अनुराधा नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं गृह स्थित फल

 अनुराधा नक्षत्र सम्पूर्ण विवेचन एवं गृह स्थित फल

राशि चक्र मे 21320 से 22640 अंश विस्तार का क्षेत्र अनुराधा नक्षत्र कहलाता है। अरब मंजिल मे इसे इकलिल अल जभाह अर्थात ताज, ग्रीक मे स्कारर्पी चीन सियु मे फेंग कहते है। देवता मित्र, स्वामी ग्रह शनि, राशि वृश्चिक 0320 से 1640 अंश।  भारतीय खगोल मे यह 17 वा  मृदु संज्ञक नक्षत्र है।  इसके चार तारे है। ये इस तरह अवस्थित है मानो लड़ी मे जड़ी चार मणिया हो।  शाक्य के अनुसार अनुराधा के तीन तारे है परन्तु अन्य धारणाए संयोजन तारे को मिलाकर चार तारे मानते है जो कमल या छतरी के सदृश्य है।  इसका चिन्ह कमल है।  यह सम्बन्ध, सम्मान, लेने-देने का नक्षत्र है। अनुराधा का अर्थ है राधा और राधा या एक के बाद एक राधा अर्थात लगातार सफलता। जिस प्रकार पूर्वा और उत्तरा फाल्गुनी युगल है उसी प्रकार विशाखा और अनुराधा युगल नक्षत्र है। यह शुभ, सात्विक, पुरुष नक्षत्र है। इसकी जाति शूद्र, योनि मृग, योनि वैर श्वान, देव गण, नाड़ी आदि है।  यह दक्षिण दिशा का स्वामी है। अनुराधा नक्षत्र-अनुराधा नक्षत्र भचक्र के विशाखा नक्षत्र से आगे के 13-20’ क्षेत्र में वृश्चिक राशि क्षेत्र के अंतर्गत स्थित है। इस नक्षत्र के 4 तारे (कुछ के मत से 3) एक बलि/छत्र के समान आकृति बनाते हैं। इस नक्षत्र के देवता मित्र (सूर्य का एक रूप विशेष) है और स्वामी शनि हैं।

     अनुराधा नक्षत्र में जन्मा पुरुष जातक परिश्रम से जीवन में उन्नति प्राप्त करने वाला, अनेक कलाओं का जानकार, विदेश से लाभ प्राप्त करने वाला, धर्म का पक्का, प्रसिद्ध, प्रेमी तथा प्रत्येक कार्य को पूर्ण करने वाला होता है।

     अनुराधा नक्षत्र में जन्मी स्त्री जातक निरभिमानी, प्रसन्नचित्त, पराक्रम व अच्छे मित्रों से युक्त, नम्र तथा गुरु एवं पति की भक्ति करने वाली कही गई है।     

मित्र - तीसरे आदित्य

प्रतीकवाद - अनुराधा नक्षत्र के देवता मित्र है।  ये स्वर्गीय मित्र है।  मित्र, आद्य भारत मे मित्र और ईरान मे मिथ्रा देवता के रूप मे जाने जाते है। ऋग्वेद के अनुसार वैदिक मित्र अनुबंध और सम्मलेन के देवता और वरुण देव के संरक्षक है। मित्र आदित्यो मे प्रमुख है।  वरुण और मित्र दोनो शपथ के देवता है। मित्र माता अदिति और कश्यप के पुत्र है और आदित्यो मे तीसरे आदित्य है।  इनके सिद्ध अत्री, यश राथास्वना, गन्धर्व हाह, अप्सरा मेनका, रक्षा पौरुषेय, नाग तस्कर है।

विशेषताए - जातक अंको का दीवाना होता है, इस वजह ये अंक ज्योतिष, ज्योतिष, सांख्यकी और मनोगत मे रूचि रखते है। जातक की मुखाकृति मित्रतावत और नेत्रो मे गोपनीयता रहती है।  ये निष्क्रियता से विपुलता की ओर जा सकते है।  जातक नेता, विदेश यात्रा  प्रिय, देव आराधक, विदेश मामले मे निपुण, अनुसंधानक होता है।

