व्यापर वृद्धि बाधा निवारण सम्पूर्ण उपाय मंत्र टोटके
कार्य-व्यापार में वृद्धि एवं सफलता प्राप्ति के उपाय
कार्य सफलता या कार्य कुशलता की निश्चित गारंटी देने वालीसूझबूझ की उत्पत्ति बुद्धि से है। छोटे-छोटे टोटके आपकी बुद्धि औरसूझबूझ पर सीधा प्रभाव करते हैं। आपकी सूझबूझ को बढ़ाते हैं। यहसरल क्रियाएं जो टोटका के नाम पर दी गई हैं। आपको निश्चितअतिरिक्त शक्ति प्रदान करती हैं, ताकि ठीक समय पर आप उचितसूझबूझ से काम ले सकें। फलत: आपकी सफलता निश्चित है। जिसप्रकार पौष्टिक पदार्थों के सेवन से मनुष्य का स्वास्थ्य बनता है, शरीरमें बल आता है, ठीक उसी प्रकार मस्तिष्क की बुद्धि को भी तोखुराक चाहिए, ताकि उचित समय पर उचित सूझबूझ के कारणसफलता मिल सके। यह टोटके वास्तव में आपकी बुद्धि प्रखर करनेके लिए, आपको सूझबूझ को उपयोगी और प्रभावशाली तथा सफलबनाने के लिए मानसिक खुराक का काम करते हैं। इससे आप अपनेकार्यों में अवश्य सफलता प्राप्त कर सकते हैं। यह एक मानी हुई बातहै। इसी तथ्य और सत्य के आधार पर यह प्रमाणित परखी हुई सामग्रीप्रस्तुत है।
कार्य-व्यापार में सफलता प्राप्ति के उपाय
व्यापार वृद्धिकर यन्त्र
विधि-इस यन्त्र को किसी शुभ मुहूर्तमें सोने चाँदी अथवा ताँबे के पत्र परखुदवाकर कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथिको रात्रि के समय किसी शुभ स्थान परस्थापित कर दें तथा उसके समक्ष श्वेतआसन पर श्वेत वस्त्र धारण कर श्वेतरेशम की माला हाथ में लेकर ‘ओं हीं श्रीं नमः’ इस मन्त्र की १० मालाजपें तथा यन्त्र के ऊपर श्वेत रंग का फूल चढ़ायें।
इस यन्त्र को 21 दिनों तक करें। तब धूप देकर यन्त्र को तिजोरीमें रख दें, इससे व्यापार में वृद्धि होती है। यन्त्र विधि सहित प्रयोग करेंयह आजमाया हुआ है।
व्यापार वर्धक प्रयोग मन्त्र
II भंवरा भंवर करे मन मेरा,डण्डी खोल व्यापार बडेरा,व्यापार बढे और कारज कर,नहीं करे तो काली मैया, काल-काल जो फोड़ खावे ठं ठं फट ll
विधि-यदि आपका व्यापार नहीं चल रहा है और उन्नति नहीं होरही है तो आप इस मन्त्र का प्रयोग करें।
शनिवार के दिन की रात को ३ मुट्ठी भर काली मिर्च तथा ३गोमती चक्र लेकर किसी लाल पोटली में बाँध दें। तेल का दीपक जलाकरअपने सामने रखकर इस मन्त्र का ११ माला का जाप पोटली पर करें।दूसरे दिन सुबह जाकर दुकान को साफ़ पानी से धो डालें, दुकान केदरवाज़े पर वह लाल रंग की पोटली को बाँध दें, जब तक पोटली बंधीरहेगी तब तक व्यापार में उन्नति होती ही रहेगी।
व्यापार वर्द्धक मन्त्र
जय जय लक्ष्मी भण्डारी माई,
सात दीप नव खण्ड ढुहाई,
ऋद्धि सिद्धि के गुण गाई,
ला बाजार करावे ज्यूं चहु,
त्यूं कार्य करावे ओं ठं ओं,
विधि-इस मन्त्र को आप विधि सहित जपकर अपनी मनोकामनाएँ
पूरी करें।
वस्तु बिके शत्रु भी खरीदे
ओं नमो चण्ड अलसूर स्वाहा।
विधि-जिस वृक्ष पर गुग्गल हो उसे शनिवार को निमंत्रण दे आवेंऔर रविवार को प्रातः उसकी डाली लाकर गुग्गल की धूनी देवें औरपैर के नीचे दबाकर बैठ जावें। १०9 बार मन्त्र पढ़कर डाली सिद्ध करलेवें। उसके पत्तों को सिर पर रखकर व्यापार करें तो शत्रु भी इच्छाअनुसार कीमत देकर माल की खरीद करेंगा।
यह प्रयोग केवल मंगलवार के दिन करना है। 22 पत्ते पीपल के लेलें और उनको धो लें पूर्व दिशा में मुंह करके हर पत्ते पर 'राम' लिखेंतथा इन्हें हनुमानजी पर चढ़ा आएं। स्मरण रहे पत्ते कटे-फटे ना हों।बुधवार को एक कटोरी बासमती चावल दान में दें। ऋण नाश, धनलाभ, व्यापार वृद्धि हेतु चमकीले लाल रंग का कपड़ा लें। उसे बिछालें। उसमें लाल चंदन का टुकड़ा, लाल गुलाब के पुष्प, रोली तथा58 पैसे रखें। फिर कपड़े में सारा सामान लपेटकर, कपड़े की पोटलीबनाकर अपने गल्ले अथवा अलमारी या संदूक में रख दें। 6 माहपश्चात पुनः नवरात्रि की अष्टमी को इस प्रक्रिया को दोहराएं।
अपने घर से किसी भी कार्य के लिए निकलते समय पहले विपरीतदिशा में चार पग जाएं, इसके पश्चात कार्य पर चले जाएं। कार्यअवश्य ही बनेगा।
किसी भी कार्य के लिए जाते समय एक बेदाग नीबू गाय के गोबरमें दबा दें। उस पर थोड़ा-सा कामिया सिंदूर छिड़क दें। अपना कार्यकहकर चले जाएं। कार्य बन जाएगा।
शनिवार के दिन प्रातः अपने काम पर जाने से पहले एक नीबूलेकर उसके दो बराबर हिस्से कर लें। घर से निकलने के पशचातजो भी पहला मोड़ आए, उस समय एक टुकड़ा आगे और एकटुकड़ा पीछे फेंकंकर चले जाएं। उस दिन सारे काम बनेंगे।परेशानियां स्वयं ही दूर हो जाएंगी।
किसी भी सोमवार के दिन सफेद फिटकरी का एक ढेला लेकर तवेपर गर्म करके फुला लें। फिर उस फिटकरी के टुकड़े को 7 बारसिर के ऊपर से वारकर किसी गंदे पानी में बहाएं। इससेयोग्यतानुसार नौकरी मिल जाएगी।
रुके हुए कारयों के लिए गणेश चर्तुथी के दिन गणेश जी का चित्रघर या दुकान पर लगाएं, जिसमें उनकी सूंड दाई ओर मुड़ी हो,उसकी आराधना करें। इसके आगे लौंग और सुपारी रखें। जब भीकहीं काम पर जाना हो तो एक साबुत लौंग तथा एक सुपारी अपनेसाथ लेकर जाएंगे तो काम बन जाएगा। लौंग को चूसें तथा सुपारीको वापस घर आकर गणेश जी के आगे रख दें। जाते हुएकहें-‘जय गणेश काटो क्लेश।'
मिट्टी का बना शेर बुधवार को दुर्गा माता के आगे चढ़ाने से सबकायों में पूर्ण सफलता प्राप्त होती है।
अगर आपको किसी कार्य विशेष के लिए जाना है, तो नीले रंगका धागा लेकर घर से निकलें। घर से जो तीसरा खंभा पड़े उसपर अपना काम कहकर नीले रंग का धागा बांध दें। काम होने कीसम्भावना बढ जाएगी।
नौ वर्ष से कम की कन्याओं के चरण छूने से संतान शीघ्र प्राप्त होजाती है। इस क्रिया को 43 दिन तक लगातार करें। 11 कन्याओंके चरणों को जरूर छूना चाहिए। साथ ही गोपियों से मन मेंकहें-‘कृष्ण भगवान को मेरी इच्छा प्राप्ति के लिए मनाएं।'
शुक्रवार को आटे में पनीर डालकर गाय को खिलाएं। ऐसा 43दिन लगातार करें।
सच्चे मन से शिव आराधना करें तथा शनिवार को प्रातः पीपल केवृक्ष के पास तिल के तेल का दीपक जलाएं। साथ ही प्रत्येकशनिवार को रोटी पर तेल लगाकर काले कुत्तों को खिलाएं। यहदिव्य प्रयोग है। लाभ अवश्य होगा।
सोमवार को प्रात: नवनिर्मित अंगूठी को गंगाजल में धोकर गाय केदूध में डुबो दें। उसमें थोड़ी-सी शक्कर, तुलसी के पत्ते और कोईभी सफेद फूल डाल दें। इसके पश्चात स्नान, ध्यान से निवृत्त होकरअंगूठी को पहन लें। ऐसा करने से व्यापार में मनोवाछित उन्नति प्राप्तहोगी।
प्रायः व्यापारिक यात्रा पर जाने वाले व्यापारियों को चाहिए कि वहप्रस्थान से पूर्व सवा रुपया किसी भी गुप्त स्थान पर रखकर चलेजाएं। यात्रा से वापस आकर उस पैसे को लेकर एक फकीर कोखाना खिला दैं। यात्रा सफल होगी और व्यापार में भी उननति होगी।
थोड़ा-सा कच्चा सूत ले लें। उसे शुद्ध केसर से रंग लें। इस रंगे हुएकच्चे सूत को अपने व्यापारिक स्थल पर बांध दें। व्यापार आगेबढ़ने लगेगा। नौकरी से सम्बंधित व्यक्ति इसे अपनी दराज में डालदैं। तरक्की का योग बनने की आशाएं अवश्य बलवती बनेंगी।
