफेद कपड़े के झंडे को पीपल के वृक्ष पर लगाना चाहिए।
जानिए की केसे करें बिना तोड़-फोड़ के वास्तु सुधार/वास्तु दोष निवारण..???
किसी के प्रत्येक शुभ कार्य में बाधा आती हो या विलम्ब होता हो तो रविवार को भैरों जी के मंदिर में सिंदूर का चोला चढ़ा कर “बटुक भैरव स्तोत्र´´ का एक पाठ कर के गौ, कौओं और काले कुत्तों को उनकी रूचि का पदार्थ खिलाना चाहिए। ऐसा वर्ष में 4-5 बार करने से कार्य बाधाएं नष्ट हो जाएंगी।
-----रूके हुए कार्यों की सिद्धि के लिए यह प्रयोग बहुत ही लाभदायक है। गणेश चतुर्थी को गणेश जी का ऐसा चित्र घर या दुकान पर लगाएं, जिसमें उनकी सूंड दायीं ओर मुड़ी हुई हो। इसकी आराधना करें। इसके आगे लौंग तथा सुपारी रखें। जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो एक लौंग तथा सुपारी को साथ ले कर जाएं, तो काम सिद्ध होगा। लौंग को चूसें तथा सुपारी को वापस ला कर गणेश जी के आगे रख दें तथा जाते हुए कहें `जय गणेश काटो कलेश´।
------सरकारी या निजी रोजगार क्षेत्र में परिश्रम के उपरांत भी सफलता नहीं मिल रही हो, तो नियमपूर्वक किये गये विष्णु यज्ञ की विभूति ले कर, अपने पितरों की `कुशा´ की मूर्ति बना कर, गंगाजल से स्नान करायें तथा यज्ञ विभूति लगा कर, कुछ भोग लगा दें और उनसे कार्य की सफलता हेतु कृपा करने की प्रार्थना करें। किसी धार्मिक ग्रंथ का एक अध्याय पढ़ कर, उस कुशा की मूर्ति को पवित्र नदी या सरोवर में प्रवाहित कर दें। सफलता अवश्य मिलेगी। सफलता के पश्चात् किसी शुभ कार्य में दानादि दें।
----- व्यापार, विवाह या किसी भी कार्य के करने में बार-बार असफलता मिल रही हो तो यह टोटका करें- सरसों के तैल में सिके गेहूँ के आटे व पुराने गुड़ से तैयार सात पूये, सात मदार (आक) के पुष्प, सिंदूर, आटे से तैयार सरसों के तैल का रूई की बत्ती से जलता दीपक, पत्तल या अरण्डी के पत्ते पर रखकर शनिवार की रात्रि में किसी चौराहे पर रखें और कहें -“हे मेरे दुर्भाग्य तुझे यहीं छोड़े जा रहा हूँ कृपा करके मेरा पीछा ना करना।´´ सामान रखकर पीछे मुड़कर न देखें।
ऐसे करें बिना तोड़फोड़ करें दोष निवारण-----
कभी-कभी दोषों का निवारण वास्तुशास्त्रीय ढंग से करना कठिन हो जाता है। ऐसे में दिनचर्या के कुछ सामान्य नियमों का पालन करते हुए निम्नोक्त सरल उपाय कर इनका निवारण किया जा सकता है-----
-----पूजा घर पूर्व-उत्तर (ईशान कोण) में होना चाहिए तथा पूजा यथासंभव प्रातः 06 से 08 बजे के बीच भूमि पर ऊनी आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठ कर ही करनी चाहिए।
------पूजा घर के पास उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में सदैव जल का एक कलश भरकर रखना चाहिए। इससे घर में सपन्नता आती है। मकान के उत्तर पूर्व कोने को हमेशा खाली रखना चाहिए।
-----घर में कहीं भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखना चाहिए। उसे पैर नहीं लगना चाहिए, न ही लांघा जाना चाहिए, अन्यथा घर में बरकत और धनागम के स्रोतों में वृद्धि नहीं होगी।
-----पूजाघर में तीन गणेशों की पूजा नहीं होनी चाहिए, अन्यथा घर में अशांति उत्पन्न हो सकती है। तीन माताओं तथा दो शंखों का एक साथ पूजन भी वर्जित है। धूप, आरती, दीप, पूजा अग्नि आदि को मुंह से फूंक मारकर नहीं बुझाएं। पूजा कक्ष में, धूप, अगरबत्ती व हवन कुंड हमेशा दक्षिण पूर्व में रखें।