अनुराधा विभूतियां

सद्दाम हुसैन (5 वे राष्ट्रपति, इराक) का चन्द्रमा अनुराधा मे मंगल व राहु से युत था।

इंदिरा गांधी (प्रथम महिला प्रधान मन्त्री भारत) का सूर्य अनुराधा नक्षत्र मे बुध से युत था।

सत्य साई बाबा (पुट्ट्पूर्ति भारत) अनुराधा लग्न मे सूर्य, बुध, शुक्र, शनि की युति थी।    

नरेन्द्र मोदी (प्रधान मन्त्री, भारत) का चन्द्र अनुराधा द्वितीय चरण मे है। 

कपिल देव (प्रसिद्ध क्रिकेटर, भारत) का चन्द्र अनुराधा द्वितीय चरण मे है।

अनुराधा नक्षत्र फलादेश

अनुराधा के पूर्ववर्ती नक्षत्र राधा कहलाते है और राधा की पुनरावृत्ति अनुराधा है। यह सम्बन्धो मे आदर का सूचक है, एक दूसरे को सम्मान देना और सम्मान पाने का द्योतक है।  भारतीय ज्योतिष अनुसार यह नक्षत्र सम्बन्धो मे संतुलन, लक्ष प्राप्ति, मित्रता मे बराबरी व स्थिरता, मित्रता से पहचान तथा प्रसिद्धि का कारक है।

" अनुराधा  एक अन्वेषण है जो समुदाय और ऊर्जा के रंगीन संयोजन पर केंद्रित है इस प्रकार यह असंतुलित बलो के बीच सेतु है। यह युवा और वृद्ध, परिपक्व और अपरिपक्व, विकसित और अविकसित, जाति और प्रजाति  के बीच संचार वाहक है। यह सार्वभौमिक विलायक, क्रान्तिकारियो का नक्षत्र है और समाज, राजनीति अर्थव्यवस्था की बेईमानी देखने मे सक्षम है "

जातक शानदार नेतृत्व करने वाला, बड़े समूह का आयोजक, दूसरो को विभक्त और समायोजन करने वाला, व्यवहार कुशल, माँ से रिश्ते मे मुश्किल वाला, प्रेमी / प्रेमिका के प्रति वफादार, उदास, सीमित गुस्से वाला, जन्म स्थान से दूर रहने वाला, विभिन्न प्रकार के प्यार और यात्रा के अवसर वाला होता है।

जातक तर्कशील, गणित, पदार्थ विज्ञान, भौतिकता की और आकर्षित, संख्याओ का जनूनी अंतर्ज्ञानी, आँखे गोपनीयता की संकेतक, स्व ऊर्जा का उपयोग और ब्रम्हाण्ड की ऊर्जा का कारण से उपयोग करने वाला, जिज्ञासा वश विदेश यात्रा करने वाला, पुरुषार्थी, धनवान, स्त्रियो मे रुचिवान होता है।

पुरुष जातक

जातक सुन्दर मुखड़ा, प्रभावी नेत्र, यदि ग्रहो का प्रभाव अशुभ हो, तो क्रूरता युक्त चेहरा होता है। जातक अनेक रुकावटो का सामना करने वाला होता है इससे इसके चेहरे पर अजब निराशा रहती है। अंततः शांति पाने वाला, मौके पर बदला लेने वाला, मेहनती, अंत मे इच्छित परिणाम पाने वाला, भगवान का दृढ़ विश्वासी, सम्बन्धो मे अस्थिर, जीवन लाचारी से भरा हुआ किन्तु आजादी युक्त, आशावादी होता है।

यह सफल वव्यसायी होता है, यदि नौकरी करता है, तो वरिष्ठो पर हावी होता है। उम्र वर्ष 17 से 48 तक कई बाधा आती है परन्तु यदा-कदा समय अनुकूल भी रहता है। 48 के बाद जीवन सुखद होता है। यदि मंगल चन्द्र का योग हो, तो रसायन या दवा विक्रेता या डॉक्टर होता है। किसी भी परिस्थिति मे सहोदर (भाई-बहन) व पिता से सहायता नही मिलती है। कुछ वक्तियो की पिता से अनबन रहती है। इसी प्रकार माँ के प्यार से वंचित रहता है। जन्म स्थान से दूर रहना पड़ता है।

