धन प्राप्ति एवं आर्थिक समृद्धि के उपाय
धन प्राप्ति आर्थिक समृद्धि के सामान्य उपाय
आज के युग में सबसे महत्वपूर्ण कार्य धन प्राप्ति है। कई लोग ऐसे हैं कि अज्ञात
कारणों से उनके धन प्राप्ति में कोई न कोई रोड़ा अटकता ही रहता है। मैं उपायों का
आरम्भ धन प्राप्ति के उपायों से ही कर रहा हूँ। धन प्राप्ति के उपाय के साथ कुछ
सामान्य नियम भी बता रहा हूँ। जिस स्थान पर इन नियमों का पालन होता है, उस
स्थान पर माँ लक्ष्मी अपना स्थाई वास बनाती है।
सर्वप्रथम आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहा हूँ जो सम्पन्नता तथा सुख-शान्ति के
लिये नियमित रूप से किये जा सकते हैं। कुछ ऐसे उपाय भी हैं जिनके बारे में आप कुछ
जानते अवश्य होंगे परन्तु यह नहीं जानते होंगे कि इनसे क्या लाभ प्राप्त हो सकता है-
* जिस घर में नियमित रूप से अथवा प्रत्येक शुक्रवार को श्रीसूक्त अथवा श्री
लक्ष्मी सूक्त का पाठ होता है, वहां माँ लक्ष्मी का स्थाई वास होता है। 1
* प्रत्येक सप्ताह घर में फर्श पर पौंछा लगाते समय थोड़ा समुद्री नमक अवश्य
मिला लिया करें। ऐसा करने से घर में होने वाले झगड़े कम होते हैं। इसके अतिरिक्त
यह भी लाभ मिलता है आपको नहीं मालूम कि आपके घर में आने वाला अतिथि कहाँ
से आ रहा है तथा उसके मन में आपके प्रति क्या विचार हैं, नमक मिले पानी से पौंछा
लगाने से सारी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है।
* प्रातः उठकर सर्वप्रथम गृहलक्ष्मी यदि मुख्यद्वार पर एक गिलास अथवा लोटा
जल डाले तो माँ लक्ष्मी के आने का मार्ग प्रशस्त होता है।
* यदि आप चाहते हैं कि आपके घर में सुख-शान्ति बनी रहे तथा आप आर्थिक
रूप से समर्थ रहें तो प्रत्येक अमावस्या को पूरे घर की पूर्ण सफाई करवायें। जितना भी
फालतू सामान इकट्ठा हुआ हो उसे कबाड़ी को बेच दें अथवा बाहर फेंक दें। सफाई के
बाद पाँच अगरबत्ती घर के मन्दिर में लगायें।
* यदि आप प्रत्येक पूर्णिमा हवन कर सकें तो बहुत ही शुभ है। इसके लिये यदि
आपको कोई मंत्र नहीं आता है तो सिर्फ इतना करें कि किसी कण्डे अथवा उपले पर
अग्नि प्रज्वलित कर ॐ के उच्चारण से 108 आहुति दें। यह आपकी पूर्ण धार्मिक भावना
को दर्शाता है।
* माह में दो बार किसी भी दिन उपले पर थोड़ा से लौबान रख कर उसके धुये
को पूरे घर में घुमायें।
* यदि आपके पूजा काल में कोई मेहमान आता है तो यह बहुत शुभ है। इस समय उस मेहमान को जलपान अवश्य करायें। यदि सांध्यकाल की पूजा में कोई
सुहागिन स्त्री आती है तो आपका बहुत ही सौभाग्य है। आप यह समझे कि आपके घर
माँ लक्ष्मी का प्रवेश हो चुका है।
* आप जब भी घर वापिस आयें तो कभी खाली हाथ न आयें। यदि आप बाजार
कुछ लाने की स्थिति में नहीं हैं तो रास्ते से एक कागज का टुकड़ा ही उठा लायें।
से
* आपकी साधना अर्थात् पूजाकाल में कोई बच्चा रोता है तो यह आपके लिये
शुभ नहीं है। इसके लिये आप किसी ज्ञानी व्यक्ति से सम्पर्क कर पता लगायें कि क्या
वजह है। इसका सामान्य कारण यह हो सकता है कि आपके घर में कोई नकारात्मक
शक्ति अवश्य है।
* आपके निवास में आग्नेय कोण (पूर्व व दक्षिण का कोना) में यदि गलती से
कोई पानी की व्यवस्था हो गई है तो यह वास्तु शास्त्र के अनुसार बहुत बड़ा दोष है।
इसके लिये आप उस स्थान पर 24 घण्टे एक लाल बल्ब जलता रहने दें। सांध्यकाल
में उस स्थान पर एक दीपक अवश्य रखें।
* घर में कभी नमक किसी खुले डिब्बे में न रखें।
* घर के जितने भी दरवाजे हों, उनमें समय-समय पर तेल अवश्य डालते रहना
चाहिये। उनमें से किसी भी प्रकार की कोई भी आवाज नहीं आनी चाहिये।
* घर में यदि किसी दिन कोई बच्चा सुबह उठते ही कुछ खाने को मांगे अथवा
बिना कारण के रोने लगे तो उस दिन घर के प्रत्येक सदस्य को सावधान रहने की
आवश्यकता है क्योंकि यह बात कुछ अशुभता को दर्शाती है।
* कभी भी किसी को दान दें तो उसे घर की देहरी में अन्दर न आने दें। दान
घर की देहरी के अन्दर से ही करें।
* यदि नियमित रूप से घर की प्रथम रोटी गाय को तथा अन्तिम रोटी कुत्ते को
दें तो आपके भाग्य के द्वार खुलने से कोई नहीं रोक सकता है।
* आप अपने निवास में कुछ कच्चा स्थान अवश्य रखें। यदि सम्भव हो तो यह
घर के मध्य स्थान में हो। यदि यहां तुलसी का पौधा लगा है तो फिर आपके कार्यों में
कभी रुकावट नहीं आ सकती।
* आप यदि अपने व्यस्त जीवन में गुरुवार को केले के वृक्ष पर सादा जल अर्पित
कर घी का दीपक तथा शनिवार को पीपल के वृक्ष में गुड़, दूध मिश्रित मीठा जल व
सरसों के तेल का दीपक अर्पित कर सकें तो कभी भी आर्थिक रूप से परेशान नहीं होंगे।
* आर्थिक सम्पन्नता के लिये आप नियम बना लें कि नित्य ही किसी भी पीपल
के वृक्ष में जल अवश्य दें।
आर्थिक समृद्धि के उपाय
अब मैं आपको कुछ ऐसे आर्थिक नियम व उपाय बता रहा हूँ कि जिन नियम पर
चलकर तथा उपाय कर आप विपन्नता से मुक्ति पा सकते हैं:-
* आप अपने व्यस्त जीवन में यदि श्री 'श्रीयंत्र' के सामने नियमित रूप से अथवा
प्रत्येक शुक्रवार को श्री 'श्रीसूक्त' तथा बीजयुक्त 'लक्ष्मी सूक्त' का पाठ कर सकें तो कभी
भी आर्थिक समस्या से ग्रस्त नहीं रहेंगे। इसका प्रभाव आप स्पष्ट रूप से सात शुक्रवार
के पाठ से ही देखने लगेंगे।
* यदि आप इस उपाय को वर्ष में सिर्फ दो बार अर्थात् एक बार जनवरी माह
में तथा एक बार जुलाई माह में करेंगे तो घर में माँ लक्ष्मी का स्थाई वास होगा। यदि
आप शनि प्रकोप से भी ग्रस्त हैं तो उसमें भी आपको मुक्ति मिलेगी। इसके लिये शुक्ल
पक्ष के प्रथम रविवार को मध्याह्न 12 बजे अपने परिवार के सभी सदस्यों के साथ बैठ
जायें। एक सूखा नारियल लें। एक प्लेट में 250 ग्राम पिसी शक्कर अथवा बूरे के साथ
5 रुपये की पंचमेवा लें। नारियल में चाकू की मदद से खोपरे के नुकीले हिस्से पर इतना
बड़ा छेद करें की उसमें आपकी अंगुली प्रवेश कर जाये। फिर बूरे में पंचमेवा मिलाकर
सभी सदस्य बारी-बारी से बूरे को खोपरे में भरें। इस बीच कोई आपस में बात नहीं
करें। मानसिक रूप से 'श्रीं श्रिययै नमः' का जाप करें। खोपरा जब बूरे से भर जाये
तो घर का मुखिया खोपरे को किसी पीपल के वृक्ष के नीचे लगभग एक हाथ गड्ढा कर
दबा दे। मिट्टी भर कर गड्ढा बन्द कर दें। जो बूरा बचा है उसे गड्ढे के आसपास फैला
दें। गड्ढे के ऊपर कोई बड़ा पत्थर अवश्य रख दें जिससे कोई जानवर खोद कर खोपरा
न निकाले। अब घर वापिस आ जायें। इसकी सार्थकता जानें कि आपने विश्व के सबसे
निर्बल जीव चींटीयों के लिये कितने समय के भोजन की व्यवस्था कर दी है, तो फिर
ईश्वर आपकी प्रार्थना क्यों नहीं स्वीकार करेगा ? शनि प्रकोप से बचने के लिये नियमित
'कीड़ी नगरा सीचें' अर्थात् चींटीयों को भोजन दें। यह भी आपने किया। आपने एक ही
कार्य से तीन लाभ लिये। प्रथम, माँ लक्ष्मी के आगमन का मार्ग प्रशस्त किया। दूसरा,
शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा आपने ईश्वर को भी प्रसन्न किया। जब आपसे
ईश्वर, माँ लक्ष्मी तथा शनिदेव प्रसन्न हैं तो आप स्वयं सोच सकते हैं कि आपको
क्या-क्या लाभ तथा फल प्राप्त होंगे।
* शुक्रवार की शाम को एक नया ताला खरीदें। ताला किसी भी साईज का हो
सकता है। ताला खरीदते समय यह अवश्य ध्यान रखें कि ताले को कोई अन्य आपके
सामने खोले नहीं। यह बात मैं आपको इसलिये बता रहा हूँ कि जैसे ताला बेचने वाले अधिकतर ताला देते समय चैक करने के लिये उसे खोलते-बन्द करते हैं परन्तु यह क्रिया
आप न करने दें। आप यही कहें कि हमें एक ताला चाहिये और उसे चैक न करने दें।