अगर आप यह अनुभव कर रहे हैं कि लाख प्रयत्न करने पर भीआपका व्यापार उन्नति नहीं कर पा रहा है तो आप श्यामा तुलसीके चारों और स्वयं ठग आई खरपतवार को किसी चमकीले पीलेवस्त्र में बांधकर व्यापार स्थल पर रख दें। यह क्रिया केवलगुरुवार को ही करें।
सूर्य निकलने से पहले रविवार के दिन हुदहुद पक्षी की कलगी लेआएं और उसे अभिमंत्रित कर व्यवसाय स्थल पर रखें। व्यापार मेंसमुचित वृद्धि होगी।
कबूतर का दिल, उल्लू का पंख और श्मशान की राख-इनसबको एक स्थान पर रखकर पीस लें। जब चूर्ण बन जाए तो इत्रमिला लें। जितने भी भागीदार हैं अपने-अपने यंत्र में यह वस्तुएं भरलें और अपने पास रखें। न केवल हिस्सेदारी में प्रेम रहेगा, उनकेस्वयं के घर में भी सुख, शांति और समृद्धि निरंतर बनी रहेगी।
जिन उद्योगपतियों तथा व्यापारियों को काफी प्रयास और अथकपरिश्रम करने के बावजूद बिक्री में वृद्धि नहीं हो पा रही हो तोप्रस्तुत टोटकों का प्रयोग करें।
विधि : यह टोटका शुक्ल पक्ष के गुरुवार से प्रारंभ करें तथाप्रत्येक गुरुवार को इस क्रिया को दोहराते रहें। घर के मुख्य द्वार केएक कोने को गंगाजल से शुद्ध कर लें या धो लें। शुद्ध किए स्थानपर स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं और उस पर थोड़ी चने की दाल
और ताजा गुड़ रख दें। ध्यान रहे कि स्वस्तिक का चिह्न हल्दी से हीबनाएं।
टोटका करने में सावधानी : स्वस्तिक बनाने के पशचातबार-बार न देखें अन्यथा अशुभ प्रभावों का शिकार होना पड़ेगा।इस क्रिया से बिक्री में वृद्धि होगी। प्रभु कृपा से शीघ्र लाभ प्राप्तहोगा।
गुरु पुष्य योग के दिन स्नान करके एक हल्दी की गांठ लें। उसेपौले रुमाल में रखें। कुछ चावल के दाने भी उसमें रखें और इसप्रकार हल्दी रंजित नारियल का समूचा गोला और एक सुपारी भीरखें। इसके उपरांत उसे धूप-दीप करके कोई सिक्का, जो पहलेसे हल्दी में रंग रखा हो, उसे भी उसमें रख दें। प्रतिदिन धूप-दीपअवश्य करते रहें। यह धन-धान्य से समृद्ध बनाता है।
व्यापार वृद्धि के लिए बारह गोमती चक्र लेकर उसे बांधकर चौखटपर लटका दें और ग्राहक उसके नीचे से निकलें तो व्यापार में वृद्धिहोती है।
अगर व्यवसाय स्थल पर ग्राहक कम आ रहे हों, किसी ने आपकेव्यवसाय को बांध दिया हो तो रविवार की दोपहर को पांचकागजी पीले नीबू काटकर व्यवसाय स्थल पर रखकर उसके साथएक मुट्ठी काली मिर्च, एक मुट्ठी पीली सरसों रख दें। अगले दिनजब दुकान या व्यवसाय स्थल खोलें तो सभी सामान को दूर वीरानेमें जाकर कच्ची धरती में गाड़ दें। इस प्रयोग से व्यवसाय परकिया गया तांत्रिक प्रयोग तुरंत समाप्त हो जाएगा।व्यवसाय में मंदी आने का एक कारण आपके ऊपर चल रही शनिकी साढेसाती अथवा ढैया हो सकता है। ऐसी स्थिति में आपकोशनि की साढेसाती एवं ढैया से शीघ्र मुक्ति पाने के लिए प्रत्येकशनिवार को पोपल पर जल चढ़ाना चाहिए तथा वहीं सरसों के तेलका दीपक जलाना चाहिए। शिवं मंदिर अथवा पीपल वृक्ष पर कालेतिल भी चढ़ाने चाहिए।
व्यवसाय के लिए जाते समय इत्र लगाकर जाने से व्यवसाय मेंवृद्धि होती है। यही राज है कि पुराने सुनार आदि सदैव इत्र लगाकररहते हैं।
व्यवसाय स्थल पर स्फटिक श्रीयंत्र लगाने तथा नित्य धूप-दीप सेपूजन करने से व्यापार में वृद्धि होती है। अगरबत्ती सदैव गुलाब कीलगाएं।
पारद शिवलिंग की घर में स्थापना से व्यापार में वृद्धि होती है।व्यवसाय स्थल में तिजोरी में सियारसिंगी रखने से व्यापार में दिनदोगुनी रात चौगुनी वृद्धि होती है।
व्यापार स्थल में, अपनी तिजोरी में शुक्ल पक्ष के शुक्रवार कोअभिमंत्रित ग्यारह काली कौड़ियां रखने से दो माह के भीतर शुभपरिणाम आने लगते हैं।
व्यापार स्थल पर अथवा घर में दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना शुभफलदायी होती है।
व्यवसाय स्थल में एकाक्षी नारियल को पूजाघर में स्थापित करनेतथा नित्य धूप-दीप से पूजन करने से व्यापार में निश्चित वृद्धि होतीहै।
होली के दिन अथवा अमावस्या को व्यवसाय स्थल परचमत्कारिक गुटिका लगाएं। ऐसा करने से नजर एवं अन्य अभिचारकर्मों से बचाव होता है और कार्य-व्यवसाय में प्रगति होती है।
दीपावली पर गोमती चक्र तिजोरी में स्थापित करें।
यदि व्यापार में लाख प्रयतल करने पर भी उन्नति नहीं हो रही हैतथा व्यापार में लगातार घाटा हो रहा है, तो रविवार के दिन हुदहुदकी कलगी ले आएं और उसे किसी भी लक्ष्मी मंत्र से अभिमंत्रितकरके अपने व्यापार स्थल पर रखें। धीरे-धीरे व्यापार में सफलतामिलने लगेगी।
बुधवार को पीली कौड़ी लें, एक जोड़ा अखंडित लौंग, एक जोड़ीछोटी इलायची तथा अपने व्यापार स्थल की एक चुटकी मिट्टी
लेकर इन कौड़ियों को जलाकर जो राख बनेगी उस राख को एकदेसी पान के पत्ते में रख लें। तांबे का सिक्का लें जिसमें छेद हुआहो। इस सारी सामग्री को छेद वाले सिक्के के साथ किसी बहते हुएजल में प्रवाहित करें। जिस दिन ये सारी सामग्री प्रवाहित करें उसदिन का उपवास रखें और छोटी कन्याओं को भोजन कराएं।
घर या व्यापार स्थल के मुख्य द्वार के पास और घर के ईशान कोणमें थोड़ी जगह को गंगाजल से धो लें। फिर उस जगह पर हल्दीसे सतिया बनाएं। इस सतिए पर थोड़ी चने की दाल तथा थोड़ानया गुड़ रखकर ईश्वर से अपने व्यापार तथा परिवार कीसुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। इससे अवश्य ही लाभ प्राप्तहोगा। यह प्रयोग शनिवार को करना है।
अगर किसी व्यापार में साझेदारी हो और लड़ाई-झगड़ा हो तोकिसी होली या दीपावली की रात को कच्चा सूत लेकर उसकोरोली में रंग लें। उसको लक्ष्मी माता के आगे रखकर प्रार्थना करेंकि हमारा कार्य-व्यापार ठीक से चले और लड़ाई-झगड़ा भी नहो। हमारी साझेदारी भी बनी रहे तथा व्यापार में बढ़ोतरी हो।
व्यापार या काम पर जाने से पहले 21 रुपए किसी गुप्त जगह पररखकर चले जाएं। आपको अवश्य ही सफलता प्राप्त होगी। वापसआने पर इन गुप्त रुपयों को किसी गरीब को दान दें।
थोड़ा-सा कच्चा सूत लेकर उसे शुद्ध केसर में रंग लें। इस रंगे हुएसूत को ग्यारह बार श्री हनुमत नमः का पाठ कर अभिमंत्रितकर लें। इसको व्यापारिक स्थल पर बांध दें। व्यापार में बढ़ोतरी होनेलगेगी।
शुक्ल पक्ष के बृहस्पतिवार को एक चमकीले पीले रंग का कपड़ालेकर मंदिर जाएं। तुलसी के आस-पास जो घास उगी हो, उसेतोड़कर पीले कपड़े या रुमाल में रखकर घर ले आएं। इसको घरमें तथा व्यापार स्थल में रख दें। व्यापार में वृद्धि होगी। इस क्रियाको केवल बृहस्पतिवार को ही करें।
अगर व्यापार में लगातार घाटा हो रहा हो, एक चुटकी आटा लेकररविवार के दिन व्यापार स्थल या दुकान के मुख्य द्वार पर दोनों ओरथोड़ा-थोड़ा छिड़क दें और कहें-जिसकी नजर लगी है उसीको लग जाए। बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला। यह उपाय केवलशुक्ल पक्ष में ही करें।
रविवार को गंगाजल लेकर उस पर फूंक मारकर 21 बार गायत्रीमंत्र का पाठ करें। फिर इस जल को व्यापार स्थल पर और सभीदीवारों पर भी छिड़क दें। ऐसा लगातार 7 रविवार करना है।व्यापार में वृद्धि होने लगेगी।