उपरोक्त विषमता के रहते वैवाहिक जीवन सुखद रहता है। यह ईश्वरीय देन के अनुसार भूत का आकलन कर संतति के साथ व्यवहार करता है। संतति की जीवन आवश्यकताओ की पूरी करता है और संतान से विशेष प्रेम रखता है, इस कारण संतान जातक से अधिक उन्नति करती है।

स्त्री जातक 

1 स्त्री जातक का चेहरा निष्कलंक, मासूम होता है। अनुराधा स्त्री जातक का चेहरा, शरीर, कमर सुन्दर होती है जिससे पुरुष जातक आकर्षित होते है।

2 यह गर्व रहित, पवित्र हृदय, फैशन परस्ती के बजाय सादा जीवन जीने वाली, निस्वार्थी, राजनीति और समाज मे महत्व प्राप्त करने वाली, वरिष्ठो की आदरी, सहेलियो की मुखिया होती है।

3 यह संगीत और ललित कला मे रुचिवान, संगीत और नृत्य मे माहिर और सनद प्राप्तक होती है। कोई-कोई स्त्री जातक व्यवसायिक नृत्यांगना भी होती है।

4 यह पति भक्त, धार्मिक सिद्धांतो का पालन करने वाली, अपनी संतति की उत्थानक, एक आदर्श माता, सुसरो की भक्ति से जीवन मे यशस्वी होती है।  रजस्वला अनियमित, कष्ट कारक होती है।

आचार्यो अनुसार अनुराधा नक्षत्र फल

अनुराधा नक्षत्र मे छिपकर पाप कर्म करने की प्रवृत्ति होती है।  ये लोग प्रायः गुप्त रूप से दुर्व्यसनो का शिकार होते है और उन्हे खुलकर नही अपनाते है।  इन लोगो को घर से बाहर रहने का मौका मिलता है परन्तु ये एक स्थान पर टिक नही पाते।  बदलाव के फेर मे हमेशा उठा-पटक करते रहते है। योग्यता और चतुराई से अच्छी सम्पत्ति अर्जित कर लेते है। छोटी उम्र मे घर से बहार चले जाते है। ये जहा रहते है वहा  के समर्थ लोगो से संपर्क बना लेते है। आँखो की पुतलिया पिंगल वर्ण की होती है।  पैतृक गुण इनमे रहते है।  - नारद 

ये लोग शीघ्र मित्रता स्थापित कर लेते है।  इनको थोड़ी ख्याति मिलती है।  कला में प्रवीण होते है।  कोई-न-कोई हुनर इनमे रहता है।  - पराशर

ये लोग समाज मे अच्छा स्थान रखते है तथा काम निकलने में होशियार होते है। इन्हे पुत्र सुख भी प्राप्त होता है।  अनुराधा गत चन्द्रमा पर मंगल बुध की दृष्टि हो और शुक्ल पक्ष मे जन्म हो, तो विपुल संपत्ति मिलती है।

चन्द्र : चंद्र यदि अनुराधा मे हो, तो जातक विद्वान, विश्वनीय, दयालु, करिश्माई, बहादुर, धनाढ्य, कठिन प्रस्थितियो मे जुझारू होता है। मातृ पक्ष से सम्बन्धो मे बाधा आती है।

जातक स्थिर, मित्रता व सम्बन्धो वाला, सहायक, प्रिय, प्रसिद्ध, सफल आयोजक, अच्छा नेता, भावुक, यात्रा प्रेमी, विश्वनीय होता है। यह प्रेम करने वालो मे अनुरक्त, कभी-कभी ईर्ष्यालु और क्रोधी होता है।