उस ताले को आप अपने उस कक्ष में रखें जिस कक्ष में आप सोते हैं। अगले दिन अर्थात्
शनिवार को सांध्यकाल में स्नान कर उस ताले को लेकर किसी भी मन्दिर में जायें।
प्रार्थना करने के बाद उस ताले को मन्दिर में ही छोड़ आयें। अब जब भी मन्दिर का
पुजारी उस ताले को खोलेगा तो आपकी किस्मत का ताला तथा माँ लक्ष्मी की तिजोरी
का ताला एक साथ खुल जायेगा।
* यदि आप आर्थिक रूप से परेशान हैं तो आपको एक बहुत ही सामान्य उपाय
बता रहा हूँ। किसी भी रात्रि में आप 3 से 5 बजे के मध्य उठें तो अपने निवास के उस
खुले स्थान में आ जायें जहां से आसमान दिखाई देता हो। पश्चिम दिशा की ओर मुख
करके अपने दोनों हाथ के पंजों को इस प्रकार मिला लें जैसे आप कुछ मांग रहे हो। फिर
आकाश की ओर देखते हुए माँ लक्ष्मी से आपनी सम्पन्नता की भीख इस प्रकार से मांगे
जैसे कोई पुत्र अपनी माँ से कुछ मांगता है। मांगते समय आप इतने भाव-विहल हो जाये
कि आपके आँसू निकल आयें। आप मन से माँ लक्ष्मी से निवेदन करें और फिर दोनों
हथेलियों को अपने मुख पर फेर लें। कुछ ही दिन में चमत्कार देखें।
* आप यदि प्रत्येक गुरुवार को किसी सुहागिन स्त्री को सुहाग सामग्री दान करें
तो भी आपकी आर्थिक समस्याओं का समाधान होगा। ऐसा आप लगातार पाँच गुरुवार
करें। इसमें यह आवश्यक नहीं है कि सुहाग सामग्री में बहुत कुछ हो। सुहाग सामग्री का
निर्णय आप अपनी आर्थिक सुविधानुसार कर सकते हैं।
* यदि आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं अथवा आपके कामों में अचानक कोई
रुकावट आती हो तो आप शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार से लगातार तीन गुरुवार को गरीबों
में मीठे पीले चावल दें। यह एक ऐसा उपाय है कि तीन बार करने पर अर्थात् 9 गुरुवार
को करने पर आपको इतना लाभ प्राप्त होगा कि आप फिर कभी भी इस उपाय को
बन्द नहीं करेंगे। इसमें यह आवश्यक नहीं है कि चावल बहुत ही हों। आप यदि एक
किलो चावल भी बनवायेंगे तो भी पर्याप्त है। आप यदि इस उपाय को बार-बार करने
के इच्छुक हों तो एक बार के तीन गुरुवार करने के बाद एक गुरुवार को रोक दें तथा
फिर आरम्भ कर दें।
* आजकल हर व्यक्ति यह चाहता है कि वह कभी भी आर्थिक समस्या में नहीं
आये। अब मैं आपको ऐसा उपाय बता रहा हूँ जिसे करने से आप कभी भी धन के लिये
समस्याग्रस्त नहीं रहेंगे। इसमें आप सर्वप्रथम तो अपने घर में तथा यदि कोई
व्यावसायिक प्रतिष्ठान हो तो वहां भी शाम के समय अर्थात् सूर्य डूबने से पहले
दीया-बत्ती अवश्य करें। घर व प्रतिष्ठान की सारी लाईट अवश्य जला दें तथा मन्दिर
के सामने कोई भी लक्ष्मी जी का मंत्र 11 बार मानसिक रूप से अवश्य पढ़ें।
* अब मैं आपको एक बहुत ही प्रभावशाली उपाय बता रहा हूँ। यह उपाय
लगातार 9 दिन का है हालांकि उपाय में अधिक समय नहीं लगेगा लेकिन कई लोग 9
दिन को भी बन्दिश मानते हैं, परन्तु कुछ पाने के लिये कुछ तो करना ही होता है। वैसे
भी माँ लक्ष्मी कर्मठ लोगों के घर में स्थाई वास करती हैं। आप प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष
की प्रथमा तिथि से यह उपाय आरम्भ कर सकते हैं। इसके लिये आपको कमलगट्टे की
माला की आवश्यकता होगी। प्रथमा तिथि को सांध्यकाल में किसी स्वच्छ स्थान में
पश्चिम की ओर मुख कर बैठ जायें। अपने सामने एक पट्टे पर लाल कपड़ा बिछायें।
थाली में 11 लाल गुलाब, प्रसाद तथा कुछ पैसे रख लें। कलावे अथवा मौली की बत्ती
वाला शुद्ध घी का दीपक बनाकर माँ लक्ष्मी का मानसिक स्मरण कर सर्वप्रथम लाल
गुलाब अर्पित करने के बाद दीपक तथा अगरबत्ती-धूप अर्पित करें। फिर प्रसाद अर्पित
करें। इसके बाद किसी जलते कण्डे या उपले पर थोड़ा सा कपूर रखें। कपूर के ऊपर
एक बताशा तथा बताशे पर लौंग का जोड़ा रखें। थोड़ी ही देर में सुगंध से वातावरण
शुद्ध हो जायेगा। फिर आप आँखें बन्द कर माँ लक्ष्मी का स्मरण कर धीरे-धीरे पाँच
गहरी साँस लें। फिर कमलगट्टे की माला से माँ लक्ष्मी के मंत्र की एक माला का जाप
करें। यदि आपको कोई मंत्र ज्ञात नहीं है तो आप 'श्रीं' अथवा 'श्रीं श्रिययै नमः' का जाप
कर सकते हैं। जाप के पश्चात् गुलाब उठाकर किसी शुद्ध स्थान पर रख दें। प्रसाद
बच्चों में बाँट दें। जो पैसे रखे थे, उसे आप अपने प्रयोग में ला सकते हैं। 9 दिन तक
अर्थात् नवमी तक आप यही प्रक्रिया करें। नवमी को सारे गुलाब इकट्ठे कर उसी लाल
कपड़े में बांध कर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। अब यदि अगले माह फिर यह
प्रयोग करना चाहते हैं तो पिछले माह वाले गुलाबों को कपड़े सहित विसर्जित कर दें।
इस बार के प्रयोग के गुलाब फिर धन के स्थान पर रख दें। कुछ ही समय में आप देखेंगे
कि माँ लक्ष्मी का आपके निवास में स्थाई वास हो गया है।
* इसी प्रकार का एक प्रयोग और है। किसी माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी अथवा
चतुर्दशी को आप माँ दुर्गा की तस्वीर के सामने कुछ रुपये तथा अपने कर्म क्षेत्र की
महत्वपूर्ण वस्तु उदाहरण के लिये अध्यापक के लिये उसकी कलम (पैन) बहुत महत्वपूर्ण
होता है, इसी प्रकार आपके लिये जो महत्वपूर्ण वस्तु हो उसको भी रुपये के साथ रख
दें। फिर माँ दुर्गा को धूप अर्पित करने के साथ कुछ प्रसाद भी अर्पित कर दें। माँ दुर्गा
का कोई स्तोत्र, चालीसा अथवा कोई भी पाठ करें। पूजा के बाद माँ दुर्गा से अपनी
सम्पन्नता का निवेदन करें। रखे हुए रुपये तथा जो भी वस्तु रखी है उसके लिये प्रार्थना
करें कि "हे माँ, यह धन और कलम अथवा जो भी आपने रखा हो, मैं तेरा प्रसाद मानकर
अपने प्रयोग के लिये ले रहा हूँ। मुझे विश्वास है कि तू मेरी प्रार्थना स्वीकार कर मुझे
अनुग्रहित करेगी।" इसके बाद रुपये और वह वस्तु उठा लें। हाथ जोड़कर पूजा स्थान
से बाहर आ जायें। अर्पित प्रसाद को 9 वर्ष से कम आयु की कन्यायों को बांट दें। रुपये
और वह वस्तु माँ दुर्गा का प्रसाद मानकर अपने प्रयोग में लायें। इसके बाद आप स्वयं
चमत्कार देखेंगे। इस प्रयोग से आपकी हर पूजा माँ दुर्गा को स्वीकार होगी क्योंकि इस
प्रयोग को शास्त्रों में 'ददगति प्रतिग्रहणाति' कहते हैं। जब तक जो व्यक्ति इस प्रयोग को
नहीं करता हैं तो उसे कम से कम माँ दुर्गा की पूजा नहीं लगती है। फिर जब भी किसी
परेशानी में आप आयें तो सिर्फ वह पाठ, जो पाठ आपने प्रयोग में किया था करें। माँ से
अपनी परेशानी से मुक्ति का निवेदन करें। आप बहुत ही जल्दी उस परेशानी से मुक्ति
पा जायेंगे।
* आप घर में नियमित रूप से पूजा करते समय जो दीपक जलाते हैं, उसमें
रूई की बत्ती के स्थान पर कलावा अर्थात् मौली का प्रयोग करें क्योंकि माँ लक्ष्मी को
लाल रंग अधिक प्रिय है।
* आर्थिक वृद्धि के लिये आप सदैव शनिवार के दिन गेहूँ पिसवायें तथा गेहूँ में
एक मुट्ठी काले चने अवश्य मिला दें।
* जब भी आप रुपये गिनें तो उसमें कभी भी थूक का प्रयोग न करें। अक्सर
आपने देखा होगा कि लोग रुपये गिनने में अंगुली पर थूक लगाकर रुपये गिनते हैं। यह
माँ लक्ष्मी का अपमान होता है क्योंकि रुपये माँ लक्ष्मी का स्वरूप हैं।
* यदि आपके घर में पहली संतान के रूप में पुत्र रत्न का जन्म हुआ है तो
उसके दाँत आने के बाद पहले दाँत गिरने के समय में विशेष ध्यान रखें। जब भी उसका
दाँत गिरे तो उस दाँत को धरती पर गिरने से पहले ही हाथ में उठाकर किसी शुद्ध
स्थान पर रख दें। अब जब भी कभी गुरुपुष्य आये अर्थात् किसी गुरुवार को पुष्य नक्षत्र
हो तो उस दाँत को सर्वप्रथम गंगाजल से शुद्ध करें। फिर अगरबत्ती दिखाकर चांदी की
डिब्बी में रख दें। उस डिब्बी को सदैव अपने पास अथवा धन रखने के स्थान पर रख