सोमवार को सफेद चंदन लेकर उसे घर के मंदिर में एक सप्ताहतक रखें। धूपबत्ती दिखाएं तथा एक सप्ताह के पश्चात उसको घरके पैसों के साथ रखें तो बिक्री में वृद्धि तथा घर में खुशहाली आनेलगेगी। सोमवार को इससे अपने माथे पर तिलक भी कर लें।
अगर व्यापार ठीक से न चल रहा हो तो एक तोता पिंजरे सहितबुधवार को खरीदें और तोते को स्वतंत्र कर दें। ध्यान रखना है कितोते के पर कटे हुए नहीं हों। तोता जितनी अधिक दूर जाएगा उतनाही व्यापार अधिक चलेगा।
कार्य-व्यापार
दुकान में बिक्री बढ़ाने के लिए सिद्ध बड़ी काली कौड़ी और एकउल्लू के पंख को काले रंग के कपड़े में बांधकर अपनेव्यावसायिक स्थल पर लटकाकर बांध दें, बिक्री बढ़ने लगेगी।
कृष्ण पक्ष के बृहस्पतिवार के दिन दोपहर के समय कहीं से एककौवे को पकड़कर घर ले आएं और उसे पिंजरे में बंद कर दें।उसको दाना-पानी देते रहें। रविवार के दिन उसे दही और चीनीमिलाकर खाने को दें। दोपहर को कौवे को भोजन में थोड़ा-साचावल का भात, दूध और चीनी मिलाकर डालें। सायंकाल कोनारियल के पानी में तर किया हुआ बाजरा और ज्वार के दानों को उसके बर्तन में रखें। फिर सोमवार के दिन प्रातःकाल दुकान मेंअपने कार्य को सिद्ध करने के लिए पहुंचें। यहां पर इस बात काध्यान रखना होगा कि द्वार के भीतर प्रवेश करते समय अपना दायांपांव पहले आगे बढ़ाना है। ऐसा करने से व्यापार में निरंतर वृद्धिहोती जाएगी। सायंकाल घर वापस आकर उस कौवे को मौठाहलवा और दही खिलाकर पिंजरे से बाहर निकालकर उसे उड़ा दैं।कई बार लोग एक व्यापार के चलते उसके साथ नया व्यापार खोललेते हैं। पुराना व्यापार तो चलता है पर नया नहीं चलता है, तो नएउद्योग को चलाने के लिए शनिवार के दिन पुराने काम से कोईलोहे की चीज नए स्थान पर लाकर रख दें। रखने से पहले उसस्थान पर थोड़े-से काले उड़द डाल दें। लाई गई वस्तु को बार-बारहटाना नहीं है। इस प्रकार पुराने व्यापार के साथ-साथ नया कामभी चलने लगेगा।
पुष्य नक्षत्र में सिद्ध किया गया नागरमोथा एक तोला प्राप्त करउसे एक शुद्ध चमकीले पीले वस्त्र में बांधकर अपने व्यापार केस्थल पर मुख्य द्वार के ऊपर शुक्रवार के दिन प्रातःकाल एक-दोइंच की कोल ठोककर लटका दें। आपके व्यापार में बहुत हीअधिक वृद्धि होने लगेगी।
व्यापार में निरंतर घाटा हो रहा हो, बिक्री भी अच्छी न हो रही होतो उसके लिए एक काली कौड़ी और एक उल्लू के पंख कोकाले रंग के कपड़े में बांधकर अपने व्यापारिक स्थल पर दक्षिणदिशा की ओर लटकाकर बांधकर रखें। आपकी समस्या कासमाधान धीरे-धीरे हो जाएगा।
व्यवसाय में वृद्धि नहीं हो रही हो, काम-धंधा ठंडा पड़ गया होतो ग्रहणकाल के समय गल्ले या तिजोरी में तांत्रिक वस्तुएंहत्थाजोड़ी, बिल्ली की जेर एवं सियारसिंगी को स्थापित करें।दक्षिणावर्ती शंख एवं दक्षिणमुखी गजानंद स्थापित करने से भीव्यापार बाधा दूर होती है।
यदि व्यापार अथवा दुकान में काम-काज मंदा पड़ गया हो तथा
आमदनी बंद हो गई हो तो एक चुटकी आटा व्यापार के मुख्यस्थल व दुकान के मुख्य द्वार पर गिरा दें तथा कहें-जिसकीनजर हो, उसी को लगे। यह क्रिया शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा सेपूर्णिमा तक लगातार करें। उसके करते समय कोई देखे नहीं। इसेचुपचाप करना चाहिए।
अगर व्यवसाय स्थल पर कम ग्राहक आ रहे हों, किसी ने आपकेव्यवसाय को बांध दिया हो तो रविवार की दोपहर को 5 कागजीपीले रंग के नीबू काटकर व्यवसाय स्थल पर रखकर उसके साथएक मुट्ठी कालीमिर्च, एक मुट्ठी पीली सरसों रखें। अगले दिन जबदुकान या व्यवसाय स्थल खोलें तो सारे सामान को इकट्ठा करकेदूर वीराने में जाकर कच्ची धरती में गाड़ दें। इस प्रयोग से व्यवसायपर किया गया तांत्रिक प्रयोग तुरंत समाप्त हो जाएगा।
परिश्रम करने के बावजूद भी कारोबार, व्यापार चल न रहा हो तथाअत्याधिक व्यय हो, तो पुष्य नक्षत्र योग और शुभ चंद्रमा के दिनप्रातः हरे रंग के कपड़े की छोटी थैली तैयार करें। इस थैली में 9दाने मूंग, 10 ग्राम साबुत धनिया, 1 पंचमुखी रुद्राक्ष, एक चांदी कारुपया तथा 2 सुपारी, 2 हल्दी की गांठें रखकर गणेश जी को शुद्धघी के लड्डुओं का भोग लगाएं। यह थैली तिजौरी में रख दें।आर्थिक स्थिति में तुरंत सुधार होगा।
व्यापार-सम्बंधी कार्य में कोई ग्राहक आपके प्रतिकूल जा रहा है।और वह अन्यत्र सम्बंधित कार्य में कोई सम्बंध बनाने का इच्छुकहै तो गेंदे का फूल पीसकर उसका तिलक लगाकर उस व्यक्ति सेबात करें। आपका सौदा पट जाएगा।
व्यापार बंधनमुक्ति उपाय
कई बार व्यावसायिक प्रतिद्वंद्धी या अपने ही सगे-सम्बंधी व्यापार,दुकान या धंधे को बांध देते हैं, जिससे आर्थिक उन्नति अवरुद्ध हो जाती है। इसके लिए सूर्य ग्रहणकाल में शुद्ध चमेली के तेल का दीपकजलाएं। आप स्वयं किसी ऊनी या रेशमी आसन पर बैठ जाएं। अब किसीभी माला से या यूं ही एक वस्तु हाथ में लेकर ॐ कीली कीली स्वाहामंत्र का 54 बार उच्चारण करें तथा फिर दूसरी और तीसरी वस्तु हाथमें लेकर 54 बार उपरोक्त मंत्र का जाप करें। इसके पश्चात दोनों वस्तुओंको एक डिब्बी में डालकर ऊपर से कामिया सिंदूर भर दें। अब दीपकबुझाकर उसका तेल भी इस डिब्बी में डाल दें। फिर डिब्बी को बंदकर दें। इसे अपने व्यापार स्थल पर छुपाकर रख दें। शुक्ल पक्ष के मंगलवारया कृष्ण पक्ष के शनिवार को अगर हनुमान मंदिर में लाल रंग की पताकालगाई जाए, तो मान-सम्मान के साथ-साथ धन की प्राप्ति भी होतीहै। यह प्रयोग कम से कम तीन बार करें।
।। ॐ शिव गोरक्ष ।।
!! लक्ष्मी बंधन, व्यापार बंधन, रोजी रोजगार बंधन !!
!! खोलने का शक्तिशाली उपाय !!
नमस्कार साधक मित्रो,
अक्सर मैने देखा है और मेरे पास काफी लोग भी आते है जिनकी मूल समस्या धन की होती है ...ये आजकल आम बात है की ईर्षा वश होके या किसी जघड़े विवाद को लेके किसी न किस ने या तो उनकी लक्ष्मी बांध दी होती है या व्यापार बंधन करदिया होता है ।
आपको जानकर हैरानी होगी कि तंत्र में और टोटकों में किसी की भी लक्ष्मी बंधन सबसे आसान क्रिया है ।बात थोड़ी अटपटी सी है मगर यही सच्चाई है । किसी भी लक्ष्मी बांध देना या धंधा बांध देना यह तंत्र में सबसे आसान काम है और कोई भी ऐरा गैरा नत्थू गौरा ये कर सकता है सिर्फ एक निब्मू या कुछ सरसो से आपके कर्ज में डूबा सकता है 😂
फिर जैसे ही आप परेशानी लेके किसी बाबा या तांत्रिक के पास जाते है तो वह तुरंत आपका बंधन बताकर आपसे इसको खोलने के लिए और पैसे की मांग करता है और आपको मजबूरन किसी न किसी पंडित या बाबा को पैसे देने पड़ते है और बंधन खुलवाना पड़ता है तब जाके आपकी जान में जान आती है ।
इतना सब करने के बाद भी अपना समय और पैसा खर्च करने के बाद भी बहुत कम लोगो को या तो किस्मत वालो को ही सच्चा पुजारी मिलता है को उनका बंधन खोल देता है बाकी तो ठग पैसे लेके गायब ही हो जाते है 😉
🤭 किंतु आपको चिंता करने की आवश्यकता क्या है जब आप हमारे ग्रुप तंत्र जगत की साधनाएं व अनुभव से जुड़े हुए है !