-------घर में दरवाजे अपने आप खुलने व बंद होने वाले नहीं होने चाहिए। ऐसे दरवाजे अज्ञात भय पैदा करते हैं। दरवाजे खोलते तथा बंद करते समय सावधानी बरतें ताकि कर्कश आवाज नहीं हो। इससे घर में कलह होता है। इससे बचने के लिए दरवाजों पर स्टॉपर लगाएं तथा कब्जों में समय समय पर तेल डालें।
------खिड़कियां खोलकर रखें, ताकि घर में रोशनी आती रहे।
ऐसे करें बिना तोड़फोड़ करें दोष निवारण-----
-घर के मुख्य द्वार पर गणपति को चढ़ाए गए सिंदूर से दायीं तरफ स्वास्तिक बनाएं।
-----महत्वपूर्ण कागजात हमेशा आलमारी में रखें। मुकदमे आदि से संबंधित कागजों को गल्ले, तिजोरी आदि में नहीं रखें, सारा धन मुदमेबाजी में खर्च हो जाएगा।
-----घर में जूते-चप्पल इधर-उधर बिखरे हुए या उल्टे पड़े हुए नहीं हों, अन्यथा घर में अशांति होगी।
------सामान्य स्थिति में संध्या के समय नहीं सोना चाहिए। रात को सोने से पूर्व कुछ समय अपने इष्टदेव का ध्यान जरूर करना चाहिए।
-----घर में पढ़ने वाले बच्चों का मुंह पूर्व तथा पढ़ाने वाले का उत्तर की ओर होना चाहिए।
------घर के मध्य भाग में जूठे बर्तन साफ करने का स्थान नहीं बनाना चाहिए।
-----उत्तर-पूर्वी कोने को वायु प्रवेश हेतु खुला रखें, इससे मन और शरीर में ऊर्जा का संचार होगा।
-------अचल संपत्ति की सुरक्षा तथा परिवार की समृद्धि के लिए शौचालय, स्नानागार आदि दक्षिण-पश्चिम के कोने में बनाएं।
------भोजन बनाते समय पहली रोटी अग्निदेव अर्पित करें या गाय खिलाएं, धनागम के स्रोत बढ़ेंगे।
-------पूजा-स्थान (ईशान कोण) में रोज सुबह श्री सूक्त, पुरुष सूक्त एवं हनुमान चालीसा का पाठ करें, घर में शांति बनी रहेगी।
-------भवन के चारों ओर जल या गंगा जल छिड़कें।
--------घर के अहाते में कंटीले या जहरीले पेड़ जैसे बबूल, खेजड़ी आदि नहीं होने चाहिए, अन्यथा असुरक्षा का भय बना रहेगा।
--------कहीं जाने हेतु घर से रात्रि या दिन के ठीक १२ बजे न निकलें।
------किसी महत्वपूर्ण काम हेतु दही खाकर या मछली का दर्शन कर घर से निकलें।
ऐसे करें बिना तोड़फोड़ करें दोष निवारण-----
किसी महत्वपूर्ण काम हेतु दही खाकर या मछली का दर्शन कर घर से निकलें।
------घर में या घर के बाहर नाली में पानी जमा नहीं रहने दें।
-------घर में मकड़ी का जाल नहीं लगने दें, अन्यथा धन की हानि होगी।
-------शयनकक्ष में कभी जूठे बर्तन नहीं रखें, अन्यथा परिवार में क्लेश और धन की हानि हो सकती है।
------भोजन यथासंभव आग्नेय कोण में पूर्व की ओर मुंह करके बनाना तथा पूर्व की ओर ही मुंह करके करना चाहिए।
वास्तु का फायदा :
वास्तु का फायदा :
अगर ये कहा जाए कि घर की खुशियों की कूंजी वास्तु में छिपी है तो हो सकता है कि आप तुरंत हमारी इस बात पर यकीन न करें. लेकिन जब आप वास्तु का सही अर्थ जान जाएंगे तब आपको इस बात पर यकीन होगा. दरअसल, वास्तु का सही अर्थ है चारों दिशाओं से मिलने वाली ऊर्जा तरंगों का संतुलन. लेकिन कई बार इन तरंगों के असंतुलन से कई दुष्परिणाम सामने आते हैं. आज हम आपको बताएंगे कि इन दुष्प्रभावों से कैसे बचा जा सकता हैं? घर के वातावरण को कैसे खुशहाल बनाया जा सकता हैं? इनके क्या उपाय हैं? कुछ सावधानियां रखकर वास्तु के दुष्परिणामों से कैसे बचा जा सकता हैं?