दें। माह में एक बार जिस नक्षत्र में बच्चे का जन्म हुआ हो उसी नक्षत्र में दाँत को
पिछली बार की तरह शुद्ध कर अगरबत्ती दिखाकर सूर्यदेव के दर्शन करवा कर पुनः
डिब्बी में रख दें। ऐसा प्रत्येक माह किया करें। आप स्वयं देखेंगे कि जिस स्थान पर
दाँत रखा है, वहां कभी धन की कमी नहीं आयेगी। यह उपाय तभी सिद्ध होता है जब
आप दाँत को जमीन पर गिरने से पहले ही हाथ में ले लेंगे।
* अक्सर मंदिर में अनेक भक्त चढ़ावे के रूप में रुपये-पैसे अपने इष्ट की ओर
उछालते हैं। आपके सौभाग्य से किसी के द्वारा मन्दिर में रुपये-पैसे चढ़ाते समय कभी
कोई सिक्का अथवा रुपया आपकी झोली में अथवा आपके ऊपर गिर जाये तो आप
बिना किसी झिझक के वह सिक्का माँ लक्ष्मी का प्रसाद मानकर अपने पास रख लें। यह
आपके लिये बहुत ही सौभाग्य की बात है। मन्दिर में माँ लक्ष्मी ने स्वयं आपको धनवान
बनाने का आरम्भ किया है।
* आपसे जब भी कोई हिजड़ा कुछ मांगने आये तो उसे यथासामर्थ्य धन दें।
उससे निवेदन करें कि वह अपने पास से अपना सिक्का अथवा रुपया आपको दे दे। वह
सिक्का आप अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। यदि वह दिन बुधवार का हो तो बहुत
ही सौभाग्य की बात है। हिजड़ों का दिया सिक्का बहुत शुभ होता है। इसमें यह अवश्य
ध्यान रखें कि वह जो भी सिक्का अथवा रुपया दे, वह आपका दिया न हो।
* किसी बुधवार के दिन यदि आपके सामने कोई हिजड़ा आ जाये तो आप उसे
अपनी सामर्थ्य से कुछ पैसा अवश्य दें चाहे वह स्वयं आपसे कुछ भी न मांगे।
* दीपावली से अट्ठारह दिन पहले कोई लोहे की चपटे आकार की चाबी लें।
उसे गंगाजल आदि से शुद्ध कर रामायण के 10-11वें पृष्ठ के मध्य रख दें। रामायण की
धूप-दीप से पूजा अर्चना कर रामायण में जो भी चौपाई आपको प्रिय हो उसका एक बार
पाठ करें, फिर रामायण बन्द कर रख दें। अगले दिन फिर यही क्रिया करनी है। बस,
इसमें आपको चाबी कुछ पृष्ठ छोड़कर अगले पृष्ठों के मध्य रखनी है तथा धूप-दीप से
वही चौपाई का पाठ करना है। ऐसा आप नित्य अट्ठारह दिन तक करें। अब अन्तिम
दिन दीपावली पर जिस पृष्ठ पर चाबी है उससे पाँच पृष्ठ पीछे से पढ़ना आरम्भ करें।
जिस पृष्ठ पर चाबी थी उस पृष्ठ तक पाठ करें। इसके बाद पूर्ण श्रद्धा से चाबी को
निकाल कर किसी लाल अथवा पीले वस्त्र में लपेट कर धन रखने के स्थान पर रख दें।
इसमें यह बात अवश्य ध्यान रखनी है कि पहले दिन जैसी पूजा आपने की है वैसी ही
पूजा नित्य हो तथा प्रत्येक दिन अगले कुछ पृष्ठ छोड़कर चाबी रखते जायें। अन्तिम दिन
की पूजा आप दीपावली पूजन के साथ ही करें।
* हिन्दू धर्म में मान्यता है कि धनतेरस पर कोई नया बर्तन खरीदा जाता है। आप
धनतेरस के दिन कोई छोटी सी चांदी की डिब्बी खरीद कर लायें। दीपावली पूजन के
समय उस डिब्बी को शुद्ध कर उसके साथ थोड़ी सी नागकेसर तथा कचनार के पत्ते लें।
यदि कचनार के पत्ते उपलब्ध न हों तो आप शहद भी ले सकते हैं। सारी सामग्री का
पूजन आप दीपावली पूजन के साथ ही करें। वह सामग्री माँ लक्ष्मी की तस्वीर के सामने
रात भर रखी रहने दें। अगले दिन प्रातः स्नान करने के बाद डिब्बी में नागकेसर व
कचनार के पत्ते अथवा शहद को लेकर डिब्बी बन्द कर दें। डिब्बी को किसी लाल
अथवा पीले वस्त्र में बांध कर धन रखने के स्थान पर रख दें। वर्ष भर माँ लक्ष्मी की
अनुकम्पा आप पर बनी रहेगी।
* धनतेरस पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी सुनार से चांदी के पत्तर को
कटवा कर "श्री" के रूप में कटवायें (यह किसी भी नाप का हो सकता है जितनी
आपकी सामर्थ्य है)। दीपावली की रात्रि में पूजन के मध्य आप इसको शुद्ध कर
एक-एक नागकेसर लेकर किसी भी वस्तु से चिपकाते जाये तथा कोई भी माँ लक्ष्मी का
मंत्र मन ही मन पाठ करते जायें। जब चांदी का "श्री" नागकेसर से पूरी तरह से ढक जाये तो उसका भी पूजन दीपावली पूजन के साथ करें। प्रातः स्नान कर "श्री" को किसी
भी लाल-पीले वस्त्र में लपेट कर धन के स्थान पर रख दें। यह यंत्र आपको जीवन भर
विपन्नता से मुक्त रखेगा।
* किसी भी शुक्लपक्ष के प्रथम शनिवार को 10 बादाम लेकर किसी भी हनुमान
मन्दिर में जायें। वहां पर बादाम रख दें। जो भी पूजा-पाठ आपको करनी है, वह करें
और वापिस आ जायें। वापिस आते समय पाँच बादाम मन्दिर में ही छोड़ आयें तथा पाँच
बादाम घर लाकर किसी भी लाल वस्त्र में बांधकर धन के स्थान पर रख दें।
* दीपावली पूजन के साथ एक लकड़ी की डिब्बी, थोड़ा सा सिन्दूर तथा 3
अभिमंत्रित गोमती चक्र का पूजन करें। प्रातः स्नान के बाद लकड़ी की डिब्बी में एक
परत सिन्दूर की बिछायें। उसके ऊपर गोमती चक्र रख कर सिन्दूर से पूरी डिब्बी भर
दें फिर डिब्बी को किसी लाल-पीले वस्त्र में लपेट कर धन के स्थान पर रख दें।
* घर में रखने के लिये सिद्ध 'श्रीयंत्र' प्राप्त करें। उसमें और अधिक माँ लक्ष्मी
की शक्तिपात के लिये आप किसी भी शुक्रवार को श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर अथवा किसी
भी माँ लक्ष्मी के मन्दिर में उस यंत्र के साथ 11 अथवा 21 श्री लक्ष्मी सहस्त्रनाम की
पुस्तकें लेकर जायें। यंत्र को माँ लक्ष्मी की मूर्ति के चरणों में रखकर उनके सामने मन्दिर
में ही बैठ कर एक बार श्री लक्ष्मी सहस्त्र नाम का पाठ करें। फिर एक पुस्तक तथा यंत्र
वापिस ले आयें। बाकी पुस्तकें वहीं छोड़ दें। यंत्र को अपने पूजा स्थान में लाल कपड़े
पर स्थान दें। कुछ ही दिनों में स्पष्टतः आपको चमत्कार दिखाई देगा।
* यदि आप आर्थिक रूप से बहुत ही समस्या ग्रस्त हैं तो आप 21 शुक्रवार को
9 वर्ष से कम आयु की पांच कन्यायों को खीर व मिश्री का प्रसाद बांटें।
* इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कभी भी दोनों समय घर में झाडू न लगायें।
* यदि किसी शुक्रवार को कोई सुहागिन स्त्री आती है तो उसका अवश्य ही
सम्मान कर जलपान करायें।
* अब मैं आपको स्थाई आर्थिक सम्पन्नता के लिये उपाय बता रहा हूँ। यदि
आपने यह प्रयोग कर लिया तो आप सदैव के लिये आर्थिक विपन्नता से मुक्ति पा
जायेंगे। आप यह प्रयोग दीपावली की रात्रि से कर सकते है। दीपावली की रात्रि में आप
एक मोती शंख अथवा दक्षिणावर्ती शंख को दीपावली पूजन के साथ ही पूजें। किसी भी
लक्ष्मी मंत्र की पाँच माला जपें। शंख को पूजास्थान में ही रख दें। अगले दिन प्रातः स्नान कर लाल आसन पर बैठकर अपने सामने शंख को रख कर उसी मंत्र का पाठ करें।प्रत्येक मंत्र के बाद एक साबुत चावल का दाना शंख में डालें। इस प्रकार आप 108 बार मंत्र पाठ कर इतने ही चावल के दानें शंख में डालें। इस प्रकार आप प्रत्येक दिन मंत्र पाठ करें। यह आपको तब तक करना है कि जब तक शंख चावलों से भर नहीं जाये।
जिस दिन शंख भर जाये, उस दिन शाम को एक सुहागिन, पाँच 9 वर्ष से कम की
कन्यायें तथा एक ब्राह्मण को भोजन करा कर दक्षिणा देकर विदा करें तथा शंख को
किसी लाल वस्त्र में बांध कर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। जिस दिन आप यह
प्रयोग समाप्त करें, उससे अगले दिन से लगातार 40 दिन तक धूप अवश्य दिखायें। इसके
बाद आप शंख को भूल जायें। आपके इस प्रयोग से माँ लक्ष्मी का आपके यहां स्थाई वास
होगा। इस प्रयोग की चर्चा किसी से भी नहीं करनी है तथा इस प्रयोग में आप जिन
चावलों का प्रयोग करें वह पूर्णतः साबुत होने चहिये अर्थात् अखण्डित हाँ।
* आप जब भी बैंक अथवा किसी अन्य स्थान पर धन जमा कराये तो उस समय
मन ही मन लक्ष्मी जी का कोई मंत्र अवश्य जपना चहिये। इससे आपको धन जमा कराने
का अधिक अवसर प्राप्त होगा।
.