💥आज में आप लोगों को एक ऐसी मंत्र विधि दे रहा हु जिससे आप अपने और अपने स्नेहिओ के बंध व्यापार या लक्ष्मी बंधन को भी खोल सकते है ।
और कुछ ठगीओ की कमाई का सबसे बड़ा मार्ग भी बंध करने जा रहा हु तो वे लोग मुझे माफ करे 🙏😉
सामग्री : तो इसके लिए आपको चाहिए एक नींबू , थोड़ेसे सरसों , एक काला धागा, एक सुई , कपूर और अगरबत्ती एक छोटी थाली ।
विधि : ५ अगरबती जलाकर आपको २७ बार मंत्र पढ़ना है हर बार मंत्र पढ़कर नींबू पे फूंक मारनी है यानी २७ बार फूंक मारनी है । उसके बाद नींबू को सुई की मदद से काले धागे में पिरोना है, और दुकान के या मकान के द्वार के बाहर बांधना है
,फिर सरसो पे एक बार मंत्र पढ़ फूंक मारनी है और उसको दुकान या मकान के कोने कोने में उतारा करना है । और फिर उस सरसो को दरवाजे से बाहर लेजाकर कपूर की मदद से सुलगा देना है , पूरा जला देना है । बची हुई अगरबती पूजा स्थान में लगा सकते है । फिर रात को दुकान बंध करते वक्त नींबू निकाल के जल में प्रवाहित करदेना है ।
दुनिया का बड़े से बड़ा बंधन टूट जायेगा ।
आपके धन के मार्ग खुल जायेंगे और बरकत ही बरकत होगी ।
मंत्र : ॐ नमो आदेश गुरुको, बावन वीर, चौसठ जोगनी ।
सातऊ कलवा पांचऊ वढवा,जिन्न,भूत,पलीत,देव,दानव।
दुष्ट मुष्ट मैली मसान,इन्ही को कील कील नजर डिथ मूठ।
टोना टा रे लोना चमारी गल्ले वा बंधे की बरकत को ना ।
छुड़ावे तो माता हिंगलाज की दुहाई ।
कार्य होने के सवा महीने बाद माता हिंगलाज के नाम से छोटे बच्चो को चॉकलेट विगेरा बांट दे ।
।। सतनमो आदेश गुरुजी को आदेश ।।
व्यापर पे तांत्रिक प्रयोग होने पर
जब भी व्यक्ति आगे बढ़ता है, तो कुछ लोगों को उसकी उन्नति से ईष्याहोने लगती है और वे उसको नीचा करने का उपाय सोवने लगते हैं। व्यापारके क्षेत्र मे तो यह भावना आम बात है। अगर किसी का व्यापार फल-फूलरहा हो, तो उसके प्रतिद्धंद्वियों की नींद हराम हो जाती है और इसी कारण वे उसके व्यापार को बांध देते हैं, जिससे कि उसकी आय न हो और वहसमस्याओं में उलझकर रह जाए। उसे यह समझ नहीं आता कि व्यापारमें लगातार घाटा क्यों होता जा रहा है। जहां-जहां भी लाभ की अपेक्षारहती है, वहीं उसे हानि प्राप्त होने लगती है। इसके विपरीत अन्य लोगोंपर कोई प्रभाव नहीं होता। लंबे समय तक इसी प्रकार की स्थिति बनीरहती है, तो वह मायूस हो जाता है। इस प्रयोग के माध्यम से आप अपनेव्यापार पर किए गए बंधन प्रयोग को काट सकते हैं।
किसी पात्र में श्रीयंत्र को स्थापित कर उसका कुकुम, अक्षत से पूजनकरें तथा दीपक जलाकर उसको देखते हुए निम्न मंत्र का जप 108 बारकरें।
।ॐ हीं व्यापार बन्ध मोचय मोचय ॐ फटू।।यह मंत्र जप 21 दिन तक करें।
व्यापार बंधन दूर करने का सिद्ध मन्त्र
ओं दक्षिण भैरवाय भूत, प्रेत, बन्ध,तन्त्र बन्ध निग्रहनी सर्व शत्रु संहारणी कार्य,सिद्धि कुरु कुरु स्वाहा।
विधि-असली गुलाल, गोरोचन, छार, छबीला और कपूर कचरी पीसकर एक में मिला दें। रात्रि को किसी भी समय उपरोक्त मन्त्र का 108 बार जप करें, और मन्त्रों का जाप करते हुए ये सब सामान दुकान में बिखेर दें। इस प्रकार ५ दिन लगातार प्रयोंग करने से आपकेव्यापार की हर बाधा दूर होगी। पहले विधिपूर्वक नियम से २१ दिनतक इस मन्त्र का जाप करके सिद्ध कर प्रयोग में लावें।
कार्य-व्यवसाय में बाधा नष्ट करने के टोटके
सुखमय जीवन व्यतीत करने के लिए मनुष्य को रोजी-रोजगारकरना पड़ता है। इसके लिए जहां अनेक लोग अपना व्यापार याव्यवसाय करते हैं, वहीं अन्य व्यक्ति नौकरी आदि से जुड़े रहते हैं। ऐसेमें अनेक प्रकार की कार्य बाधाएं उपस्थित हो जाती हैं, जिनकाकभी-कभी कोई समाधान नहीं दिखाई देता। इसके अलावाघर-परिवार के कार्यों में भी प्रायः बाधाएं उत्पन्न होती रहती हैं। इसप्रकार की समस्त बाधाओं के निवारण में भी टोने-टोटके महत्त्वपूर्णभूमिका निभाते हैं। कार्यबाधा नाश सम्बंधी आजमाए हुए इनटोने-टोटकों से शीघ्र लाभ होता है। आप भी यहां दिए जा रहेटोने-टोटकों का प्रयोग करके अपने कार्यों की बाधाएं दूर कर सकतेहै।कयबशकखटोेटटकनमनलखत हंनित्य प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर गीता के ग्यारहवें अध्यायका पाठ करने से कारयों में आने वाली सभी बाधाएं नष्ट हो जातीहैं।
गीता के ग्यारहवें अध्याय के 36वें श्लोक को लाल स्याही सेलिखकर घर में टांग दें। सभी प्रकार की बाधाएं दूर हो जाएंगी।अपने दिन का आरंभ करते समय जब आप बाहर निकलें तो पहलेदायां पांव बाहर निकालें। आपके वांछित कायों में कोई बाधा नहींआएगी।
घर से निकलते समय कोई मीठा पदार्थ-गुड़, शक्कर, मिठाई याशक्कर मिला दही खा लें। कारयों की बाधा दूर हो जाएगी।तुलसी के तीन-चार पत्तों को ग्रहण करके घर से बाहर जाने परभी कारयों की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
प्रातःकाल गणेशजी को दूर्वा अर्पित करके घर से बाहर जाएं।आपके कार्यों में कोई बाधा नहीं उत्पन्न होगी।
अगर बार-बार कार्यों में बाधा आ रही हो तो अपने घर में श्यामातुलसी का पौधा लगाएं। संध्याकाल तुलसी के पास शुद्ध घी कादौपक जलाएं। इस टोटके द्वारा बार-बार आने वाली बाधा से सदैवके लिए छुटकारा मिल जाएगा।
5 बत्ती का दीपक हनुमान जी के मंदिर में जला आएं। इससेआपकी सभी प्रकार की बाधाएं और परेशानियां दूर हो जाएंगी।
प्रातःकाल भगवती दुर्गा को पांच लाल पुष्प चढ़ाएं। आपके कार्योंकी सभी बाधाएं समाप्त हो जाएंगी।
घर से बाहर निकलते समय जिधर का स्वर चल रहा हो, उसीतरफ का पैर पहले बाहर निकालें। इससे कार्यों में बाधा नहींआएगी।
अश्विनी नक्षत्र में पीपल का बांदा लाकर लाल धागे में लपेटकरबाई भुजा पर बांध लें। इस टोटके से कार्यों की बाधाएं समाप्त होतीहैं।
किसी कार्य की बाधा दूर करने के लिए प्रातःकाल सीता एवंहनुमानजी के मंदिर जाएं। सबसे पहले हनुमानजी के दर्शन करें।उनकी प्रतिमा से अपनी उंगली पर थोड़ा सा सिंदूर लेकर सीताजीके सामने अपनी समस्या कहें। फिर वह सिंदूर उनके चरणों परलगा दें। 9 दिनों में कार्यों की बाधा दूर हो जाएगी।
कार्यों की बाधाएं दूर करने के लिए मंगलवार के दिन मिट्टी केपात्र में शुद्ध शहदभरकर उसे किसी एकांत स्थान पर चुपचाप रखआएं। यह टोटका करने से भी सभी प्रकार की कार्य बाधाएं दूरहो जाएंगी।
हल्दी और चावल को पीसकर उसके घोल से घर के प्रवेश द्वारपर ॐ लिख दें। आपका घर समस्त प्रकार की बाधाओं से सुरक्षितरहेगा।
सफेद कपड़े की ध्वजा को पीपल के वृक्ष पर लगाने से व्यवसायमें स्थिरता आती है तथा कार्यों की बाधाएं दूर होती हैं।
घर से निकलते समय एक सिक्का हाथ में ले लें। उसे भिखारी को
देने से भी सभी प्रकार की कार्य बाधा दूर हो जाती है।
कायों में आने वाली बाधाएं दूर करने के लिए धनतेरस से दीपावली
तक लगातार तीन दिन संध्याकाल ‘श्रीगणेश स्तोत्र' का पाठ करें।
पाठ के बाद गाय को हरी सब्जी या घास खिलाएं। इस टोटके सेकार्यों की बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।
21 दिनों तक भगवती दुर्गा को रक्त पुष्प चढ़ाकर धूप-दीप जलाकर108 बार दुर्गा के बीज मंत्र का जप करने से कारयों की बाधाएंसमाप्त हो जाती हैं।
प्रातःकाल दीपक जलाकर उसमें दो अखंडित लौंग डाल दें। उसकेबाद घर से प्रस्थान करें। आपके कार्यों में आने वाली बाधा नष्ट होजाएगी।
शनिवार के दिन सरसों का तेल तथा काली उड़द का दान करें।कार्यों की समस्त बाधाएं दूर हो जाएंगी।
सायंकाल स्नानादि से निवृत्त होकर साफ कपड़े पहनकर गाय का
आधा किलो कच्चा दूध ले आएं। इस दूध में 21 बूंद शहदडालकर घर में छिड़क दें। सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी।
राहु या केतु के लग्न में होने पर राहु-केतु का मंत्र जप करें। इससे
कार्यों की सभी प्रकार की बाधाएं दूर हो जाती हैं।
बुधवार के दिन प्रातःकाल स्नान करें। फिर गणपति की मूर्ति व चित्र
को स्थापित करके उसका सामान्य पूजन करें। इसके बाद ॐ गं