वास्तु दोष निवारण यंत्र :
सम्पूर्ण वास्तु दोष निवारण यंत्र विभिन्न उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से बनाया गया हैं. इसमें 13 यंत्र होते है – वास्तु दोष निवारण यंत्र, बगलामुखी यंत्र, गायत्री यंत्र, महामृत्युंजय यंत्र, महाकाली यंत्र, वास्तु महायंत्र, केतु यंत्र, राहु यंत्र, शनि यंत्र, मंगल यंत्र, कुबेर यंत्र, श्री यंत्र, गणपति यंत्र.
वास्तु दोष निवारण यंत्र का उपयोग :
इन सभी यंत्रों का उपयोग हमारे जीवन में संतुलन और हमारे बाहरी और आंतरिक वास्तु में सामंजस्य बनाए रखता है और इस प्रकार हमारे जीवन में अधिक से अधिक खुशियाँ रहती हैं.
वास्तु पूजा :
वास्तु पूजा :
वास्तु यंत्र के साथ-साथ वास्तु पुरुष, ब्रह्मा, विष्णु, महेश की पूजा करके, अन्य सभी देवताओं और देवियों की पूजा की जाती हैं. वास्तु पूजा से वातावरण में फैली हुई सभी बाधाओं को खत्म किया जा सकता है अन्यथा जीवन जीने में बाधा उतपन्न हो सकती हैं. वास्तुी अनहोनी, नुकसान और दुर्भाग्य से भी बचाता है. ये घर के साथ-साथ काम के स्थान पर भी उत्तर या पूर्व दिशा में स्थापित किया जा सकता हैं .
वास्तु दोष निवारण यंत्र की पूजा कैसे करें :
सबसे पहले नहा -धोकर अपने मन को शांत करें. ये सुनिश्चित कर लें कि यंत्र इस प्रकार रखा हो की आप का मुंह पूर्व दिशा की ओर हो. वास्तु दोष निवारण यंत्र के आगे दीया जला दें. अगर हो सके तो यंत्र के आगे 2 – 3 ताजा फूल रख दें.
बीज मंत्र का जाप :
21 बार बीज मंत्र का जाप करें जो यन्त्र के साथ मिला हो. अगर आप संस्कृत नहीं जानते, तो हिंदी या इंग्लिश
में भी आप इसका जाप कर सकते हैं. अब आप जो कुछ भी अपने दिल की इच्छा से मांगना चाहते है उन्हें
ऊंची आवाज में बोलकर अपनी पूजा को समाप्त करें.
बीज मंत्र :
बीज मंत्र जो वास्तु दोष निवारण यंत्र के साथ पढ़ा जाता है – “ओम आकर्षय महादेवी राम राम प्रियं हे त्रिपुरे देवदेवेषि तुभ्यं दश्यमि यंचितम ”
वास्तु दोष निवारण यंत्र का महत्व :
वास्तु दोष निवारण यंत्र बहुत ही शक्तिशाली यंत्र होता हैं. ये यंत्र किसी भी इमारत की वास्तु में दोष के कारण उत्पन्न होने वाले हानिकारक प्रभावों से निपटने के लिए बहुत प्रभावशाली होता हैं. वास्तु दोष निवारण यंत्र एक ऐसा यंत्र है जो सभी पांच तत्वों-पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और अंतरिक्ष के बीच संतुलन बनाकर हमारे घर और काम के स्थान पर समृद्धि, मानसिक शांति , खुशी और सामंजस्य को प्राप्त करने में मदद करता हैं.