* आप दीपावली की रात्रि में सफेद रंग के 21 हकीक पत्थर लें। इन्हें पंच तत्व
से शुद्ध करने के बाद दीपावली पूजन के साथ पहले पूजें। उसके बाद 11 माला “ॐ
श्रीं श्रिययै नमः" का जाप करें। अगले दिन आप उन सभी हकीक को एक लाल रेशमी
वस्त्र में बांधकर अपने व्यवसाय स्थल में धन रखने के स्थान पर रख दें। इनके प्रभाव
से आपके व्यापार में दिनोंदिन अधिक उन्नति होगी।
* आर्थिक स्थिरता के लिये दीपावली की रात्रि में 21 हकीक अपनी तिजोरी
अथवा धन रखने के स्थान से उसार कर अपने घर के मध्य स्थान में गाड़ दें। कुछ ही
समय में आप घर की आर्थिक स्थिति में परिवर्तन देखेंगे।
* यदि आप चाहते हैं कि आपके पास सदैव धन रहे तथा आप जिस भी क्षेत्र में
हाथ डालें, वहां आपको सफलता प्राप्त हो तो आप दीपावली की रात्रि में एक असली
स्फिटिक की माला से "ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं" मंत्र का 11 माला जाप करें। इस प्रकार
दीपावली की रात्रि से लगातार 40 दिन तक मंत्र जाप करें। 40वें दिन उस माला को
स्वयं धारण कर लें। उस दिन 9 वर्ष से कम आयु की कन्या को भोजन करायें व दक्षिणा
देकर चरण स्पर्श करें। यह ध्यान रखना है कि जब तक मंत्र पूर्ण न हो, तब तक माला
पूजा स्थान पर ही रहेगी। इस उपाय से माँ लक्ष्मी की कृपा से आप पर कभी धन की
कमी नहीं रहेगी।
* कोई भी व्यक्ति कभी दुर्भाग्यशाली नहीं होता है। सारा खेल समय का है। फिर
भी यदि आपके मन में यह बात घर कर गई है कि आप दुर्भाग्यशाली हैं तो आप
दीपावली की रात्रि में अपने घर में पारद की माँ लक्ष्मी की मूर्ति को स्थान दें तथा
दीपावली की रात्रि से लेकर लगातार 40 दिन तक 11 माला नित्य “ॐ ऐं ऐं श्रीं श्रीं ह्रीं
ह्रीं पारदेश्वरी सिद्धि ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं ऐं ऐं ॐ" का जाप करें। 40वें दिन किसी सुहागिन
को भोजन करायें। इससे पहले आप किसी पाटे पर लाल रेशमी वस्त्र बिछा कर उस
पर हल्दी से रंगे पीले चावलों से "स्वास्तिक" बनायें। स्वास्तिक के ऊपर तांबे की प्लेट
पर हल्दी से ही "श्रीं" लिखकर गुलाब पुष्प की पंखुड़ियों पर पारदेश्वरी माँ लक्ष्मी को
स्थान दें। इस उपाय से आपके मन का सारा शक निकल जायेगा तथा आप स्वयं ही
स्वीकार करेंगे कि आप से बड़ा कोई भाग्यशाली नहीं है।
* दीपावली की रात्रि में लाल रेशमी वस्त्र पर किसी चौड़े मुख के पात्र में कुछ
कमलगट्टे के बीज रखें। फिर सिद्ध श्री "श्रीयंत्र" को पंचतत्व ये शुद्ध कर उसको उस
पात्र में रखे बीजों के ऊपर स्थान देकर 21 बार श्रीसूक्त अथवा बीजयुक्त श्रीलक्ष्मी सूक्त
का पाठ कर पीले पुष्प अथवा पीले चावल अर्पित करें। इससे माँ लक्ष्मी की कृपा बनी
रहती है।
* शास्त्रानुसार प्रत्येक पूर्णिमा पर प्रातः 10 बजे पीपल वृक्ष पर माँ लक्ष्मी का
फेरा लगता है, इसलिये जो व्यक्ति आर्थिक रूप परेशान हो उनको इस समय अवश्य ही
पीपल के वृक्ष के साथ माँ लक्ष्मी की उपासना करनी चाहिये ।
* आपने अपने पूजा घर में माँ लक्ष्मी का कोई भी विग्रह को स्थान दिया हो जैसे
श्रीयंत्र आदि तो उस पर कमलगट्टे के बीज की माला अर्पित करनी चाहिये। इससे
दिग्रह शीघ्र ही चैतन्य होता है।
* माँ लक्ष्मी की उपासना में सदैव प्रत्येक वस्तु लाल रंग की ही प्रयोग करें। यहां
तक कि आप यदि दीपक की बत्ती के रूप में कलावा अथवा मौली का प्रयोग करें तो माँ
लक्ष्मी की प्रसन्नता शीघ्र प्राप्त होती है।
* यदि आप अपने आने वाले वंश तक को आर्थिक रूप से सम्पन्न रखना चाहते
हैं तो आपको यह साधना अवश्य करनी चाहिये। इस साधना के प्रयोग से आपकी आने
वाली पीढ़ियाँ भी आर्थिक रूप से सम्पन्न रहेंगी। दीपावली को किसी भी स्थिर लग्न
(जैसे वृषभ लग्न) में पश्चिम दिशा की ओर मुख कर लाल रंग के आसन पर बैठ जायें।.
सामने किसी पट्टे पर चावल की ढेरी बनाकर उस पर जल भरकर तांबे का कलश रखें।
कलश में 11 कोड़ियां हल्दी से रंग कर डालें। तत्पश्चात् कलश को तांबे की ही प्लेट से
ढक कर उस पर रोली से स्वास्तिक बनाकर "श्री लक्ष्मी गणेश महायंत्र" को स्थापित
कर रोली, चदंन व गुलाल अबीर से पूजन करें। लाल पुष्प अर्पित कर भोग लगायें। फिर कमलगट्टे की माला से निम्न मंत्र का 7 माला जाप करें- "ॐ महालक्ष्मी श्रीं श्रीं श्रीं
दारिद्रय हराय भूतेशु"। इसके बाद अगले दिन प्रातः पुनः सिर्फ पूजन कर जल को पूरे
घर की दीवारों में छिड़क दें तथा यंत्र को पूजाघर में स्थान देकर कौड़ियों को लाल
रेशमी वस्त्र में बांधकर अपने धन रखने स्थान पर रख दें। कुछ ही समय में आप
परिवर्तन महसूस करेंगे।
* आप अपने निवास में धन रखने के स्थान पर किसी लाल रेशमी वस्त्र में 11
सूखे छुआरे रखें। इनके प्रभाव से आप कभी भी आर्थिक समस्या का अनुभव नहीं करेंगे।
* प्रत्येक शनिवार को आप दिन में 12 बजे के आसपास अपनी लम्बाई से
पाँचगुना अधिक लाल धागा लेकर जटा वाले नारियल पर लपेट कर किसी बहते जल
में प्रवाहित करें। ऐसा आप सिर्फ सात बार करें तथा हाथ जोड़कर वापिस आ जायें।
पीछे मुड़कर न देखें। कुछ ही समय में आप आर्थिक क्षेत्र में सुखद परिवर्तन देखेंगे।
* यदि आपको अचानक आर्थिक हानि अधिक होती है तो आप सात शुक्रवार को
किन्हीं सात सुहागिनों को अपनी पत्नी के माध्यम से लाल वस्तु उपहार में दें। यदि
उपहार में इत्र भी हो तो इस प्रयोग से तुरन्त ही आपकी हानि बन्द हो जायेगी।
* आप जब भी बैक में किसी कार्य से जायें तो मन ही मन कोई भी लक्ष्मी मंत्र
का जाप अवश्य करें।
* यदि आप घर से कहीं जा रहे हों और आपको मार्ग में नेवला दिख जाये तो
आप तुरन्त ही रुक कर उस स्थान की चुटकी भर मिट्टी लेकर वापिस घर आ जायें।
अपने पूजा घर में 11 अगरबत्ती माँ लक्ष्मी के नाम पर जलाकर उस मिट्टी को किसी
लाल कागज में अपने सामने रखकर माँ लक्ष्मी का कोई भी मंत्र का जाप करें। यह जाप
बिना गिनती के होगा अर्थात् जब तक अगरबत्ती जलेगी, तब तक आपको जाप करना
है। जाप के बाद आप उस मिट्टी को लाल कागज में ही बांधकर अपने धन रखने के
स्थान पर रख दें। इसके प्रभाव से आपके धन में अत्यधिक वृद्धि होगी।
* आप यह अवश्य ध्यान रखें कि किसी को भी बुधवार को धन उधार न दें
अन्यथा वह धन डूब जायेगा अर्थात् जिसे उधार दिया है वह आपको वापिस नहीं करेगा।
* किसी को भी आप उधार पैसा प्रातःकाल में न दें अन्यथा पैसे वापिस मिलने
की सम्भावना नहीं होती है। इसके साथ ही आप पूजाकाल में भी पैसा न दें, विशेषकर
सांध्य उपासना में।
* किसी भी धर्मस्थल में आपको कोई सिक्का अथवा कोई भी धनमुद्रा मिले तो
आप उसे बिना किसी झिझक के उठा लें और उसको धन रखने के स्थान पर लाल
अथवा पीले रेशमी वस्त्र में बांधकर रख दें।
* आपको यदि शुक्रवार को किसी भी स्थान पर कोई सिक्का मिले अथवा कोई
किसी भी प्रकार के हिसाब में आपको कोई सिक्का अधिक दे तो आप उसे वापिस न
करें। वह पैसा आप धन रखने के स्थान पर लाल रेशमी वस्त्र में लपेट कर रख दें। फिर