गणपतये नम: मंत्र का जप प्रारंभ करें। 21 दिनों में सवा लाख मंत्रजपें। साधना समाप्त होने पर किसी ब्राह्मण पुत्र या कुंआरी कन्या कोभोजन कराकर उसे दक्षिणा एवं वस्त्र आदि भेंट स्वरूप प्रदान करें।गणपति का विग्रह या मूर्ति अपने पूजा स्थान में रख दें। ऐसा करनेपर निकट भविष्य में होने वाला कोई विष्न उपस्थित नहीं होगा।
कार्य-व्यवसाय में पूर्ण सफलता हेतु टोटके
प्रत्येक मनुष्य की यह इच्छा होती है कि वह अपने व्यवसाय,नौकरी, कारयों तथा अन्य क्षेत्रों में सफलता अर्जित करे। लेकिनकभी-कभी किन्हीं कारणवश वह इनमें बार-बार असफल होता रहताहै। कई बार भाग्य के कारण बनते-बनते कार्य भी बिगड़ जाते हैं। ऐसीस्थिति में उसे मानसिक तनाव, चिंता, क्षोभ, दुख एवं निराशा का सामनाकरना पड़ता है। इन सभी स्थितियों से छुटकारा पाने और समस्त क्षेत्रोंमें सफलता अर्जित करने के लिए आप टोने-टोटके का आश्रय लेसकते हैं। इस अध्याय में हम विभिन्न कार्य क्षेत्रों में सफलता प्रदानकरने वाले आजमाए हुए टोने-टोटकों का वर्णन कर रहे हैं। इनकाउपयोग करके आप समस्त क्षेत्रों में सफलता की सीढ़ियां चढ़ने मेंसमर्थ हो सकते हैं। सफलता प्राप्ति के कुछ महत्त्वपूर्ण तथा उपयोगीटोने-टोटके यहां प्रस्तुत हैं
शुभ कार्य के लिए जाते समय प्रियंगु को दरवाजे के बाहर बिखेरदैं। बिगड़ते हुए काम भी सफल हो जाएंगे।
एक सुपारी पर मौली लपेटकर उसे गणपति के रूप में स्थापित
करके उसका संक्षिप्त पूजन करें। कायों में सफलता मिलेगी।
सरसों के तेल के दीपक में एक अखंडित लौंग डालकर निर्जनस्थान पर जला दें। कार्यों में सफलता प्राप्त होगी।
प्रातःकाल श्यामा तुलसी के पौधे में अर्ध्य देकर धूप दिखाएं। पूरा
दिन सफलतापूर्वक व्यतीत होगा।
प्राण-प्रतिष्ठित हाखिद्रिक की सामान्य पूजा करके अपनी जेब में रख
लें। शाम को उसे निर्जन स्थान पर डाल दें। सभी कार्य सफल होंगे।
अभिमंत्रित घुरुण्डी को चमकीले लाल वस्त्र में बांधकर अपने पास
रखने से पूरा दिन सफलतापूर्वक व्यतीत होगा।
अपनी दाई भुजा में विधिपूर्वक आम का बांदा बांधने से कायों मेंसफलता मिलती है तथा पराजय का सामना नहीं करनापड़ता।
महत्त्वपूर्ण कार्यों के लिए जाते समय चमकीले लाल रंग के वस्त्रधारण करने से कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
महत्त्वपूर्ण कारयों को करते समय नीले एवं गहरे रंग के वस्त्र धारणकरने से कायों में सफलता अवश्य मिलती है।
अगर आप किसी विशेष कार्य के लिए जा रहे हों तो एक नारियलपर कुंकुम का तिलक करके अपने साथ ले जाएं। कार्य में सफलतामिलने पर उचित दक्षिणा के साथ उसे गणेश मंदिर में अर्पित करदें।
नौकरी अथवा साक्षात्कार के लिए जाने से पूर्व कपिला गाय कोदेशी गेहूं का आटा और नया गुड़ खिलाएं। सफलता अवश्य प्राप्तहोगी।
कृष्ण पक्ष के किसी भी शनिवार को काले फर्श पर इमली केकोयले से शनि का यंत्र बनाएं। फिर काले तिल, काली उड़द औरकच्ची घानी के सरसों के तेल से उसकी पूजा करके उसे अपने सिरसे पैर तक 21 बार उतारकर किसी नदी में डाल दें। सभी कारयों मेंसफलता प्राप्त होगी।
आक, खैर, अपामार्ग, पीपल, गूलर, शमी, दूर्वा एवं कुशा इनसबकी जड़ को पीतल की एक छोटी सी डिब्बी में रखकरनित्य पूजा करने से मनुष्य को हर कार्य में सफलता प्राप्त होतीहै।
साक्षात्कार में सफलता प्राप्त करने के लिए 5 अभिमंत्रित कौड़ियोंपर हल्दी का तिलक लगाकर अपने ऊपर से 8 बार उतारकरकिसी हरिजन को 11 रुपए के साथ दे दें। आपको सफलताअवश्य मिलेगी।
प्रातःकाल भगवान शिव के आगे 5 बत्ती का दीपक जलाएंlआपको सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होगी।
श्मशान में उत्पन्न चावलों का हल्दी मिला टीका लगाकर बाहर जाने से व्यक्ति का प्रत्येक कार्य सफल होता है।
श्मशान में उगे गुलाब के फूलों से बनाया गया इत्र का फाहा कानमें रखने से मुकदूदमा, वाद-विवाद और अन्य कायों में सफलतामिलती है।
मुख्य द्वार पर 7 काली मिर्च डालकर उस पर पैर रखकर बाहरनिकलें तथा एक बार चल देने पर पुनः वापस न आएं। कायों मेंसफलता मिलेगी।
बाहर जाने से पहले बेसन का लड्डू खा ले। सब काम सफल हाँगे।किसी मंदिर में अनाज के 7 दाने चढ़ाने से कारयोँ में सफलतामिलेगी।
चुटकी भर नमक घर के द्वार पर डालकर बाहर जाएं। कार्य सफलहोगा।
भगवान गणपति पर दूर्वा चढ़ाकर कार्य हेतु जाएं। सफलता मिलेगी।तुलसी के पौधे में जल डालकर प्रदक्षिणा करें। कायों में सफल होंगे।
प्रातःकाल बिस्तर से उठने पर पहले दायां पांव धरती पर रखें। सारादिन उत्साह और सफलता के साथ व्यतीत होगा।
शुक्ल पक्ष के किसी भी गुरुवार को हल्दी की 3 पुड़िया बना लें।इनमें से एक नदी में प्रवाहित कर दें। दूसरी माता दुर्गा अथवा मांपार्वती के चरणों में रख दें। तीसरी सदैव अपने पास रखें। आपकोसभी कार्यों में सफलता मिलेगी।
पीपल के वृक्ष के नीचे शाम को 7 दीपक जलाकर 7 बार परिक्रमाकरें। उसके पश्चात 7 लड्डू कुत्ते को खिलाएं। ऐसा करने से मनप्रफुल्लित रहेगा और समस्त का्यों में सफलता प्राप्त होगी।
परिवार के प्रत्येक व्यक्ति से पैसा लेकर गुरुधाम में दें। इससेअनिष्टकारी फल का नाश होकर प्रत्येक कार्य में सफलता मिलेगी।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में पूर्वा नामक वृक्ष का बांदा दाई भुजा पर बांधनेसे सभी कायों में सफलता प्राप्त होती है।
प्रथम पुत्र संतान की नाल को जेब में रखकर कचहरी जाने सेमुकद्दमे तथा अन्य कार्यों में सफलता अवश्य मिलती है।
व्यापार-व्यवसाय सम्बंधी टोटके
आज के युग में अधिकांश लोग नौकरी की अपेक्षा व्यापार तथ्यव्यवसाय करना अधिक पसंद करते हैं। इसका कारण यह है किनौकरी से जहां सीमित और निर्धारित धन प्राप्त होता है, वहाँ।व्यापार-व्यवसाय से अपार धन लाभ तथा उसके विस्तार कीसम्भावना रहती है। इसीलिए लोग अपने व्यापार-व्यवसाय को जमानेऔर उसकी प्रगति के लिए अथक प्रयास एवं उपाय करते हैं। लेकिनअनेक लोग सभी प्रकार के क्रियाकलापों तथा विभिन्न हथकंडों कोअपनाने के बावजूद व्यवसाय या व्यापार में सफल नहीं हो पाते। कईलोग तो निराश होकर उसे बंद कर देते हैं। ऐसी स्थिति में आप यहांप्रस्तुत किए जा रहे टोने-टोटकों को आजमाकर अपने व्यापार एवंव्यवसाय को चमका सकते हैं। इन टोने-टोटकों से कार्यस्थल, दुकानया फैक्टरी आदि की उत्तरोत्तर उन्नति का विकास होने लगता है। आपभी इन टोने-टोटकों को आजमाकर देखें। ये इस प्रकार हैं-होली के अवसर पर नए चमकीले लाल कपड़े में गुलाल रखकरपोटली बनाकर तिजोरी में रखें। व्यवसाय से धन लाभ होगा।श्रीयंत्र को कमलगट्टे की माला पर स्थापित किया जाए तो व्यापारएवं व्यवसाय का विस्तार होने लगता है।
पूजा स्थान में श्रीयंत्र के साथ कुछ नागकेसर रखने से व्यापार औरव्यवसाय में बहुत वृद्धि होती है।
यदि नित्य सुबह दुकान खोलने के बाद लक्ष्मीजी के चित्र कोधूप-दीप दिखाकर प्रणाम किया जाए तो अवश्य ही बिक्री बढ़जाती है।
12 गोमती चक्र को कपड़े में बांधकर कार्यस्थल की चौखट परलटका दें ताकि ग्राहक उसके नीचे से निकलें। इससे भी व्यापारमें वृद्धि होती है।
एक नारियल को चमकीले नए लाल वस्त्र में लपेटकर व्यवसाय
स्थल पर रखने से व्यवसाय में उत्तरोत्तर वृद्धि होती है।
# एकाक्षी नारियल को अपनी दुकान में रखने से दुकान खूब चलती है।
# यदि आपका व्यवसाय मशीनों से सम्बंधित है, आपके व्यवसाय में कोई महंगी मशीन है अथवा कोई मशीन जल्दी-जल्दी खराब होती है तो आप काली हल्दी को पीसकर केसर तथा गंगाजल में मिलाकर प्रथम बुधवार को उस मशीन पर स्वास्तिक का चिह्न बना दें। मशीन खराब नहीं होगी।
७ दुकान अथवा व्यवसाय के उद्घाटन के समय चांदी की एक कटोरी में धनिया डालकर उसमें चांदी की लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति रख दें। इस कटोरी को पूर्व दिशा की ओर स्थापित करें। दुकान खोलते ही 5 अगरबत्ती से इनका पूजन करने से दुकान और व्यवसाय में उत्तरोत्तर उन्नति होती है। .