घर के वास्तु दोष के निदान हेतु अचूक वास्तु टिप्स
पारिवारिक झगडे - वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि आपके घर में निरंतर झगड़े होते रहते हैं. तो आपको अपने घर के शयनकक्ष की उत्तर दिशा की दीवार पर दो हंसों के जोड़ों की तस्वीर लगानी चाहिए या दो सारस के जोड़ों का फोटो लगाना चाहिए. शयनकक्ष की उत्तरी दीवार पर इनकी तस्वीरें लगाने से आपके घर में कलह – कलेश नहीं होगा तथा आपका दाम्पत्य जीवन भी सुखपूर्वक व्यतीत होगा.
2. तिजोरी - यदि आपके घर में तिजोरी हैं. तो उसे किसी धातु पर न रखकर समतल भूमि पर रखें. यदि तिजोरी के हिलने की समस्या हैं तो इसके लिए तिजोरी के नीचे किसी पत्थर को न लगायें. बल्कि इसके स्थान पर किसी छोटे से लकड़ी के टुकड़े का प्रयोग करें. इन दोनों ही उपायों से आपके घर में कभी पैसे की हानि नहीं होगी.
घर के वास्तु दोष के निदान हेतु अचूक वास्तु टिप्स
घर की सुख – समृद्धि - घर में हमेशा सुख – समृद्धि बनाये रखने के लिए रोजाना अपने घर के पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाएं. लेकिन घी का दीपक जलाते हुए इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि दीपक में बाती बिल्कुल बीच में हो तथा दीपक को जलाने के बाद इसका दीपक का मुख व लौ पूर्व दिशा या दक्षिण दिशा की ओर हो. प्रतिदिन घी का दीपक जलाने से आपके घर में हमेशा सुख पूर्ण वातावरण बना रहेगा तथा आपको तथा आपके परिवार के सभी सदस्यों को ईश्वर के द्वारा शुभ फल की प्राप्ति होगी.
4. पूजा – घर में पूजा – पाठ करने के लिए मंदिर हमेशा ईशान कोण में स्थापित करें तथा रोजाना सुबह उठकर श्री सूक्त, पुरुष सूक्त का पाठ करें. शाम को हनुमान चालीसा का पाठ करें. इस प्रकार प्रतिदिन घर के पूजा – स्थल पर पूजा – पाठ करने से आपके घर में किसी भी प्रकार की कोई समस्या उत्पन्न नहीं होगी तथा आपके घर में हमेशा शांतिपूर्ण माहौल बना रहेगा
घर के वास्तु दोष के निदान हेतु अचूक वास्तु टिप्स
टी.वी, एंटीना तथा दिश की सही दिशा – अगर आपको अपने घर में टी.वी का एंटीना या डिश लगवाना हैं. तो इन्हें कभी भी घर की पूर्व व ईशान कोण में न लगायें. इन्हें हमेशा नैऋत्य कोण में ही लगायें. नैऋत्य कोण में एंटीना या डिश लगवाने से यदि आपके घर का कोई भाग ईशान कोण से ऊंचा हैं तो उस दोष का निवारण भी इससे हो जाएगा.
6. जल का सेवन – वास्तु शास्त्र के अनुसार जब भी जल का सेवन करें. अपना मुख सदैव उत्तर – पूर्व दिशा की ओर रखें.
7. भोजन का सेवन – जब भी आप भोजन का सेवन करें. तो हमेशा अपनी भोजन की थाली हमेशा दक्षिण पूर्व दिशा की ओर रखें और स्वयं भी पूर्व दिशा की ओर ही मुख करके भोजन का सेवन करें
घर से रोग, भूत – प्रेत बाधा को दूर करने हेतु उपाय –
यदि आपके घर पर किसी बुरी शक्तियों का या भूत – प्रेत का प्रभाव हैं. जिसके कारण आपके घर का कोई न कोई सदस्य हमेशा बिमार रहता हैं. तो भूत – प्रेत की इस बाधा को अपने घर से दूर करने के लिए आप अमावस्या के दिन इस एक उपाय कर सकते हैं. जिसके बारे में जानकारी नीचे दी गई हैं.
1. भूत – प्रेत की बाधा को दूर करने के लिए अमावस्या की सुबह स्नान करने के बाद मेहंदी के साथ पानी का प्रयोग कर चार मुख वाला दीपक बना लें.