भले ही अगले दिन उस अधिक मिले पैसे को आप दूसरे रूप में वापिस कर आयें। यह
भी लक्ष्मी आगमन का एक संकेत है।
* आप यदि किसी मार्ग पर जा रहे हैं तथा मार्ग में आपको कोई मोर नाचता
दिखाई दे तो आप तुरन्त उस स्थान की मिट्टी उठाकर अपनी जेब अथवा पर्स में रख लें।
फिर घर आकर उस मिट्टी को धूप-दीप दिखा कर किसी चांदी के ताबीज में अथवा लाल
रेशमी वस्त्र में रखकर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें।
* शुक्रवार के दिन आपको यदि कोई विवाहित महिला जलपान अथवा कोई
अन्य सामाजिक रूप से उचित निवेदन करे तो आप उसके निवेदन को ठुकरायें नहीं भले
ही आप कितने ही व्यस्त क्यों न हॉ। उसका आग्रह स्वीकार करें। यह भी आपको माँ
लक्ष्मी के आगमन का संकेत है।
* शुक्रवार को किसी सुहागिन को लाल वस्त्र अथवा सुहाग सामग्री दान करने
का अवसर मिले तो आप यह अवसर नहीं चूकें, क्योंकि माँ लक्ष्मी का आपके घर में
आगमन का यह आरम्भ है।
* आपसे जब भी कोई हिजड़ा कुछ मांगने आये तो उसे यथासामर्थ्य धन दें।
उससे निवेदन करें कि वह अपने पास से अपना सिक्का अथवा रुपया आपको दे दे। वह सिक्का आप अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। यदि वह दिन बुधवार का हो तो बहुत ही सौभाग्य की बात है। हिजड़ों का दिया सिक्का बहुत शुभ होता है। इसमें यह अवश्य ध्यान रखें कि वह जो भी सिक्का अथवा रुपया दे, वह आपका दिया न हो।
* किसी बुधवार के दिन यदि आपके सामने कोई हिजड़ा आ जाये तो आप उसे अपनी सामर्थ्य से कुछ पैसा अवश्य दें चाहे वह स्वयं आपसे कुछ भी न मांगे।
* दीपावली से अट्ठारह दिन पहले कोई लोहे की चपटे आकार की चाबी लें। उसे गंगाजल आदि से शुद्ध कर रामायण के 10-11वें पृष्ठ के मध्य रख दें। रामायण की धूप-दीप से पूजा अर्चना कर रामायण में जो भी चौपाई आपको प्रिय हो उसका एक बार पाठ करें, फिर रामायण बन्द कर रख दें। अगले दिन फिर यही क्रिया करनी है। बस, इसमें आपको चाबी कुछ पृष्ठ छोड़कर अगले पृष्ठों के मध्य रखनी है तथा धूप-दीप से
वही चौपाई का पाठ करना है। ऐसा आप नित्य अट्ठारह दिन तक करें। अब अन्तिम
दिन दीपावली पर जिस पृष्ठ पर चाबी है उससे पाँच पृष्ठ पीछे से पढ़ना आरम्भ करें।
जिस पृष्ठ पर चाबी थी उस पृष्ठ तक पाठ करें। इसके बाद पूर्ण श्रद्धा से चाबी को
निकाल कर किसी लाल अथवा पीले वस्त्र में लपेट कर धन रखने के स्थान पर रख दें।
इसमें यह बात अवश्य ध्यान रखनी है कि पहले दिन जैसी पूजा आपने की है वैसी ही
पूजा नित्य हो तथा प्रत्येक दिन अगले कुछ पृष्ठ छोड़कर चाबी रखते जायें। अन्तिम दिन
की पूजा आप दीपावली पूजन के साथ ही करें।
* हिन्दू धर्म में मान्यता है कि धनतेरस पर कोई नया बर्तन खरीदा जाता है। आप
धनतेरस के दिन कोई छोटी सी चांदी की डिब्बी खरीद कर लायें। दीपावली पूजन के
समय उस डिब्बी को शुद्ध कर उसके साथ थोड़ी सी नागकेसर तथा कचनार के पत्ते लें।
यदि कचनार के पत्ते उपलब्ध न हों तो आप शहद भी ले सकते हैं। सारी सामग्री का
पूजन आप दीपावली पूजन के साथ ही करें। वह सामग्री माँ लक्ष्मी की तस्वीर के सामने
रात भर रखी रहने दें। अगले दिन प्रातः स्नान करने के बाद डिब्बी में नागकेसर व
कचनार के पत्ते अथवा शहद को लेकर डिब्बी बन्द कर दें। डिब्बी को किसी लाल
अथवा पीले वस्त्र में बांध कर धन रखने के स्थान पर रख दें। वर्ष भर माँ लक्ष्मी की
अनुकम्पा आप पर बनी रहेगी।
* धनतेरस पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी सुनार से चांदी के पत्तर को
कटवा कर "श्रीं" के रूप में कटवायें (यह किसी भी नाप का हो सकता है जितनी
आपकी सामर्थ्य है)। दीपावली की रात्रि में पूजन के मध्य आप इसको शुद्ध कर
एक-एक नागकेसर लेकर किसी भी वस्तु से चिपकाते जाये तथा कोई भी माँ लक्ष्मी का
मंत्र मन ही मन पाठ करते जायें। जब चांदी का "श्रीं" नागकेसर से पूरी तरह से ढक जाये तो उसका भी पूजन दीपावली पूजन के साथ करें। प्रातः स्नान कर "श्री" को किसी
भी लाल-पीले वस्त्र में लपेट कर धन के स्थान पर रख दें। यह यंत्र आपको जीवन भर
विपन्नता से मुक्त रखेगा।
* किसी भी शुक्लपक्ष के प्रथम शनिवार को 10 बादाम लेकर किसी भी हनुमान
मन्दिर में जायें। वहां पर बादाम रख दें। जो भी पूजा-पाठ आपको करनी है, वह करें
और वापिस आ जायें। वापिस आते समय पाँच बादाम मन्दिर में ही छोड़ आयें तथा पाँच
बादाम घर लाकर किसी भी लाल वस्त्र में बांधकर धन के स्थान पर रख दें।
* दीपावली पूजन के साथ एक लकड़ी की डिब्बी, थोड़ा सा सिन्दूर तथा 3
अभिमंत्रित गोमती चक्र का पूजन करें। प्रातः स्नान के बाद लकड़ी की डिब्बी में एक
परत सिन्दूर की बिछायें। उसके ऊपर गोमती चक्र रख कर सिन्दूर से पूरी डिब्बी भर
दें फिर डिब्बी को किसी लाल-पीले वस्त्र में लपेट कर धन के स्थान पर रख दें।
* घर में रखने के लिये सिद्ध 'श्रीयंत्र' प्राप्त करें। उसमें और अधिक माँ लक्ष्मी
की शक्तिपात के लिये आप किसी भी शुक्रवार को श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर अथवा किसी
भी माँ लक्ष्मी के मन्दिर में उस यंत्र के साथ 11 अथवा 21 श्री लक्ष्मी सहस्त्रनाम की
पुस्तकें लेकर जायें। यंत्र को माँ लक्ष्मी की मूर्ति के चरणों में रखकर उनके सामने मन्दिर
में ही बैठ कर एक बार श्री लक्ष्मी सहस्त्र नाम का पाठ करें। फिर एक पुस्तक तथा यंत्र
वापिस ले आयें। बाकी पुस्तकें वहीं छोड़ दें। यंत्र को अपने पूजा स्थान में लाल कपड़े
पर स्थान दें। कुछ ही दिनों में स्पष्टतः आपको चमत्कार दिखाई देगा।
* यदि आप आर्थिक रूप से बहुत ही समस्या ग्रस्त हैं तो आप 21 शुक्रवार को
9 वर्ष से कम आयु की पांच कन्यायों को खीर व मिश्री का प्रसाद बांटें।
* इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कभी भी दोनों समय घर में झाडू न लगायें।
* यदि किसी शुक्रवार को कोई सुहागिन स्त्री आती है तो उसका अवश्य ही
सम्मान कर जलपान करायें।
* अब मैं आपको स्थाई आर्थिक सम्पन्नता के लिये उपाय बता रहा हूँ। यदि
आपने यह प्रयोग कर लिया तो आप सदैव के लिये आर्थिक विपन्नता से मुक्ति पा
जायेंगे। आप यह प्रयोग दीपावली की रात्रि से कर सकते है। दीपावली की रात्रि में आप
एक मोती शंख अथवा दक्षिणावर्ती शंख को दीपावली पूजन के साथ ही पूजें। किसी भी
लक्ष्मी मंत्र की पाँच माला जपें। शंख को पूजास्थान में ही रख दें। अगले दिन प्रातः स्नान
कर लाल आसन पर बैठकर अपने सामने शंख को रख कर उसी मंत्र का पाठ करें।
प्रत्येक मंत्र के बाद एक साबुत चावल का दाना शंख में डालें। इस प्रकार आप 108 बार
मंत्र पाठ कर इतने ही चावल के दानें शंख में डालें। इस प्रकार आप प्रत्येक दिन मंत्र
पाठ करें। यह आपको तब तक करना है कि जब तक शंख चावलों से भर नहीं जाये।
जिस दिन शंख भर जाये, उस दिन शाम को एक सुहागिन, पाँच 9 वर्ष से कम की