वराहमिहिर अनुसार चंद्र प्रभाव यात्रा, धन, क्षुधा शांत करने का कारक है। क्योकि जातक अधिक समय तक बिना आहार के नही रह सकता है।

सूर्य : सूर्य यदि अनुराधा मे हो, तो जातक नेतृत्व क्षमता वाला, राजनीति मे रुचिवान, सफल, धनी, सम्मानीय, खिलाडी, ललित कला मे भेट प्राप्त करने वाला, शक्तिशाली होता है।

लग्न : यदि लग्न अनुराधा मे हो, तो, जातक मोहक, घुमक्कड़, कामुक, वहमी, आध्यात्मिक, अनुशरणी, गोपनीय स्वभाव वाला, मनमौजी, आहार पर नियत्रण की आवश्यकता वाला, पारिवारिक जीवन प्रेमी होता है।

अनुराधा चरण फल

प्रथम चरण - इसका स्वामी सूर्य है। इसमे मंगल, शनि, सूर्य का प्रभाव है। वृश्चिक 21320 से 21640 अंश।  नवमांश सिंह।  यह अंतरंग प्रत्यक्षीकरण, गर्व, वृत्ति उन्मुखता का द्योतक है।  जातक लम्बी भुजा, चौड़ा वक्ष, लाल उग्र नेत्र,  अल्प केश, बलवान का वध करने वाला, साहसी कर्म करने वाला होता है।

जातक व्यावसायिक योग्यता के लिए आतुर, लगातार सीखने और नीचे की पंक्ति मे सुधार के लिए अर्जित ज्ञान का उपयोग करने वाला, अनुशासित, प्रायोगिक होता है।

ये आमतौर पर परिवार या पेशे का विकल्प चुनने में अटक जाते है, लेकिन मजबूती और बेहतर कॅरियर तथा संतति और स्वयं के वित्तीय सुरक्षा के लिए परिवार को छोड़ देते है।

द्वितीय चरण - इसका स्वामी बुध है। इसमे मंगल, शनि, बुध का प्रभाव है। वृश्चिक 21640 से 22000 अंश। नवमांश कन्या। यह बुद्धि, सीखना, अनुशासन, आयोजन, पूर्ति करना, श्रेणी बद्धता, विवेक, निर्णय का द्योतक है।  जातक गौर वर्ण, दृढ़ कंधे व भुजा, कोमल होंठ वाला, धन के लिए प्रयन्तशील, स्पष्ट भाषी, बुद्धिमान, अविवाहित माँ की संतान होता है।

जातक उच्च श्रेणी का विद्वान, ज्ञान का भौतिक जगत मे सदुपयोग करने वाला, गंभीर रुकावटो का सामना कर सफल होने वाला, भौतिक ज्ञान मे उन्नत्ति करने वाला, वृद्धावस्था मे सलाहकार, संचार कुशल होता है।

तृतीय चरण - इसका स्वामी शुक्र है।  इसमे मंगल, शनि, शुक्र का प्रभाव है। वृश्चिक 22000 से 22320 अंश।  नवमांश तुला। जातक श्याम वर्ण, असित (मटमैले) नेत्र, दूसरे की स्त्री के साथ विश्वास घाती, भ्रमण शील, धैर्यवान, नट, साहसी होता है।

जातक सामाजिक, बहु मित्र वाला, अच्छा ज्योतिषी होता है।  जातक का खोजी दिमाग पूरी तरह ज्योतिष की ओर निर्देशित होता है।  वह अच्छा ज्योतिषी या अंक ज्योतिषी बन जाता है।

कुछ प्रतिकूल मामलो मे देखा गया है कि जातक जीवन पथ से भटक जाता है और पारिवारिक जीवन मे बुरी तरह असफल होता है।  शोध मे गंतव्य तक नही पहुँच पता है। कोई-कोई जातक राजद्रोही भी होता है।