2. अब इस दीपक में चार तेल की बाती डालें, 7 उड़द की डाल डालें, थोडा सिंदूर डालें, थोड़ी दही डालें. एक निम्बू लाकर उसे दो हिस्सों में कटकर उन्हें भी इस दीपक में डाल दें.
3. इसके बाद भैरव देवता की तस्वीर तथा शिवजी की तस्वीर अपने सामने रखें और उनकी पूजा करें.
4. भैरव और शिवजी की पूजा करने के बाद इस दीपक को जला लें.
घर से रोग, भूत – प्रेत बाधा को दूर करने हेतु उपाय –
5. अब महामृत्युंजय मन्त्र की एक माला का जाप करें या बटुक भैरव के स्त्रोत का पाठ करें.
6. इसके बाद हाथ जोड़कर शिवजी से तथा भैरव जी से अपने घर के सदस्यों को स्वस्थ और निरोग रखने के लिए प्रार्थना करें.
7. भगवान से प्रार्थना करने के पश्चात् दीपक को किसी सूखे कुएं में निम्बू के साथ डाल दें. दीपक को कुएं में डालने के बाद पीछे मुड़कर न देखें और घर वापिस आ जाएँ.
8. घर पहुँचने के बाद एक ब्राह्मण को भोजन कराएँ. उन्हें दक्षिणा दें तथा वस्त्र का दान करें.
9. इस उपाय को करने के कुछ दिनों तक गरीब तथा रोगी व्यक्तियों की सेवा करें, दान – पुण्य करें.
वास्तु दोष के निवारण तथा प्रभावी उपाय
सबसे पहले उठकर हमें इस ब्रह्मांड के संचालक परमपिता परमेश्वर का कुछ पल ध्यान करना चाहिए। उसके बाद जो स्वर चल रहा है, उसी हिस्से की हथेली को देखें, कुछ देर तक चेहरे का उस हथेली से स्पर्श करें, उसे सहलाएं। उसके बाद जमीन पर आप उसी पैर को पहले रखें, जिसकी तरफ का स्वर चल रहा हो। इससे चेहरे पर चमक सदैव बनी रहेगी।
3. सुबह जब उठते हैं तो शरीर के एक हिस्से में सबसे अधिक चुंबकीय और विद्युतीय शक्ति होती है, इसलिए शरीर के उस हिस्से का पृथ्वी से स्पर्श करा कर पंच तत्वों की शक्तियों को संतुलित किया जाता है।
यदि आपके मकान के सामने किसी प्रकार का वेध यानी खंभा, बड़ा पेड़ या बहुमंजिला इमारत हो तो इसकी वजह से आपका स्वास्थ्य या आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। यदि वेघ दोष हो तो निम्न उपाय करना कारगर होगा।
5. यदि अपने मकान के सामने लैम्प पोस्ट लगा लें। यदि यह संभव नहीं हो, तो घर के आगे अशोक का वृक्ष और सुगंधित फूलों के पेड़ के गमले लगा दें। तुलसी का पौधा स्वास्थ्य के लिए शुभ होता है।
6. घर में अखण्ड रूप से श्री रामचरित मानस के नौ पाठ करने से वास्तुजनित दोष दूर हो जाता है.
वास्तु दोष के निवारण तथा प्रभावी उपाय -2
घर में नौ दिन तक अखण्ड भगवन्नाम-कीर्तन करने से वास्तुजनित दोष का निवारण हो जाता है.
8. मुख्य द्वार के ऊपर सिन्दूर से स्वस्तिक का चिन्ह बनाये.यह चिन्ह नौ अंगुल लम्बा तथा नौ अंगुल चौड़ा होना चाहिये.