कन्यायें तथा एक ब्राह्मण को भोजन करा कर दक्षिणा देकर विदा करें तथा शंख को
किसी लाल वस्त्र में बांध कर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। जिस दिन आप यह
प्रयोग समाप्त करें, उससे अगले दिन से लगातार 40 दिन तक धूप अवश्य दिखायें। इसके
बाद आप शंख को भूल जायें। आपके इस प्रयोग से माँ लक्ष्मी का आपके यहां स्थाई वास
होगा। इस प्रयोग की चर्चा किसी से भी नहीं करनी है तथा इस प्रयोग में आप जिन
चावलों का प्रयोग करें वह पूर्णतः साबुत होने चहिये अर्थात् अखण्डित हों।
* आप जब भी बैंक अथवा किसी अन्य स्थान पर धन जमा करायें तो उस समय
मन ही मन लक्ष्मी जी का कोई मंत्र अवश्य जपना चहिये। इससे आपको धन जमा कराने
का अधिक अवसर प्राप्त होगा।
* आप दीपावली की रात्रि में सफेद रंग के 21 हकीक पत्थर लें। इन्हें पंच तत्व
से शुद्ध करने के बाद दीपावली पूजन के साथ पहले पूजें। उसके बाद 11 माला “ॐ
श्रीं श्रिययै नमः" का जाप करें। अगले दिन आप उन सभी हकीक को एक लाल रेशमी
वस्त्र में बांधकर अपने व्यवसाय स्थल में धन रखने के स्थान पर रख दें। इनके प्रभाव
से आपके व्यापार में दिनोंदिन अधिक उन्नति होगी।
* आर्थिक स्थिरता के लिये दीपावली की रात्रि में 21 हकीक अपनी तिजोरी
अथवा धन रखने के स्थान से उसार कर अपने घर के मध्य स्थान में गाड़ दें। कुछ ही
समय में आप घर की आर्थिक स्थिति में परिवर्तन देखेंगे।
* यदि आप चाहते हैं कि आपके पास सदैव धन रहे तथा आप जिस भी क्षेत्र में
हाथ डालें, वहां आपको सफलता प्राप्त हो तो आप दीपावली की रात्रि में एक असली
स्फिटिक की माला से "ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं" मंत्र का 11 माला जाप करें। इस प्रकार
दीपावली की रात्रि से लगातार 40 दिन तक मंत्र जाप करें। 40वें दिन उस माला को
स्वयं धारण कर लें। उस दिन 9 वर्ष से कम आयु की कन्या को भोजन करायें व दक्षिणा
देकर चरण स्पर्श करें। यह ध्यान रखना है कि जब तक मंत्र पूर्ण न हो, तब तक माला
पूजा स्थान पर ही रहेगी। इस उपाय से माँ लक्ष्मी की कृपा से आप पर कभी धन की
कमी नहीं रहेगी।
* कोई भी व्यक्ति कभी दुर्भाग्यशाली नहीं होता है। सारा खेल समय का है। फिर
भी यदि आपके मन में यह बात घर कर गई है कि आप दुर्भाग्यशाली हैं तो आप
दीपावली की रात्रि में अपने घर में पारद की माँ लक्ष्मी की मूर्ति को स्थान दें तथा
दीपावली की रात्रि से लेकर लगातार 40 दिन तक 11 माला नित्य "ॐ ऐं ऐं श्रीं श्रीं ह्रीं
ह्रीं पारदेश्वरी सिद्धि ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं ऐं ऐं ॐ" का जाप करें। 40वें दिन किसी सुहागिन
को भोजन करायें। इससे पहले आप किसी पाटे पर लाल रेशमी वस्त्र बिछा कर उस
पर हल्दी से रंगे पीले चावलों से "स्वास्तिक" बनायें। स्वास्तिक के ऊपर तांबे की प्लेट
पर हल्दी से ही "श्रीं" लिखकर गुलाब पुष्प की पंखुड़ियों पर पारदेश्वरी माँ लक्ष्मी को
स्थान दें। इस उपाय से आपके मन का सारा शक निकल जायेगा तथा आप स्वयं ही
स्वीकार करेंगे कि आप से बड़ा कोई भाग्यशाली नहीं है।
* दीपावली की रात्रि में लाल रेशमी वस्त्र पर किसी चौड़े मुख के पात्र में कुछ
कमलगट्टे के बीज रखें। फिर सिद्ध श्री "श्रीयंत्र" को पंचतत्व ये शुद्ध कर उसको उस
पात्र में रखे बीजों के ऊपर स्थान देकर 21 बार श्रीसूक्त अथवा बीजयुक्त श्रीलक्ष्मी सूक्त
का पाठ कर पीले पुष्प अथवा पीले चावल अर्पित करें। इससे माँ लक्ष्मी की कृपा बनी
रहती है।
* शास्त्रानुसार प्रत्येक पूर्णिमा पर प्रातः 10 बजे पीपल वृक्ष पर माँ लक्ष्मी का
फेरा लगता है, इसलिये जो व्यक्ति आर्थिक रूप परेशान हो उनको इस समय अवश्य ही
पीपल के वृक्ष के साथ माँ लक्ष्मी की उपासना करनी चाहिये।
* आपने अपने पूजा घर में माँ लक्ष्मी का कोई भी विग्रह को स्थान दिया हो जैसे
श्रीयंत्र आदि तो उस पर कमलगट्टे के बीज की माला अर्पित करनी चाहिये। इससे
द्विग्रह शीघ्र ही चैतन्य होता है।
* माँ लक्ष्मी की उपासना में सदैव प्रत्येक वस्तु लाल रंग की ही प्रयोग करें। यहां
तक कि आप यदि दीपक की बत्ती के रूप में कलावा अथवा मौली का प्रयोग करें तो माँ
लक्ष्मी की प्रसन्नता शीघ्र प्राप्त होती है।
* यदि आप अपने आने वाले वंश तक को आर्थिक रूप से सम्पन्न रखना चाहते
हैं तो आपको यह साधना अवश्य करनी चाहिये। इस साधना के प्रयोग से आपकी आने
वाली पीढ़ियाँ भी आर्थिक रूप से सम्पन्न रहेंगी। दीपावली को किसी भी स्थिर लग्न
(जैसे सिंह वृषभ वृष्चिक कुम्भ लग्न) में पश्चिम दिशा की ओर मुख कर लाल रंग के आसन पर बैठ जायें।.
सामने किसी पट्टे पर वल की ढेरी बनाकर उस पर जल भरकर तांबे का कलश रखें।
कलश में 11 कोड़ियां हल्दी से रंग कर डालें। तत्पश्चात् कलश को तांबे की ही प्लेट से
ढक कर उस पर रोली से स्वास्तिक बनाकर "श्री लक्ष्मी गणेश महायंत्र" को स्थापित
कर रोली, चदंन व गुलाल अबीर से पूजन करें। लाल पुष्प अर्पित कर भोग लगायें। फिर
कमलगट्टे की माला से निम्न मंत्र का 7 माला जाप करें- "ॐ महालक्ष्मी श्रीं श्रीं श्रीं
दारिद्रय हराय भूतेशु"। इसके बाद अगले दिन प्रातः पुनः सिर्फ पूजन कर जल को पूरे घर की दीवारों में छिड़क दें तथा यंत्र को पूजाघर में स्थान देकर कौड़ियों को लाल रेशमी वस्त्र में बांधकर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। कुछ ही समय में आप परिवर्तन महसूस करेंगे।
आप अपने निवास में धन रखने के स्थान पर किसी लाल रेशमी वस्त्र में 11सूखे छुआरे रखें। इनके प्रभाव से आप कभी भी आर्थिक समस्या का अनुभव नहीं करेंगे।
* प्रत्येक शनिवार को आप दिन में 12 बजे के आसपास अपनी लम्बाई सेपाँचगुना अधिक लाल धागा लेकर जटा वाले नारियल पर लपेट कर किसी बहते जल
में प्रवाहित करें। ऐसा आप सिर्फ सात बार करें तथा हाथ जोड़कर वापिस आ जायें।
पीछे मुड़कर न देखें। कुछ ही समय में आप आर्थिक क्षेत्र में सुखद परिवर्तन देखेंगे।
* यदि आपको अचानक आर्थिक हानि अधिक होती है तो आप सात शुक्रवार को
किन्हीं सात सुहागिनों को अपनी पत्नी के माध्यम से लाल वस्तु उपहार में दें। यदि
उपहार में इत्र भी हो तो इस प्रयोग से तुरन्त ही आपकी हानि बन्द हो जायेगी।
आप जब भी बैक में किसी कार्य से जायें तो मन ही मन कोई भी लक्ष्मी मंत्रका जाप अवश्य करें।
* यदि आप घर से कहीं जा रहे हों और आपको मार्ग में नेवला दिख जाये तो
आप तुरन्त ही रूक कर उस स्थान की चुटकी भर मिट्टी लेकर वापिस घर आ जायें।
अपने पूजा घर में 11 अगरबत्ती माँ लक्ष्मी के नाम पर जलाकर उस मिट्टी को किसी
लाल कागज में अपने सामने रखकर माँ लक्ष्मी का कोई भी मंत्र का जाप करें। यह जाप
बिना गिनती के होगा अर्थात् जब तक अगरबत्ती जलेगी, तब तक आपको जाप करना
है। जाप के बाद आप उस मिट्टी को लाल कागज में ही बांधकर अपने धन रखने के
स्थान पर रख दें। इसके प्रभाव से आपके धन में अत्यधिक वृद्धि होगी।