चतुर्थ चरण - इसका स्वामी मंगल है।  इसमे मंगल, शनि, मंगल  का प्रभाव है। वृश्चिक 22320 से  22640 अंश। नवमांश वृश्चिक। यह संघर्ष, उत्तेजना, कामातुर, गोपनीयता, संस्कारिता का द्योतक है।  जातक गंभीर लाल  नेत्र, चपटी नाक, सुदृढ़ अंग, अच्छी पाचन शक्ति वाला, बड़ा पेट, उग्र कर्म करने वाला होता है।

जातक चरम पंथी अर्थात चरम सीमा तक कार्य करने वाला, ये अपने लक्ष्यो के साथ पारिवारिक जीवन के साथ पाने मे असफल होते है। इनमे अत्यधिक ऊर्जा होती है जिससे गुमराह होकर अंत मे कुछ भी नही पाते है। इन्हे सख्त जीवन साथी और अच्छे दोस्त या ज्येष्ठ भ्राता की आवश्यकता होती है।

आचार्यो ने चरण फल सूत्र रूप में कहा है परन्तु अंतर बहुत है।

यवनाचार्य - अनुराधा के पहले चरण मे तीखे स्वाभाव वाला, दूसरे मे धार्मिक, तीसरे मे दीर्घायु, चौथे मे चरित्र हीन होता है।

मानसागराचार्य - अनुराधा के पहले पाद मे यशस्वी, दूसरे में आगमो का ज्ञाता, तीसरे मे महन्ततिक, चौथे मे कुलमण्डन होता है।

भारतीय मत से सूर्य, बुध, शुक्र की आपसी पूर्ण या पाद दृष्टि नही होती क्योकि बुध 28 अंश और शुक्र 48 अंश से अधिक दूर नही हो सकते है। 

अनुराधा ग्रह चरण फल

सूर्य :

सूर्य पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक विचारवान, मनन-चिंतन रत होता है।

सूर्य पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक वीर, युद्ध कला मे प्रवीण होगा।

सूर्य पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक राजनीतिज्ञो के संपर्क मे रहेगा।

सूर्य पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक अविश्वसनीय, कुकार्यो मे रत होता है।

अनुराधा सूर्य चरण फल

प्रथम चरण - जातक नेतृत्व क्षमता वाला, राजनीति मे रुचिवान, सफल खिलाडी, मैदानी खेलो मे प्रवीण, छिपकर पाप कर्म करने वाला, बचपन और युवावस्था  मे घर से बाहर रहने वाला होता है।

द्वितीय चरण - जातक सुखी, सम्पन्नता युक्त, लक्ष्य उन्मुख, धनवान, जैसे-तैसे अपना काम निकालने मे होशियार, कला मे प्रवीण, देखने मे बेवकूफ, घमण्डी होता है।

तृतीय चरण - जातक परिवार का मुखिया, विवेकशील, पैतृक गुणो से तारतम्य वाला, ललित कला मे उपहार प्राप्त करने वाला, सम्मानीय होता है।

स्वयं मध्यम या निम्न वर्ग का होने के बावजूद समाज के दीन-हीन के पास नही फटकने वाला, बेकार की शान शौकत दिखाने वाला होता है। 

चतुर्थ चरण - जातक  नेता, राजनीति मे सफल, गुप्त तरीको से व्यसनो का शिकार लेकिन उन्हे खुले तोर पर नही अपनाने वाला, सही निर्णय लेने की प्रतिभा वाला होता है। 

चन्द्र :

चन्द्र पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक के दो माता-पिता होगे यानि जातक दत्तक होगा।

चन्द्र पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक राजा का विश्वास पात्र होगा।

चन्द्र पर बुध  की दृष्टि हो, तो जातक नीच और अधम होगा।

चन्द्र पर गुरु  की दृष्टि हो, तो जातक रोग, ऋण, रिपु युक्त होगा।

चन्द्र पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक दीन-हीन, निर्धन होगा।

चन्द्र पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक मंत्री या मंत्री के समकक्ष होगा।

अनुराधा चन्द्र चरण फल

प्रथम चरण - जातक विद्वान, परस्थितियो से जुझने वाला, मातृ पक्ष से बाधा, स्थिर मित्रता और सम्बन्धो वाला, छिपकर आचरणहीन कार्य करने वाला, गुप्त रूप से दुर्व्यसनो का शिकार होता है। 