७ दुकान एवं व्यवसाय शुरू करते समय मिट्टी के 4 कलश में क्रमश: काले तिल, मूंग, जो तथा पीली सरसों भरकर रखने से ग्राहकों का आगमन सरलता से होता है। ये कलश वर्ष भर रखें तथा अगले वर्ष इन्हें नदी में प्रवाहित करके नए कलश में पुनः नई सामग्री भरकर रख लें। दुकान की प्रगति होगी।
७ देसी कर्पुएर और रोली को जलाकर उसकी राख बना लें। फिर उस राख हे गल्ले में रखें। इससे व्यापार दिन दुगना रात चोगुना बढ़ जाता है।
७ यदि व्यवसाय में निरंतर हानि हो रही हो तो वटवृक्ष की जड़ लाकर उसे रेशमी धागे में बांधकर दुकान के मुख्य द्वार के समीप लटका दें। अगर कच्चे रेशमी धागे को लाल चंदन से रंग लिया जाए तो शीघ्र ही हानि दूर होकर लाभ होने लगता है।
७ टुकान या व्यवसाय स्थल को खोलने से पहले मुख्य द्वार के दोनों तरफ गंगाजल छिड़कें। वह दिन काफी लाभदायक होगा।
# किसी भी शनिवार के दिन पुराने व्यवसाय स्थल से कच्चे लोहे की वस्तु लाकर अपने नए व्यवसाय स्थल पर रख दें। इससे पुराने व्यवसाय के साथ-साथ नए व्यवसाय में भी सफलता मिलने लगेगी।
७छ काले तिल और सफेद सरसों को ख्यवसाय स्थल या दुकान के मुख्य द्वार पर रखने से बिक्री बढ़ाने में सहायता मिलती है।
७छ निर्गुडी ओर सफेद सरसों को दुकान या व्यलसाय स्थल के मुख्य द्वार पर रखने से बिक्री बढ जाती है।
७ प्रत्येक शुक्रवार को निर्धनों में चना एवं गुड़ बांटने से व्यवसाय एवं
व्यापार में काफी लाभ होता है। ७ शुक्रवार के दिन भुने हुए चने और रसायनरहित गुड़ में खट्टी-मीठी गोलियां मिलाकर 8 वर्ष तक के बच्चों में बांट दें। इससे व्यापार
एवं व्यवसाय में वृद्धि होती है। ७ बुधवार के दिन व्यवसाय या व्यापार करने वाले व्यक्ति के ऊपर
से 7 लड्डू उतारकर रख दें। दूसरे दिन परिवार का कोई व्यक्ति सूरज निकलने से पहले (जब तारे दिखाई दे रहे हों) वे लड्डू किसी सफेद गाय को खिलाकर घर लोट आएं। लेकिन लौटते समय पीछे मुड़कर न देखें। व्यवसाय एवं व्यापार में वृद्धि
होगी।
व्यापार में होने वाले घाटे से बचने के लिए ७ अगर किसी के व्यापार में लगातार हानि हो रही हो तो किसी भी पक्ष के बुधवार के दिन यह प्रयोग कर सकते हैं। यह प्रयोग लगातार करना आवश्यक होता है। प्रयोग को प्रारंभ करने वाले बुधवार को पीली कौडी लें, एक जोड़ा लोंग लें, एक जोडी छोटी इलायची तथा अपने व्यापार स्थल की एक चुटकी मिट्टी लेकर इन कोडियों को जला लें। जो इनकी राख बनेगी उस राख को एक पान के पत्ते में रख लें, तांबे का सिक्का लें जिसमें एक छेद कर लें। इस सामग्री को सिक्के के साथ जल में प्रवाहित कर दें।
व्यापार में उन्नति प्राप्त करने हेतु प्रयोग
७ जिन व्यापारी भाइयों का व्यापार चलते-चलते ठप्प हो गया हो, लाख प्रयल करने के पश्चात भी नहीं चल रहा हो तो इस उपाय
को करें। प्रत्येक मंगलवार को 21 पीपल के पत्ते लें। उनको गंगा जल से अच्छी तरह से धोकर लाल चंदन से हर पत्ते पर एक बार राम-राम लिखें। इसके पश्चात हनुमान जी के मंदिर चढ़ा आएं) इस उपाय को 21 मंगलवार करें।
कार्य-व्यापार में वृद्धि एवं सफलता के लिए अचूक टोटके
व्यापार में लगातार घाटा हो रहा हो तो
यदि किसी के व्यापार में लगातार नुकसान हो रहा हो तो किसी भै बुधवार के दिन यह प्रयोग शुरू कर सकते हैं। यह प्रयोग कम से कम पंच सप्ताह तक लगातार करना आवश्यक होता है। प्रयोग को प्रारम्भ करने वाले बुधवार को पीली कीड़ी लें, एक जोड़ा लौंग लें, एक जोड़ी छोटी इलायची तथा अपने व्यापार स्थल की एक चुटकी मिट्टी लेकर इन कीड़ियों को जला लें जो इनकी राख बनेगी उस राख को एक पान के पत्ते में रख लें तांबे भर सिक्का लें जिसमें एक छेद कर लें। इस सारी सामग्री को छेद वाले सिक्के के साथ किसी बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। जिस दिन सारी सामग्री करे जल में प्रवाह करें उस दिन का उपवास रखें तथा किसी नौ वर्ष से छोद॑ कन्या को भोजन कराएं। ह प्रयास करने पर भी व्यापार में उन्नति न हो रही हो
आपके सभी प्रयत्न करने पर भी अगर व्यापार में अनुकूलता नहीं मित् पा रही हो, तो श्यामा तुलसी (जिस तुलसी के पत्ते श्याम रंग के होते हैं) के चारों ओर अग आयी खरपतवार को, स्वार्थ सिद्धि योग में लाकर, पीले कड़े में बांधकर, गणेश जी के मंत्र का 108 बार जाप करें और उसे पीले कपड़े में बांधकर, व्यापार स्थल पर रख दें तथा 11 बार गणेश जी के मंत्र का जाप नित्य प्रति व्यापार स्थान पर सुबह जाने से पहले करते रहें, तो लाभ प्राप्त होगा। गुरुवार इसके लिए श्रेष्ठ दिन होता है। राहु काल से रहित, शुभ-लाभ अमृत की चौघड़िया को काम में लें।
व्यापार-व्यवसाय में वृद्धि हेतु जिन व्यापारियों का व्यापार स्थिर हो गया हो, चलते-चलते ठप्प पड़ गया हो अथवा व्यापार में समुचित प्रगति नहीं हो पा रही हो तो उन्हें वांछित सफलता प्राप्ति हेतु विधिपूर्वक सिद्ध करके इस यंत्र को गले में धारण कर लेना चाहिए।
मंत्र--त्रयाणां देवानां त्रिगुणजनितानां तव शिवे। भवेत्पूजा पूजा तव चरण योर्या विरचिता। तथा हि त्वत्पादो दहनमणि पीठस्या निकटे। स्थिता हयेते राखन्मुकुलित करोतं स मुकुटाः।
विधि-ै इस यंत्र को स्वर्ण पत्र अथवा रजत या ताम्र पत्र पर अंकित करवाकर या भोजपत्र पर अनार की कलम और लाल चंदन की स्याही से अंकित कर विधिपूर्वक पूजनादि करके स्थापित करें। यंत्र पर एकाग्र दृष्टि रखते हुए उक्त मंत्र का 45 दिन तक प्रतिदिन 100 जाप करें तथा प्रतिदिन यंत्र पूजन करें। प्रयोग समाप्ति के पश्चात् यंत्र को श्रद्धापूर्वक सोने अथवा चांदी की चेन में गले में धारण कर लें तो निश्चय ही चमत्कारी रूप से व्यापार में प्रगति होने लगती है। नैवेध---शहद को प्रतिदिन चढ़ाएं।
व्यापार को नजर से बचाने तथा व्यवसाय में वृद्धि के लिए
यह एक साधारण प्रयोग है तथा भारत में अधिसंख्य लोग इसे करते हैं। मंगलवार के दिन 7 साबुत डंठल सहित हरी मिर्च और एक बेदाग नींबू लें। उन्हें एक डोरे में इस प्रकार पिरोएं कि पहले 4 हरी मिर्च, फिर नींबू और फिर 3 हरी मिर्च हों। इन सबको डोरे में पिरोकर कार्यलिय, या व्यापार स्थान से बाहर टांग दें। यह प्रयोग हर मंगलवार के दिन करें। इससे व्यापार बढ़ेगा तथा नजर, या टोक भी नही लगेगी। यह प्रयोग शनिवार के दिन भी कर सकते हैं, परंतु मंगलवार के दिन यह विशेष फलदायी होगी।
बिक्री में बढ़ोतरी के लिए चमत्कारी प्रयोग
सामग्री : जल पात्र, मंत्र सिद्ध प्राण प्रतिष्ठायुक्त क्रिस्टल का गोला और तांबे या चांदी का कुबेर यंत्र धूप, अगरबत्ती चमेली की, देशी धी का दीपक केसर, साबुत ताजे पुष्प तथा मुनक्का (सफेद) एवं खोए की मिठाई।
माला : स्फटिक माला।
समय : रात्रि का कोई भी समय |
दिशा : उत्तर दिशा।
जप संख्या : सवा लाख।
अवधि : पांच, ग्यारह या अठारह दिन |
मंत्र : 5 हीं श्री क्री श्रीं क्रीं श्री कुबेराय अष्ट लक्ष्मी मम गृहे धन पूरय पूरय नमः। प्रयोग : रात्रि को किसी भी समय स्नान कर सफेद वस्त्र (सूती) बिछाकर
व्यवसाय में सफलता के लिए
कभी-कभी ऐसा समय आता है, जब व्यापार में रुकावट और परेशानी के कारण, व्यवस्थाएं बिगड़ने लगती हैं। परिवार में तनाव की स्थिति बन जाते है और सभी प्रयास निष्फल होते नजर आते हैं। ऐसी स्थिति में प्रत्येक गुरुवार 'बृहस्पतिवार” को यह प्रयोग करें--घर, या व्यापार स्थल के मुख्य द्वार के पास और घर के ईशान कोण में थोड़ी जगह को गंगा जल से थो लें। फिर उस जगह पर हल्दी से सतिया बनाएं। इस सतिए पर थोड़ी चने की दाल तथा थोड़ा गुड़ रखकर ईश्वर से अपने व्यापार तथा परिवार की मुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। लाभ होने लगेगा।
सावधानी : यह प्रयोग शुक्ल पक्ष के गुरुवार से प्रारम्भ करें; राहु काल मैं प्रारम्भ न करें। कम से कम 21 गुरुवार नियमित करें तथा पूजा स्थल को बार-बार न देखें। सम्भव हो तो प्रयोग के बाद थोड़ी चने की दाल एवं गुड़ गाय को भी खिलाएं।