* आप यह अवश्य ध्यान रखें कि किसी को भी बुधवार को धन उधार न दें अन्यथा वह धन डूब जायेगा अर्थात् जिसे उधार दिया है वह आपको वापिस नहीं करेगा।
* किसी को भी आप उधार पैसा प्रातःकाल में न दें अन्यथा पैसे वापिस मिलने की सम्भावना नहीं होती है। इसके साथ ही आप पूजाकाल में भी पैसा न दें, विशेषकर
सांध्य उपासना में।
* किसी भी धर्मस्थल में आपको कोई सिक्का अथवा कोई भी धनमुद्रा मिले तो आप उसे बिना किसी झिझक के उठा लें और उसको धन रखने के स्थान पर लालअथवा पीले रेशमी वस्त्र में बांधकर रख दें।
* आपको यदि शुक्रवार को किसी भी स्थान पर कोई सिक्का मिले अथवा कोई
किसी भी प्रकार के हिसाब में आपको कोई सिक्का अधिक दे तो आप उसे वापिस न
करें। वह पैसा आप धन रखने के स्थान पर लाल रेशमी वस्त्र में लपेट कर रख दें। फिर
भले ही अगले दिन उस अधिक मिले पैसे को आप दूसरे रूप में वापिस कर आयें। यह
भी लक्ष्मी आगमन का एक संकेत है।
* आप यदि किसी मार्ग पर जा रहे हैं तथा मार्ग में आपको कोई मोर नाचतादिखाई दे तो आप तुरन्त उस स्थान की मिट्टी उठाकर अपनी जेब अथवा पर्स में रख लें।फिर घर आकर उस मिट्टी को धूप-दीप दिखा कर किसी चांदी के ताबीज में अथवा लालरेशमी वस्त्र में रखकर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें।
* शुक्रवार के दिन आपको यदि कोई विवाहित महिला जलपान अथवा कोई अन्य सामाजिक रूप से उचित निवेदन करे तो आप उसके निवेदन को ठुकरायें नहीं भले
ही आप कितने ही व्यस्त क्यों न हों। उसका आग्रह स्वीकार करें। यह भी आपको माँ लक्ष्मी के आगमन का संकेत है।
* शुक्रवार को किसी सुहागिन को लाल वस्त्र अथवा सुहाग सामग्री दान करने का अवसर मिले तो आप यह अवसर नहीं चूकें, क्योंकि माँ लक्ष्मी का आपके घर मेंआगमन का यह आरम्भ है।
यह तांत्रिक उपाय एक अंक वाली लॉटरी में काम आ सकते हैं।एक अंक वाली लॉटरियां भी लगभग सटूटे के ही गणित से चलती है औरसदैव अंकगणित की सीमा में रहती हैं। उल्लेखनीय बात यह है कि दो अंकतक पर कोई इनाम नहीं होता है। फिर तीन चार अंकों पर इनाम रखते हैं।अगर ऐसा न करें तो उनका सारा अंकगणित गड़बड़ हो जाएगा। इन्हींविचित्र अंकों को आकर्षित करने का विधान प्रस्तुत है।
नौ से एक तक अंकों को पकड़ने के लिए विवरण इस प्रकार है
0. सोमवार को
1. गुरुवार को
बेलपत्र शिवजी पर चढ़ाएं
2. मंगलवार को
हनुमानजी की पूजा करें
3. शनिवार को
4. बुधवार को
भैरव को पूजे
5. शुक्रवार को
शिव को दूध चढाएं
6. रविवार को
7. मंगलवार को
8. शनिवार को
9. रविवार को
गुड़, चना पीपल पर चढ़ाएंलोहा और तेल दान करेंसूर्य की आराधना करेंहनुमानजी की पूजा करेंतिल और तेल दान करेंलाल मसूर का दान करें
इस प्रकार आप अपने मूलांक वाली लॉटरियां खरीदकर भी अपना भाग्यचमका सकते हैं। तंत्र में जैसा कि सदैव कहा जाता है, आप श्रद्धा औरविश्वास बराबर बनाए रखें, अपनी क्रियाओं, साधनाओं पर निष्ठा रखें।स्मरण रखें, बिना विश्वास के आप कुछ नहीं पा सकते हैं। क्या ‘विश्वासफलदायक' की बात निर्थक है? नहीं, आप विश्वास, श्रद्धा और निष्ठा बनाएरखें। शायद कभी सफलता के द्वार खुल जाएं।
धन हानि होने पर
यह टोटका मेरे एक परम मित्र श्री राजीव शर्मा ‘शूर’ एवं श्री दीपककुमार शर्मा जी ने बतलाया था। इसका प्रयोग मैंने अनेक बार किया औरसफल पाया। वही टोटका आपके लाभ हेतु ज्यों का त्यों लिख रहा हूँ।
शुक्ल पक्ष में किसी भी रात को एक लोटे में (स्टील का ना हो) जल औरदूध मिलाकर सिरहाने रखकर सो जाएं। प्रातः वह दूध मिश्रित जल कीकरपर चढ़ा दें। यह क्रिया 21 बार करनी है। सम्भव हो तो यह क्रिया सोमवारसे सोमवार करें। अधिक लाभ होगा।
प्रिय पाठको! सम्भव है इस क्रिया के मध्य में आपको कोई लाभ प्राप्त होजाए। तब आप उसका लाभ उठाएं। स्मरण रहे, अनुचित प्रयोग न करें,अन्यथा प्रयोग असफल तो होगा ही साथ ही आपको ह्ानि भी हो सकती है।लॉटरी के अंक हेतु
मंत्र-भैरों गोपाल काशी के कोतवाल, खप्पर में खाए, मसान में खेलेएक बात मैं पूरछू तोये, ‘अमूक’ का अंक बता दे मोये।
यह मंत्र अपने मुम्बई प्रवास के मध्य वहां के स्थानीय घाटकोपर निवासीश्री गणेश सरकार से प्रप्त हुआ। उन्होंने बतलाया इस मंत्र की साधना उन्होंनेफिरोजाबाद में एक औघड़ के मार्ग-निर्देशन में की थी। इस मंत्र के प्रति उनकेक्या अनुभव हैं, मुझे नहीं बतलाया, पर विधि अवश्य बतलाई, जो यहां परआपके लाभ हेतु प्रस्तुत है-
‘ॐ० नमो नगर चीटि महावीर, हू पूरो तोरी आशा, तू पूरो मोरी।
ॐ हीं स्वप्नेश्वरी मम मनोवांछित साथय साधय ॐ फट्।।
सर्वप्रथम हवन सामश्री में काले तिल मिला लें। एक दीपक तिल्ली के तेलसे भरा इस दीपक की बाती काफी लम्बी बनाएं। तैलीया मंसान की राखआसन के नीचे रखें। आसन काले कपड़़े का होना आवश्यक है। सतिया(स्वास्तिक) बनाएं और मुंह झूठा करके बैटें। अब उपरोक्त मंत्र को 112माला नियमित श्रद्धा विश्वास और निष्ठा के साथ जपें। धन प्राप्त होगा हदनसामग्री इस प्रकार है-
1. चंदन का बुरादा 2. तिल 3. शुद्ध धी 4. शुद्ध चीनी 5. अगर6. तगर 7. कपूर 8. शुद्ध केसर 9. नागर मोथा 10. पंचमेवा 11. जी
और 12. चावल
तंत्र विज्ञान में ‘टोटका विज्ञान’ स्वयं में जितना परिपूर्ण है, उतना हीप्रभावशाली भी है।
टोटकों की तीन स्थितियां होती हैं-कुछ व्यक्ति सोचते हैं, पता नहीं येक्या हैं? इनसे क्या होता है? दूसरे वे हैं, जो इनकी कार्यशक्ति के प्रतिआश्वस्त होते हैं और तीसरे वे हैं जो इनके अस्तित्त्व को बिल्कुल स्वीकारनहीं करते हैं। मेरे विचार से ये तीनों ही स्थितियां अपने आप में निर्र्थकहैं।
ध्वनि-विज्ञान के महत्त्व पर अधिक कहने की आवश्यकता नहीं है। उसीप्रकार टोटकों के विषय में समझना चाहिए। आस्था, विश्वास, प्रयास यह सबटोटका सिद्धि के आधार हैं, जिसके द्वारा मनोकामनाओं की पूर्ति सम्भव है।
संसार के कोने-कोने में टोटकों के माध्यम से रोगों से मुक्त होने की प्रवृत्तिपाई जाती है, किंतु हमारे देश में इस प्रवृत्ति की व्यापकता सर्वाधिक है। टोटकोद्वारा चिकित्सा को भी प्रश्रय दिया गया है। एक उदाहरण-
आप मार्गस्य मूलच्च मीली मूलमथापि वा।
लौहितेन तु सूत्रेण आमस्तक प्रष्माणतः।वामकर्ण कटीवद्धवां ज्वरं हन्तितृतीयकम्।।
‘चरक संहिता’ के अनुसार-
मणिनामौषधीनांच मगल्यानांच विषस्य च।धारणाददानाच्च सेवानान्न भवेत ज्वरः।।
चांदी के यंत्र में बच्चे के प्रथम दूध वाला दांत मढ़वाकर पहनने से समजमें सम्मान मिलता है। धन-धान्य की भी प्राप्ति होती है।
मोर पंख का चंदोवा रवि-पुष्य नक्षत्र में काट करके पास रखने सीसम्मान एवं धन की वृद्धि होती है।