द्वितीय चरण - जातक घर से बाहर रहने वाला, योग्यता और धन से अच्छी संपत्ति अर्जित करने वाला, प्रेम मे अनुरक्त, व्यसनी और व्यसन को प्रगट नही करने वाला, कभी-कभी ईर्ष्यालु होता है।  यदि शुक्र उत्तरा फाल्गुनी मे हो, तो शासन मे उच्च पद पर होता है।

तृतीय चरण - जातक सुन्दर, बचपन मे घर से बाहर रहने वाला, प्रौढ़ावस्था में घर से अलग रहने वाला, दुःखी, यौन सम्बन्धो मे बदनाम, प्रेम मे धोखा खाने वाला, भावुक, परस्थितियो मे जुझारु होता है। यदि पूर्वा फाल्गुनी मे लग्न हो और इस चरण मे चंद्र सूर्य से युत हो तथा शनि की दृष्टि हो, तो माता की मृत्यु होती है।

चतुर्थ चरण - जातक सौम्य और सुंदर, छुपकर व्यसन करने वाला, एक कमरे मे शराब और सुन्दरी का सेवन कर राधे-राधे करता निकलने वाला, नारियो का प्रिय होता है। यदि चन्द्रमा पर मंगल या बुध की दृष्टि हो और शुक्ल पक्ष का जन्म हो, तो विपुल सम्पत्ति अर्जित कर लेता है।

मंगल :

मंगल पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक  पत्नी से नफरत करेगा और दूर जा बसेगा।

मंगल पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक माता से प्रेम करेगा और पिता से वैर करेगा।

मंगल पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक से बुद्धिमान उसकी संतान होगी।

मंगल पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक परिवार का सहायक और परिवार मे अनुरक्त होगा।

मंगल पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक रति रत होगा किन्तु यौन विकृत होगा।

मंगल पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक नेक, धनवान, किन्तु कंजूश होगा।

अनुराधा मंगल चरण फल

प्रथम चरण - जातक साहसी, छिपकर पाप करने की प्रवृत्ति वाला, व्यसनो का शिकार, परिश्रम से विपुल संपत्ति अर्जित करने वाला होता है।

यदि यह चरण लग्न हो और चन्द्रमा लग्न मे हो, तो पुरुष जातक सख्त दिल, दुराग्रही, मलिन, समस्या मूलक होगा।  स्त्री जातक अवैध कार्य करेगी और दिल से क्रूर होगी।

द्वितीय चरण - जातक अति व्यसनी, स्त्रियो से शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए आतुर, रतिक्रीड़ा प्रेमी, भ्रमणशील, धन के लिए घूमने फिरने वाला होता है।

तृतीय चरण - जातक दुर्व्यसनो का शिकार, काम लोलुप, कुमार अवस्था से विदेश मे रहने वाला, योग्यता से धन कमाने वाला, कला मे प्रवीण, कोई-न-कोई हुनर का जानकार, शीघ्र मित्रता स्थापित करने वाला होता है।

चतुर्थ चरण - जातक सुन्दर, लुक-छिप कर व्यसन करने वाला, बंधु बांधव व स्त्रियो का स्नेह पाने वाला, बिरादरी मे उच्च स्थान रखने वाला होता है। विशाल कृषि भूमि का मालिक होता है।

बुध :

बुध पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक  मेहनती, मृदुभाषी, प्रज्ञ, धनवान होगा।

बुध पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक साहसी, धनवान, सुखी, भाग्यवान होगा।

बुध पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक धनवान, धर्मपरायण, बुद्धिमान होगा।

बुध पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक दरिद्र, सभी विपत्तियो का सामना करेगा।

अनुराधा बुध चरण फल

प्रथम चरण - जातक व्यर्थ की बकभक करने वाला, व्यसनो मे पड़ने वाला, जन्म भूमि से दूर निवास करने वाला, काम निकलने मे होशियार होता है।  धन के प्रति लापरवाह होने से परिजन उसका धन हड़प लेगे और उसे वापस नही करेंगे या आंशिक वापस करेगे।