व्यापार में लगातार घाटा हो रहा हो तो
यदि किसी के व्यापार में लगातार नुकसान हो रहा हो तो किसी भी बुधवार के दिन यह प्रयोग शुरू कर सकते हैं। यह प्रयोग कम से कम पांच सप्ताह तक लगातार करना आवश्यक होता है।
साधक बुधवार के दिन पीली कौड़ी लें, एक जोड़ा लौंग लें, एक जोड़ी छोटी इलायची तथा अपने व्यापार स्थल की एक चुटकी मिट्टी लेकर इन कौड़ियों को जला लें जो इनकी राख बनेगी उस राख को एक पान के पत्ते में इकट्ठा कर लें। एक ताबे का सिक्का लेकर उसमें एक छेद कर लें। इस सारी सामग्री को छेद वाले सिक्के के साथ किसी बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। जिस दिन सारी सामग्री को जल में प्रवाह करें उस दिन का उपवास रखें तथा किसी नौ वर्ष से छोटी कन्या को भोजन फराएं।
साझेदारी तथा व्यापार में उन्नति के लिए
अगर साझेदारी हो और लड़ाई-झगड़े हो, तो ऐसा करें--किसी होली या दीपावली की रात को कच्चा सूत लेकर उसको रोली में रंग लें। उसको लक्ष्मी माता के आगे रखकर प्रार्थना करें, कि हमारा कामकाज टीक चने तथा लडाई-झगडे न हों। हमारी साझेदारी बनी रहे तथा व्यापार में उन्नति हो
व्यापार में सफलता के लिए व्यापारिक यात्रा पर काम पर जाने से पहले ग्यारह रुपए किसी गुप्त जगह
पर रखकर चले जाएं। आपको हर हालत में सफलता प्राप्त होगी। वापत आने पर इन गुप्त रुपयों को किसी गरीब को दान में दें।
व्यापार स्थिर करने हेतु
धोड़ा-सा कच्चा सूत लेकर उसे शुद्ध केसर में रंग लें। इस रगे हुए सूत को ग्यारह बार “श्री हनुमते नमः” का पाठ करके अभिमंत्रित कर लें। इसको व्यापारिक स्थल पर बांध दें। व्यापार आगे बढ़ने लगेगा तथा नौकरी से सम्बंधित व्यक्ति इसे अपनी दराज में रखें। तरक्की का योग बनने लगेगा तथा हर प्रकार की मनोकामना पूर्ण होने की सम्भावना बढ़ जाएगी।
व्यापार में हानि होने पर
जिन व्यक्तियों को लगातार हानि हो रही हो, वे गायत्री मंत्र के द्वारा हवन करवाएं। व्यापार स्थल पर हवन कुंड की भभूती को, किसी सफेद रंग के कपड़े में डालकर, घर में तथा व्यापार स्थल पर रखें। हानि होनी बंद हो जाएगी। व्यापार अच्छा चल जाएगा। परेशानी होने पर या सेहत खराब होने पर इस हवन की भभूति का तिलक करें तथा जीभ से भी चाट लें, तो शारीरिक कष्ट तथा बीमारी हर हालत में ठीक हो जाएगी।
व्यापार की उन्नति हेतु
जिन व्यापारियों को व्यापार चलते-चलते ठप हो गया हो, लाख प्रयल करने के बाद भी नहीं चल रहा हो उसे किए-किराए काम, या व्यापार में बाधा होने की शंका हो, तो इस उपाय को करें। प्रत्येक मंगलवार को 11 पीपल के पत्ते लें। उनको गंगा जल से अच्छी तरह धोकर लाल चंदन से हर पत्ते पर सात बार राम-राम लिखें। इसके बाद हनुमान जी के मंदिर में चढ़ा आएं तथा प्रसाद बांटें और इस मंत्र का जाप, जितना कर सकते हैं, करें। मंत्र है--/जय जय जय हनुमान गोसाई कृपा करो गुरुदेव की नाई”। इस उपाय को सात मंगलवार लगातार करें। अगर हो सके तो इसे गुप्त रखें।
व्यापार में वृद्धि तथा बरकत के लिए
अगर आप यह अनुभव करते हैं, कि लाख प्रयत्न करने पर भी आपका व्यापार उन्नति नहीं करता तथा पैसे और घर में बरकत नहीं है, तो ऐसा करें---बृस्पतिवार को एक पीले रंग का रूमाल या कपड़ा लेकर मंदिर जाएं। तुलसी के आसपास जो घास उगी हो, उसे तोड़कर पीले कपड़े या रूमाल में रखकर वापस घर ले आएं । इसको व्यापार स्थल तथा घर में रख दें। व्यापार में वृद्धि तथा धन की बरकत रहेगी। इस क्रिया को ब्रहचस्पतिवार को ही करें।
व्यापार एवं कारोबार के लिए
अगर आपको किसी काम से जाना हो, तो एक नीबू लेकर उस पर चार लौंग गाड़ दें तथा इस मंत्र का जाप करें - “ओम श्री डनुमते नमः”? 21 बार जाप करने के बाद उसको साथ लेकर चले जाएं । काम में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।
व्यापार में वृद्धि तथा शांति के लिए
एक पीपल का पत्ता शनिवार को तोड़कर लाएं। उसे गंगा जल से अच्छी तरह से धोकर उस पर 21 बार गायत्री मंत्र का पाठ पढ़ें तथा उसको जेब में या कैश बॉक्स या गद्दी के नीचे रखें। यह पीपल के पत्ता हर शनिवार बदलें। व्यापार वृद्धि छोगी और घर में सुख-शांति रहेगी।
व्यापार में घाटा दूर करने के लिए
व्यापार में घाटा हो रहा हो, या काम नहीं हो रहा हो, एक चुटकी में आटा लेकर रविवार के दिन व्यापार स्थल या दुकान के मुख्य द्वार के दोनों और थोड़ा-थोड़ा छिड़क दें साथ में कहें---जिसकी नजर लगी है उसको लग जाए। बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला। यह क्रिया या उपाय केवल शुक्ल पक्ष में ही करें। सम्भव हो तो प्रयत्न करें कि इस क्रिया को कोई नहीं देखे। हो सके तो यह क्रिया गुप्त रखें।
व्यापार में वृद्धि के लिए
कई बार बहुत परिश्रम के बाद भी व्यापार में वृद्धि सहीं होती, तो इस उपाय को करें। शनिवार को एक पीपल का पत्ता लेकर गंगा जल से थो लें। अगर गंगा जल न हो, तो दूध से थो लें। आप जहां बैटले हैं, इस पते को अपने पास रख ले। अगले शनिवार एक पत्ता और लाएँ। फिर यैसा ही करें। जब सात शनिवार के बाद सात पत्ते हो जाएं, तो इन सातों पत्तों पर जय यीर
हनुमान लिखकर नदी या नहर में प्रवाहित करें। इससे व्यापार में वृद्धि होती रहेगी ।
बिक्री की वृद्धि हेतु
हमारा व्यापारी वर्ग आमतौर पर बिक्री घटने, या बिक्री पर रोक लगने से अधिक चिंतित रहता डै, तो इसके लिए इस उपाय को करें। रविवार को गंगा जल लेकर, उस पर फूंक मारकर, 21 बार गायज्री मंत्र का पाठ करें। फिर इस जल को व्यापार स्थल पर और सभी दीवारों पर भी छिड़क दें। ऐसा लगातार सात रविवार करें। व्यापार में वृद्धि छोगी। सोमवार को सफेद चंदन लेकर आएं । उसे एक सप्ताह तक घर के मंदिर में रखें, ध्रूपबत्ती दिखाएं तथा एक सप्ताड़ के बाद उसको घर में पैसों के साथ रखें, तो बिक्री में वृद्धि और घर में खुशहाली होगी। अगर हो सके, तो सोमवार को इससे अपने माथे पर तिलक भी किया करें।
व्यापार में वृद्धि तथा धन लाभ हेतु
यह प्रयोग नवरात्रि की अष्टमी के दिन किया जाता है। लाल रंग का चौकोर कपड़ा लें। उसे देवी के चित्र / मूर्ति के सामने चौकी (पटरा) पर बिछा लें। उसमें 1 तोला साबुत चावल, लाल चंदन का टुकड़ा, लाल गुलाब के साबुत पुष्प, रोली तथा एक लघु नारियल रखें। फिर उस लाल कपड़े में सारा सामान लपेटकर, कपड़े की पोटली बनाकर अपने गल्ले, अथया अलमारी, या सिंदूक, जो भी आपके हीसाब से उपयुक्तस्थान हो, वहां रख दें 6 माह बाद पुनः नवरात्रि की अष्टमी पर इस प्रयोग को दोहराएं |
अपनी मुट्ठी में साबुत काले उड़द दाल लेकर इस मंत्र को 21 बार पढ़ते हुए उड़द दाल पर फूंक मारे और अपनी दुकान को खोलकर चारों ओर बिखेर दें।इस मंत्र का जप पूर्व दिशा की ओर मुख करके करे
मंत्र
भंवर वीर तू चेला मेरा, खोल दुकान कहा कर मेरा,
उठे जो डंण्डी बिके जो माल, भंवर वीर खाली नहीं जाए।
व्यापारिक बाधाएं दूर करने का टोटका
अगर किसी कारणवश आपका व्यापार ठीक अथवा अशानुरूप नहीं चल
रहा हो तो एक तोता पिंजरे सहित बुधवार को खरीदें और तोते को आजाद
कर दें। ध्यान रहे कि तोते के पर कटे हुए नहीं होने चाहिए। तोता जितनी
अधिक दूर उड़कर जाएगा और दूर जाकर बैठेगा व्यापार उतना ही अधिक
चलेगा।
व्यापार वृद्धि के लिए
शनिवार को छोड़कर किसी भी दिन एक पीपल का पत्ता लेकर, गंगाजल
से धोकर, उस पर तीन बार 'ॐ नमः भगवते वासुदेवाय नमः' लिखकर,
पत्ते को पूजा स्थल पर रख लें। उसकी आराधना करें। नित्य धूप, अगरबत्ती
की धूनी दें, तो ईश्वर की कृपा से सब बाधाएं दूर हो जाएंगी।
व्यापारिक समस्या निवारण के लिए
व्यापार में निरंतर घाटा होता हो, दुकान में अच्छी बिक्री न होती हो तो