9. घर के दरवाजे पर घोड़े की नाल (लोहे की) लगायें। यह अपने आप गिरी होनी चाहिए
10. घर के सभी प्रकार के वास्तु दोष दूर करने के लिए मुख्य द्वार पर एक ओर केले का वृक्ष दूसरी ओर तुलसी का पौधा गमले में लगायें।
दो फीट गहरा गङ्ढा खोदकर स्थापित किया जाता है।
12. यदि प्लाट खरीदे हुये बहुत समय हो गया हो और मकान बनने का योग न आ रहा हो तो उस प्लाट में अनार का पौधा पुष्प नक्षत्र में लगायें।
13. फैक्ट्री-कारखाने के उद्धाटन के समय चांदी का सर्प पूर्व दिशा में जमीन में स्थापित करें।
14. यदि कोई बहुमंजिली इमारत आपके सामने हो, तो फेंगशुई के अनुसार अष्ट कोणीय दर्पण, क्रिस्टल बाल तथा दिशा सूचक यंत्र लगा सकते हैं।
15. घर में टूटे-फूटे बर्तन या टूटी खाट नहीं रखनी चाहिए। टूटे-फूटे बर्तन और टूटी खाट रखने से धन की हानि होती है।
वास्तु दोष के निवारण तथा प्रभावी उपाय -3
बड़ा गोल आईना मकान की छत पर ऎसे लगाएं कि मकान की संपूर्ण छाया उसमें दिखाई देती रहे।
17. यदि मकान के पास में फैक्टरी का धुआं निकलता हो, तो एग्जास्ट पंखा या वृक्ष लगा लें।
18. यदि मकान में बीम ऎसी जगह हो जिसके कारण आप मानसिक तनाव महसूस करते हो तो बीम से उत्पन्न होने वाले दोषों से बचाव के लिए यह उपाय अपना सकते है।
19. शयनकक्ष में बीम हो, तो इसके नीचे अपना बैड या डाइनिंग टेबल नहीं लगाएं। यदि ऑफिस हो तो मेज व कुर्सियां नहीं रखें।
20. बीम के दोनों ओर बांसुरी लगा दें। इससे वास्तुदोष निवारण हो जाता है।पवन घंटी बीम के नीचे लटका दें या बीम को सीलिंग टायलस से ढक दें।बीम के दोनों ओर हरे रंग की गणपति प्रतिमा लगा दें। यह वास्तु दोषनाशक मानी जाती है।
21. यदि मकान का कोई कोना आपके मुख्य द्वार के सामने आए, तो स्पॉट लाइट लगाएं। जिससे प्रकाश आपके घर की ओर रहे तथा सीधा ऊंचा वृक्ष बीच में लगा दें।
वास्तु दोष के निवारण तथा प्रभावी उपाय -4
शयनकक्ष में घी का दीपक व अगरबत्ती करें जिससे मन प्रसन्न रहे। इस बात का घ्यान रखें कि झाड़ू शयनकक्ष में नहीं रखें।
23. यदि मकान में दिशा संबंघी कोई दोष हो तो इससे बचने के लिए ये उपाय करने से लाभ मिलना संभव है।
24. मकान में मुख्य द्वार पर देहरी बना लें। इससे बुरे व अन्य दोष घर में प्रवेश नहीं कर पाते हैं।
25. ईशान कोण के दोष के लिए इस दिशा में पानी से भरा मटका रखें। इस कोण को साफ-सुथरा रखे।
26. अग्नि कोण दोष निवारण के लिए कोने में एक लाल रंग का बल्ब लगा दें जो दिन-रात जलता रहे।
27. वायव्य कोण दोष निवारण के लिए इस ओर की खिड़कियां खुली रखें, ताकि वायु आ सके। एजॉस्ट पंखा भी लगा सकते हैं।
28. रसोई घर गलत स्थान पर हो तो अग्निकोण में एक बल्ब लगा दें और सुबह-शाम अनिवार्य रूप से जलाये।
वास्तु दोष के निवारण तथा प्रभावी उपाय -5
द्वार दोष और वेध दोष दूर करने के लिए शंख, सीप, समुद्र झाग, कौड़ी लाल कपड़े में या मोली में बांधकर दरवाजे पर लटकायें।
30. बीम के दोष को शांत करने के लिए बीम को सीलिंग टायल्स से ढंक दें। बीम के दोनों ओर बांस की बांसुरी लगायें।
31. नैऋत्य कोण दोष निवारण के लिए इस कोने को भारी बनाएं। स्टोर बनाना यहां शुभ होता है।
32. शयनकक्ष में दर्पण का प्रतिबिंब पलंग पर न पड़े तथा डबल बेड पर एक ही गद्दा रखें, तो ठीक रहेगा।
33. पति-पत्नी में प्रेम के लिए प्रेमी परिंदे का चित्र या मेडरिन बतख का जोड़ा रखें अथवा सपरिवार प्रसन्नचित मुद्रा वाला चित्र लगाएं।
34. डायनिंग टेबल को प्रतिबिंबित करने वाला आईना आपके सद्भाव व भाग्य में वृद्धि करता है, इसे लगाएं।
35. संभव हो तो गाय का पालन करना चाहिये.