अमावस्या के दिन स्नानादि से निवृत्त होकर लाल रंग के वस्त्र धारण्णकरें। दिन में केवल फलाहार लेते हुए सात्विक विचार करते रहें। तदोपररातउस रात्रि में लगभग 11 से 1 बजे पीपल के ताजा पत्तों पर पांच साबुतसुपारी रखें। इन सुपारियों में श्रद्धा सहित पिशाच की प्राण प्रतिष्ठा करें औरअगरबत्ती जलाएं। इसमें तेज गंध वाले पदार्थ चढ़ाना वर्जित है। ऊपर सेतिल और फूल चढ़ाएं। दही, चावल, मालपुए चढ़ाकर गुलाब जल छिड़ककरभोग लगाएं और निवेदन करें-‘हे पिशाच महाराज! आप मुझे धन-धान्यप्रदान करके अनुग्रहित कीजिए।' इस प्रकार चार अमावस्या करें।
शनिवार के दिन बहेड़े के वृक्ष को मम कार्यसिद्धि कुरु कुरु स्वाहा कहतेहुए न्यौत कर रविवार की प्रातः एक अखंडित पत्ता ले आएं। उस पत्ते कोपास रखने से या यंत्र में रखकर गले में पहनने से धन प्राप्त होता है। यहप्रयोग मेरा अनेक बार परीक्षित है।
गड़ा हुआ धन पता लगाने या लॉटरी प्राप्त करने के लिए किसी भीशुक्रवार से प्रयोग प्रारम्भ करें। मंत्र जाप से पूर्व सिंदूर का तिलक लगा लें,हनुमान की मूर्ति पर सिंदूर पोत लें और फिर उसके सामने नित्य सौ मालामंत्र जाप 10 दिन करें, मंत्र जाप के बाद उसी स्थान पर सो जाएं, स्वप्न
में आपकी मनोकामना से सम्बंधित रहस्य का आभास हो जाएगा।
मंत्र इस प्रकार है-
ॐ श्री हनुमते नमः
ॐ नमो हरि मर्कट मर्कटाय स्वाहा
ॐ श्री पवननन्दनाय नमः
धन-सम्पत्ति
व्यापारियों के लिए लक्ष्मी साधना
प्रायः देखा गया है कि कई व्यापारी भाइयों का व्यापार प्रायः मंदा याहानिकारक रहता है। या फिर व्यापार में समृद्धि नहीं होती। पैसे काआवागमन बराबर रहता है। ऐसे हालात में व्यापारी भाई काफी कुंटा कीस्थिति अनुभव करते हैं। ऐसे व्यापारी भाइयों से मेरा नम्र निवेदन है कि वहहताश न हों, वह इस सरल क्रिया को स्वयं करें-
ताम्रपत्र पर सुंदरता से अंकित ‘श्रीयंत्र’ ले लें। उसे गंगाजल से शुद्ध करले। दीपावली की मध्य रात्रि एक स्वच्छ स्थान पर ‘श्रीयंत्र' को रखकर थोड़ागंगाजल रखकर बैठ जाएं फिर निम्न मंत्र की यथासम्भव माला जपे--ॐ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिम शेष जन्तोःस्वस्थे, स्मृता मति मतीव शुभाम् ददासि।
विशिष्ट लाभ हेतु
यह मंत्र भी दीपावली के दिन ही सिद्ध किया जाता है। दीपावली की रातलगभग बारह और एक के मध्य थोड़ा-सा गंगाजल लेकर और सवा सौ ग्रामबेसन की बनी पीली बरफी लेकर आसन पर बैठ जाएं, त्पश्चात इस मंत्रकी तीन माला जपें। मंत्र इस प्रकार है-
“ॐ० यक्षाय कुबेराय वैश्रववाय, धन-धान्याधिपतये धन- धान्यसमृद्धि मम देहि दापय स्वाहा।"
इसके पश्चात पीली बरफी बच्चों को बांट दें और अभिमंत्रित जलेकार्यालय या व्यापार-स्थल की चारों दीवारों पर छिड़क दें। इस क्रिया केपश्चात सम्भव हो तो एक माला प्रतिदिन नियम से जपें। मां लक्ष्मी ने चाहा
तो धन-धान्य की वृद्धि होगी। व्यापारी वर्ग के लिए यह साथना अति उपयोगीहै।
लक्ष्मी प्राप्ति हेतु
प्रायः हर व्यक्ति किसी न किसी समस्या कोलेकर दुखी है। कुछ घर में ऐश्वर्य सम्पन्नताचाहते हैं तो कुछ व्यापार में उन्नति चाहते हैं,तो कुछ नौकरी की समस्या को लेकर परेशानहैं। अग्रांकित यंत्र को पूरी तरह अभिमंत्रितकर शीशे के फ्रेम में या किसी अन्य सुरक्षितस्थान पर जड़वा लें तो यह यंत्र आपके भाग्यको पलट देगा और आप जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं के लिए दुखीनहीं होंगे। घर में सुख-शांति का वास और व्यापार-स्थल में बरकत होगी।इस यंत्र के प्रभाव से चंचल लक्ष्मी स्थायित्व ग्रहण करेगी।
धन वृद्धि हेतु
जीवन चलाने के लिए धन आवश्यक होता है, पर जीवन को जीने लायकबनाने के लिए बुनियादी आवश्यकता है प्रेम, प्रेममय रिश्ते, जिनके बिना सारेअरमान व सपने पत्थरों पर सिर पटक-पटककर दम तोड़़ देते हैं।प्रेमविहीन दाम्पत्य वैसा ही है जैसे बिना पानी मीन। प्रायः लाभ की लालसामें लोग व्यापार करते हैं। कई इसमें सफल होते हैं और कई असफल।व्यापार में हानि कभी-कभी व्यक्ति को दाने-दाने के लिए मोहताज कर देतीहै और ऊपर से कर्ज का बोझ व्यक्ति को पागल बना देता है। कहने काअर्थ यह है कि अगर घाटा हुआ तो व्यक्ति को तन-मन-धन का संकटझेलना पड़ता है। अगर कोई व्यक्ति निरंतर असफल हो रहा हो, कोई बाधाहो, लगातार घाटा सहन करना पड़ रहा हो और कोई उपाय लाभ न दे रहाहो तो उसे व्यापारवर्द्धक मंत्र का प्रयोग करना चाहिए।
निम्न मंत्र के साधक को सर्वप्रथम उपवास करना चाहिए। सायंकाल मेंगुरु मंत्र की साधना करके मंत्र की 12 माला जपनी चाहिए। तदुपरांत
अष्टगंध में असगंध के पुष्य को भली-भांति मिलाकर मंत्रोच्चारण के साथएक सौ आठ बार हवन करें। ऐसा 10 दिन तक करें। आप लामान्वितहोंगे। वर्ष भर में एक दो बार मंत्र जाग्रत कर देने पर लाभ में वृद्धि होतीहै, परंतु जब स्थितियां विपरीत हों तो अधिक फलदायक होंगी। मंत्र इसप्रकार है-ऊ श्री श्री परमा सिद्धि श्री श्री श्रीं।
अचानक धन-प्राप्ति के लिए
निम्न मंत्र को 51000 की संख्या। में जपकर शक्तिवान कर लें, इसकेबाद इस मंत्र को विधि अनुसार प्रयोग में लाएं। अचानक धन प्राप्त होगामंत्र अग्र प्रकार है-
‘बैठे चबूतरे पढ़े कुरान,हजार काम दुनिया का करे,एक काम मेरा कर न करे तो,
तीन लाख तैंतीस हजार पैगम्बरों की दुहाई ।'
अचल सम्पत्ति के लिए टोटकाजिन व्यक्तियों के लाख प्रयत्न करने पर भी स्वयं का मकान न बन पा
रहा हो वह व्यक्ति इस अनुभूत टोटके को प्रत्येक शुक्रवार को नियम से करें।किसी भूखे को भोजन कराएं और रविवार के दिन गाय को गुड़ खिलाएं। ऐसानियमित करने से अपनी अचल सम्पत्ति बनेगी या फिर कोई पैतृक सम्पत्तिप्राप्त होगी। अगर सम्भव हो तो प्रातःकाल स्नान ध्यान के पश्चात निम्नलिखितमंत्र का जप करें। उद्देश्य शीष्र ही प्राप्त होगा। मंत्र निम्न प्रकार है-ॐ पद्मावती पद्म कुशी वज्रवज्रांदुशी,प्रतिपक्ष भवन्ति भवन्ति।'यह मेरे स्वयं का अनुभूत प्रयोग है। एक बार जब मैं स्वयं काफी
अर्थाभाव में फंस गया तो मैंने प्रयोग किया और शत-प्रतिशत सफलता प्राप्त
की। उक्त मंत्र का 108 बार जप करके तदुपरांत दुर्गा सप्तशती के चतुर्थ
अध्याय का पाठ 108 दिन तक नियम से करें। कार्य में सिद्धि प्राप्त होगी।
लॉटरी द्वारा धन-प्राप्ति हेतु
यूं तो भारतवर्ष में प्रतिदिन करोड़ों व्यक्ति लॉटरी का टिकट खरीदते हैं,
पर केवल चंद ही भाग्यशाली व्यक्ति होते हैं जिनकी लॉटरी निकलती है। यहां
मैं लॉटरी द्वारा धन प्राप्त करने का टोटका दे रहा हूं। इस कार्य में सफलता
केवल भाग्य पर निर्भर करती है।
जिस दिन लॉटरी का टिकट खरीदना हो उस दिन आप प्रातःकाल ही
स्नान करें। लक्ष्मी के चित्र के आगे धूप, दीप जलाएं। पीले पुष्प अर्पण करें
और पीली वस्तु खाकर, पीले वस्त्र पहनकर लॉटरी का टिकट खरीदकर
लाएं। यह ध्यान रखें, उस टिकट के अंकों का जोड़ आपके मूलांक के जोड़
से मिलता हुआ हो। वह टिकट लाकर लक्ष्मी के चित्र के आगे रख दें। मांलक्ष्मी की कृपा से हो सकता है, आपको कोई पुरस्कार मिल जाए।मूलांक आप अपनी जन्मतिथि से ज्ञात कर सकते हैं। ध्यान रहे,जन्मतिथि शुद्ध होनी चाहिए, वरना गणित में त्रुटि होने पर आप लाभ सेवंचित हो सकते हैं।