उसके लिए ऐसा कर लें कि सिद्ध काली कौड़ी और एक उल्लू के पंख को
काले रंग के कपड़े में बांधकर अपने व्यापारिक स्थल पर लटका कर बांधकर
रखें, आपकी समस्या का निवारण हो सकता है।
व्यापार बाधा निवारण के लिए प्रयोग
यदि कहीं से पुष्य नक्षत्र में सिद्ध किया गया नागरमोथा मिल जाए तो
एक तोला यह नागरमोथा प्राप्त कर उसे एक शुद्ध पीले रेशमी रूमाल में बांध
कर अपने व्यापार के स्थान पर मुख्य द्वार के ठीक ऊपर शुक्रवार के दिन
प्रातः एक कील ठोककर लटका दें। कुछ ही दिनों में यह अपना चमत्कार
दिखाने लगेगा व्यापार खूब चल निकलेगा।
व्यापार बाधा निवारण का उपयोगी प्रयोग
तांत्रिक पद्धति द्वारा सिद्ध किए गए पहाड़ी इमली के 5 बीज किसी सिद्ध
तांत्रिक से प्राप्त कर उन बीजों को एक गमले में (जिसमें पहले से मिट्टी)
डाली हुई हो, रोप दें (यह कार्य रविवार के दिन दोपहर में करें) बीज रोपने
के समय ‘ॐ क्लीं' मंत्र का उच्चारण करते रहें। पश्चात् उसमें पानी के
स्थान पर कच्ची लस्सी प्रत्येक रविवार को दोपहर में ही (5 रविवार) डालें।
इस प्रकार यदि यह बीज रोपने 40 दिन तक अंकुरित हो जाएं तो हर
प्रकार की तांत्रिक बाधा का निवारण स्वयं ही हो जाता है परंतु यदि यह बीज
अंकुरित न हों तो अन्य तंत्रोपचार करवाना चाहिए।
व्यापार बाधा निवारण प्रयोग
कभी-कभी व्यापार में बाधा किसी तंत्र प्रयोग के विपरीत पड़ने पर भी
होती है। इनकी पहचान इस प्रकार हो सकती है-
• यदि व्यापारिक संस्थान के मुख्य द्वार के ऊपर कौए ने घोंसला बना
लिया हो और विशेषकर उस घोंसले के बनाने के उपरांत ही व्यापार
ठीक से न चल रहा हो तो निश्चित समझें कि यह किसी तंत्र या टोटके
का विपरीत प्रभाव है। बस इसी एक उपचार से ही आपकी व्यापार से
सम्बंधित सभी समस्याएं शीघ्र दूर हो जाएंगी।
व्यापार वृद्धि प्रयोग
यदि व्यापार ठीक ढंग से नहीं चल रहा हो, उसमें बाधाएं आ रहीं हों या
व्यापार को किसी ने बांध दिया हो अथवा आमदनी बहुत कम हो गई हो तो,
होली की रात्रि को यह प्रयोग किया जा सकता है। अपने सामने डेढ़ हाथ
लम्बा सूती लाल रंग का वस्त्र बिछाएं, इस पर काले तिल की ढेरी बना
तथा उस पर एक दीया लगा दें। दीए में कोई भी खाद्य तेल डाल सकते हैं।
फिर इस दीपक के सामने 11 लौंग, 11 इलायची व 11 लाल मिर्च रख दें
व दीपक के तेल में 5 गोमती चक्र डाल दें जो कि तेल में डूबे रहें। हाथ
जोड़कर प्रार्थना करें, कि यदि किसी ने मेरा व्यापार बांधा हुआ हो या व्यापार
में कोई बाधा हो तो वह दूर हो, और व्यापार दिन दूना रात चौगुना फैले।
इसके बाद साधक नीचे लिखे मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
मंत्र-
ॐ हनुमत वीर, रखो हद धीर, करो यह काम, व्योपार बढ़े तंतर हो
दूर, टूणा टूटे, ग्राहक बढ़ें, यह कारज सिद्ध होय, न होय तो अंजनी की
दुहाई ।
इस मंत्र का जाप 1 घंटे तक बार-बार करते रहें। जब 1 घंटे तक मंत्र
जाप हो जाए,
तब दीया बुझा दें व दीपक में रखे गोमती चक्र व अन्य
वस्तुओं के साथ एक पोटली बांध दें व उस पोटली को जहां पर दो सड़कें
आकर मिलती हों ऐसे चौराहे पर रख दें। यह पोटली रखने के बाद वापिस
अपने घर पर लौट आएं और हाथ पैर धो लें। ऐसा करने पर व्यापार से
सम्बंधित बाधाएं व दोष दूर होते हैं, व दूसरे दिन से ही व्यापार में वृद्धि
दिखाई देने लगती है। यह अपने आप में एक सफल व श्रेष्ठ प्रयोग है।
व्यापार में फंसा पैसा निकालने हेतु
अगर व्यापार में पैसा इधर-उधर फंस गया है, या देनदार पैसे देने से
कतराता हो, तो इस टोटके का प्रयोग करें-
किसी भी शुक्ल पक्ष की अष्टमी को रुई धुनने वाले से थोड़ी साफ रूई
लेकर आएं। इसकी चार बत्तियां बना लें। इन बत्तियों को मंदिर में रख लें।
फिर रात को एक चारमुखी दीया लें। उसमें सरसों का तेल डालें। उस दीए
में चारों बत्तियां लगा दें तथा जलाकर किसी चौराहे पर रख दें। वापस आने
से पहले किसी नुकीली-सी चीज से अपनी अंगुली का थोड़ा-सा खून
निकालकर उसे उस तेल के दिए में डाल दें। जिस व्यक्ति से पैसे लेने हैं,
मन में उसका नाम लें (तीन बार) फिर बिना रुके वापस घर आ जाएं।
आपको अवश्य पैसे मिलेंगे। घर आकर थोड़ा-सा गुड़ एक रोटी पर रखकर
गाय को खिला दें। अगर गाय न मिले, तो उसे कहीं रख दें।
व्यवसाय वृद्धि के अचूक उपाय
यदि आपका व्यवसाय नया है और गति नहीं पकड़ पा रहा है तो आप किसी शुभ समय में नए लाल वस्त्र पर 11 अभिमंत्रित गोमती चक्र के साथ तीन लघु नारियल को रखकर रद्वाक्ष की माला से ऐं ह्रीं श्री क्लीं' की 11 माला जाप कर लाल वस्त्र को पोटली का रूप देकर मुख्यद्वार पर अंदर की ओर थोड़ी ऊंचाई पर लटका दें।
उपरोक्त प्रकार का ही अन्य उपाय है। इसमें आप किसी पीले वस्त्र में सात अभिमंत्रित गोमती चक्र, तीन लघु नारियल व एक मोती शंख में चांदी का सिक्का रखकर 'ऐं ही श्रीं कली” मंत्र का एक माला का जाप करते हुए थोड़े-थोड़े चावल शंख में डालते जाएं। माला पूर्ण होने तक शंख चावल से भर जाना थाहिए। इसके बाद आप सारी सामग्री को वस्त्र में बांधकर उपरोक्त विधि से मुख्यद्वार पर टांग दें।
आपके व्यवसाय में यदि कोई अभिचारिक कर्म करता है तो अपने व्यवसाय स्थल में पारद “मां लक्ष्मी' के साथ अभिमंत्रित 'दिकृदोष' नामक यंत्र की स्थापना कर रुद्राक्ष की माला से 5 माला श्रीं ऐं फट क्लीं का जाप करें। पांच दिन तक मंत्र जाप करते रहें। पांचवें दिन मां लक्ष्मी की मूर्ति को पूजास्थल में स्थान दे दें और यंत्र को नैऋत्य दिशा में दीवार में दबा दें। आपके व्यवसाय पर जो भी अभिचारिक कर्म होगा, वह समाप्त जाएगा।
कई बार व्यवसाय में ऐसा होता है कि किसी ऐसे व्यक्ति को पैसा दिया जाता है जिसके बाद तिजोरी में पैसा रुकता नहीं है। इसके लिए आप किसी शुभ समय में लाल वस्त्र पर तीन अभिमंत्रित गोमती चक्र, पांच
धनकारक कौड़ियां व एक मोती शंख रखें। मोती शंख में आप एक चांदी का सिक्का रखें। फिर मां लक्ष्मी का स्मरण करते हुए “श्रीं” बीज मंत्र का मानसिक जाप करते हुए थोड़े-थोड़े साबुत चावल शंरब में डालते जाएं । शायर चावल से भर जाने पर मां लक्ष्मी से अपने थन की रक्षा का निवेदन करते हुए सारी सामग्री को वस्त्र में बांधकर अपनी तिजोरी में रख दें। आपके द्वारा जो व्यर्थ का धन जा रहा था वह रुककर आय के नए मार्ग प्रशस्त होंगे। आप अपने व्यवसाय को यदि गति नहीं दे पा रहे हैं तो आप किसी शुभ समय में एक दक्षिणावर्ती शंख को विधि-विधान से शुद्ध कर उसमें केसर व अष्टगंध मिश्रीत जल भरकर कमलगटूटे की माला से निम्न मंत्र की 11 माला जाप करें“ॐ ऐं श्रीं सर्वकार्यसिद्धि कुरू कुरू स्वाहा" जाप के बाद हाथ जोड़कर उठ जाएं।
आप अपने व्यवसाय पर जाने से पहले शंख के दर्शन अवश्य करें। यदि आपने कोई नया व्यापार आरम्भ किया है अथवा आपका व्यापार आपके अनुसार गति नहीं पकड़ रहा है तो आप किसी शुभ समय (दीपावली, होली अथवा' ग्रहणकाल) में शुभ-लाभ व्यापार वृद्धि यंत्र का निर्माण करें। यदि आप यंत्र निर्माण न कर सकें तो किसी विश्वासपात्र से इस यंत्र की व्यवस्था करें। शुभ समय में अपने व्यवसाय स्थल पर पूर्वमुखी होकर बैठें। थोड़ी-सी नागकेसर के साथ केसर का चूर्ण बना लें और गंगाजल में मिलाकर लेप बना लें। लेप को यंत्र में बने शुभ-लाभ के ऊपर लगा दें | उसके सूखने तक “ॐ नमो नारायणाय” का जाप करें। प्रण लें कि आपके पास आने वाले प्रथम ग्राहक के द्वारा बिके सामान के लाभ में से कुछ रुपए ईश्वर और कुछ किसी गरीब को अवश्य देंगे, फिर भले ही यह मात्रा एक-दो रुपए की ही क्यों न डो। जब यह सूख जाए तो आप इसको अपने उस स्थान पर पूर्य अथवा पश्चिम मुख कर टांगें। यदि चाहें तो आप इसको फ्रेम भी करवा सकते हैं। आप जब अपने व्यवसाय स्थल पर आएं तो यंत्र के दर्शन करके ही अन्य कार्य आरम्भ करें। कुछ ही दिन में आप चमत्कार महसूस करेंगे ।