36. घर में तुलसी का पौधा लगाना चाहिये.
वास्तु दोष के निवारण तथा प्रभावी उपाय-6
रसोई की सबसे बेहतरीन जगह दक्षिण-पूर्व है, दूसरा विकल्प उत्तर-पश्चिम दिशा में है। अगर दाम्पत्य जीवन के तालमेल में कमी के संकेत मिलते हों तो रसोई तथा शयन कक्ष की वास्तु योजना पर खास तौर पर ध्यान देना चाहिए। रसोई की दीवारों का पेंट आदि का भी ध्यान रखना आवश्यक होता है। रसोई घर में पूजाघर या देवताओं की मूर्ति जैसी चीजें न रखें। रसोई में कुकिंग रेंज पूर्व में ऐसे रखें कि खाना बनाने वाले के सामने पूर्व दिशा पड़े। फूज्ड प्रोसेसर, माइक्रोवन, फ्रिज इत्यादि की व्यवस्था दक्षिण-पूर्व में होनी चाहिए। पानी संबंधी कार्य जैसे वाटर फिल्टर, डिशवाशर, बर्तन धोने का सिंक आदि उत्तर-पूर्व वाले भाग में होने चाहिए। पूर्व की दीवार में वॉल कैबिनेट न हों तो बेहतर है यदि जरूरी हो तो यहाँ भारी सामान न रखें। खाने-पीने का सामान उत्तर-पश्चिम दिशा में या रसोईघर के उत्तर-पश्चिम भाग में स्टोर करें जिस दरवाजे से अधिक आना जाना हो या मुख्य द्वार यदि रसोईघर के ठीक सामने हो साथ ही पति पत्नी के ग्रह-नक्षत्र कलह का इशारा देते हैं तो बेहतर होगा कि दरवाजों की जगह बदलवाएँ वरना उक्त परिस्थितियाँ आग में घी का काम करती हैं।
38. भवन के बीचों-बीच का हिस्सा ब्रह्म स्थान कहा जाता है। इसे खाली रखा जाना चाहिए। जैसे फर्नीचर या कोई भारी सामान यहाँ पर सेहत व मानसिक शांति को प्रभावित करते हैं। ब्रह्मस्थान वाले क्षेत्र में छत में भारी झाड़ फानूस भी नहीं लटकाएँ जाएँ। इस हिस्से में पानी की निकासी के लिए नालियों की व्यवस्था का निषेध है, यह आर्थिक नुकसान का संकेतक है।
39. श्मशान की भूमि पर मकान बनाकर रहना सभी अशुभ मानते हैं। वास्तव में यह सारी पृथ्वी ही श्मशान है। जब कर्ण ने भगवान कृष्ण से निवेदन किया कि मेरा दाह ऐसे स्थान पर करना जहां किसी का आज तक दाह कर्म नहीं किया गया हो तब भगवान को पूरी पृथ्वी पर ऐसा कोई स्थान नहीं मिला।
40. वास्तुशास्त्र में वेध काफी महत्व रखता है। यह बाधा या रूकावट के संकेत देता है। भवन अथवा मुख्य द्वार के सामने अगर पेड़, खंभा, बड़ा पत्थर आदि या जनता द्वारा प्रयोग होने वाले मार्ग का अंत होता है तो उसका विपरीत असर पड़ता है। जब वेध व भवन के बीचों-बीच ऐसी सड़क हो जिसमें आम रास्ता हो तो वेध का प्रभाव पूरी तरह तो नहीं मगर बहुत कुछ कम हो जाता है। घर पर भी किसी कमरे के दरवाजे के सामने कोई वस्तु मसलन जसे सोने के कमरे के सामने ऐसी सजावटी वस्तुएँ तनाव और चिंताओं के कारण या नींद में बाधक हो सकती है.