द्वितीय चरण - जातक भाग्यशाली, जुंवा-सट्टा, वायदा, शेयर अादि व्यसनो मे रत, अर्थ हानि उठाने वाला, मित्रो से नुकसान उठाने वाला, परिवार से दूर होता है।  बुध अकेला हो तो धनी और सुखी होता है।

तृतीय चरण - जातक सौम्य और सुन्दर, बचपन से ही घर से दूर रहने वाला, कम उम्र से ही दुर्व्यसन और बुरी आदताे का शिकार, भाग्य से समर्थ होने वाला होता है। रोहणी लग्न हो, तो पुरुष जातक मे काम प्रवृत्ति अल्प होने से रति के बाद कलह होगा जो अन्य प्रकार से सम्पन्न होगा।

चतुर्थ चरण - जातक स्वस्थ, सुन्दर, आकर्षक, मंजरी आंखे वाला, उदार लेकिन व्यसनी, परिवार जनो से सहायता नहीं लेने वाला, काम निकलने मे प्रवीण, शिक्षक या महिला हॉस्टल का वार्डन होता है।  यदि शनि या मंगल से दृष्ट या युत हो तो नीच औरतो के दल का नेता होगा।

गुरु :

गुरु पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक धनी, स्वस्थ, सुखी जीवन वाला होगा।

गुरु पर चंद्र की दृष्टि हो, तो जातक का जीवन राजसी वैभव जैसा होगा।

गुरु पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक विद्वान साहसी, वीर होगा। 

गुरु पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक नेक  दरिया दिल, धनी होगा।

गुरु पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक प्रभावशाली व ललना प्रिय होगा।

गुरु पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक विभिन्न विषयो मे प्रवीण होगा।

अनुराधा गुरु चरण फल

प्रथम चरण - जातक महा व्यसनी, सभी प्रकार के नशो और दुराचरण में व्यस्त, परदेश वासी, जीविका के लिए भ्रमणशील, बदनाम, काम निकलने मे प्रवीण होता है।

द्वितीय चरण - जातक गुप्त रूप से पाप कर्म करने वाला और उन्हे समाज के सामने जाहिर नही करने वाला, बदलाव के लिए एक ही स्थान पर नही टिकने वाला, बुद्धिमानी से अच्छी  संपत्ति अर्जित करने वाला होता है।

तृतीय चरण - जातक दयालु, छिपकर व्यसन करने वाला, किसी कला में होशियार, पैतृक गुणो से तारतम्य वाला होता है।  इसकी आँखों की पुतलिया भूरापन लिए होती है।

चतुर्थ चरण - जातक गुप्त रूप से पाप करने वाला, परदेश निवासी, धनवान, लोगो से संपर्क करने में माहिर, पारम्परिक परम्परा का निर्वाहक, शीघ्र मित्रता स्थापित करने वाला, बिरादरी मे उच्च पद पर होता है।

शुक्र :

शुक्र पर चन्द्र की दृष्टि हो, तो जातक परिवार मे नगीना, मृदुभाषी होगा।

शुक्र पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक दुष्ट, अवैध कार्यकारी होगा।

शुक्र पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक सब प्रकार से सुखी होता है।

शुक्र पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक क्रूर, बेईमान, मुकदमो मे फ़ंसा रहेगा।

अनुराधा शुक्र चरण फल

प्रथम चरण - जातक पाप कर्म मे रत, विभिन्न प्रकार के नशो का आदी, दुराचारी, घर से बाहर भटकने वाला, पारिवारिक परम्पराओ को नही मानने वाला, काम निकालने मे माहिर, पर स्त्री रत होता है।

अन्यत्र - शादी उसके लिए खेल के सामान होगी, उसका लक्ष्य केवल काम वासना शान्त करना और रति का आनंद लेना होता है।

द्वितीय चरण - जातक छिपकर पाप कर्म करने मे रुचिवान, आजीविका के लिए भ्रमणशील, चतुराई से धन इकट्ठा करने मे कामयाब, अच्छे मित्रो से सहयोग पाने वाला होता है।

तृतीय चरण - जातक कच्ची उम्र मे विद्या अध्यन के लिये बाहर और बाद मे व्यापार व्यवसाय के लिए बाहर रहने वाला, पैतृक गुणो का निर्वाहक, पुस्तैनी कला मे माहिर, मित्रवान होता है।

चतुर्थ चरण - जातक शीघ्र दुर्व्यसनो का शिकार, योग्यता और चतुराई से धन कमाने वाला, सुमित्रो से युक्त, पैतृक गुणो से युक्त, पास पड़ोस से मित्रता रखने वाला होता है।  कुछ लोग अनिद्रा के शिकार या कुछ मे नींद में चलने की आदत वाले होते है।

शनि :

शनि पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक गरीब, पिता के सहयोग से वंचित रहेगा।

शनि पर चंद्र की दृष्टि हो, तो जातक राजनीति क्षेत्र मे वरिष्ठ, आद्योगिक इकाई का अध्यक्ष होगा।

शनि पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक अड़ंगे बाज, उन्मादी, नियोक्ता के लिए समस्या मूलक होगा।

शनि पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक अनेक शास्त्रो का ज्ञाता, धन वैभव का आनंद लेने वाला होगा।

शनि पर गुरु की दृष्टि हो, तो जातक सभी सुख से सम्पन्न होगा।

शनि पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक भोग विलास व वाहन आदि से युक्त होगा।

अनुराधा शनि चरण फल

प्रथम चरण - गोपनीय तरीको से अवैध कार्य करने वाला, कुआचरणी, परदेशवासी, अनैतिक, हत्यारा या चोर, धार्मिक और पारिवारिक परम्परा का निर्वाह नही करने वाला होता है।

द्वितीय चरण - जातक नशेबाज, भटकने वाला, जन्मभूमि से पृथक, आस-पास की औरतो पर बुरी नजर रखने वाला, बर्तन व्यवसायी, काम निकलने वाला होता है।

तृतीय चरण - आकर्षक, भोग विलास की ओर प्रेरित, भाग्यशाली, संपर्क बनाने वाला, शासन से कार्य करवाने मे माहिर होगा।  52 वर्ष की आयु बाद जीवन सुखद होगा।

चतुर्थ चरण - जातक विज्ञान मे आविष्कारक या अनुशंधानक, सीमित व्यसन करने वाला, नौकरी या व्यवसाय के लिए अन्यत्र रहने वाला, उदार और सुन्दर पत्नी युक्त, पुत्रवान होता है।  अग्नि या शस्त्र से खतरा होता है।

अनुराधा राहु चरण फल

प्रथम चरण - परिवार मे समस्या होगी, शिक्षा से निम्न स्तर का व्यवसाय होगा। यह चरण लग्न हो, तो जातक स्वस्थ लेकिन कमजोर होगा।

द्वितीय चरण - जातक स्वार्थी होगा।  चंद्र के साथ हो, तो राजसी वैभव युक्त होगा।

तृतीय चरण - राहु अकेला हो तो जातक का जीवन सुखद और अच्छा परिवार होगा।

चतुर्थ चरण - जातक दुःखी, गरीब, रोग ग्रस्त होगा।

अनुराधा केतु चरण फल

प्रथम चरण - जातक विद्वान सुदृढ़ स्थति वाला होगा।  शनि की युति हो, तो प्रगति धीमी होती है।

द्वितीय चरण - जातक मुक़दमे मे व्यस्त, भारी हानि उठाने वाला, शत्रु से पीड़ित होता है।

तृतीय चरण - जातक सुख ऐश्वर्य सहित, 30 वर्ष पश्चात सुखी होगा।

चतुर्थ चरण - जातक निवास बदलता रहेगा, पैतृक सम्पत्ति बेचकर परदेश मे भटकता रहेगा।

जातक = वह प्राणी जिसका ज्योतिषीय विचार किया जा रहा हो।

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